Quoteಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ಬಡವರಿಗೂ ಪಕ್ಕಾ ಮನೆ ಸಿಗಬೇಕು, ಪ್ರತಿ ಗ್ರಾಮಕ್ಕೂ ವೇಗದ ಇಂಟರ್ನೆಟ್ ಲಭ್ಯವಾಗಬೇಕು, ಪ್ರತಿ ಹಳ್ಳಿಯೂ ಪಕ್ಕಾ ರಸ್ತೆಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಬೇಕು: ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ
Quoteವಸತಿ, ಎಲ್‌ಪಿಜಿ ಸಂಪರ್ಕಗಳು ಮತ್ತು ರೈತರ ಬೆಂಬಲದಂತಹ ಕಲ್ಯಾಣ ಯೋಜನೆಗಳು ರಾಜ್ಯದಲ್ಲಿ ಮುಂದುವರಿಯಲು, ಡಬಲ್ ಎಂಜಿನ್ ಸರ್ಕಾರ್ ಅಧಿಕಾರದಲ್ಲಿ ಉಳಿಯುವುದು ಅತ್ಯಗತ್ಯ: ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ
Quoteಅವರ ಹೆಚ್ಚಿನ ಅಭ್ಯರ್ಥಿಗಳು ಇತಿಹಾಸ-ಶೀಟರ್. ಅವರ ಸ್ಥಿತಿ ಹೇಗಿದೆ ಎಂದರೆ ಅವರ ಕೆಲವು ಅಭ್ಯರ್ಥಿಗಳು ಜೈಲಿನಿಂದಲೇ ಚುನಾವಣೆ ಎದುರಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ: ಪ್ರತಿಪಕ್ಷಗಳ ವಿರುದ್ಧ ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ ವಾಗ್ದಾಳಿ ನಡೆಸಿದರು

भारत माता की… भारत माता की…

कन्नौज के सभी भाइयों-बहनों को मेरा आदरपूर्वक नमस्कार।

आप सभी इतनी बड़ी संख्या में भारतीय जनता पार्टी को आशीर्वाद देने आए हैं। मैं आपका हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। इटावा, औरैया और फर्रुखाबाद से भी लोग हमारे साथ जुड़े हुए हैं। इस क्षेत्र के भी सभी लोगों का मैं अभिनंदन करता हूं। कन्नौज की आबोहवा में इत्र की खुशबू तो होती ही है इसके साथ-साथ यहां के लोगों के परिश्रम की सुगंध भी होती है। आप लोगों का विकास हो, निरंतर विकास हो, हर व्यापारी-कारोबारी का बिजनेस और बढ़े, इसी कामना के साथ मैं आप सबको अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। बीते दिनों उत्तर प्रदेश हो, गोवा हो, उत्तराखंड हो जहां-जहां बीजेपी के पक्ष में वहां मुझे कार्यक्रमों के लिए जाना हुआ, भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में अभूतपूर्व लहर देखी है। अभी मैं उत्तराखंड से आ रहा हूं, जो मिजाज उत्तराखंड में मैंने देखा है, जो उत्साह और उमंग मैंने उत्तराखंड में देखा है। भाइयों-बहनों, ऐसा लगता है कि भारतीय जनता पार्टी इन राज्यों में पहले से ज्यादा सीटें कैसे प्राप्त करे, ये जैसे जनता ने मन बला लिया है। और भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए आज भाजपा का कार्यकर्ता जितनी मेहनत कर रहा है उससे ज्यादा उत्तर प्रदेश के, गोवा के, उत्तराखंड के, पंजाब के, मणिपुर के वहां के मतदाता जी-जान से जुटे हैं, रात-दिन मेहनत कर रहे हैं, मैं इन मतदाताओं का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। आज मैं कन्नौज की धरती से, उत्तराखंड के लोगों को, गोवा के लोगों को फिर एक बार कहूंगा कि 14 फरवरी को अधिक से अधिक मतदान करके रिकॉर्ड बनाएं।और साथियों, मैं आपसे एक बात कहूंगा। यूपी में लड़ाई इस बात की नहीं है कि किसकी सरकार बनेगी या किसकी सरकार नहीं बनेगी। पूरा यूपी जानता है, पूरा देश जानता है कि- “आएगी तो भाजपा ही, आएंगे तो योगी ही”। और पहले चरण के चुनाव ने ये पक्का कर दिया है- “आएगी तो भाजपा ही, आएंगे तो योगी ही”। बस अब मुकाबला इस बात की है बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनेगी, वो पहले से कितनी ज्यादा से ज्यादा सीटें लेकर के बनेगी इसका मुकाबला चल रहा है। और इस मुकाबले में भी आगे निकलना है, इसलिए भाजपा समर्थकों के लिए भी एक- एक वोट की अहमियत है। योगी जी आज फ्रंट फुट पर जो मोर्चा संभाले हैं तो उसके पीछे भी आपके एक-एक वोट की ताकत है आपके समर्थन की ताकत। हमें मिलकर इस ताकत को और बढ़ाना है।

भाइयों और बहनों,

पहले चरण के मतदान ने एक और बात साफ की है। दो दिन से घोर परिवारवादियों को सपने दिखना बंद हो गए हैं… पता है क्यों? इसलिए क्योंकि उनकी नींद हराम हो गई है। वो लोग सोच रहे थे कि जातिवाद फैलाकर, संप्रदायवाद फैलाकर, वोटों को बांट देंगे। लेकिन मुझे खुशी है कि यूपी के लोग माफियावादियों, दंगावादियों के खिलाफ एकजुट होकर वोट कर रहे हैं। ये एकजुटता दंगावाद से मुक्ति के पक्ष में है। ये एकजुटता, कानून व्यवस्था के पक्ष में है। ये एकजुटता महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और समृद्धि के पक्ष में है। यूपी के जिन क्षेत्रों में आगे के चरणों का चुनाव है, वहां के लोगों को भी मैं कहूंगा- इसी तरह एकजुट रहना है, अपना वोट जाति के नाम पर, संप्रदाय के नाम पर बंटने नहीं देना है।

साथियों,

विकास के लिए, रोजगार के लिए, निवेश के लिए, शांति का माहौल सबसे पहली शर्त होती है। इसलिए, उत्तर प्रदेश आज कानून के राज को सबसे बड़ी प्राथमिकता दे रहा है। यूपी का सामान्य से सामान्य मतदाता भी समझ रहा है कि दंगाइयों और गुंडे-बदमाशों के इलाज की दवा सिर्फ और सिर्फ भाजपा के सरकार के ही पास है। मुझे याद है, एक समय था जब गुजरात में भी ऐसी ही स्थिति थी। कांग्रेस के बरसों के शासन ने वहां ऐसी स्थितियां बना दी थीं कि ना व्यापार-कारोबार फलता-फूलता था, ना लोग सुरक्षित महसूस करते थे। और हर साल वहां दंगे होते थे। हर बार खबरे आती थी कि यहां दंगा हो गया, तो वहां दंगा हो गया। वहां हर वर्ष जैसे जगन्नाथ पुरी में जगन्नथ जी की रथयात्रा निकलती है न ऐसे ही अहमदाबाद में भी जगन्नाथ जी की यात्रा निकलती है, और अनुभव ये है कि पिछले बीजेपी सरकार आने से पहले 10 साल में से 7 साल ऐसे जाते थे कि कोई न कोई दंगा हो जाता था, इतना ही नहीं पतंग उड़ाने में भी दंगा, रास्ते में आने जाने पर दंगा, यानि हर साल हर छोटी-मोदी बात पर दंगे होते थे। और दंगों की वजह से कर्फ्यू लगता था, संपत्ति जलती थी, हत्याएं होना तो आम बात हो गई थी। लोगों को मोहल्ले के मोहल्ले खाली करके भागना पड़ता था। और इसके बाद खाली मकानों को सस्ते में खरीद कर उस इलाके की पहचान ही बदल दी जाती थी। इसी प्रकार के दुष्चक्र में गुजरात लंबे अरसे तक फंसा हुआ था। गुजरात के लोगों ने जब बीजेपी को मौका दिया, तो स्थितियां बदलनी शुरू हो गई। हमने सबसे बड़ी प्राथमिकता कानून व्यवस्था को दी, कानून के राज को दी।

इसी का नतीजा है कि पिछले दो दशकों से गुजरात में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ है। अब वहां हर वर्ग, हर संप्रदाय के लोग अपने विकास, गुजरात के विकास, देश के विकास में जुटे हुए हैं। और आप देखिए, सभी के प्रयासों से गुजरात भी किस तरह विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। कन्नौज के मेरे भाइयों-बहनों आप मुझे बताइये, हमें शांति चाहिए कि नहीं चाहिए ? कानून का राज चाहिए कि नहीं चाहिए ? दंगों से मुक्ति चाहिए कि नहीं चाहिए ? गुंडागर्दी बंद होनी चाहिए कि नहीं चाहिए ? माफियाशाही बंद होनी चाहिए कि नहीं चाहिए ? बेटियों को सम्मान की जिंदगी मिलनी चाहिए कि नहीं चाहिए ? व्यापारी सुख शांति से व्यापार करे ऐसी स्थिति चाहिए कि नहीं चाहिए ? ये काम भाजपा सरकार ही कर सकती है योगी जी की सरकार ही कर सकती है। उधर साथियों देखिए, जगह कम है लोग ज्यादा है, आप वहीं रहिए प्लीज आगे आने की कोशिश मत कीजिए, आप वहीं रहीये आपका प्यार मेरे सर आंखों पर। ये आपका प्यार ही है जो मुझे दिन-रात काम करने के लिए दौड़ाता रहता है। आपके प्यार को सौ-सौ सलाम। भाइयों-बहनों, उत्तर प्रदेश में भी हमें कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी है।योगी जी के नेतृत्व में यूपी ने जिस प्रकार दंगों को रोका है, हमें उसे स्थाई स्वरूप देना है। दोबारा ऐसी हरकतों को उत्तर प्रदेश में पनपने नहीं देना है।

भाइयों और बहनों,

सिर्फ विकास की बातें करने से विश्वास नहीं आता, लेकिन जब नीयत भी साफ होती है मेहनत दिन-रात होती है, जनता की सुख-दुख की चिंता होती है तभी सामान्य मानवी के मन में विश्वास पैदा होता है। लेकिन, जिनकी राजनीतिक बुनियाद अपराध, गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार पर टिकी हो, वो कभी सुधर नहीं सकते।आप देखिए, कैसे-कैसे उम्मीदवारों को इन लोगों ने टिकट दिए हैं। इनके ज्यादातर उम्मीदवार हिस्ट्रीशीटर है। और उनकी तो हालत ऐसी है, कई लोग तो जेल से ही चुनाव लड़ रहे हैं।

साथियों,

लोकतंत्र की व्याख्या करते हुए पूरे विश्व में एक बात कही जाती है, लंबे अरसे से कही जाती है और कहा जाता है… “Government-of-the-people-by-the-people-for-the-people” यानि जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन। हमारे देश की घोर परिवारवादी पार्टियों ने, लोकतंत्र की इस भावना को ही बदल दिया। इन लोगों का मंत्र क्या बन गया है। ये लोग कहते हैं, उनका सूत्र क्या है of-the-people-by-the-people-for-the-people नहीं, उनका सूत्र है परिवार का, परिवार के लिए, परिवार द्वारा शासन। “Government-of-the family-by-the-family-for-the-family” इसलिए यूपी के लोगों ने फिर ठान लिया है कि उन्हें सिर्फ अपने परिवार के स्वार्थ के लिए काम करने वाले लोग अब उत्तर प्रदेश में नहीं चाहिए। यूपी के लोगों को तो पब्लिक की सेवा करने वाले लोग चाहिए, परिवार की सेवा करने वाले नहीं। इन घोर परिवारवादियों की कुनीति का एक गवाह कन्नौज का इत्र उद्योग भी है। इन्होंने अपने भ्रष्टाचार से, अपने काले कारनामों से यहां के इत्र कारोबार को बदनाम किया। इन्होंने इत्र को करप्शन से जोड़ दिया। हम इस इत्र को ग्लोबल ब्रांड बनाने में जुटे हैं। दुनिया में कन्नौज के इत्र का डंका बजे इसके लिए हम काम कर रहे हैं।

साथियों,

पहले की सरकारों के समय, उत्तर प्रदेश के जिलों की पहचान, यहां जिलों की पहचान कैसे होती थी? फलाना जिला- फलाना माफिया, वो जिला- वो माफिया, उधर वाला जिला- वो मदमाश। जिलों की पहचान ऐसे ही माफियाओं से होती थी। पांच वर्ष के भीतर-भीतर अब योगी जी की सरकार के समय यूपी के जिलों की पहचान वहां के उत्पादों से हो रही है। वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट के तहत योगी जी की सरकार ने औरैया के देसी घी को भी अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने में मदद की है। इटावा के बुनकरों द्वारा बनाए उत्पाद, देश विदेश में धूम मचाएं इसके लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यूपी में ऐसे उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय मार्केट तक पहुंचाने के लिए भी काम हो रहा है। अब तो बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे भी जल्द तैयार होने वाला है। इसका भी लाभ औरैया और इटावा सहित इस पूरे क्षेत्र को होने वाला है।

साथियों,

गांव, गरीब, किसान, पशुपालक, सभी का जीवन बेहतर बनाने के लिए भी हम दिनरात काम कर रहे हैं। हमारे यहां पशुधन का क्या महत्व है, ये हमारे गोपालकों से बेहतर कौन बता सकता है। बीते वर्षों में हमारी सरकार ने गोबरधन योजना की शुरुआत की, राष्ट्रीय कामधेनु आयोग का गठन किया, डेयरी सेक्टर के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए हज़ारों करोड़ रुपए का विशेष फंड बनाया है। हमने पहली बार, पशुपालकों को, मछली पालन से जुड़े लोगों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा हमारी सरकार ने दी है।

साथियों,

कोरोना की वजह से आज देश में लोगों के टीकाकरण की बहुत चर्चा हो रही है। कोरोना के कारण सबको पता है कि टीकाकरण कितना बड़ा काम होता है, कितनी मेहनत होती है, कितने काम होते हैं, सबको पता है, लेकिन एक बात बताता हूं जिसकी चर्चा बहुत नहीं हो रही है, लोगों के ध्यान में भी नहीं आता है क्यों ? बात ऐसी भी है जैसे कोरोना के समय वैक्सीन की चर्चा होती है, हमने हिंदुस्तान में आजादी के बाद पहली बार सबसे बड़ा एक काम चलाया है वो पशुधन की सुरक्षा के लिए पशुओं के लिए पशुओं के लिए बहुत बड़ा टीकाकरण अभियान चलाया आजादी के बाद पशुओं के टीकाकरण का ऐसा अभियान देश में पहली बार शुरू हुआ है। इस पर सरकार 13 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर रही है। पशुओं को Foot and Mouth Disease, मुंहपका और खुरपका बीमारी से निजात दिलाना हमारी प्राथमिकता है।

भाइयों और बहनों,

जो काम इनको छोटे लगते हैं, हमें उनमें गरीब की तरक्की का समाधान दिखता है। हमें उसकी चिंता थी जिसके पास या तो ज़मीन है ही नहीं, या फिर बहुत कम है। हमें उन बहनों की चिंता थी जिनके लिए पशुपालन आत्मनिर्भरता का, आत्मसम्मान का माध्यम है। पशुपालन में जुटे एक बड़े समाज को, जिसे पिछड़ा कहा गया, हमें उनकी समृद्धि, उनकी गरिमा की चिंता थी। हमें उन पशुओं की चिंता थी, जिनको बेसहारा, बेआसरा छोड़ दिया जाता है। इसलिए दूध के साथ-साथ, और जो दूध नहीं दे पाते है उन पशुओं के गोबर से भी धन कमाने के माध्यम आज हम विकसित कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में गोबर से बायोगैस बनाने के, जैविक खाद बनाने वाले, बहुत बड़े-बड़े प्लांट्स लगाए जा रहे हैं।

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साथियों,

हमारी सरकार, नैचुरल फार्मिंग को भी बढ़ावा दे रही है। ये खेती का वो तरीका है, जिसमें खेती पर खर्च ना के बराबर होता है, लेकिन उत्पादन कहीं ज्यादा होता है। इसमें भी हमारे पशुधन की भूमिका है। देश के अनेक राज्यों के किसान, आज केमिकल फ्री खेती कर रहे हैं, नैचुरल फार्मिंग कर रहे हैं और पहले से ज्यादा पैसा कमा रहे हैं। जो पशु कुछ लोगों को बोझ लगते हैं, वही पशु, अब किसानों की कमाई बढ़ाने में मदद करने जा रहे हैं। अभी कुछ दिन पहले मेरी काशी के ऐसे कई किसानों से मुलाकात हुई थी। नैचुरल फार्मिंग का ये तरीका, उत्तर प्रदेश के छोटे किसानों के लिए भी बहुत लाभकारी है। उनके अनुभव सुनकर के मुझे इतना आनंद आया, उन्होंने खेती में क्रांति का काम किया है।

भाइयों और बहनों,

कन्नौज को विशेष ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार एक और अभियान चला रही है। मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए भाजपा सरकार ने 500 करोड़ रुपए का एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है। इससे यहां के लोगों को दो तरह के लाभ मिलेंगे। एक तो मधुमक्खियों से फूलों की खेती को मदद मिलेगी, यानि एक तरह से इत्र उद्योग को सीधी मदद मिलेगी। दूसरा ये कि यहां अलग-अलग फूलों के रस से बने, अलग अलग तरह के सुगंध और स्वाद वाले शहद का उत्पादन संभव होगा और बढ़ेगा जिसका दुनिया के बाजार में बहुत बड़ी आवश्यकता है। इस तरह के आधुनिक प्रयासों की उम्मीद आप परिवारवादियों से कभी नहीं कर सकते।

भाइयों और बहनों,

भाजपा सरकार वर्तमान के साथ ही भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए भी निरंतर काम कर रही हैं। चाहे हर गरीब को पक्का घर देना हो, हर गांव को तेज़ इंटरनेट की सुविधा देनी हो, हर गांव को पक्की सड़कों से जोड़ना हो, हाईवे-एक्सप्रेसवे बनाने हो, गांव के पास ही अच्छे भंडार, आधुनिक कोल्ड स्टोरेज, कृषि आधारित उद्योग लगाने हो, इसके लिए हमारी सरकार ने बड़ी-बड़ी योजनाएं बनाई हैं। 44 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की केन-बेतवा लिंक परियोजना इसी का एक उदाहरण है। ये जो घोर परिवारवादी बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रहे हैं, वो इन्हीं योजनाओं के भरोसे बोलना पड़ रहा है। लेकिन भाइयों और बहनों, केंद्र की इन योजनाओं का लाभ उत्तर प्रदेश को तभी मिल सकता है जब यहां बेहतर तालमेल वाली सरकार हो। गरीबों को घर देने में यूपी अव्वल राज्यों में रहा, क्योंकि यहां डबल इंजन सरकार है। गरीब बहनों को मुफ्त गैस कनेक्शन तेज़ी से मिले, क्योंकि यहां डबल इंजन की सरकार है। लाखों किसान परिवारों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिला, क्योंकि यहां डबल इंजन सरकार है। आयुष्मान भारत योजना के तहत लाखों मरीज़ों को मुफ्त इलाज मिला, क्यों ? क्योंकि यहां डबल इंजन सरकार है।दशकों पुरानी सिंचाई परियोजनाएं पूरी हुईं, हर घर जल योजना पर काम हुआ, क्यों ? क्योंकि यहां पर डबल इंजन की सरकार है।

साथियों

ये डबल इंजन की सरकार ही है जिसके कारण 100 साल के सबसे बड़े संकट का, कोरोना महामारी का यूपी ने डटकर मुकाबला किया। ऐसा संकट अगर उनके जमाने में आय होता, 2017 से पहले आता होता तो, उत्तर प्रदेश को बहुत बड़ी समस्या हो जाती। इनका काम तब भी बोलता था कि ये यूपी के लोगों के विरोधी हैं, इनका काम अब भी यही बोलता है। इन्होंने मेड इन इंडिया टीकों को भाजपा का टीका बताकर गरीबों के जीवन से बहुत बड़ा खिलवाड़ करने की कोशिश की।हमारी सरकार पूरी शक्ति से जुटी है कि यूपी के एक-एक गरीब को कोरोना की वैक्सीन लग जाए। लेकिन इन लोगों ने इस अभियान में भी बाधा डालने की कोशिश की। आप अंदाजा लगाइए साथियों, अगर गरीबों को कोरोना वैक्सीन नहीं लगी होती तो इस लहर में मेरे सभी भाइयों-बहनों का, मेरे उत्तर प्रदेश के नागरिकों का क्या हाल हुआ होता। हमारी सरकार ने गरीब का सामान्य मानवी का जीवन बचाने के लिए, सबको मुफ्त वैक्सीन लगवाई और आज भी लगवा रही है। मैं कन्नौज के, इटावा, औरैया, फर्रुखाबाद और यूपी के हर व्यापारी, कारोबारी, हर दुकानदार से एक बात विशेष तौर पर कहूंगा। एक बार सोचिए कि अगर हमारी सरकार ने तेजी से सबको वैक्सीन नहीं लगवाई होती, अगर हम ये काम नहीं करवाए होते तो क्या होता? आज देश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, बाजारों में हलचल बढ़ रही है। क्या बिना वैक्सीन ऐसा संभव होता और अगर एक-दो साल और निकालने पड़ते तो न जाने मेरे कितने परिवार तबाह हो जाते तबाह हो जाते।

साथियों,

याद रखिए, मोदी विरोध में जो गरीब के जीवन से खेल सकते हैं, वो लोग क्या-क्या नहीं कर सकते। डबल इंजन की सरकार है, इसलिए आज यूपी शत-प्रतिशत टीकाकरण की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है। साथियों, इस कोरोना काल ने एक और बात का ऐहसास सबको कराया है। इन घोर परिवारवादियों ने, उनके जो राशन माफिया अगर इस कोरोना काल में होते, तो यूपी के गरीबों को जो मुफ्त राशन पहुंच रहा है वह पहुंचता क्या? ये राशन मिलता क्या, गरीबों का चूल्हा जलता क्या? मेरे प्यारे भाइयों बहनों,यूपी के गरीबों, दलितों, पिछड़ों को तो भुखमरी का सामना करना पड़ता। दिल्ली से जो राशन हम भेजते उसको इनका माफिया अपने गोदामों में बंद कर देता, ब्लैक में बाजारों में बिकवाता। ये डबल इंजन की सरकार है, जो महामारी के इस समय में बीते कई महीनों से गरीब को मुफ्त अनाज दे रही है। और यूपी के लोग, यूपी के गरीब याद रखें, इन घोर परिवारवादियों की आंखों में ये गरीब कल्याण की योजनाएं उनको खटक रही हैं। पहला मौका मिलते ही, वो इन योजनाओं को उसका लाभ गरीबों तक पहुंचना बंद करा देंगे। और उनकी ये माफिया कंपनी कटकी कंपनी सबकुछ तबाह कर देगी।

भाइयों और बहनों,

डबल इंजन सरकार कैसे काम करती है, वो शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी दिखता है। यहां स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में गरीबों को, हमारी बहनों को, लखनऊ-दिल्ली तक जाना पड़ता था। लेकिन अब मेडिकल कॉलेज, सुपरस्पेशियेलिटी हॉस्पिटल, पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट्स यहीं बन रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सुविधाएं तो बेहतर होंगी ही, यहां के युवाओं के लिए डॉक्टरी और पैरामेडिकल के क्षेत्र में जाने का एक अवसर भी बढ़ेगा। और जितनी मात्रा में हम मेडिकल कॉलेज बना रहे हैं, इतना ही नहीं अब हमारे मेडिकल कॉलेज में अपनी भाषा में अपनी मातृभाषा में हमारे नवजवान पढ़ सकेंगे। हमारी बेटियां पढ़ सकेंगी। इसका मतलब यह हुआ कि जो अंग्रेजी नहीं पढ़ा है जिसको गरीबी के कारण अंग्रेजी की शिक्षा नहीं मिली है वो परिवार का बच्चा भी अगर उसमें दमखम है तो हिंदी में पढ़कर बी वो डॉक्टर बनेगा। और अपनी जिंदगी भी बनाएगा।

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भाइयों और बहनों,

सबका साथ, सबका विकास, क्या होता है, ये युवाओं के लिए हमारी नीति में भी दिखता है। भारतीय जनता पार्टी ने सामान्य वर्ग के गरीबों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण की सुविधा दी है। ये भी हमारे दलित वर्ग हमारे ट्राइवल वर्ग के एससी एसटी के भाई-बहनों, या पिछड़ा वर्ग के जो भाई-बहन है उनके आरक्षण का अधिकार को जरा भी तकलीफ दिए बिना उसको बरकरार रखते हुए रखने का काम हमने किया है जो सालों से मांग हो रही थी, इनको परवाह नहीं थी।

साथियों,

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के हमारे लोकसभा और विधानसभाओं के साथियों के लिए आरक्षण को 10 साल तक और बढ़ाने का भी काम भाजपा की सरकार ने किया है। ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देने के लिए तीन-तीन दशक से मांग हो रही थी, इतनी सरकारें आईं, यहां के सपा वाले भी उस सरकार में भागीदार थे लेकिन उन्होंने कभी ओबीसी को यह अधिकार नहीं दिया ये मोदी की सरकार आने के बाद हमने ओबीसी कमीशन को संविधान अधिकार देकर के ओबीसी की मांग को हमने पूरा किया है। देशभर में केंद्र सरकार के कोटे में जो मेडिकल सीटें होती हैं, उनमें ओबीसी को आरक्षण देने का फैसला भी भाजपा सरकार का एक बड़ा निर्णय़ है। कुछ दिन पहले सरकार ने एक और बड़ा फैसला किया है। अब प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को भी अपनी आधी सीटें, 50 प्रतिशत सीटों की फीस सरकारी मेडिकल कॉलेजों के बराबर रखनी होगी। इसका बहुत बड़ा लाभ, हमारे मध्यम वर्ग के परिवार, हमारे निम्न वर्ग मध्य वर्ग के परिवार, जो बेचारे ज्यादा खर्च नहीं कर सकते हैं वे भी अपने बच्चों को डॉक्टर बना सकते हैं। भाइयों-बहनों गरीब, दलित, पिछड़े वर्ग के लोग भी, ये जो हमने सारी व्यवस्थाएं बदली हैं। आराम से वे अपने सपने पूरे कर सकते हैं।

साथियों,

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की वजह से भी उत्तर प्रदेश के युवाओं को बहुत मदद मिलने वाली है। हिंदी मीडियम में, जैसे मैंने कहा, ये पढ़ने वाले छात्रों को भी, गांव और गरीब परिवारों के युवाओं को भी डॉक्टर बनना है, इंजीनियर बनना है, टेक्निकल एजुकेशन लेना है वो आराम से ले पाएगा, उनको जो मुश्किल आती थी वो अब जाएगी, और इसलिए भाइयों-बहनों हमने पढ़ाई में ये सारे विकल्प हमने आपको दिया हुआ है।

साथियों,

जब आप मतदान केंद्रों पर जाकर हमें अपना स्नेह, अपना आशीर्वाद देते हैं, तब हमें नए संकल्पों की शक्ति मिलती है। सुविधा, सुरक्षा और सुअवसर देने के इस अभियान को हमें जारी रखना है। यूपी को दंगामुक्त रखने के अभियान को हमें सशक्त करना है। हर बूथ को जगाना है। हर बूथ से लोगों को मतदान केंद्र पर लाना है। इस बार सिर्फ भाजपा को जिताना नहीं हैं, बल्कि बड़े मार्जिन से जिताना है। पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ के जिताना है। आप लोग ये काम करेंगे? घर-घर जाएंगे? एक-एक बूथ से अपने आस-पास के लोगों को निकालेंगे? ज्यादा से ज्यादा मतदान करवाएंगे? भाइयों-बहनों, ये चुनाव का समय है मतदान के दिन पहले मतदान फिर जलपान, इसी अपेक्षा के साथ आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद। इस चुनाव में जो उम्मीदवार है उनसे मेरा आग्रह है कि आगे आ जाइए। सारे उम्मीदवार आकर के खड़े हो जाएं। और हमारे उप-मुख्यमंत्री जी भी आ जाएं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद, हमारे साथ बोलिए… भारत माता की… दोनों हाथ ऊपर कर पूरी ताकत से बोलिए भारत माता की… भारत माता की…

भारत माता की… बहुत-बहुत धन्यवाद

  • krishangopal sharma Bjp February 15, 2025

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  • krishangopal sharma Bjp February 15, 2025

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  • krishangopal sharma Bjp February 15, 2025

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  • krishangopal sharma Bjp February 15, 2025

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  • krishangopal sharma Bjp February 15, 2025

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  • MLA Devyani Pharande February 17, 2024

    जय श्रीराम
  • n.d.mori August 21, 2022

    Namo Namo Namo Namo Namo Namo Namo 🌹
  • G.shankar Srivastav August 03, 2022

    नमस्ते
  • Laxman singh Rana July 02, 2022

    नमो नमो 🇮🇳🌷🌹
  • Laxman singh Rana July 02, 2022

    नमो नमो 🇮🇳🌷
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78ನೇ ಸ್ವಾತಂತ್ರ್ಯ ದಿನಾಚರಣೆಯ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಕೆಂಪು ಕೋಟೆಯಿಂದ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಮಾಡಿದ ಭಾಷಣದ ಕನ್ನಡ ಅನುವಾದ

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"Huge opportunity": Japan delegation meets PM Modi, expressing their eagerness to invest in India
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Today, India is not just a Nation of Dreams but also a Nation That Delivers: PM Modi in TV9 Summit
March 28, 2025
QuoteToday, the world's eyes are on India: PM
QuoteIndia's youth is rapidly becoming skilled and driving innovation forward: PM
Quote"India First" has become the mantra of India's foreign policy: PM
QuoteToday, India is not just participating in the world order but also contributing to shaping and securing the future: PM
QuoteIndia has given Priority to humanity over monopoly: PM
QuoteToday, India is not just a Nation of Dreams but also a Nation That Delivers: PM

श्रीमान रामेश्वर गारु जी, रामू जी, बरुन दास जी, TV9 की पूरी टीम, मैं आपके नेटवर्क के सभी दर्शकों का, यहां उपस्थित सभी महानुभावों का अभिनंदन करता हूं, इस समिट के लिए बधाई देता हूं।

TV9 नेटवर्क का विशाल रीजनल ऑडियंस है। और अब तो TV9 का एक ग्लोबल ऑडियंस भी तैयार हो रहा है। इस समिट में अनेक देशों से इंडियन डायस्पोरा के लोग विशेष तौर पर लाइव जुड़े हुए हैं। कई देशों के लोगों को मैं यहां से देख भी रहा हूं, वे लोग वहां से वेव कर रहे हैं, हो सकता है, मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं। मैं यहां नीचे स्क्रीन पर हिंदुस्तान के अनेक शहरों में बैठे हुए सब दर्शकों को भी उतने ही उत्साह, उमंग से देख रहा हूं, मेरी तरफ से उनका भी स्वागत है।

साथियों,

आज विश्व की दृष्टि भारत पर है, हमारे देश पर है। दुनिया में आप किसी भी देश में जाएं, वहां के लोग भारत को लेकर एक नई जिज्ञासा से भरे हुए हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो देश 70 साल में ग्यारहवें नंबर की इकोनॉमी बना, वो महज 7-8 साल में पांचवे नंबर की इकोनॉमी बन गया? अभी IMF के नए आंकड़े सामने आए हैं। वो आंकड़े कहते हैं कि भारत, दुनिया की एकमात्र मेजर इकोनॉमी है, जिसने 10 वर्षों में अपने GDP को डबल किया है। बीते दशक में भारत ने दो लाख करोड़ डॉलर, अपनी इकोनॉमी में जोड़े हैं। GDP का डबल होना सिर्फ आंकड़ों का बदलना मात्र नहीं है। इसका impact देखिए, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, और ये 25 करोड़ लोग एक नियो मिडिल क्लास का हिस्सा बने हैं। ये नियो मिडिल क्लास, एक प्रकार से नई ज़िंदगी शुरु कर रहा है। ये नए सपनों के साथ आगे बढ़ रहा है, हमारी इकोनॉमी में कंट्रीब्यूट कर रहा है, और उसको वाइब्रेंट बना रहा है। आज दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे भारत में है। ये युवा, तेज़ी से स्किल्ड हो रहा है, इनोवेशन को गति दे रहा है। और इन सबके बीच, भारत की फॉरेन पॉलिसी का मंत्र बन गया है- India First, एक जमाने में भारत की पॉलिसी थी, सबसे समान रूप से दूरी बनाकर चलो, Equi-Distance की पॉलिसी, आज के भारत की पॉलिसी है, सबके समान रूप से करीब होकर चलो, Equi-Closeness की पॉलिसी। दुनिया के देश भारत की ओपिनियन को, भारत के इनोवेशन को, भारत के एफर्ट्स को, जैसा महत्व आज दे रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। आज दुनिया की नजर भारत पर है, आज दुनिया जानना चाहती है, What India Thinks Today.

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साथियों,

भारत आज, वर्ल्ड ऑर्डर में सिर्फ पार्टिसिपेट ही नहीं कर रहा, बल्कि फ्यूचर को शेप और सेक्योर करने में योगदान दे रहा है। दुनिया ने ये कोरोना काल में अच्छे से अनुभव किया है। दुनिया को लगता था कि हर भारतीय तक वैक्सीन पहुंचने में ही, कई-कई साल लग जाएंगे। लेकिन भारत ने हर आशंका को गलत साबित किया। हमने अपनी वैक्सीन बनाई, हमने अपने नागरिकों का तेज़ी से वैक्सीनेशन कराया, और दुनिया के 150 से अधिक देशों तक दवाएं और वैक्सीन्स भी पहुंचाईं। आज दुनिया, और जब दुनिया संकट में थी, तब भारत की ये भावना दुनिया के कोने-कोने तक पहुंची कि हमारे संस्कार क्या हैं, हमारा तौर-तरीका क्या है।

साथियों,

अतीत में दुनिया ने देखा है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब भी कोई वैश्विक संगठन बना, उसमें कुछ देशों की ही मोनोपोली रही। भारत ने मोनोपोली नहीं बल्कि मानवता को सर्वोपरि रखा। भारत ने, 21वीं सदी के ग्लोबल इंस्टीट्यूशन्स के गठन का रास्ता बनाया, और हमने ये ध्यान रखा कि सबकी भागीदारी हो, सबका योगदान हो। जैसे प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती है। देश कोई भी हो, इन आपदाओं से इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान होता है। आज ही म्यांमार में जो भूकंप आया है, आप टीवी पर देखें तो बहुत बड़ी-बड़ी इमारतें ध्वस्त हो रही हैं, ब्रिज टूट रहे हैं। और इसलिए भारत ने Coalition for Disaster Resilient Infrastructure - CDRI नाम से एक वैश्विक नया संगठन बनाने की पहल की। ये सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार करने का संकल्प है। भारत का प्रयास है, प्राकृतिक आपदा से, पुल, सड़कें, बिल्डिंग्स, पावर ग्रिड, ऐसा हर इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रहे, सुरक्षित निर्माण हो।

साथियों,

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हर देश का मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। ऐसी ही एक चुनौती है, हमारे एनर्जी रिसोर्सेस की। इसलिए पूरी दुनिया की चिंता करते हुए भारत ने International Solar Alliance (ISA) का समाधान दिया है। ताकि छोटे से छोटा देश भी सस्टेनबल एनर्जी का लाभ उठा सके। इससे क्लाइमेट पर तो पॉजिटिव असर होगा ही, ये ग्लोबल साउथ के देशों की एनर्जी नीड्स को भी सिक्योर करेगा। और आप सबको ये जानकर गर्व होगा कि भारत के इस प्रयास के साथ, आज दुनिया के सौ से अधिक देश जुड़ चुके हैं।

साथियों,

बीते कुछ समय से दुनिया, ग्लोबल ट्रेड में असंतुलन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी challenges का सामना कर रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भी भारत ने दुनिया के साथ मिलकर नए प्रयास शुरु किए हैं। India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC), ऐसा ही एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। ये प्रोजेक्ट, कॉमर्स और कनेक्टिविटी के माध्यम से एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को जोड़ेगा। इससे आर्थिक संभावनाएं तो बढ़ेंगी ही, दुनिया को अल्टरनेटिव ट्रेड रूट्स भी मिलेंगे। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन भी और मजबूत होगी।

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साथियों,

ग्लोबल सिस्टम्स को, अधिक पार्टिसिपेटिव, अधिक डेमोक्रेटिक बनाने के लिए भी भारत ने अनेक कदम उठाए हैं। और यहीं, यहीं पर ही भारत मंडपम में जी-20 समिट हुई थी। उसमें अफ्रीकन यूनियन को जी-20 का परमानेंट मेंबर बनाया गया है। ये बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम था। इसकी मांग लंबे समय से हो रही थी, जो भारत की प्रेसीडेंसी में पूरी हुई। आज ग्लोबल डिसीजन मेकिंग इंस्टीट्यूशन्स में भारत, ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज़ बन रहा है। International Yoga Day, WHO का ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिए ग्लोबल फ्रेमवर्क, ऐसे कितने ही क्षेत्रों में भारत के प्रयासों ने नए वर्ल्ड ऑर्डर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, और ये तो अभी शुरूआत है, ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत का सामर्थ्य नई ऊंचाई की तरफ बढ़ रहा है।

साथियों,

21वीं सदी के 25 साल बीत चुके हैं। इन 25 सालों में 11 साल हमारी सरकार ने देश की सेवा की है। और जब हम What India Thinks Today उससे जुड़ा सवाल उठाते हैं, तो हमें ये भी देखना होगा कि Past में क्या सवाल थे, क्या जवाब थे। इससे TV9 के विशाल दर्शक समूह को भी अंदाजा होगा कि कैसे हम, निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक, Aspirations से Achievement तक, Desperation से Development तक पहुंचे हैं। आप याद करिए, एक दशक पहले, गांव में जब टॉयलेट का सवाल आता था, तो माताओं-बहनों के पास रात ढलने के बाद और भोर होने से पहले का ही जवाब होता था। आज उसी सवाल का जवाब स्वच्छ भारत मिशन से मिलता है। 2013 में जब कोई इलाज की बात करता था, तो महंगे इलाज की चर्चा होती थी। आज उसी सवाल का समाधान आयुष्मान भारत में नजर आता है। 2013 में किसी गरीब की रसोई की बात होती थी, तो धुएं की तस्वीर सामने आती थी। आज उसी समस्या का समाधान उज्ज्वला योजना में दिखता है। 2013 में महिलाओं से बैंक खाते के बारे में पूछा जाता था, तो वो चुप्पी साध लेती थीं। आज जनधन योजना के कारण, 30 करोड़ से ज्यादा बहनों का अपना बैंक अकाउंट है। 2013 में पीने के पानी के लिए कुएं और तालाबों तक जाने की मजबूरी थी। आज उसी मजबूरी का हल हर घर नल से जल योजना में मिल रहा है। यानि सिर्फ दशक नहीं बदला, बल्कि लोगों की ज़िंदगी बदली है। और दुनिया भी इस बात को नोट कर रही है, भारत के डेवलपमेंट मॉडल को स्वीकार रही है। आज भारत सिर्फ Nation of Dreams नहीं, बल्कि Nation That Delivers भी है।

साथियों,

जब कोई देश, अपने नागरिकों की सुविधा और समय को महत्व देता है, तब उस देश का समय भी बदलता है। यही आज हम भारत में अनुभव कर रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। पहले पासपोर्ट बनवाना कितना बड़ा काम था, ये आप जानते हैं। लंबी वेटिंग, बहुत सारे कॉम्प्लेक्स डॉक्यूमेंटेशन का प्रोसेस, अक्सर राज्यों की राजधानी में ही पासपोर्ट केंद्र होते थे, छोटे शहरों के लोगों को पासपोर्ट बनवाना होता था, तो वो एक-दो दिन कहीं ठहरने का इंतजाम करके चलते थे, अब वो हालात पूरी तरह बदल गया है, एक आंकड़े पर आप ध्यान दीजिए, पहले देश में सिर्फ 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, आज इनकी संख्या 550 से ज्यादा हो गई है। पहले पासपोर्ट बनवाने में, और मैं 2013 के पहले की बात कर रहा हूं, मैं पिछले शताब्दी की बात नहीं कर रहा हूं, पासपोर्ट बनवाने में जो वेटिंग टाइम 50 दिन तक होता था, वो अब 5-6 दिन तक सिमट गया है।

साथियों,

ऐसा ही ट्रांसफॉर्मेशन हमने बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी देखा है। हमारे देश में 50-60 साल पहले बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, ये कहकर कि इससे लोगों को बैंकिंग सुविधा सुलभ होगी। इस दावे की सच्चाई हम जानते हैं। हालत ये थी कि लाखों गांवों में बैंकिंग की कोई सुविधा ही नहीं थी। हमने इस स्थिति को भी बदला है। ऑनलाइन बैंकिंग तो हर घर में पहुंचाई है, आज देश के हर 5 किलोमीटर के दायरे में कोई न कोई बैंकिंग टच प्वाइंट जरूर है। और हमने सिर्फ बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का ही दायरा नहीं बढ़ाया, बल्कि बैंकिंग सिस्टम को भी मजबूत किया। आज बैंकों का NPA बहुत कम हो गया है। आज बैंकों का प्रॉफिट, एक लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए के नए रिकॉर्ड को पार कर चुका है। और इतना ही नहीं, जिन लोगों ने जनता को लूटा है, उनको भी अब लूटा हुआ धन लौटाना पड़ रहा है। जिस ED को दिन-रात गालियां दी जा रही है, ED ने 22 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक वसूले हैं। ये पैसा, कानूनी तरीके से उन पीड़ितों तक वापिस पहुंचाया जा रहा है, जिनसे ये पैसा लूटा गया था।

साथियों,

Efficiency से गवर्नमेंट Effective होती है। कम समय में ज्यादा काम हो, कम रिसोर्सेज़ में अधिक काम हो, फिजूलखर्ची ना हो, रेड टेप के बजाय रेड कार्पेट पर बल हो, जब कोई सरकार ये करती है, तो समझिए कि वो देश के संसाधनों को रिस्पेक्ट दे रही है। और पिछले 11 साल से ये हमारी सरकार की बड़ी प्राथमिकता रहा है। मैं कुछ उदाहरणों के साथ अपनी बात बताऊंगा।

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साथियों,

अतीत में हमने देखा है कि सरकारें कैसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिनिस्ट्रीज में accommodate करने की कोशिश करती थीं। लेकिन हमारी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही कई मंत्रालयों का विलय कर दिया। आप सोचिए, Urban Development अलग मंत्रालय था और Housing and Urban Poverty Alleviation अलग मंत्रालय था, हमने दोनों को मर्ज करके Housing and Urban Affairs मंत्रालय बना दिया। इसी तरह, मिनिस्ट्री ऑफ ओवरसीज़ अफेयर्स अलग था, विदेश मंत्रालय अलग था, हमने इन दोनों को भी एक साथ जोड़ दिया, पहले जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय अलग था, और पेयजल मंत्रालय अलग था, हमने इन्हें भी जोड़कर जलशक्ति मंत्रालय बना दिया। हमने राजनीतिक मजबूरी के बजाय, देश की priorities और देश के resources को आगे रखा।

साथियों,

हमारी सरकार ने रूल्स और रेगुलेशन्स को भी कम किया, उन्हें आसान बनाया। करीब 1500 ऐसे कानून थे, जो समय के साथ अपना महत्व खो चुके थे। उनको हमारी सरकार ने खत्म किया। करीब 40 हज़ार, compliances को हटाया गया। ऐसे कदमों से दो फायदे हुए, एक तो जनता को harassment से मुक्ति मिली, और दूसरा, सरकारी मशीनरी की एनर्जी भी बची। एक और Example GST का है। 30 से ज्यादा टैक्सेज़ को मिलाकर एक टैक्स बना दिया गया है। इसको process के, documentation के हिसाब से देखें तो कितनी बड़ी बचत हुई है।

साथियों,

सरकारी खरीद में पहले कितनी फिजूलखर्ची होती थी, कितना करप्शन होता था, ये मीडिया के आप लोग आए दिन रिपोर्ट करते थे। हमने, GeM यानि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म बनाया। अब सरकारी डिपार्टमेंट, इस प्लेटफॉर्म पर अपनी जरूरतें बताते हैं, इसी पर वेंडर बोली लगाते हैं और फिर ऑर्डर दिया जाता है। इसके कारण, भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है, और सरकार को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत भी हुई है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर- DBT की जो व्यवस्था भारत ने बनाई है, उसकी तो दुनिया में चर्चा है। DBT की वजह से टैक्स पेयर्स के 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा, गलत हाथों में जाने से बचे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा फर्ज़ी लाभार्थी, जिनका जन्म भी नहीं हुआ था, जो सरकारी योजनाओं का फायदा ले रहे थे, ऐसे फर्जी नामों को भी हमने कागजों से हटाया है।

साथियों,

 

हमारी सरकार टैक्स की पाई-पाई का ईमानदारी से उपयोग करती है, और टैक्सपेयर का भी सम्मान करती है, सरकार ने टैक्स सिस्टम को टैक्सपेयर फ्रेंडली बनाया है। आज ITR फाइलिंग का प्रोसेस पहले से कहीं ज्यादा सरल और तेज़ है। पहले सीए की मदद के बिना, ITR फाइल करना मुश्किल होता था। आज आप कुछ ही समय के भीतर खुद ही ऑनलाइन ITR फाइल कर पा रहे हैं। और रिटर्न फाइल करने के कुछ ही दिनों में रिफंड आपके अकाउंट में भी आ जाता है। फेसलेस असेसमेंट स्कीम भी टैक्सपेयर्स को परेशानियों से बचा रही है। गवर्नेंस में efficiency से जुड़े ऐसे अनेक रिफॉर्म्स ने दुनिया को एक नया गवर्नेंस मॉडल दिया है।

साथियों,

पिछले 10-11 साल में भारत हर सेक्टर में बदला है, हर क्षेत्र में आगे बढ़ा है। और एक बड़ा बदलाव सोच का आया है। आज़ादी के बाद के अनेक दशकों तक, भारत में ऐसी सोच को बढ़ावा दिया गया, जिसमें सिर्फ विदेशी को ही बेहतर माना गया। दुकान में भी कुछ खरीदने जाओ, तो दुकानदार के पहले बोल यही होते थे – भाई साहब लीजिए ना, ये तो इंपोर्टेड है ! आज स्थिति बदल गई है। आज लोग सामने से पूछते हैं- भाई, मेड इन इंडिया है या नहीं है?

साथियों,

आज हम भारत की मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस का एक नया रूप देख रहे हैं। अभी 3-4 दिन पहले ही एक न्यूज आई है कि भारत ने अपनी पहली MRI मशीन बना ली है। अब सोचिए, इतने दशकों तक हमारे यहां स्वदेशी MRI मशीन ही नहीं थी। अब मेड इन इंडिया MRI मशीन होगी तो जांच की कीमत भी बहुत कम हो जाएगी।

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साथियों,

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान ने, देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक नई ऊर्जा दी है। पहले दुनिया भारत को ग्लोबल मार्केट कहती थी, आज वही दुनिया, भारत को एक बड़े Manufacturing Hub के रूप में देख रही है। ये सक्सेस कितनी बड़ी है, इसके उदाहरण आपको हर सेक्टर में मिलेंगे। जैसे हमारी मोबाइल फोन इंडस्ट्री है। 2014-15 में हमारा एक्सपोर्ट, वन बिलियन डॉलर तक भी नहीं था। लेकिन एक दशक में, हम ट्वेंटी बिलियन डॉलर के फिगर से भी आगे निकल चुके हैं। आज भारत ग्लोबल टेलिकॉम और नेटवर्किंग इंडस्ट्री का एक पावर सेंटर बनता जा रहा है। Automotive Sector की Success से भी आप अच्छी तरह परिचित हैं। इससे जुड़े Components के एक्सपोर्ट में भी भारत एक नई पहचान बना रहा है। पहले हम बहुत बड़ी मात्रा में मोटर-साइकल पार्ट्स इंपोर्ट करते थे। लेकिन आज भारत में बने पार्ट्स UAE और जर्मनी जैसे अनेक देशों तक पहुंच रहे हैं। सोलर एनर्जी सेक्टर ने भी सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। हमारे सोलर सेल्स, सोलर मॉड्यूल का इंपोर्ट कम हो रहा है और एक्सपोर्ट्स 23 गुना तक बढ़ गए हैं। बीते एक दशक में हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट भी 21 गुना बढ़ा है। ये सारी अचीवमेंट्स, देश की मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी की ताकत को दिखाती है। ये दिखाती है कि भारत में कैसे हर सेक्टर में नई जॉब्स भी क्रिएट हो रही हैं।

साथियों,

TV9 की इस समिट में, विस्तार से चर्चा होगी, अनेक विषयों पर मंथन होगा। आज हम जो भी सोचेंगे, जिस भी विजन पर आगे बढ़ेंगे, वो हमारे आने वाले कल को, देश के भविष्य को डिजाइन करेगा। पिछली शताब्दी के इसी दशक में, भारत ने एक नई ऊर्जा के साथ आजादी के लिए नई यात्रा शुरू की थी। और हमने 1947 में आजादी हासिल करके भी दिखाई। अब इस दशक में हम विकसित भारत के लक्ष्य के लिए चल रहे हैं। और हमें 2047 तक विकसित भारत का सपना जरूर पूरा करना है। और जैसा मैंने लाल किले से कहा है, इसमें सबका प्रयास आवश्यक है। इस समिट का आयोजन कर, TV9 ने भी अपनी तरफ से एक positive initiative लिया है। एक बार फिर आप सभी को इस समिट की सफलता के लिए मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं हैं।

मैं TV9 को विशेष रूप से बधाई दूंगा, क्योंकि पहले भी मीडिया हाउस समिट करते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर एक छोटे से फाइव स्टार होटल के कमरे में, वो समिट होती थी और बोलने वाले भी वही, सुनने वाले भी वही, कमरा भी वही। TV9 ने इस परंपरा को तोड़ा और ये जो मॉडल प्लेस किया है, 2 साल के भीतर-भीतर देख लेना, सभी मीडिया हाउस को यही करना पड़ेगा। यानी TV9 Thinks Today वो बाकियों के लिए रास्ता खोल देगा। मैं इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आपकी पूरी टीम को, और सबसे बड़ी खुशी की बात है कि आपने इस इवेंट को एक मीडिया हाउस की भलाई के लिए नहीं, देश की भलाई के लिए आपने उसकी रचना की। 50,000 से ज्यादा नौजवानों के साथ एक मिशन मोड में बातचीत करना, उनको जोड़ना, उनको मिशन के साथ जोड़ना और उसमें से जो बच्चे सिलेक्ट होकर के आए, उनकी आगे की ट्रेनिंग की चिंता करना, ये अपने आप में बहुत अद्भुत काम है। मैं आपको बहुत बधाई देता हूं। जिन नौजवानों से मुझे यहां फोटो निकलवाने का मौका मिला है, मुझे भी खुशी हुई कि देश के होनहार लोगों के साथ, मैं अपनी फोटो निकलवा पाया। मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं दोस्तों कि आपके साथ मेरी फोटो आज निकली है। और मुझे पक्का विश्वास है कि सारी युवा पीढ़ी, जो मुझे दिख रही है, 2047 में जब देश विकसित भारत बनेगा, सबसे ज्यादा बेनिफिशियरी आप लोग हैं, क्योंकि आप उम्र के उस पड़ाव पर होंगे, जब भारत विकसित होगा, आपके लिए मौज ही मौज है। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।