QuoteThose that destroyed the ethos of this great land are out not to form a government at the Centre, they are rather looking to grab an opportunity to return to power: PM Modi
QuoteI urge my supporters to vote for the BJP-led NDA so as to keep these anti-social elements in check while the economy of Bihar prospers in the years to come: Prime Minister Modi
QuoteThe BJP-led NDA government acts with a ‘zero-tolerance’ policy on terrorism and will not shy away from hitting terror at its epicenter if any attack is made against India: PM Modi in Bihar

भारत माता की जय, भारत माता की जय

यहां वैशाली और हाजीपुर से भी भारी संख्या में सब साथी आए हैं। मैं उनका भी बहुत-बहुत आभारी हूं। भाइयो-बहनो, मैं नीतीश कुमार जी को सुन रहा था, और जिस प्रकार से हमारी माताएं और बहनें उनकी बात का स्वागत कर रही थीं। ये दृश्य शायद बिहार में ही देखने को मिल सकता है। मैं इन माताओं और बहनों को विशेष प्रणाम करता हूं। भाइयो-बहनो लीची और आम मिठास घोलने वाली स्वीट सिटी में आप जितनी बड़ी संख्या में हम सभी को आशीर्वाद देने आए हैं, वो कई लोगों के मुंह में कड़वाहट पैदा करने वाला है। चार चरणों के चुनाव के बाद ये लोग चारों खाने चित्त हो चुके हैं। अब अगले चरणों में तय होना है कि इनकी हार कितनी बड़ी होगी, और एनडीए की जीत की कितनी भव्य होगी। जब हर बूथ पर बीजेपी एनडीए कार्यकर्ता मजबूती से डटे हुए हो, जब लोग खुद घरों से बाहर निकलकर अपने इस सेवक का प्रचार कर रहे हो। एनडीए की विजय निश्चित देखकर भी जब हर व्यक्ति उस विजय में अपना योगदान देने के लिए बेताब हो, तो समझ सकते हैं कि हवा का रुख किधर है। भाइयो-बहनो, ये लहर नहीं ललकार है। ये लहर नहीं ललकार है, फिर एक बार मोदी सरकार है।

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साथियो, नीतीश जी, पासवान जी, सुशील जी, एनडीए के इन हमारे सभी लीडर के प्रयत्नों से एनडीए के लगातार प्रयासों से बहुत मुश्किल से बिहार ने अपने पुराने दौर को पीछे छोड़ा है। जिन लोगों ने इस महान भूमि की पहचान बदल दी। वो ये चुनाव में केंद्र सरकार बनाने के लिए नहीं लड़ रहे हैं। वो छटपटा रहे हैं किसी भी तरह से अपने कुछ मेंबर की संख्या बढ़ाने के लिए, इसलिए मैं बिहार के लोगों को सावधान कर रहा हूं। उनकी ताकत बढ़ाने का मकसद है, बिहार में फिर से लूटपाट के दिन उस दौर को वापस लाना। उनकी ताकत बढ़ाने का मतलब है बेटियों का अपहरण, गुंडागर्दी, हत्याएं, हर योजना में भ्रष्टाचार। उनकी ताकत बढ़ाने का मतलब है सूरज ढलने के बाद अपने ही घर में कैद हो जाना। घुट-घुट के जीना, पलायन के लिए मजबूर हो जाना। बिहार को इन लोगों ने यहीं दिया है, आज फिर से ये लोग अपनी गिद्ध दृष्टि जमाए हुए बिहार पर। ये बिहार को जाति में बांटकर, समाज को बांटकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाहते हैं। वो अपने भ्रष्टाचार, अपने काले कारनामे को छिपाना चाहते हैं। उनका लक्ष्य है कि किसी भी प्रकार से दिल्ली में एक कमजोर ढीली-ढाली कमजोर सरकार बने, ताकी वो मनमानी कर सके। जो जेल में हैं, जो जेल के दरवाजे पर है, जो बेल पर है, जो बेल के लिए कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहे हैं। वो सब केंद्र में एक मजबूत सरकार को एक मिनट भी बर्दाश्त नहीं करना चाहते। लेकिन साथियो, ये चाहे कितनी भी कोशिश कर लें, कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जो अभियान हमने चलाया हुआ है। उसकी रफ्तार धीमी नहीं पड़ेगी। जो बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल, फॉर्म हाऊस खड़े हुए हैं, उसका भी हिसाब देना होगा। इनको गरीब का लूटा एक-एक पैसा लौटाना ही पड़ेगा। जिस तरह से मिशेल मामा को उठा कर लाएं हैं। इनके बाकी चाचाओं को भी भारत आना ही पड़ेगा।

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बीते पांच वर्ष में इन लोगों को बेल लेने के लिए मजबूर किया है। बेल तक पहुंचाया है। अब जेल भी भिजवाने की पूरी तैयारी है। भाइयो-बहनो, स्वार्थ और सिर्फ अपने हित के लिए समर्पित इन सारे महामिलावट करने वालों की मंशा को समझना बहुत जरूरी है। अगर आप ध्यान दें तो जितने भी ये महामिलावटी के दल हैं, उनमें से ज्यादातर इतनी सीटों पर भी नहीं लड़ रहे हैं कि वो लोकसभा में नेता विपक्ष का पद हासिल कर पाएं। यानी नेता विपक्ष बनने के लिए जो नियम है कि लोकसभा की 10 प्रतिशत सीटें जीतनी पड़ेगी। 2014 में देश की जनता ने कांग्रेस को भी नेता विपक्ष बन सके, इतनी सीटें नहीं दी थी, और इनदिनों अब इनके बीच में लड़ाई चल रही है। कांग्रेस वाले सोचते थे कि हम तो पांच साल विपक्ष के नेता भी नहीं बन पाए और कोई बनना नहीं चाहिए, इसलिए वो महामिलावटी लोगों की भी टांग खींचने में लगे हैं। भाइयो- बहनो, जिनके नसीब में विपक्ष के नेता का पद नहीं है, वो प्रधानमंत्री बनने के सपने देख रहे हैं। साथियो, इनके लिए सत्ता से ऊपर कुछ भी नहीं है, देश भी नहीं है। इन लोगों को सिर्फ इपनी शानो-शौकत और सुरक्षा की चिंता रहती है, देश की नहीं। याद करिए वो दिन जब देश के बड़े बड़े शहरों में, कभी ट्रेन में, कभी बाजार में, कभी बस में, कभी मंदिर में, कभी रेलवे स्टेशन पर बम धमाके हुआ करते थे। बम धमाके के उस दौर में कांग्रेस और उसके साथी कैसे कमजोरों की तरह बर्ताव करते थे। ये भी याद रखिए आतंकवाद जब फलता है, फूलता है तब कोई बचता नहीं है, कोई सुरक्षित रहता नहीं है। किसी भी जाति का हो, किसी की भी पंथ का हो, कोई भी व्यक्ति सुरक्षित नहीं रहता।

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बीते पांच वर्षों में बहुत मेहनत से हमारी सुरक्षा एजेंसियों ने हमारे सपूतों ने इन गलत इरादे वालों को रोक कर रखा है। लेकिन उनके इरादे तो वैसे ही है, वो मौके की तलाश में हैं, मौका मिलेगा तो फिर हमला करने के लिए वो अपने प्लान करते ही रहते हैं, और हम उनके प्लान खत्म करने में लगे रहते हैं। ये रोज की लड़ाई है। सिर्फ भारत नहीं दुनिया पर से भी आतंकी खतरा टला नहीं है। कौन सोच सकता था कि श्रीलंका में 300 लोगों को मार देंगे। आय दिन और इसलिए देश में एक ऐसी सरकार चाहिए, जो आतंकवाद को, देश में हिंसा फैलाने वाली हर ताकत को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध हो। भाइयो-बहनो, आप बताइए, आप बताइए, ये आतंकवाद को कौन खत्म कर सकता है? माताएं-बहनें जो बताएंगी वो सच्चा आशीर्वाद होगा। कौन कर सकता है? आतंकवाद और नक्सलवाद पर सबसे बड़ा प्रहार करके ये ताकत किसने दिखाई है? किसने दिखाई है? साथियो, चाहे देश के भीतर हो या फिर सीमा के उस पार आतंक और हिंसा फैलाने वाली फैक्ट्री जहां भी होगी इस चौकीदार के निशाने पर है। भारत को जहां से भी खतरा होगा। हम घर में घुसकर के मारेंगे। ये तय है, साथियो, एनडीए की नीति स्पष्ट है। लेकिन महामिलावटी दलों की देश की रक्षा और सुरक्षा के लिए क्या नीति है, क्या आपको पता है क्या? कभी उन्होंने बताया क्या ? क्या इन्होंने अपनी रैली में इस पर एक शब्द बोला है क्या ? उनको आपकी सुरक्षा की चिंता है क्या? भाइयो-बहनो, इनका इतिहास ऐसा है कि आतंकवाद पर कुछ भी नहीं कह सकते। पाकिस्तान का नाम सुनते ही इनके पैर कांपने लगते हैं। इनकी सरकार डोलने लगती है। यहीं कारण है कि सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्टाइक के नाम पर इनको एलर्जी होती है, और उनकी नींद हराम हो जाती है। उनको चिंता है कि ये मोदी ने कैसे कर दिया। ये सवाल उनको सोने नहीं देता है। और इसलिए ये राष्ट्र रक्षा की बात करने से भी कतरा रहे हैं। भाइयो-बहनो, इनकी जमीन इसलिए भी खिसक रही है, क्योंकि पांच वर्ष में सबका साथ सबका विकास को हमने जमीन पर उतारा है। गांव-गांव गरीब के घर तक ले गए हैं। सामान्य वर्ग के गरीब युवाओं को 10% आरक्षण सामाजिक सद्भाव का एक बहुत बड़ा प्रयास है। क्योंकि इसमें किसी दूसरे वर्ग का हक बिल्कुल नहीं छीना गया। यहीं नहीं हमने महामिलावटियों के तमाम विरोध के बावजूद ओबीसी कमीशन को भी संवैधानिक दर्जा दे दिया है। और मैं गर्व से कह सकता हूं जब आज मुजफ्फरपुर की धरती पर आया हूं। मैं गर्व से कह सकता हूं कि इसी पवित्र धरती से यहीं के संतान भगवान लाल साहनी इसके सबसे पहले चेयरमैन हमने बनाए है। 

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साथियो, हमने देश को लाल बत्ती की संस्कृति से निकाला है, और गांव-गांव गरीब-गरीब को एलईडी बल्ब दूधिया बत्ती से रौशन कर दिया है। हम लोगों की सबकी लाल बत्ती चली गई, लेकिन गरीब के घर में बत्ती जल रही है। ये हमारे लिए पूंजी है। हमने उस गरीब को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देने का काम किया है। जिसको इलाज के लिए अपना घरबार कभी बेचना पड़ता था। हमने गांव-गांव में गरीब बहनों के घर उनको इज्जत घर देने शौचालय देने का काम किया। हमने उस गरीब बहन तक मुफ्त रसोई गैस का कनेक्शन पहुंचाने का काम किया। जो गरीब मां पूरी उम्र धुएं में जिंदगी गुजारती थी, उन माताओं को बहनो को हमने धुएं से मुक्ति दिलाई है। मेरी मां वहां से मुझे आशीर्वाद दे रही है। हमने उस गरीब को पक्का घर देने का बीड़ा उठाया है। जिसने सपने में भी कभी अपने घर के बारे में नहीं सोचा था। साथियो, जिनको ये सुविधाएं मिल चुकी है, उनको मैं ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं। जिनको नहीं मिला है उनको भी मैं विश्वास देता हूं ये मोदी है, वादों का पक्का है, ये मैं सबको देकर के ही रहने वाला हूं। हमने संकल्प लिया है कि 2022 तक हर गरीब के पास अपना पक्का घर हो, इतना ही नहीं जो हमारे किसान परिवार हैं, उनके खाते में सीधे पैसे जमा होने शुरू हो चुके हैं, और 23 मई को चुनाव के नतीजे आएंगे। 23 मई को चुनाव के नतीजे आएंगे, और फिर एक बार मोदी सरकार। फिर एक बार मोदी सरकार। चुनाव नतीजे के बाद फिर से एक बार मोदी सरकार आएगी। तब हम बिहार के सभी किसानों को ये सुविधा देने वाले हैं। 5 एकड़ की सीमा जो आज है, उसे हटा दिया जाएगा। सब किसानों को उसका लाभ मिलेगा। इसी तरह जो हमारे मछली के व्यवसाय से जुड़े साथी है। उनके लिए हमने किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा पहले ही दी जा चुकी है। अब मछली पालन के लिए एक अलग से मंत्रालय होगा। अलग डिपार्टमेंट बनाने का हमने फैसला किया है। जो हमारे लीची उत्पादक किसान है उनकी सुविधा के लिए यहां लीची ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाया गया है। 

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साथियो, हमारे छोटे किसान हो, खेत मजदूर हो, छोटे दुकानदार हो। सबको 60 वर्ष की आयु की बाद नियमित पेंशन मिले। इसका इंतजाम भी हम करने वाले हैं। व्यापारियों के लिए तो हमने पहली बार एक राष्ट्रीय आयोग बनाने का फैसला लिया है। जो जीएसटी रजिस्टर्ड व्यापारी और कारोबारी हैं, उनको 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना बीमा देने का संकल्प भी हमने लिया है। भाइयो–बहनो, मुजफ्फरपुर और वैशाली के इन्फ्रास्टकचर को मजबूत करने के लिए भी गंभीर प्रयास हम कर रहे हैं। सड़क, रेल और हवाई यातायात से जुड़े अनेक प्रोजेक्ट यहां चल रहे हैं। पताही एयरपोर्ट भी जल्द ही आप सभी को नियमित सेवाएं देना शुरू कर देगा। भाइयो -बहनो, ऐसे सभी काम तभी पूरे हो पाएंगे जब दिल्ली में एक ईमानदार और मजबूत सरकार बनेगी। मजबूत सरकार तभी बनेगी जब यहां के सभी मेरे साथी मुजफ्फरपुर के लोग कमल छाप पर, वैशाली के लोग बांग्ला छाप पर, और सीतामढ़ी के लोग तीर छाप पर वोट डालेंगे। हम थ्री इन वन है। आप कमल छाप को वोट डालोगे कहां जाएगा, मोदी के खाते में जाएगा। आप बांग्ला छाप पर वोट डालोगे, कहां जाएगा मोदी को जाएग। आप तीर छाप को वोट डालोगे, कहां जाएगा, मोदी को जाएगा। आपका हर वोट मोदी के खाते में जाएगा। भाइयो-बहनो, फिर एक बार मैं इतनी बड़ी तादाद में आप आए, हमें आशीर्वाद दिया, मेरा आग्रह है कि पहले से मतदान ज्यादा करें, और जैसा नीतीश जी ने बताया कि पहले मतदान फिर जलपान... हम लोग इस मंत्र को लेकर के जाएं। मेरे साथ बोले- भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय
बहुत बहुत धन्यावाद...

 

 

 

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QuoteToday's India thinks big, sets ambitious targets and delivers remarkable results: PM
QuoteWe launched the SVAMITVA Scheme to grant property rights to rural households in India: PM
QuoteYouth is the X-Factor of today's India, where X stands for Experimentation, Excellence, and Expansion: PM
QuoteIn the past decade, we have transformed impact-less administration into impactful governance: PM
QuoteEarlier, construction of houses was government-driven, but we have transformed it into an owner-driven approach: PM

नमस्कार!

आप लोग सब थक गए होंगे, अर्णब की ऊंची आवाज से कान तो जरूर थक गए होंगे, बैठिये अर्णब, अभी चुनाव का मौसम नहीं है। सबसे पहले तो मैं रिपब्लिक टीवी को उसके इस अभिनव प्रयोग के लिए बहुत बधाई देता हूं। आप लोग युवाओं को ग्रासरूट लेवल पर इन्वॉल्व करके, इतना बड़ा कंपटीशन कराकर यहां लाए हैं। जब देश का युवा नेशनल डिस्कोर्स में इन्वॉल्व होता है, तो विचारों में नवीनता आती है, वो पूरे वातावरण में एक नई ऊर्जा भर देता है और यही ऊर्जा इस समय हम यहां महसूस भी कर रहे हैं। एक तरह से युवाओं के इन्वॉल्वमेंट से हम हर बंधन को तोड़ पाते हैं, सीमाओं के परे जा पाते हैं, फिर भी कोई भी लक्ष्य ऐसा नहीं रहता, जिसे पाया ना जा सके। कोई मंजिल ऐसी नहीं रहती जिस तक पहुंचा ना जा सके। रिपब्लिक टीवी ने इस समिट के लिए एक नए कॉन्सेप्ट पर काम किया है। मैं इस समिट की सफलता के लिए आप सभी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं, आपका अभिनंदन करता हूं। अच्छा मेरा भी इसमें थोड़ा स्वार्थ है, एक तो मैं पिछले दिनों से लगा हूं, कि मुझे एक लाख नौजवानों को राजनीति में लाना है और वो एक लाख ऐसे, जो उनकी फैमिली में फर्स्ट टाइमर हो, तो एक प्रकार से ऐसे इवेंट मेरा जो यह मेरा मकसद है उसका ग्राउंड बना रहे हैं। दूसरा मेरा व्यक्तिगत लाभ है, व्यक्तिगत लाभ यह है कि 2029 में जो वोट करने जाएंगे उनको पता ही नहीं है कि 2014 के पहले अखबारों की हेडलाइन क्या हुआ करती थी, उसे पता नहीं है, 10-10, 12-12 लाख करोड़ के घोटाले होते थे, उसे पता नहीं है और वो जब 2029 में वोट करने जाएगा, तो उसके सामने कंपैरिजन के लिए कुछ नहीं होगा और इसलिए मुझे उस कसौटी से पार होना है और मुझे पक्का विश्वास है, यह जो ग्राउंड बन रहा है ना, वो उस काम को पक्का कर देगा।

साथियों,

आज पूरी दुनिया कह रही है कि ये भारत की सदी है, ये आपने नहीं सुना है। भारत की उपलब्धियों ने, भारत की सफलताओं ने पूरे विश्व में एक नई उम्मीद जगाई है। जिस भारत के बारे में कहा जाता था, ये खुद भी डूबेगा और हमें भी ले डूबेगा, वो भारत आज दुनिया की ग्रोथ को ड्राइव कर रहा है। मैं भारत के फ्यूचर की दिशा क्या है, ये हमें आज के हमारे काम और सिद्धियों से पता चलता है। आज़ादी के 65 साल बाद भी भारत दुनिया की ग्यारहवें नंबर की इकॉनॉमी था। बीते दशक में हम दुनिया की पांचवें नंबर की इकॉनॉमी बने, और अब उतनी ही तेजी से दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहे हैं।

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साथियों,

मैं आपको 18 साल पहले की भी बात याद दिलाता हूं। ये 18 साल का खास कारण है, क्योंकि जो लोग 18 साल की उम्र के हुए हैं, जो पहली बार वोटर बन रहे हैं, उनको 18 साल के पहले का पता नहीं है, इसलिए मैंने वो आंकड़ा लिया है। 18 साल पहले यानि 2007 में भारत की annual GDP, एक लाख करोड़ डॉलर तक पहुंची थी। यानि आसान शब्दों में कहें तो ये वो समय था, जब एक साल में भारत में एक लाख करोड़ डॉलर की इकॉनॉमिक एक्टिविटी होती थी। अब आज देखिए क्या हो रहा है? अब एक क्वार्टर में ही लगभग एक लाख करोड़ डॉलर की इकॉनॉमिक एक्टिविटी हो रही है। इसका क्या मतलब हुआ? 18 साल पहले के भारत में साल भर में जितनी इकॉनॉमिक एक्टिविटी हो रही थी, उतनी अब सिर्फ तीन महीने में होने लगी है। ये दिखाता है कि आज का भारत कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है। मैं आपको कुछ उदाहरण दूंगा, जो दिखाते हैं कि बीते एक दशक में कैसे बड़े बदलाव भी आए और नतीजे भी आए। बीते 10 सालों में, हम 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफल हुए हैं। ये संख्या कई देशों की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा है। आप वो दौर भी याद करिए, जब सरकार खुद स्वीकार करती थी, प्रधानमंत्री खुद कहते थे, कि एक रूपया भेजते थे, तो 15 पैसा गरीब तक पहुंचता था, वो 85 पैसा कौन पंजा खा जाता था और एक आज का दौर है। बीते दशक में गरीबों के खाते में, DBT के जरिए, Direct Benefit Transfer, DBT के जरिए 42 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा ट्रांसफर किए गए हैं, 42 लाख करोड़ रुपए। अगर आप वो हिसाब लगा दें, रुपये में से 15 पैसे वाला, तो 42 लाख करोड़ का क्या हिसाब निकलेगा? साथियों, आज दिल्ली से एक रुपया निकलता है, तो 100 पैसे आखिरी जगह तक पहुंचते हैं।

साथियों,

10 साल पहले सोलर एनर्जी के मामले में भारत दुनिया में कहीं गिनती नहीं होती थी। लेकिन आज भारत सोलर एनर्जी कैपेसिटी के मामले में दुनिया के टॉप-5 countries में से है। हमने सोलर एनर्जी कैपेसिटी को 30 गुना बढ़ाया है। Solar module manufacturing में भी 30 गुना वृद्धि हुई है। 10 साल पहले तो हम होली की पिचकारी भी, बच्चों के खिलौने भी विदेशों से मंगाते थे। आज हमारे Toys Exports तीन गुना हो चुके हैं। 10 साल पहले तक हम अपनी सेना के लिए राइफल तक विदेशों से इंपोर्ट करते थे और बीते 10 वर्षों में हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 20 गुना बढ़ गया है।

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साथियों,

इन 10 वर्षों में, हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टील प्रोड्यूसर हैं, दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरर हैं और दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बने हैं। इन्हीं 10 सालों में हमने इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपने Capital Expenditure को, पांच गुना बढ़ाया है। देश में एयरपोर्ट्स की संख्या दोगुनी हो गई है। इन दस सालों में ही, देश में ऑपरेशनल एम्स की संख्या तीन गुना हो गई है। और इन्हीं 10 सालों में मेडिकल कॉलेजों और मेडिकल सीट्स की संख्या भी करीब-करीब दोगुनी हो गई है।

साथियों,

आज के भारत का मिजाज़ कुछ और ही है। आज का भारत बड़ा सोचता है, बड़े टार्गेट तय करता है और आज का भारत बड़े नतीजे लाकर के दिखाता है। और ये इसलिए हो रहा है, क्योंकि देश की सोच बदल गई है, भारत बड़ी Aspirations के साथ आगे बढ़ रहा है। पहले हमारी सोच ये बन गई थी, चलता है, होता है, अरे चलने दो यार, जो करेगा करेगा, अपन अपना चला लो। पहले सोच कितनी छोटी हो गई थी, मैं इसका एक उदाहरण देता हूं। एक समय था, अगर कहीं सूखा हो जाए, सूखाग्रस्त इलाका हो, तो लोग उस समय कांग्रेस का शासन हुआ करता था, तो मेमोरेंडम देते थे गांव के लोग और क्या मांग करते थे, कि साहब अकाल होता रहता है, तो इस समय अकाल के समय अकाल के राहत के काम रिलीफ के वर्क शुरू हो जाए, गड्ढे खोदेंगे, मिट्टी उठाएंगे, दूसरे गड्डे में भर देंगे, यही मांग किया करते थे लोग, कोई कहता था क्या मांग करता था, कि साहब मेरे इलाके में एक हैंड पंप लगवा दो ना, पानी के लिए हैंड पंप की मांग करते थे, कभी कभी सांसद क्या मांग करते थे, गैस सिलेंडर इसको जरा जल्दी देना, सांसद ये काम करते थे, उनको 25 कूपन मिला करती थी और उस 25 कूपन को पार्लियामेंट का मेंबर अपने पूरे क्षेत्र में गैस सिलेंडर के लिए oblige करने के लिए उपयोग करता था। एक साल में एक एमपी 25 सिलेंडर और यह सारा 2014 तक था। एमपी क्या मांग करते थे, साहब ये जो ट्रेन जा रही है ना, मेरे इलाके में एक स्टॉपेज दे देना, स्टॉपेज की मांग हो रही थी। यह सारी बातें मैं 2014 के पहले की कर रहा हूं, बहुत पुरानी नहीं कर रहा हूं। कांग्रेस ने देश के लोगों की Aspirations को कुचल दिया था। इसलिए देश के लोगों ने उम्मीद लगानी भी छोड़ दी थी, मान लिया था यार इनसे कुछ होना नहीं है, क्या कर रहा है।। लोग कहते थे कि भई ठीक है तुम इतना ही कर सकते हो तो इतना ही कर दो। और आज आप देखिए, हालात और सोच कितनी तेजी से बदल रही है। अब लोग जानते हैं कि कौन काम कर सकता है, कौन नतीजे ला सकता है, और यह सामान्य नागरिक नहीं, आप सदन के भाषण सुनोगे, तो विपक्ष भी यही भाषण करता है, मोदी जी ये क्यों नहीं कर रहे हो, इसका मतलब उनको लगता है कि यही करेगा।

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साथियों,

आज जो एस्पिरेशन है, उसका प्रतिबिंब उनकी बातों में झलकता है, कहने का तरीका बदल गया , अब लोगों की डिमांड क्या आती है? लोग पहले स्टॉपेज मांगते थे, अब आकर के कहते जी, मेरे यहां भी तो एक वंदे भारत शुरू कर दो। अभी मैं कुछ समय पहले कुवैत गया था, तो मैं वहां लेबर कैंप में नॉर्मली मैं बाहर जाता हूं तो अपने देशवासी जहां काम करते हैं तो उनके पास जाने का प्रयास करता हूं। तो मैं वहां लेबर कॉलोनी में गया था, तो हमारे जो श्रमिक भाई बहन हैं, जो वहां कुवैत में काम करते हैं, उनसे कोई 10 साल से कोई 15 साल से काम, मैं उनसे बात कर रहा था, अब देखिए एक श्रमिक बिहार के गांव का जो 9 साल से कुवैत में काम कर रहा है, बीच-बीच में आता है, मैं जब उससे बातें कर रहा था, तो उसने कहा साहब मुझे एक सवाल पूछना है, मैंने कहा पूछिए, उसने कहा साहब मेरे गांव के पास डिस्ट्रिक्ट हेड क्वार्टर पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बना दीजिए ना, जी मैं इतना प्रसन्न हो गया, कि मेरे देश के बिहार के गांव का श्रमिक जो 9 साल से कुवैत में मजदूरी करता है, वह भी सोचता है, अब मेरे डिस्ट्रिक्ट में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनेगा। ये है, आज भारत के एक सामान्य नागरिक की एस्पिरेशन, जो विकसित भारत के लक्ष्य की ओर पूरे देश को ड्राइव कर रही है।

साथियों,

किसी भी समाज की, राष्ट्र की ताकत तभी बढ़ती है, जब उसके नागरिकों के सामने से बंदिशें हटती हैं, बाधाएं हटती हैं, रुकावटों की दीवारें गिरती है। तभी उस देश के नागरिकों का सामर्थ्य बढ़ता है, आसमान की ऊंचाई भी उनके लिए छोटी पड़ जाती है। इसलिए, हम निरंतर उन रुकावटों को हटा रहे हैं, जो पहले की सरकारों ने नागरिकों के सामने लगा रखी थी। अब मैं उदाहरण देता हूं स्पेस सेक्टर। स्पेस सेक्टर में पहले सबकुछ ISRO के ही जिम्मे था। ISRO ने निश्चित तौर पर शानदार काम किया, लेकिन स्पेस साइंस और आंत्रप्रन्योरशिप को लेकर देश में जो बाकी सामर्थ्य था, उसका उपयोग नहीं हो पा रहा था, सब कुछ इसरो में सिमट गया था। हमने हिम्मत करके स्पेस सेक्टर को युवा इनोवेटर्स के लिए खोल दिया। और जब मैंने निर्णय किया था, किसी अखबार की हेडलाइन नहीं बना था, क्योंकि समझ भी नहीं है। रिपब्लिक टीवी के दर्शकों को जानकर खुशी होगी, कि आज ढाई सौ से ज्यादा स्पेस स्टार्टअप्स देश में बन गए हैं, ये मेरे देश के युवाओं का कमाल है। यही स्टार्टअप्स आज, विक्रम-एस और अग्निबाण जैसे रॉकेट्स बना रहे हैं। ऐसे ही mapping के सेक्टर में हुआ, इतने बंधन थे, आप एक एटलस नहीं बना सकते थे, टेक्नॉलाजी बदल चुकी है। पहले अगर भारत में कोई मैप बनाना होता था, तो उसके लिए सरकारी दरवाजों पर सालों तक आपको चक्कर काटने पड़ते थे। हमने इस बंदिश को भी हटाया। आज Geo-spatial mapping से जुडा डेटा, नए स्टार्टअप्स का रास्ता बना रहा है।

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साथियों,

न्यूक्लियर एनर्जी, न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़े सेक्टर को भी पहले सरकारी कंट्रोल में रखा गया था। बंदिशें थीं, बंधन थे, दीवारें खड़ी कर दी गई थीं। अब इस साल के बजट में सरकार ने इसको भी प्राइवेट सेक्टर के लिए ओपन करने की घोषणा की है। और इससे 2047 तक 100 गीगावॉट न्यूक्लियर एनर्जी कैपेसिटी जोड़ने का रास्ता मजबूत हुआ है।

साथियों,

आप हैरान रह जाएंगे, कि हमारे गांवों में 100 लाख करोड़ रुपए, Hundred lakh crore rupees, उससे भी ज्यादा untapped आर्थिक सामर्थ्य पड़ा हुआ है। मैं आपके सामने फिर ये आंकड़ा दोहरा रहा हूं- 100 लाख करोड़ रुपए, ये छोटा आंकड़ा नहीं है, ये आर्थिक सामर्थ्य, गांव में जो घर होते हैं, उनके रूप में उपस्थित है। मैं आपको और आसान तरीके से समझाता हूं। अब जैसे यहां दिल्ली जैसे शहर में आपके घर 50 लाख, एक करोड़, 2 करोड़ के होते हैं, आपकी प्रॉपर्टी की वैल्यू पर आपको बैंक लोन भी मिल जाता है। अगर आपका दिल्ली में घर है, तो आप बैंक से करोड़ों रुपये का लोन ले सकते हैं। अब सवाल यह है, कि घर दिल्ली में थोड़े है, गांव में भी तो घर है, वहां भी तो घरों का मालिक है, वहां ऐसा क्यों नहीं होता? गांवों में घरों पर लोन इसलिए नहीं मिलता, क्योंकि भारत में गांव के घरों के लीगल डॉक्यूमेंट्स नहीं होते थे, प्रॉपर मैपिंग ही नहीं हो पाई थी। इसलिए गांव की इस ताकत का उचित लाभ देश को, देशवासियों को नहीं मिल पाया। और ये सिर्फ भारत की समस्या है ऐसा नहीं है, दुनिया के बड़े-बड़े देशों में लोगों के पास प्रॉपर्टी के राइट्स नहीं हैं। बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कहती हैं, कि जो देश अपने यहां लोगों को प्रॉपर्टी राइट्स देता है, वहां की GDP में उछाल आ जाता है।

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साथियों,

भारत में गांव के घरों के प्रॉपर्टी राइट्स देने के लिए हमने एक स्वामित्व स्कीम शुरु की। इसके लिए हम गांव-गांव में ड्रोन से सर्वे करा रहे हैं, गांव के एक-एक घर की मैपिंग करा रहे हैं। आज देशभर में गांव के घरों के प्रॉपर्टी कार्ड लोगों को दिए जा रहे हैं। दो करोड़ से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड सरकार ने बांटे हैं और ये काम लगातार चल रहा है। प्रॉपर्टी कार्ड ना होने के कारण पहले गांवों में बहुत सारे विवाद भी होते थे, लोगों को अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते थे, ये सब भी अब खत्म हुआ है। इन प्रॉपर्टी कार्ड्स पर अब गांव के लोगों को बैंकों से लोन मिल रहे हैं, इससे गांव के लोग अपना व्यवसाय शुरू कर रहे हैं, स्वरोजगार कर रहे हैं। अभी मैं एक दिन ये स्वामित्व योजना के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंस पर उसके लाभार्थियों से बात कर रहा था, मुझे राजस्थान की एक बहन मिली, उसने कहा कि मैंने मेरा प्रॉपर्टी कार्ड मिलने के बाद मैंने 9 लाख रुपये का लोन लिया गांव में और बोली मैंने बिजनेस शुरू किया और मैं आधा लोन वापस कर चुकी हूं और अब मुझे पूरा लोन वापस करने में समय नहीं लगेगा और मुझे अधिक लोन की संभावना बन गई है कितना कॉन्फिडेंस लेवल है।

साथियों,

ये जितने भी उदाहरण मैंने दिए हैं, इनका सबसे बड़ा बेनिफिशरी मेरे देश का नौजवान है। वो यूथ, जो विकसित भारत का सबसे बड़ा स्टेकहोल्डर है। जो यूथ, आज के भारत का X-Factor है। इस X का अर्थ है, Experimentation Excellence और Expansion, Experimentation यानि हमारे युवाओं ने पुराने तौर तरीकों से आगे बढ़कर नए रास्ते बनाए हैं। Excellence यानी नौजवानों ने Global Benchmark सेट किए हैं। और Expansion यानी इनोवेशन को हमारे य़ुवाओं ने 140 करोड़ देशवासियों के लिए स्केल-अप किया है। हमारा यूथ, देश की बड़ी समस्याओं का समाधान दे सकता है, लेकिन इस सामर्थ्य का सदुपयोग भी पहले नहीं किया गया। हैकाथॉन के ज़रिए युवा, देश की समस्याओं का समाधान भी दे सकते हैं, इसको लेकर पहले सरकारों ने सोचा तक नहीं। आज हम हर वर्ष स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन आयोजित करते हैं। अभी तक 10 लाख युवा इसका हिस्सा बन चुके हैं, सरकार की अनेकों मिनिस्ट्रीज और डिपार्टमेंट ने गवर्नेंस से जुड़े कई प्रॉब्लम और उनके सामने रखें, समस्याएं बताई कि भई बताइये आप खोजिये क्या सॉल्यूशन हो सकता है। हैकाथॉन में हमारे युवाओं ने लगभग ढाई हज़ार सोल्यूशन डेवलप करके देश को दिए हैं। मुझे खुशी है कि आपने भी हैकाथॉन के इस कल्चर को आगे बढ़ाया है। और जिन नौजवानों ने विजय प्राप्त की है, मैं उन नौजवानों को बधाई देता हूं और मुझे खुशी है कि मुझे उन नौजवानों से मिलने का मौका मिला।

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साथियों,

बीते 10 वर्षों में देश ने एक new age governance को फील किया है। बीते दशक में हमने, impact less administration को Impactful Governance में बदला है। आप जब फील्ड में जाते हैं, तो अक्सर लोग कहते हैं, कि हमें फलां सरकारी स्कीम का बेनिफिट पहली बार मिला। ऐसा नहीं है कि वो सरकारी स्कीम्स पहले नहीं थीं। स्कीम्स पहले भी थीं, लेकिन इस लेवल की last mile delivery पहली बार सुनिश्चित हो रही है। आप अक्सर पीएम आवास स्कीम के बेनिफिशरीज़ के इंटरव्यूज़ चलाते हैं। पहले कागज़ पर गरीबों के मकान सेंक्शन होते थे। आज हम जमीन पर गरीबों के घर बनाते हैं। पहले मकान बनाने की पूरी प्रक्रिया, govt driven होती थी। कैसा मकान बनेगा, कौन सा सामान लगेगा, ये सरकार ही तय करती थी। हमने इसको owner driven बनाया। सरकार, लाभार्थी के अकाउंट में पैसा डालती है, बाकी कैसा घर बनेगा, ये लाभार्थी खुद डिसाइड करता है। और घर के डिजाइन के लिए भी हमने देशभर में कंपीटिशन किया, घरों के मॉडल सामने रखे, डिजाइन के लिए भी लोगों को जोड़ा, जनभागीदारी से चीज़ें तय कीं। इससे घरों की क्वालिटी भी अच्छी हुई है और घर तेज़ गति से कंप्लीट भी होने लगे हैं। पहले ईंट-पत्थर जोड़कर आधे-अधूरे मकान बनाकर दिए जाते थे, हमने गरीब को उसके सपनों का घर बनाकर दिया है। इन घरों में नल से जल आता है, उज्ज्वला योजना का गैस कनेक्शन होता है, सौभाग्य योजना का बिजली कनेक्शन होता है, हमने सिर्फ चार दीवारें खड़ी नहीं कीं है, हमने उन घरों में ज़िंदगी खड़ी की है।

साथियों,

किसी भी देश के विकास के लिए बहुत जरूरी पक्ष है उस देश की सुरक्षा, नेशनल सिक्योरिटी। बीते दशक में हमने सिक्योरिटी पर भी बहुत अधिक काम किया है। आप याद करिए, पहले टीवी पर अक्सर, सीरियल बम ब्लास्ट की ब्रेकिंग न्यूज चला करती थी, स्लीपर सेल्स के नेटवर्क पर स्पेशल प्रोग्राम हुआ करते थे। आज ये सब, टीवी स्क्रीन और भारत की ज़मीन दोनों जगह से गायब हो चुका है। वरना पहले आप ट्रेन में जाते थे, हवाई अड्डे पर जाते थे, लावारिस कोई बैग पड़ा है तो छूना मत ऐसी सूचनाएं आती थी, आज वो जो 18-20 साल के नौजवान हैं, उन्होंने वो सूचना सुनी नहीं होगी। आज देश में नक्सलवाद भी अंतिम सांसें गिन रहा है। पहले जहां सौ से अधिक जिले, नक्सलवाद की चपेट में थे, आज ये दो दर्जन से भी कम जिलों में ही सीमित रह गया है। ये तभी संभव हुआ, जब हमने nation first की भावना से काम किया। हमने इन क्षेत्रों में Governance को Grassroot Level तक पहुंचाया। देखते ही देखते इन जिलों मे हज़ारों किलोमीटर लंबी सड़कें बनीं, स्कूल-अस्पताल बने, 4G मोबाइल नेटवर्क पहुंचा और परिणाम आज देश देख रहा है।

साथियों,

सरकार के निर्णायक फैसलों से आज नक्सलवाद जंगल से तो साफ हो रहा है, लेकिन अब वो Urban सेंटर्स में पैर पसार रहा है। Urban नक्सलियों ने अपना जाल इतनी तेज़ी से फैलाया है कि जो राजनीतिक दल, अर्बन नक्सल के विरोधी थे, जिनकी विचारधारा कभी गांधी जी से प्रेरित थी, जो भारत की ज़ड़ों से जुड़ी थी, ऐसे राजनीतिक दलों में आज Urban नक्सल पैठ जमा चुके हैं। आज वहां Urban नक्सलियों की आवाज, उनकी ही भाषा सुनाई देती है। इसी से हम समझ सकते हैं कि इनकी जड़ें कितनी गहरी हैं। हमें याद रखना है कि Urban नक्सली, भारत के विकास और हमारी विरासत, इन दोनों के घोर विरोधी हैं। वैसे अर्नब ने भी Urban नक्सलियों को एक्सपोज करने का जिम्मा उठाया हुआ है। विकसित भारत के लिए विकास भी ज़रूरी है और विरासत को मज़बूत करना भी आवश्यक है। और इसलिए हमें Urban नक्सलियों से सावधान रहना है।

साथियों,

आज का भारत, हर चुनौती से टकराते हुए नई ऊंचाइयों को छू रहा है। मुझे भरोसा है कि रिपब्लिक टीवी नेटवर्क के आप सभी लोग हमेशा नेशन फर्स्ट के भाव से पत्रकारिता को नया आयाम देते रहेंगे। आप विकसित भारत की एस्पिरेशन को अपनी पत्रकारिता से catalyse करते रहें, इसी विश्वास के साथ, आप सभी का बहुत-बहुत आभार, बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद!