QuoteCongress is certain to be defeated in Karnataka for its mis-governance: PM Modi
QuoteEvery section of society is unhappy with the Congress government in Karnataka: PM Narendra Modi
QuoteBy focussing on farmers and rural India, the NDA government is taking several steps for the transformation of the agriculture sector: PM
QuoteKarnataka: PM Modi questions Congress’ misrule for 48 years and urged people to compare it to the 48 months of the NDA Government
QuoteMore than Mr. Siddaramaiah, it is 'Seedha Rupaiyya' that drives the working of the Government in Karnataka, says PM Modi
QuoteCongress' is a 10 per cent government in Karnataka. No work is done here without any commission: PM Narendra Modi

सागरो पादी यल्ली। सेदिनूं कर्नाटक दा अन्न दात महाजनरे निबज्ञ नरी गनू नन्ना नमस्कार करूं। संत बसश्वेश्वर, संत कनक दास, पूज्य मादार चेन्नय स्वामी जी इवरिगे नन प्रणाम करूं। वीर महिले ओवने के ओवोम मतकरिनाय रेत नायक शांतवरी गोपाल गोड़ महनि अरके नमस्कार करूं।

मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी प्रदेश के अध्यक्ष और हमारे वरिष्ठ नेता श्रीमान येदुरप्पा जी, श्री अनंत कुमार जी, श्री सदानंद गौड़ा जी,  जगदीश शेट्टार जी, यहां के सांसद श्रीमान सिद्धेश्वर जी, हमारे मित्र भाई ईश्वरप्पा जी, गोविंद करजोल जी, श्रीमान रमेश जी, शोभा जी, रामलू जी, एन रविकुमार, अरविंद निंबाबड़े, श्रीमान शंकर गौड़ पाटिल जी, प्रहलाद जोशी जी, ईश्वरचंद जी, श्रीमान उदासी जी, श्री योगी स्वामी जी, करूणाकर रेड्डी जी, एमपी रेणुकाचार्य, बीपी हरीश, अरुण कुमार, एसबी रामचंद्र, यशवंत राव यादव, एसे रविन्द्र नायक, श्रीमान बासव राव नायक, श्रीमान मजार विजुरप्पा नायक और विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे किसान भाइयो और बहनों।

आज मुझे कर्नाटक के किसान भाइयो और बहनो का आशीर्वाद पाने का सौभाग्य मिला लेकिन साथ-साथ मेरे लिए ये भी खुशी की बात है कि हमारे वरिष्ठ नेता श्रीमान येदुरप्पा जी के जन्मदिन पर रूबरू आकरके, उनका सम्मान करने का उन्हें बधाई देने का भी अवसर मिला। मैं सबसे पहले कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी के सभी नेताओं को, छोटे-मोटे सभी कार्यकर्ता को आज ह्रदय से बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूं। क्योंकि आपने रेयता बंधु यदुरप्पा, ये जो अभियान का आरंभ किया है, ये अपने आप में यह अनूठा अभियान है। कर्नाटक की मिट्टी से जुड़ा हुआ, कर्नाटक की धरती से जुड़ा हुआ,  हर किसान भाई अपनी भावनाओं का दान एक मुष्टीभर चावल उसके साथ अपनी आशा, अपेक्षाओं और भावनाओं का प्रतिबिंब उस दान की प्रक्रिया में है। और जब जनशक्ति की ताकत जुड़ती है तो कैसा रूप होती है। जब गुजरात में मैं मुख्यमंत्री था, सरदार वल्लभ भाई पटेल का विश्व का सबसे ऊंचा स्टेच्यू बनाने का संकल्प किया। ये किसान पुत्र थे, किसान की गोद में पले-बढ़े थे। महात्मा गांधी के साथ किसानों के लिए सर्वाधिक आंदोलन करने वाले नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल थे। उनका दुनिया में सबसे बड़ा स्टेच्यू, अगर कोई अमेरिका जाए तो स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी देखता है। ये सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मारक, स्टेच्यू ऑफ यूनिटी, एकता की मूर्ति और उसकी ऊंचाई स्टेच्यू की लिबर्टी से भी डबल है। लेकिन उसकी एक विशेषता है। हिन्दुस्तान के 6 लाख गांव, हर गांव के किसानों से प्रार्थना की गई थी। आपने अपने खेत में जोतने के लिए उपयोग किया हुआ जो औजार है, उसका लोहा हमें दान में दीजिए। हर गांव से ऐसा एक लोहे का एक टुकड़ा हमने दान में लिया। उसको आकरके मेल्ट किया गया। और उसका उपयोग ये सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्टेच्यू बनाने के लिए हो रहा है। वैसे ही आपका मुष्टीभर चावल ये आपका रेयता बंधु येदुरप्पा अभियान, जिस प्रकार से लोहे का टुकड़ा दुनिया का सबसे बड़ा सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मारक बनाने जा रहा है। ये आपके मुट्ठीभर चावल एक नए कर्नाटक का निर्माण करके रहेगा। कर्नाटक के गांवों का भाग्य बदलेगा। किसान का भाग्य बदलेगा।

|

और इसलिए भाइयो बहनो।

येदुरप्पा के जन्मदिन पर सिर्फ बधाई देकर न रूकते हुए, आने वाले एक मार्च से 15 मार्च तक गांव-गांव, घर-घर जाकरके, और मैं चाहूंगा। मेरे किसान भाइयो से आग्रह करूंगा। मेरे गांव के भाइयो बहनों से आग्रह करूंगा कि अब सिर्फ भाजपा के कार्यकर्ता ही इस कार्यक्रम को न चलाए। हर किसान इस कार्यक्रम को अपना माने। हर किसान अपने भाग्य के निर्माण के लिए मुष्ठीभर चावल के काम में जुट जाएं। आप देखिए कैसा बदलाव आता है।

भाइयो बहनो।

अब ये कर्नाटक सरकार का जाना तो तय है। ये अपने पापों के भार से ऐसी परिस्थिति में पहुंच गई है कि वो कर्नाटक की नेतागिरी, कर्नाटक को तो क्या कांग्रेस को भी बचा नहीं पाएगी। और पूरे देश में आप देखिए। देश की जनता ने जहां मौका मिला है, सबसे पहला काम किया है कांग्रेस को निकालो, कांग्रेस को निकालो, कांग्रेस को निकालो। क्योंकि देश को पता चल गया है कि हमारी समस्याओं की जड़ ये कांग्रेसी कल्चर है। ये कांग्रेसी कल्चर होता है तो हर प्रकार की चीजें तुरंत हमारे सामने आती है। कोई भी अच्छी चीज नजर नहीं आती है। कर्नाटक में यहां की जनता जनार्धन इस सरकार की विदाई के लिए इतनी उत्साहित है। और मैं पिछले दो-तीन जगह जाने का अवसर मिला है। मैंने जनता-जनार्धन का जो मिजाज देखा है, इस सरकार के प्रति जो गुस्सा देखा है। हर व्यक्ति इस सरकार से परेशान है।

भाइयो बहनो।

ऐसी नफरत पैदा हुई हो। शायद ऐसी सरकारें बहुत कम होती है, जैसी नफरत आज इस कांग्रेस की सरकार के प्रति है।

भाइयो बहनो।

भारतीय जनता पार्टी इस मत के लिए, कई दशकों से काम कर रही है कि अगर भारत का भाग्य बदलना है तो भारत के गांवों का भाग्य बदलना होगा। भारत के किसानों का भाग्य बदलना होगा। इसलिए आपने देखा होगा कि दिल्ली में जब से आपने हमें सेवा करने का मौका दिया है। हमारी हर योजना में किसानों का कल्याण, कृषि का विकास, गांव में बदलाव इन मूलभूत बातों को लेकरके हम सरकार में एक के बाद एक निर्णय करते चले जा रहे हैं। हमारे देश में किसान फसल ज्यादा हो तो भी परेशान, फसल कम हो तो भी परेशान, प्राकृतिक आपदा आ जाए तो भी परेशान।

|

भाइयो बहनो।  

ऊपर वाले की मेहरबानी पर हमारा किसान जिंदगी गुजारा करता है। क्या कोई उसे सुरक्षा दी जा सकती है। मैंने कर्नाटक में ही आकर के एक बात कही थी। हमारी सरकार ने फसल बीमा योजना शुरू की। और किसानों को, ये ऐसी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनाई कि जिसके कारण अगर किसान की फसल तैयार होने के बाद, खेत से बाजार जाने के बीच में ही, अगर कोई बहुत बड़ी आपदा आ गई और फसल बर्बाद हो गई तो उसको भी बीमा देने की योजना बनाई। पानी भर जाए तो उसको बीमा, अरे किसान खेत में बुआई कर दे, सोइंग कर दे। और सोचता है कि 15 जून तक बारिश आएगी, 20 जून को आएगी, जुलाई आएगी, अगस्त में आएगी लेकिन बारिश नहीं आई। तो भी भारत सरकार ने ऐसा बीमा दिया है तो भी किसान को मिनिमम प्राइस मिल जाएगा ताकि उसका साल बर्बाद न हो जाए।

भाइयो बहनो।

आज किसानों को जो फसल के बीमा का पैसा मिल रहा है। अकेले कर्नाटक में 11 हजार करोड़ रुपया। अगर भारत सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का पैकेज घोषित कर दिया होता तो यहां पर वाहवाही होती। मोदी तो सबसे बड़ा किसान का नेता है। ऐसा बोल दिया जाता। सारे देश में भी 10 हजार करोड़ का पैकेज घोषित कर देता तो न जाने कितनी वाहवाही होती। लेकिन हम ऐसी योजना लाए कि अकेले कर्नाटक में 11 हजार करोड़ रुपए का भुगतान मेरे किसान भाइयो बहनों को हुआ है।

भाइयो बहनो।

2022, आजादी के 75 साल हो रहे हैं। हमारा सपना है, किसानों की आय दोगुनी करना, किसानों की आय डबल करना। पांच साल में किसानों की आय डबल करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। और इसके लिए सबसे पहले जमीन की तबीयत कैसी है, जमीन की सेहत कैसी है। हम जिस भूमि पर खेती करते हैं, जो हमारा खेत है, उसकी हेल्थ कैसी है। और इसलिए सबसे पहले स्वॉयल हेल्थ कार्ड का काम शुरू किया है। उसका परिणाम ये आया है कि किसान को पता चलने लगा है कि इसकी जमीन किस पैदावर के काम आएगी। कौन सी फसल के लिए जमीन बेकार है। कौन सा खाद लगेगा, किस प्रकार का बीज लगेगा। कौन सी दवाई की जरूरत है या नहीं है। इसका परिणाम ये आया है कि किसानों का जो फालतू खर्चा होता था बंद हो गया। सही उपज पैदा होने लगी। पहले की तुलना में ज्यादा होने लगी। और ये प्रयोग तीन-चार सीजन वो लगातार करेगा तो उसकी जमीन में भी बहुत बड़ा बदलाव आएगा, जमीन ज्यादा उपजाऊ हो जाएगी। मेरे किसान को सीधा फायदा मिलेगा।

हमने एमएसपी, बड़ी चर्चाएं हो रही थी। मैं कांग्रेस के नेताओं से पूछ रहा हूं - एक परिवार 48 साल तक, उसने देश पर शासन किया औऱ एक चाय वाला जिसने 48 महीने शासन किया। अमीर घरानों में पैदा हुए लोग 48 साल शासन किया, किसानों की चिंता नहीं कर पाए थे। हमने 48 महीने के भीतर-भीतर एमएसपी के अंदर जो खर्चा होगा, जो लागत होगी, डेढ़ गुणा एमएसपी कर दिया गया। और आने वाले दिनों में किसान को अपनी लागत का डेढ़ गुणा मिलेगा। और ऐसा एश्योरेंस 48 साल तक राज करने तक एक परिवार ने राज करने के बाद भी देश को नहीं दिया। 48 महीने में हमने दे दिया है मेरे किसान भाइयो बहनो। इतना ही नहीं। हमने कोल्ड स्टोरेज, वेयर हाउसिंग, eNAM, ई-मंडी, अनेक ऐसी योजनाएं, बीज से बाजार तक, किसान की फसल का पूरा दाम मिले, उसका वैल्यू एडिशन हो, वो जो पैदा करता है ...। यहां पर कॉटन, कभी ये मैनचेस्टर कहा जाता था। लेकिन ऐसे लोगों का नेतृत्व आया कि सारी मिलें बंद हो गई। लोग बेरोजगार हो गए। ये हाल करके रख दिया है। और इसलिए कॉटन पैदा करने वाला क्या करेगा। यहां पर मूंगफली। वर्ना पहले ऐसे माना जाता था कि मूंगफली का तेल यानि गुजरात में, ये क्षेत्र था जहां पर मुंगफली की तेल की मिलें हुआ करती थी। ये सब बर्बाद करके छोड़ दिया क्योंकि इनको किसानों की कोई परवाह नहीं थी।

और इसलिए भाइयो बहनो।

हमने किसानों की मूल्य वृद्धि करने के लिए। हमने एक जो फसल का मूल्य वृद्धि करना है। अंतर्राष्ट्रीय वैल्यू एडिशन का एक बहुत बड़ा इवेंट किया। दुनियाभर के इंवेस्टर को बुलाया। नई टेक्नोलॉजी ले आए। और हमारा किसान जो पैदा करता है, वो फसल सब्जी हो, फल हो, फूल हो, वैल्यू एडीशन हो। अगर दूध बेचने जाता है तो कम पैसा मिलता है लेकिन दूध में से मक्खन निकालकर के बेचता है, तो ज्यादा पैसा मिलता है। घी बनाकरके बेचता है तो और पैसा मिलता है। अगर उसका वैल्यू एडीशन करता है तो ज्यादा कमाई होती है। कच्चा आम बेचता है तो कम पैसा मिलता है। पका हुआ आम बेचता है तो ज्यादा पैसा मिलता है। कच्चा आम का अचार बनाकर बेचेगा तो और पैसा मिलेगा। हम चाहते हैं कि किसान जो पैदा करता है उसको मूल्य वृद्धि होनी चाहिए। हमने एक इस बार बजट के अंदर एक बहुत बड़ा अभियान छेड़ा है। और ऑपरेशन ग्रीन्स के नाम से, मिशन ग्रीन्स के नाम से जिस प्रकार से व्हाइट रेवल्यूशन हुआ। और दुग्ध क्रांति का काम हमारे देश में हुआ। हमारे यहां जो सब्जी पैदा करने वाले किसान हैं। ज्यादा समय टीक नहीं पाती है, खराब हो जाती है। किसान बर्बाद हो जाता है। और कभी ज्यादा सब्जी हो जाए तो भी दाम नहीं मिलता है। और इसलिए हमने मिशन ग्रीन्स के नाम से योजना बनाई है। हजारो करोड़ रुपए लगाएंगे।

और TOP – टमाटर ऑनियन और पोटेटो। यहां पर आलू का हाल क्या है। आपके ऐसे यहां मुख्यमंत्री हैं। कुछ लोगों को मत है कि कर्नाटक में सिद्धारमैया की सरकार चल रही है लेकिन हकीकत ये है कि यहां सीधा रुपैया की सरकार है। ये जो सीधा रुपैया है, हर चीज में सीधा रुपैया होता है, तभी काम काम होता है। आप मुझे बताइए। क्या सीधा रुपैया वाला कल्चर चाहिए क्या आपको ...। सीधा रुपैया वाला कल्चर चाहिए क्या ...। ये सीधा रुपैया वाला कल्चर चाहिए क्या ...। ये सीधा रुपैया वाले कारनामे चाहिए क्या ...। सीधा रुपैया से ही इंसान को न्याय मिलेगा क्या ...।

और इसलिए भाइयो बहनो।

ये सीधा रुपैया अब जाना चाहिए। एक ईमानदारी की सरकार आनी चाहिए। और इसलिए अब कर्नाटक को सीधा रुपैया का कारोबार नहीं, कर्नाटक को लोगों की आवाज सुनने वाली, लोगों का काम करने वाली सरकार चाहिए।

और इसलिए भाइयो बहनो।

आप हैरान होंगे। भारत सरकार ने इतना धन इस सरकार को दिया है लेकिन जमीन पर पैसा नजर नहीं आता है। और इसलिए यहां कारोबार, हर मंत्री, हर दफ्तर, थाने में जाओ, कहीं भी जाओ, सिर्फ सीधा रुपैया चलता है। और कुछ नहीं चलता है।

भाइयो बहनो।

|

भारत सरकार ने कर्नाटक को कितनी मदद की है। जब कांग्रेस की सरकार थी दिल्ली में तब कर्नाटक को फाइनेंस कमीशन के तहत 73 हजार करोड़ रुपया मिलता था। हमारी सरकार बनने के बाद, एनडीए बीजेपी की सरकार। आज कर्नाटक को फाइनेंस कमीशन से 2 लाख करोड़ रुपए मिलता है जी। कहां कांग्रेस का दिया 73 हजार, कहां भाजपा की सरकार से आया 2 लाख करोड़ रुपया।

लेकिन भाइयो बहनो।

कर्नाटक में ऐसी सरकार है कि वो पैसों को खर्च भी नहीं कर पा रही है। कई ऐसी योजनाएं आज भारत सरकार के द्वारा कर्नाटक में चल रही है, कार्यरत है। कुछ योजनाएं पूर्णता के निकट पहुंची है। करीब-करीब 21 हजार 400 करोड़ रुपए के प्रोजेट ऑल रेडी आज कार्यरत है। दामनगिरी-हावेरी नेशनल हाईवे उसकी छह लाइन बनाने की दिशा में 830 करोड़ रुपए की लागत से उस काम को हम आगे बढ़ा रहे हैं। दामनगिरी-चित्रदुर्गा नेशनल हाइवे 1000 करोड़ रुपए की लागत से, उस नेशनल हाइवे का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। हमारे दिल में ये साफ है कि कर्नाटक के लोग अच्छे हैं। कर्नाटक के लोग परिश्रमी है। कर्नाटक एक ऐसा राज्य है, यहां के लोग ऐसे हैं, जो देश के लिए कुछ न कुछ करने वाले लोग हैं। देश को कुछ न कुछ देने वाले लोग हैं। अगर उसका कर्नाटक आगे बढ़ेगा, अगर कर्नाटक की ताकत बढ़ेगी तो देश की ताकत भी आगे बढ़ेगी। और देश भी आगे बढ़ेगा।

और इसलिए भाइयो बहनो।

हम लगातार यहां की सरकार को, हर विषय में खुले हाथ से मदद करते रहे। लेकिन जब तक 10 परसेंट वाला मामला बनता नहीं, यहां काम चलता नहीं। पहले 10 परसेंट, 12 परसेंट, 15 परसेंट, उसी की चर्चा  होती रहती है, हर गली में चर्चा होती है। कोई कर्नाटक का नागरिक नहीं होगा, जिसको इस कारोबार का पता नहीं है। फिर भी, अब खाद्यान्न खरीदी। मेरे किसान भाइयो बहनो। भारत सरकार ने उनसे खाद्यान्न खरीदने के लिए पैसे दिए। उनका काम था किसानों से ये खाद्यान्न खरीदना। उनके दाम गिरते हैं तो उसको रोकना। पैसा भारत सरकार ने दिया। लेकिन आप हैरान हो जाएंगे। अभी भी 50-55 करोड़ रुपया बिना खर्च किए वैसे ही पड़ा हुआ है। अगर किसानों के प्रति ये संवेदनशील सरकार होती तो ये रुपए खजाने में पड़े नहीं होते।

भाइयो बहनो।

हमारे देश के बच्चों का स्वास्थ्य। हमारी माताओं बहनों का स्वास्थ्य। और इसलिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सरकार अनेक योजनाएं चला रही है। अगर हमारे देश का बचपन तंदुरुस्त होगा तो मेरा भारत भी तंदुरुस्त बनेगा। हमारी देश की माताएं-बहनें वे अगर तंदुरुस्त होंगी तो उनसे पैदा होने वाली संतान भी तंदुरुस्त होंगे। उसके लिए उनको पैसे दिए। आप हैरान हो जाएंगे। अरे कोई बीमार होता है, और उसके पास पैसा नहीं होता है तो पड़ोसी जाकरके पैसा देता है। लेकिन यहां एक ऐसी सरकार बनी है। भारत सरकार के पैसे देने के बाद भी 500 करोड़ रुपया अभी भी बिना खर्च किए ऐसे ही पड़ा हुआ है। जो सरकार में केंद्र के द्वारा सामान्य मानवी के तबीयत के लिए, स्वास्थ्य के लिए, हेल्थ के लिए पैसा दिया गया। उसको भी खर्च करने का सामर्थ्य नहीं है। उसके दिल में आपके प्रति संवेदना होगी कि नहीं होगी। ये समझना मुश्किल नहीं है।

भाइयो बहनो।

शिक्षा। हर कोई कहता है, गरीब से गरीब से पूछो। आप एक ड्राइवर से पूछिए। आप मजदूर से पूछिए। आप एक ऑटो रिक्शा वाले से पूछिए। उसको पूछिए आपकी इच्छा क्या है। वो कहेगा बच्चे को अच्छी शिक्षा देना है, बच्चों को पढ़ाना है। उसकी इच्छा रहती है। भारत सरकार सर्व शिक्षा अभियान, माध्यमिक शिक्षा में सुधार। 400 करोड़ रुपया अभी भी बिना खर्च को पड़ा हुआ है। ऐसी नाकामी सरकार, नाकाम करने वाली सरकार।

भाइयो बहनो।

टेक्निकल एजुकेशन। आज टेक्निकल एजुकेशन का महत्व बढ़ता चला जा रहा है। करीब-करीब 80-90 करोड़ रुपया, वो बिना खर्च किए पड़ा हुआ है। हमारे देश में, आज गुजरात देखिए। मैं गुजरात में मुख्यमंत्री था। वहां पर एक नर्मदा नदी, तापी नदी। बाकी सूखा। 10 साल में 7 साल में सूखा पड़ता। हम रोते नहीं बैठते थे। हमने सरकार के पाई-पाई उपयोग करके वर्षा के पानी को बचाने का अभियान चलाया। छोटे-छोटे डैम बनाए। छोटे-छोटे बांध बनाए। चेकडैम बनाए। पानी को रोका। पानी जमीन में गया। और करीब 12-13 मीटर पानी का लेबल ऊपर आया। और पानी बचाने के कारण, गुजरात जो सूखा प्रदेश माना जाता, एग्रीकल्चर में कभी नाम नहीं होता था। उसने लगातार 10 प्रतिशत एग्रीकल्चर ग्रोथ करके एक बड़ा विक्रम स्थापित किया। लेकिन ये सरकार ऐसी है यहां कर्नाटक में। वाटर शेड के पैसे दिए। कर्नाटक को अकाल के दिन थे। अकाल में पानी की जरूरत थी। किसानों को पानी चाहिए लेकिन इन्होंने वाटर शैड के कार्यक्रम में भी ...। अभी तक करीब-करीब 100 करोड़ रुपया, उसको भी खर्च नहीं कर पाए।

भाइयो बहनो।

स्मार्ट सिटी। कर्नाटक की अर्बन बॉडी का आज देश में नाम है। बैंगलुरू, मैसूर को कौन नहीं जानता है। उसके भी 300 करोड़ रुपया बिना खर्च किए पड़ा हुआ है। स्मार्ट सिटी के लिए दिया हुआ 300 करोड़ रुपया वैसे के वैसे पड़ा हुआ है। स्वच्छ भारत मिशन। हमने उनको पैसे दिये। स्वच्छता से स्वास्थ्य के लिए गारंटी बनती है। वर्ल्ड बैंक कहती है, यूएनओ कहता है, डब्ल्यूएचओ कहता है। स्वास्थ्य को दुनिया में महात्मय दिया है। लेकिन यहां पर उसके प्रति भी उदासीनता। भारत सरकार के दिये हुए 75 करोड़ रुपया, ये भी आज वैसा का वैसा पड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना। 88 करोड़ ...। मैं एक लंबी लिस्ट गिना सकता हूं, लंबी लिस्ट गिना सकता हूं।

लेकिन भाइयो बहनो।

मुझे कहना यही है। कि ये ऐसी सरकार है जिसको जनता के लिए नहीं ...। वह दो ही काम करती है एक - दिल्ली के आकाओं को खुश करना और दूसरा - यहां पर राजी-नाराजी में लोग रहते है, हर एक को टुकड़ी फेंकते रहना। यही काम करता है। और लोगों को ऐसे ही, एमएलए को पकड़ के रखो। गाड़ी चलाओ।

भाइयो बहनो।

आप कल्पना कर सकते हैं। इस देश में किसी सरकार के सीटिंग मंत्री के घरों में कभी रेड नहीं पड़ी। इनके यहां डायरियां मिलती है, पैसे मिलते हैं। उनके नेताओं के घर से नोटों के बंडल के बंडल मिलते हैं। ये कहां से आए भाई। ये पैसे कहां से आते हैं। ये किसके पैसे हैं। ये सीधा रुपैया नहीं है तो क्या है जी। ये सीधा रुपैया नहीं है तो क्या है ...। जिस प्रकार की बर्बादी कर्नाटक में हुई है, ऐसी सरकार को एक मिनट नहीं चलने देना चाहिए। एक मिनट ...।

और भाइयो बहनो।
दिल्ली में आपका भला हो, इसके लिए जीजान से जुटी हुई सरकार है। अगर कर्नाटक में भी आप हमारी योजनाओं को आगे बढ़ाने वाली सरकार बना दें। आज मैं विश्वास दिलाता हूं। जो काम ये इतने वर्षों में नहीं कर पाए हैं। हम आने वाले पांच वर्ष में करके दिखा देंगे।

और इसलिए भाइयो बहनो।

आज येदुरप्पा जी के जन्मदिन पर, आज एक किसान नेता के जन्मदिन पर, आज इतने बड़े किसान समूह के बीच में धान का अभियान चला रहे हैं, चावल देने का अभियान चला रहे हैं, एक संकल्प का अभियान चला रहे हैं। हम कर्नाटक को भी समृद्ध बनाएंगे, सुखी बनाएंगे। हम कर्नाटक के किसान को सुखी करेंगे, समृद्ध करेंगे। हम कर्नाटक की माताओं-बहनों को सुरक्षित करेंगे। हम कर्नाटक के नौजवानों के सपनों को पूरा करेंगे। हम कर्नाटक के मध्यम वर्गीय की आशा अपेक्षाओं को पूर्ण करने में कोई कमी नहीं रखेंगे। हम गरीबों के कल्याण के लिए जीएंगे। इन सपनों के साथ, इन सपनों के साथ हम भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाएं। येदुरप्पा के नेतृत्व में हम आगे बढ़े। कर्नाटक को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।

भाइयो बहनों।

इतनी बड़ी विशाल संख्या में आए। मुझे आशीर्वाद दिये। इसलिए मैं बहुत-बहुत आभारी। ईबारी बीजेपी सरकार। ईबारी बीजेपी की सरकार। बन्नी बीजेपी गेल्ली सी। बन्नी बीजेपी ...। बन्नी बीजेपी ...। समस्त कनन्ड़ गिरीगे, अनन्त नमस्कार करूं। भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय। बहुत-बहुत धन्यवाद।



Explore More
78ನೇ ಸ್ವಾತಂತ್ರ್ಯ ದಿನಾಚರಣೆಯ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಕೆಂಪು ಕೋಟೆಯಿಂದ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಮಾಡಿದ ಭಾಷಣದ ಕನ್ನಡ ಅನುವಾದ

ಜನಪ್ರಿಯ ಭಾಷಣಗಳು

78ನೇ ಸ್ವಾತಂತ್ರ್ಯ ದಿನಾಚರಣೆಯ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಕೆಂಪು ಕೋಟೆಯಿಂದ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಮಾಡಿದ ಭಾಷಣದ ಕನ್ನಡ ಅನುವಾದ

Media Coverage

"Huge opportunity": Japan delegation meets PM Modi, expressing their eagerness to invest in India
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Today, India is not just a Nation of Dreams but also a Nation That Delivers: PM Modi in TV9 Summit
March 28, 2025
QuoteToday, the world's eyes are on India: PM
QuoteIndia's youth is rapidly becoming skilled and driving innovation forward: PM
Quote"India First" has become the mantra of India's foreign policy: PM
QuoteToday, India is not just participating in the world order but also contributing to shaping and securing the future: PM
QuoteIndia has given Priority to humanity over monopoly: PM
QuoteToday, India is not just a Nation of Dreams but also a Nation That Delivers: PM

श्रीमान रामेश्वर गारु जी, रामू जी, बरुन दास जी, TV9 की पूरी टीम, मैं आपके नेटवर्क के सभी दर्शकों का, यहां उपस्थित सभी महानुभावों का अभिनंदन करता हूं, इस समिट के लिए बधाई देता हूं।

TV9 नेटवर्क का विशाल रीजनल ऑडियंस है। और अब तो TV9 का एक ग्लोबल ऑडियंस भी तैयार हो रहा है। इस समिट में अनेक देशों से इंडियन डायस्पोरा के लोग विशेष तौर पर लाइव जुड़े हुए हैं। कई देशों के लोगों को मैं यहां से देख भी रहा हूं, वे लोग वहां से वेव कर रहे हैं, हो सकता है, मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं। मैं यहां नीचे स्क्रीन पर हिंदुस्तान के अनेक शहरों में बैठे हुए सब दर्शकों को भी उतने ही उत्साह, उमंग से देख रहा हूं, मेरी तरफ से उनका भी स्वागत है।

साथियों,

आज विश्व की दृष्टि भारत पर है, हमारे देश पर है। दुनिया में आप किसी भी देश में जाएं, वहां के लोग भारत को लेकर एक नई जिज्ञासा से भरे हुए हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो देश 70 साल में ग्यारहवें नंबर की इकोनॉमी बना, वो महज 7-8 साल में पांचवे नंबर की इकोनॉमी बन गया? अभी IMF के नए आंकड़े सामने आए हैं। वो आंकड़े कहते हैं कि भारत, दुनिया की एकमात्र मेजर इकोनॉमी है, जिसने 10 वर्षों में अपने GDP को डबल किया है। बीते दशक में भारत ने दो लाख करोड़ डॉलर, अपनी इकोनॉमी में जोड़े हैं। GDP का डबल होना सिर्फ आंकड़ों का बदलना मात्र नहीं है। इसका impact देखिए, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, और ये 25 करोड़ लोग एक नियो मिडिल क्लास का हिस्सा बने हैं। ये नियो मिडिल क्लास, एक प्रकार से नई ज़िंदगी शुरु कर रहा है। ये नए सपनों के साथ आगे बढ़ रहा है, हमारी इकोनॉमी में कंट्रीब्यूट कर रहा है, और उसको वाइब्रेंट बना रहा है। आज दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे भारत में है। ये युवा, तेज़ी से स्किल्ड हो रहा है, इनोवेशन को गति दे रहा है। और इन सबके बीच, भारत की फॉरेन पॉलिसी का मंत्र बन गया है- India First, एक जमाने में भारत की पॉलिसी थी, सबसे समान रूप से दूरी बनाकर चलो, Equi-Distance की पॉलिसी, आज के भारत की पॉलिसी है, सबके समान रूप से करीब होकर चलो, Equi-Closeness की पॉलिसी। दुनिया के देश भारत की ओपिनियन को, भारत के इनोवेशन को, भारत के एफर्ट्स को, जैसा महत्व आज दे रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। आज दुनिया की नजर भारत पर है, आज दुनिया जानना चाहती है, What India Thinks Today.

|

साथियों,

भारत आज, वर्ल्ड ऑर्डर में सिर्फ पार्टिसिपेट ही नहीं कर रहा, बल्कि फ्यूचर को शेप और सेक्योर करने में योगदान दे रहा है। दुनिया ने ये कोरोना काल में अच्छे से अनुभव किया है। दुनिया को लगता था कि हर भारतीय तक वैक्सीन पहुंचने में ही, कई-कई साल लग जाएंगे। लेकिन भारत ने हर आशंका को गलत साबित किया। हमने अपनी वैक्सीन बनाई, हमने अपने नागरिकों का तेज़ी से वैक्सीनेशन कराया, और दुनिया के 150 से अधिक देशों तक दवाएं और वैक्सीन्स भी पहुंचाईं। आज दुनिया, और जब दुनिया संकट में थी, तब भारत की ये भावना दुनिया के कोने-कोने तक पहुंची कि हमारे संस्कार क्या हैं, हमारा तौर-तरीका क्या है।

साथियों,

अतीत में दुनिया ने देखा है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब भी कोई वैश्विक संगठन बना, उसमें कुछ देशों की ही मोनोपोली रही। भारत ने मोनोपोली नहीं बल्कि मानवता को सर्वोपरि रखा। भारत ने, 21वीं सदी के ग्लोबल इंस्टीट्यूशन्स के गठन का रास्ता बनाया, और हमने ये ध्यान रखा कि सबकी भागीदारी हो, सबका योगदान हो। जैसे प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती है। देश कोई भी हो, इन आपदाओं से इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान होता है। आज ही म्यांमार में जो भूकंप आया है, आप टीवी पर देखें तो बहुत बड़ी-बड़ी इमारतें ध्वस्त हो रही हैं, ब्रिज टूट रहे हैं। और इसलिए भारत ने Coalition for Disaster Resilient Infrastructure - CDRI नाम से एक वैश्विक नया संगठन बनाने की पहल की। ये सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार करने का संकल्प है। भारत का प्रयास है, प्राकृतिक आपदा से, पुल, सड़कें, बिल्डिंग्स, पावर ग्रिड, ऐसा हर इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रहे, सुरक्षित निर्माण हो।

साथियों,

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हर देश का मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। ऐसी ही एक चुनौती है, हमारे एनर्जी रिसोर्सेस की। इसलिए पूरी दुनिया की चिंता करते हुए भारत ने International Solar Alliance (ISA) का समाधान दिया है। ताकि छोटे से छोटा देश भी सस्टेनबल एनर्जी का लाभ उठा सके। इससे क्लाइमेट पर तो पॉजिटिव असर होगा ही, ये ग्लोबल साउथ के देशों की एनर्जी नीड्स को भी सिक्योर करेगा। और आप सबको ये जानकर गर्व होगा कि भारत के इस प्रयास के साथ, आज दुनिया के सौ से अधिक देश जुड़ चुके हैं।

साथियों,

बीते कुछ समय से दुनिया, ग्लोबल ट्रेड में असंतुलन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी challenges का सामना कर रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भी भारत ने दुनिया के साथ मिलकर नए प्रयास शुरु किए हैं। India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC), ऐसा ही एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। ये प्रोजेक्ट, कॉमर्स और कनेक्टिविटी के माध्यम से एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को जोड़ेगा। इससे आर्थिक संभावनाएं तो बढ़ेंगी ही, दुनिया को अल्टरनेटिव ट्रेड रूट्स भी मिलेंगे। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन भी और मजबूत होगी।

|

साथियों,

ग्लोबल सिस्टम्स को, अधिक पार्टिसिपेटिव, अधिक डेमोक्रेटिक बनाने के लिए भी भारत ने अनेक कदम उठाए हैं। और यहीं, यहीं पर ही भारत मंडपम में जी-20 समिट हुई थी। उसमें अफ्रीकन यूनियन को जी-20 का परमानेंट मेंबर बनाया गया है। ये बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम था। इसकी मांग लंबे समय से हो रही थी, जो भारत की प्रेसीडेंसी में पूरी हुई। आज ग्लोबल डिसीजन मेकिंग इंस्टीट्यूशन्स में भारत, ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज़ बन रहा है। International Yoga Day, WHO का ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिए ग्लोबल फ्रेमवर्क, ऐसे कितने ही क्षेत्रों में भारत के प्रयासों ने नए वर्ल्ड ऑर्डर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, और ये तो अभी शुरूआत है, ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत का सामर्थ्य नई ऊंचाई की तरफ बढ़ रहा है।

साथियों,

21वीं सदी के 25 साल बीत चुके हैं। इन 25 सालों में 11 साल हमारी सरकार ने देश की सेवा की है। और जब हम What India Thinks Today उससे जुड़ा सवाल उठाते हैं, तो हमें ये भी देखना होगा कि Past में क्या सवाल थे, क्या जवाब थे। इससे TV9 के विशाल दर्शक समूह को भी अंदाजा होगा कि कैसे हम, निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक, Aspirations से Achievement तक, Desperation से Development तक पहुंचे हैं। आप याद करिए, एक दशक पहले, गांव में जब टॉयलेट का सवाल आता था, तो माताओं-बहनों के पास रात ढलने के बाद और भोर होने से पहले का ही जवाब होता था। आज उसी सवाल का जवाब स्वच्छ भारत मिशन से मिलता है। 2013 में जब कोई इलाज की बात करता था, तो महंगे इलाज की चर्चा होती थी। आज उसी सवाल का समाधान आयुष्मान भारत में नजर आता है। 2013 में किसी गरीब की रसोई की बात होती थी, तो धुएं की तस्वीर सामने आती थी। आज उसी समस्या का समाधान उज्ज्वला योजना में दिखता है। 2013 में महिलाओं से बैंक खाते के बारे में पूछा जाता था, तो वो चुप्पी साध लेती थीं। आज जनधन योजना के कारण, 30 करोड़ से ज्यादा बहनों का अपना बैंक अकाउंट है। 2013 में पीने के पानी के लिए कुएं और तालाबों तक जाने की मजबूरी थी। आज उसी मजबूरी का हल हर घर नल से जल योजना में मिल रहा है। यानि सिर्फ दशक नहीं बदला, बल्कि लोगों की ज़िंदगी बदली है। और दुनिया भी इस बात को नोट कर रही है, भारत के डेवलपमेंट मॉडल को स्वीकार रही है। आज भारत सिर्फ Nation of Dreams नहीं, बल्कि Nation That Delivers भी है।

साथियों,

जब कोई देश, अपने नागरिकों की सुविधा और समय को महत्व देता है, तब उस देश का समय भी बदलता है। यही आज हम भारत में अनुभव कर रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। पहले पासपोर्ट बनवाना कितना बड़ा काम था, ये आप जानते हैं। लंबी वेटिंग, बहुत सारे कॉम्प्लेक्स डॉक्यूमेंटेशन का प्रोसेस, अक्सर राज्यों की राजधानी में ही पासपोर्ट केंद्र होते थे, छोटे शहरों के लोगों को पासपोर्ट बनवाना होता था, तो वो एक-दो दिन कहीं ठहरने का इंतजाम करके चलते थे, अब वो हालात पूरी तरह बदल गया है, एक आंकड़े पर आप ध्यान दीजिए, पहले देश में सिर्फ 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, आज इनकी संख्या 550 से ज्यादा हो गई है। पहले पासपोर्ट बनवाने में, और मैं 2013 के पहले की बात कर रहा हूं, मैं पिछले शताब्दी की बात नहीं कर रहा हूं, पासपोर्ट बनवाने में जो वेटिंग टाइम 50 दिन तक होता था, वो अब 5-6 दिन तक सिमट गया है।

साथियों,

ऐसा ही ट्रांसफॉर्मेशन हमने बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी देखा है। हमारे देश में 50-60 साल पहले बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, ये कहकर कि इससे लोगों को बैंकिंग सुविधा सुलभ होगी। इस दावे की सच्चाई हम जानते हैं। हालत ये थी कि लाखों गांवों में बैंकिंग की कोई सुविधा ही नहीं थी। हमने इस स्थिति को भी बदला है। ऑनलाइन बैंकिंग तो हर घर में पहुंचाई है, आज देश के हर 5 किलोमीटर के दायरे में कोई न कोई बैंकिंग टच प्वाइंट जरूर है। और हमने सिर्फ बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का ही दायरा नहीं बढ़ाया, बल्कि बैंकिंग सिस्टम को भी मजबूत किया। आज बैंकों का NPA बहुत कम हो गया है। आज बैंकों का प्रॉफिट, एक लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए के नए रिकॉर्ड को पार कर चुका है। और इतना ही नहीं, जिन लोगों ने जनता को लूटा है, उनको भी अब लूटा हुआ धन लौटाना पड़ रहा है। जिस ED को दिन-रात गालियां दी जा रही है, ED ने 22 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक वसूले हैं। ये पैसा, कानूनी तरीके से उन पीड़ितों तक वापिस पहुंचाया जा रहा है, जिनसे ये पैसा लूटा गया था।

साथियों,

Efficiency से गवर्नमेंट Effective होती है। कम समय में ज्यादा काम हो, कम रिसोर्सेज़ में अधिक काम हो, फिजूलखर्ची ना हो, रेड टेप के बजाय रेड कार्पेट पर बल हो, जब कोई सरकार ये करती है, तो समझिए कि वो देश के संसाधनों को रिस्पेक्ट दे रही है। और पिछले 11 साल से ये हमारी सरकार की बड़ी प्राथमिकता रहा है। मैं कुछ उदाहरणों के साथ अपनी बात बताऊंगा।

|

साथियों,

अतीत में हमने देखा है कि सरकारें कैसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिनिस्ट्रीज में accommodate करने की कोशिश करती थीं। लेकिन हमारी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही कई मंत्रालयों का विलय कर दिया। आप सोचिए, Urban Development अलग मंत्रालय था और Housing and Urban Poverty Alleviation अलग मंत्रालय था, हमने दोनों को मर्ज करके Housing and Urban Affairs मंत्रालय बना दिया। इसी तरह, मिनिस्ट्री ऑफ ओवरसीज़ अफेयर्स अलग था, विदेश मंत्रालय अलग था, हमने इन दोनों को भी एक साथ जोड़ दिया, पहले जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय अलग था, और पेयजल मंत्रालय अलग था, हमने इन्हें भी जोड़कर जलशक्ति मंत्रालय बना दिया। हमने राजनीतिक मजबूरी के बजाय, देश की priorities और देश के resources को आगे रखा।

साथियों,

हमारी सरकार ने रूल्स और रेगुलेशन्स को भी कम किया, उन्हें आसान बनाया। करीब 1500 ऐसे कानून थे, जो समय के साथ अपना महत्व खो चुके थे। उनको हमारी सरकार ने खत्म किया। करीब 40 हज़ार, compliances को हटाया गया। ऐसे कदमों से दो फायदे हुए, एक तो जनता को harassment से मुक्ति मिली, और दूसरा, सरकारी मशीनरी की एनर्जी भी बची। एक और Example GST का है। 30 से ज्यादा टैक्सेज़ को मिलाकर एक टैक्स बना दिया गया है। इसको process के, documentation के हिसाब से देखें तो कितनी बड़ी बचत हुई है।

साथियों,

सरकारी खरीद में पहले कितनी फिजूलखर्ची होती थी, कितना करप्शन होता था, ये मीडिया के आप लोग आए दिन रिपोर्ट करते थे। हमने, GeM यानि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म बनाया। अब सरकारी डिपार्टमेंट, इस प्लेटफॉर्म पर अपनी जरूरतें बताते हैं, इसी पर वेंडर बोली लगाते हैं और फिर ऑर्डर दिया जाता है। इसके कारण, भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है, और सरकार को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत भी हुई है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर- DBT की जो व्यवस्था भारत ने बनाई है, उसकी तो दुनिया में चर्चा है। DBT की वजह से टैक्स पेयर्स के 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा, गलत हाथों में जाने से बचे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा फर्ज़ी लाभार्थी, जिनका जन्म भी नहीं हुआ था, जो सरकारी योजनाओं का फायदा ले रहे थे, ऐसे फर्जी नामों को भी हमने कागजों से हटाया है।

साथियों,

 

हमारी सरकार टैक्स की पाई-पाई का ईमानदारी से उपयोग करती है, और टैक्सपेयर का भी सम्मान करती है, सरकार ने टैक्स सिस्टम को टैक्सपेयर फ्रेंडली बनाया है। आज ITR फाइलिंग का प्रोसेस पहले से कहीं ज्यादा सरल और तेज़ है। पहले सीए की मदद के बिना, ITR फाइल करना मुश्किल होता था। आज आप कुछ ही समय के भीतर खुद ही ऑनलाइन ITR फाइल कर पा रहे हैं। और रिटर्न फाइल करने के कुछ ही दिनों में रिफंड आपके अकाउंट में भी आ जाता है। फेसलेस असेसमेंट स्कीम भी टैक्सपेयर्स को परेशानियों से बचा रही है। गवर्नेंस में efficiency से जुड़े ऐसे अनेक रिफॉर्म्स ने दुनिया को एक नया गवर्नेंस मॉडल दिया है।

साथियों,

पिछले 10-11 साल में भारत हर सेक्टर में बदला है, हर क्षेत्र में आगे बढ़ा है। और एक बड़ा बदलाव सोच का आया है। आज़ादी के बाद के अनेक दशकों तक, भारत में ऐसी सोच को बढ़ावा दिया गया, जिसमें सिर्फ विदेशी को ही बेहतर माना गया। दुकान में भी कुछ खरीदने जाओ, तो दुकानदार के पहले बोल यही होते थे – भाई साहब लीजिए ना, ये तो इंपोर्टेड है ! आज स्थिति बदल गई है। आज लोग सामने से पूछते हैं- भाई, मेड इन इंडिया है या नहीं है?

साथियों,

आज हम भारत की मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस का एक नया रूप देख रहे हैं। अभी 3-4 दिन पहले ही एक न्यूज आई है कि भारत ने अपनी पहली MRI मशीन बना ली है। अब सोचिए, इतने दशकों तक हमारे यहां स्वदेशी MRI मशीन ही नहीं थी। अब मेड इन इंडिया MRI मशीन होगी तो जांच की कीमत भी बहुत कम हो जाएगी।

|

साथियों,

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान ने, देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक नई ऊर्जा दी है। पहले दुनिया भारत को ग्लोबल मार्केट कहती थी, आज वही दुनिया, भारत को एक बड़े Manufacturing Hub के रूप में देख रही है। ये सक्सेस कितनी बड़ी है, इसके उदाहरण आपको हर सेक्टर में मिलेंगे। जैसे हमारी मोबाइल फोन इंडस्ट्री है। 2014-15 में हमारा एक्सपोर्ट, वन बिलियन डॉलर तक भी नहीं था। लेकिन एक दशक में, हम ट्वेंटी बिलियन डॉलर के फिगर से भी आगे निकल चुके हैं। आज भारत ग्लोबल टेलिकॉम और नेटवर्किंग इंडस्ट्री का एक पावर सेंटर बनता जा रहा है। Automotive Sector की Success से भी आप अच्छी तरह परिचित हैं। इससे जुड़े Components के एक्सपोर्ट में भी भारत एक नई पहचान बना रहा है। पहले हम बहुत बड़ी मात्रा में मोटर-साइकल पार्ट्स इंपोर्ट करते थे। लेकिन आज भारत में बने पार्ट्स UAE और जर्मनी जैसे अनेक देशों तक पहुंच रहे हैं। सोलर एनर्जी सेक्टर ने भी सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। हमारे सोलर सेल्स, सोलर मॉड्यूल का इंपोर्ट कम हो रहा है और एक्सपोर्ट्स 23 गुना तक बढ़ गए हैं। बीते एक दशक में हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट भी 21 गुना बढ़ा है। ये सारी अचीवमेंट्स, देश की मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी की ताकत को दिखाती है। ये दिखाती है कि भारत में कैसे हर सेक्टर में नई जॉब्स भी क्रिएट हो रही हैं।

साथियों,

TV9 की इस समिट में, विस्तार से चर्चा होगी, अनेक विषयों पर मंथन होगा। आज हम जो भी सोचेंगे, जिस भी विजन पर आगे बढ़ेंगे, वो हमारे आने वाले कल को, देश के भविष्य को डिजाइन करेगा। पिछली शताब्दी के इसी दशक में, भारत ने एक नई ऊर्जा के साथ आजादी के लिए नई यात्रा शुरू की थी। और हमने 1947 में आजादी हासिल करके भी दिखाई। अब इस दशक में हम विकसित भारत के लक्ष्य के लिए चल रहे हैं। और हमें 2047 तक विकसित भारत का सपना जरूर पूरा करना है। और जैसा मैंने लाल किले से कहा है, इसमें सबका प्रयास आवश्यक है। इस समिट का आयोजन कर, TV9 ने भी अपनी तरफ से एक positive initiative लिया है। एक बार फिर आप सभी को इस समिट की सफलता के लिए मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं हैं।

मैं TV9 को विशेष रूप से बधाई दूंगा, क्योंकि पहले भी मीडिया हाउस समिट करते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर एक छोटे से फाइव स्टार होटल के कमरे में, वो समिट होती थी और बोलने वाले भी वही, सुनने वाले भी वही, कमरा भी वही। TV9 ने इस परंपरा को तोड़ा और ये जो मॉडल प्लेस किया है, 2 साल के भीतर-भीतर देख लेना, सभी मीडिया हाउस को यही करना पड़ेगा। यानी TV9 Thinks Today वो बाकियों के लिए रास्ता खोल देगा। मैं इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आपकी पूरी टीम को, और सबसे बड़ी खुशी की बात है कि आपने इस इवेंट को एक मीडिया हाउस की भलाई के लिए नहीं, देश की भलाई के लिए आपने उसकी रचना की। 50,000 से ज्यादा नौजवानों के साथ एक मिशन मोड में बातचीत करना, उनको जोड़ना, उनको मिशन के साथ जोड़ना और उसमें से जो बच्चे सिलेक्ट होकर के आए, उनकी आगे की ट्रेनिंग की चिंता करना, ये अपने आप में बहुत अद्भुत काम है। मैं आपको बहुत बधाई देता हूं। जिन नौजवानों से मुझे यहां फोटो निकलवाने का मौका मिला है, मुझे भी खुशी हुई कि देश के होनहार लोगों के साथ, मैं अपनी फोटो निकलवा पाया। मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं दोस्तों कि आपके साथ मेरी फोटो आज निकली है। और मुझे पक्का विश्वास है कि सारी युवा पीढ़ी, जो मुझे दिख रही है, 2047 में जब देश विकसित भारत बनेगा, सबसे ज्यादा बेनिफिशियरी आप लोग हैं, क्योंकि आप उम्र के उस पड़ाव पर होंगे, जब भारत विकसित होगा, आपके लिए मौज ही मौज है। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।