QuoteThe history of human civilisation illustrates the vitality of rivers and maritime trade: PM Modi
QuoteRo-Ro ferry service will bring back to life our glorious past and connect Saurashtra with South Gujarat: PM Modi
QuoteIn the last three years, a lot of importance has been given to the development of Gujarat: PM Modi
QuoteGujarat has a long coastline, steps have been taken in developing coastal infrastructure: PM Modi

यहां उपस्थित विशाल संख्‍या में पधारे हुए मेरे प्‍यारे भाईयो और बहनों,

आप सबको दीपावली और नवीन वर्ष की शुभकामनाओं के साथ, अभी हम लोगों ने भाई दूज का त्‍यौहार मनाया नागपंचमी के त्‍यौहार का इंतजार कर रहे हैं और नये संकल्‍प के साथ, नये भारत, नये गुजरात के निर्माण की दिशा में आज एक अनमोल उपहार घोघा की धरती से पूरे हिन्‍दुस्‍तान को मिल रहा है। आज घोघा दहेज के बीच Ro-Ro ferry service का प्रथम चरण का शुभारंभ किया जा रहा है। ये भारत में अपनी तरह का पहला project है। यही दक्षिण पूर्वी एशिया का भी ये इतना बड़ा पहला project है। मैं गुजरात के लोगों को, यहां की सरकार को, 650 करोड़ रूपयों का ये project, अनेक आधुनिक तकनीक के साथ परिपूर्ण करने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस project की शुरूआत के साथ साढ़े छ: करोड़ गुजरातियों का एक बहुत बड़ा सपना पूरा हुआ है। भाईयो बहनो

अभी इस मंच से मुझे सर्वोत्‍तम डेयरी cattle feed plant के उद्घाटन का भी अवसर मिला है।

मेरे प्‍यारे भाईयो बहनों, एक विवाद का विषय है। क्‍या? मनुष्‍य जात ने सबसे पहले तैरना सीखा था कि पहिया बनाना सीखा था। कोई तय नहीं कर पाता था कि पहले पहिया बना कि पहले इंसान तैरना सीखा। लेकिन ये सही है कि मानव जात सदियों से तैर कर नांव से नदी पार करना उसने हमेशा सरल माना, आसान माना। गुजरात के हजारों साल का सामुद्रिक यात्रा का इतिहास रहा है। नांव बनती यहां थी। नाव लेकर दुनिया में जाकर लोगों की परंपरा थी। लोथल 84 देशों के झंडे यहां पर फहरते थे। फलफी यूनिवर्सिटी 1700 साल पहले अनेक देशों के बच्‍चे हमारे यहां फलफी यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे। लेकिन पता नहीं क्‍या हुआ सब कुछ इतिहस की तरह नीचे जमीन में दब गया। वो भी तो एक जमाना था।

भाईयो बहनों, आज का ये programme, आज का ये प्रारंभ घोघा, भावनगर, गुजरात के समुद्र तक के वो पुराने भव्‍य दिवसों को वापिस लाने का अवसर है। घोघा-दहेज के बीच से फेरी सर्विस सवा सौ दक्षिण गुजरात के करोड़ो लोगों की जिंदगी को न सिर्फ आसान बनाएगी बल्कि उन्‍हें और निकट ले आएगी। जिस सफर में 7-8 घंटे लगते थे। वो सफर एक सवा घंटे में पूरा किया जा सकेगा। हमारे यहां कहा जाता है सबसे मुल्‍यवान चीज समय होता है। time is money ये कहा जाता है। आज दुनिया में कोई 24 घंटे के, 25 घंटे नहीं कर सकता है। लेकिन ये भारत सरकार और गुजरात सरकार है कि आपके 24 घंटों में से एक घंटे की सफर करके, सात घंटे की सौगात दे सकता है। एक study कहती है कि सामान को ले जाने में अगर सड़क के रास्‍ते डेढ़ रूपये का खर्च होता है, तो उतना ही सामान ले जाने के लिए रेल के जरिये एक रूपया लगता है, लेकिन वही सामान अगर हम जलमार्ग से ले जाएं तो सिर्फ 20-25 पैसे में ले जा सकते हैं। आप सोच सकते हैं कि आपका कितना समय बचने जा रहा है। देश का कितना पेट्रोल डीजल बचने वाला है। वरना लाखों लीटर इंधन तो जब ट्रेफिक जाम हो जाता है, वहीं पर बरबाद हो जाता है।

भाईयो और बहनों, सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के बीच हर रोज लगभग 12 हजार लोग यात्रा करते हैं। पांच हजार से ज्‍यादा गाड़ियाँ हर रोज इन दो क्षेत्रों को connect करने के लिए सड़कों पर दौड़ती हैं। जब यही connectivity सड़क के बजाय समुद्र से होगी, तो 307 किलोमीटर की दूरी 31 किलोमीटर में बदल जाएगी। एक फेरी अपने साथ 500 से ज्‍यादा लोग, 100 के लगभग कारें, 100 के करीब ट्रकें ये अपने साथ लेकर के जा सकती है। साथियों जब ट्रेफिक का बड़ा हिस्‍सा इस फेरी सर्विस पर निर्भर हो जाएगा। या जब अपनी-अपनी गाड़ियाँ इधर से उधर ले जाएंगे। तो इसका प्रभाव दिल्‍ली और मुंबई को connect करने वाले रास्‍तों पर भी पड़ने वाला है। गुजरात के सबसे ज्‍यादा औद्योगिकरण वाले क्षेत्र जैसे दहेज, बड़ोदरा और उसके आस-पास के मार्गों पर गाडि़यों की संख्‍या कम होगी, गाडि़यों की रफ्तार बढ़ेगी और तेजी यहां के पूरे economy system को top-gear में ले जाएगी।

साथियों, हम पुरानी approach के साथ नए नतीजे प्राप्‍त नहीं कर सकते हैं। न ही पुरानी सोच के साथ नए प्रयोग किए जा सकते हैं। Ghogha-Dahej Ro-Ro ferry service इसका भी बहुत बड़ा उदाहरण है।

मैं जब मुख्‍यमंत्री बना और खोज खबर ली इस पर चर्चा की, तो कई दशकों से होकर रहे थे। लेकिन ये योजना पता नहीं किस कोने में पड़ी थी। अब जब मैं इसमें जाने लगा आगे बढ़ने लगा। मेरे आने के बाद मैं चाहता था तुरंत शुरू हो, आप हैरान हो जाएंगे कि सरकार ने ऐसी structural गलतियां की थी कि कभी Ro-Ro ferry service हो ही नहीं सकता। पुराने जमाने में क्‍या काम किया था इन्‍होंने? समस्‍या ये थी कि जिसे ferry चलानी थी, उसी से आग्रह किया जाता था कि तुम भी टर्मिनल बनाओ। क्‍या मुझे बताइये, रोड के उपर कोई बस दौड़ाता है, तो बस वाले को हम कहते हैं कि रोड बनाओं, बस वाले को कहते हैं कि बस स्‍टेशन बनाओ! एयर पोर्ट पर विमान आता है क्‍या मैं विमान वाले को कहता हूं कि एयरपोर्ट बनाओ? एयरपोर्ट सरकार बनाती हैं, बस स्‍टेशन सरकार बनाती हैं, रोड सरकार बनाती हैं। उस पर दौड़ने के लिए private लोग व्‍यापार के लिए आते हैं। Ro-Ro ferry service में उन्‍होंने कह दिया एक Jetty बनानी है, उसका पोर्ट बनाना है, आपको करना है तो करो ये समुद्र का किनारा है, ये पानी है आगे बढ़ो। कौन बढ़ेगा भाई? आखिरकर हमनें नीतिया बदली, पुरानी सरकारों के इस approach को हमने बदल दिया। हमने तय किया कि ferry service के लिए टर्मिनल बनाने का काम सरकार करेगी। टर्मिनल बन जाने के बाद उसका संचालन और ferry चलाने का काम private agency को दिया जाएगा। यहां के ‘रब’ समुद्र क्षेत्र में तलहाटी में जमीन मिट्टी भी बड़ी समस्‍या होती है। इस वजह से ferry को किनारे तक आने में दिक्‍कत होती है। बदली हुई रणनीति के तहत सरकार ने भी तय किया कि मिट्टी निकालने के लिए पत्‍थर हटाने के लिए dredging का काम भी, सरकार उसका खर्चा उठाएगी। हमने ये भी व्‍यवस्‍था बनाई कि इस सर्विस के बाद private agency को जो लाभ होगा, उसमें सरकार की भी भागीदारी होगी। ये नई रणनीति सफल रही। और इसी का परिणाम है कि Ghogha-Dahej के बीच Ro-Ro ferry service प्रारंभ हो रही है।

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2012 में मैं आया था। इसका शिलान्‍यास मैंने किया था। लेकिन तब समुद्र में कुछ काम करना है। तो हम जरा भारत सरकार पर dependent रहते थे। और भारत सरकार में ऐसे लोग बैठे थे उस समय, जब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था। वापी लेकर के कच्‍छ के मांडवी तक गुजरात के समुद्री तट पर विकास पर पूरा प्रतिबंध लगा दिया गया। हमारी सारी industries को पर्यावरण के नाम पर ताले लगाने की धमकियां दी गईं थी। मैं जानता हूं कितनी कठिनाईयों से हमने गुजरात को आगे बढ़ाने में सफलता पाई थी। लेकिन जब दिल्‍ली में आप सबने मुझे सेवा करने का मौका दिया एक के बाद एक समस्‍याएं सुलझती गईं। और आज Ro-Ro ferry service

का लोकार्पण करने का प्रथम चरण का और ये project कठिन था। वरूण देव जी हमारी परीक्षा लेते रहे। लेकिन इतिहास गवाह है जब सेतू के निर्माण में किसी तरह की बाधा आई तो समुद्र मंथन में से ही अमृत भी निकल कर आया।

साथियों आज हमें वरूण देव की आर्शीवाद से ये अमृत मिला है। जो जलसेतू मिला है। मैं शीश झुकाकर के ये कामना करता हूं कि वरूण देव का आर्शीवाद हमेशा की तरह गुजरात के लोगों के साथ रहे। और आज जब हम आज ये Ro-Ro ferry service का प्रारंभ कर रहे हैं तब, मैं वीर मोखरा जी दादा को भी नमन करता हूं। और जैसे मेरे मछुवारे भाई बहन वीर मोखरा जी दादा को नरियल कराके करके आगे बढ़ते हैं। मैं भी उनकी परंपरा का आज पालन करूंगा। और वीर मोखरा जी के आर्शीवाद से हमारी यात्रियों की सुरक्षा बनी रहे। भावनगर और सौराष्ट्र, दक्षिण गुजरात के हिस्‍से की तरह आगे बढ़ जाएं, इतनी प्रगति हो और वीर मोखरा जी के आर्शीवाद हम पर बने रहेंगे, ये मुझे पूरा विश्‍वास है।

ये project इंजीनियरों और गुजरात सरकार दोनों के लिए ही एक बहुत बड़ी चुनौती था। इसलिए जो भी लोग इस परियोजना से जुड़े हैं, वे सब के सब बधाई के पात्र हैं।

भाईयो और बहनों, गुजरात में देश का सबसे बड़ा sea front उपलब्‍ध है। 1600 किलोमीटर से भी ज्‍यदा हमारा समुद्री तट है। सैंकड़ों वर्षों से गुजरात अपनी शक्ति और सामर्थ्‍य से पुरी दुनिया का ध्‍यान अपनी ओर खींचता रहा है। लोथल पोर्ट से निकली जानकारियां आज भी बड़े-बड़े marine experts को अचभिंत करती है। जिस जगह पर हम सभी उपस्थित हैं, वहां पर सैंकड़ों वर्षों से दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों से जहाज आते रहे हैं। इस समुद्र को विरासत समझते हुए, देखते हुए मैं उसी समय से गुजरात में port led development की बात कर रहा हूं। जब आपने मुझे मुख्‍यमंत्री के पद पर बिठाया। इसी को ध्‍यान में रखते हुए हमने गुजरात के coastal इलाके में Infrastructure और Development के दूसरे projects पर विशेष ध्‍यान दिया। हमने Ship-Building इसकी नई policy बनाई, Ship Building Park बनाए। Special Economic Zones में छोटे पोर्ट को बढ़ावा दिया जाए। Ship-breaking के नियमों में भी बढ़े बदलाव किए गए। सरकार ने Specialized Terminals के निर्माण पर भी विशेष जोर लगाया, जैसे दहेज में Solid Cargo, Chemical और LNG Terminal, मुंद्रा में Coal Terminal ऐसे Specialized Terminals से गुजरात के port-sector को एक नई दिशा, नई ऊर्जा और नई चेतना प्राप्‍त हुई है।

इसके साथ ही सरकार ने Vessel Traffic Management System और Ground Breaking Connectivity Project को भी विशेष रूप से बढ़ावा दिया। सरकार आने वाले दिनों में Maritime University बनाने और लोथल में Maritime Museum बनाने पर भी बहुत विस्‍तार से काम इन दिनों चल रहा है। इन सारे कार्यों के साथ ही यहां रहने वाले मेरे मछुवारे भाई बंघु और स्‍थानिय लोगों का विकास हो, इसके लिए सागर-खेड़ू विकास कार्यक्रम जैसी योजनाएं भी हम लगातार चला रहे हैं। इसी बात पर भी जोर दिया कि Shipping Industry में स्‍थानिय युवाओं को प्रशिक्षित करके उन्‍हें ही रोजगार दिया जाएगा।

उनकी शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, पीने के पानी, बिजली के साथ ही हमने Coastal Social Security का भी पूरा infrastructure तैयार किया।

भाईयो और बहनों, अभी हाल ही में जापान के प्रधानमंत्री आए थे। उस समय हमने जापान के साथ Shipping Sector को लेकर के एक महत्‍वपूर्ण समझौता किया। इस समझौते के तहत जापान सरकार और वहां की एक वित्‍तीय संस्‍था JAICA, Alang shipyard में up-gradation के लिए उसके modernization के लिए हमें वित्‍तीय सहयोग देंगे, हमें धन देंगे। इसके लिए वो तैयार हुए हैं।

साथियों, सरकार भावनगर से Alang-Sosiya Ship Recycling Yard तक के लिए एक alternative road भी उस पर भी काम कर रही है। एशिया के सबसे बड़े Ship Recycling Yard में 15 से 25 हजार कर्मचारी काम करते हैं। Alang-Sosiya Ship Recycling Yard भावनगर से करीब 50 किलोमीटर दूर है। अभी जो route उस पर काफी जाम की कितनी दिक्‍कत रहती है। मुझे लगता है वो मुझे बताने की जरूरत नहीं है। सरकर ने ये तय किया है Alang-Sosiya Ship Recycling Yard और मअुवा, पीपावाओ और जाफराबाद, वैरावल को जोड़ने वाला जो एक वैकिल्‍पक रूट है उसे चौड़ा किया जाएगा, upgrade किया जाएगा। भविष्‍य में Alang Yard की क्षमता भी बढ़ने जा रही है और उसे देखते हुए बीच सड़क का आधुनिकीकरण आवश्‍यक हो गया है। इस रूट से Ghogha-Dahej ferry service के लिए आ रही गाडि़यों को भी फायदा होने वाला है।

साथियों, सरकार के लगातार प्रयास का नतीजा है कि गुजरात के coastal आज इतनी तेजी से विकस हो रहा है। आज गुजरात पूरे देश में छोटे पोर्ट के जरिए होने वाले कुल cargo की आवाजाही का 32 प्रतिशत अकेला गुजरात handle करता है। यानि एक तिहाई गुजरात में होता है। इतना ही नहीं इस काम में पिछले 15 वर्षों में गुना बढ़ोतरी हुई है। मुझे उम्‍मीद है कि जिस तरह पिछले 15 साल में गुजरात ने अपने ports की क्षमता को भी चार गुना बढ़ाया है, cargo handling की रफ्तार भी और तेज होगी।

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भाईयो और बहनों, गुजरात मार्ग की दृष्टि से बहुत ही strategic location पर है। यहां से दुनियां के किसी भी भू-भाग तक समुद्री मार्ग से पहुंचना बहुत ही आसान, सस्‍ता और सरल रास्‍ता है। हमें गुजरात की शक्ति का भरपूर फायदा उठाना चाहिए। गुजरात का maritime development भी पूरे देश के लिए एक model है। मुझे उम्‍मीद है कि Ro-Ro ferry service का पूरा project भी दूसरे राज्‍यों के लिए भी एक model project की तरह काम करेगा।

हमनें जिस तरह बरसों की मेहनत के बाद इस तरह के project में आने वाली दिक्‍कतों को समझा है, उन्‍हें दूर किया है। वो दिक्‍कतें कम से कम इसे दोहराने वालों राज्‍यों को कभी नहीं आएगी। इस ferry service से पूरे क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक विकास का एक नया दौर शुरू होगा। रोजगार के हजारों नये अवसर बनेगें। Coastal Shipping और Coastal Tourism का भी नया अध्‍याय आरंभ होगा। आने वाले दिनों में जब दिल्‍ली और मुबंई के बीच Dedicated Freight Corridor बन जाएगा और साथ ही दिल्‍ली-मुबंई Industrial Corridor का काम पूरा हो जाएगा तो इस सर्विस समेत गुजरात से जुड़े समुद्री मार्ग का महात्‍मय भी कई गुना बढ़ जाएगा। ये project अहमदाबाद और भावनगर के बीच के इलाकों में औद्योगिक विकास को एक करने के लिए बनाए गये Dholera special investment region (SIR) को भी एक नई मजबूती देने वाला है। Dholera SIR भारत ही नहीं विश्‍व के नक्‍शे पर विकसित होने वाला ये सबसे बड़ा औद्योगिक केंद्र होने वाला है। इससे लाखों लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर बनेगें। गुजरात सरकार के प्रयास से Dholera में infrastructure से जुड़े काम तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। कुछ ही वर्षों में Dholera पूरी दुनिया में अपनी धाक जमाएगा और उसमें एक ही भूमि का, Ghogha -Dahej ferry service का भी योगदान होगा।

साथियों, भविष्‍य में हम इस ferry service को ये सिर्फ Ghogha-Dahej तक रूकने वाला नहीं है। भविष्‍य में हम इस ferry service को हम हजीरा, पीपावाओ, जाफराबाद, दमन-द्वीप इन सभी जगह पर जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ने वाले हैं मुझे बताया गया है। कि सरकार की तैयारी आने वाले वर्षों में इस ferry service को सूरत से आगे हजीरा और फिर मुंबई तक ले जाने के लिए भी चल रही है। कच्‍छ की खाड़ी में भी इसी तरह का project शुरू किए जाने की चर्चा अभी प्राथमिक स्‍तर पर चल रही है। मुझे बताया गया है। कि कच्‍छ के वायु और जामनगर के rozi बंदर के बीच ऐसी सेवा शुरू करने के लिए pre-feasibilty report already तैयार हो चुकी है। इतना ही नहीं जब ferry service का इस्‍तेमाल बढ़ेगा तो तमाम उद्योगों को नर्मदा नदी के माध्‍यम से भी connect किया जा सकता है।

साथियों, भारत की विशाल समुद्री सीमा 7500 किलोमीटर लंबी है। निवेश की बड़ी संभावनाओं से भरी हुई है। मेरा मानना रहा है कि हमारे समुद्री तट देश की प्रगति के gateway हैं। भारत की समृद्धि के प्रवेश द्वार हमारे बंदर होते हैं। लेकिन बीते दशकों में केंद्रीय स्‍तर से इन पर कम ही ध्‍यान दिया गया। देश का shipping और port sector भी लंबे समय तक उपेक्षित रहा। इस sector को सुधारने के लिए उसे आधुनिक बनाने के लिए सरकार ने सागरमाला कार्यक्रम भी शुरू किया है।

सागरमाला परियोजना के तहत देश में मौजूदा ports उसका modernization और नये पोर्ट के development का काम किया जा रहा है। सड़क रेलमार्ग Interstate-Waterways और Coastal Transport को integrated किया जा रहा है। ये परियोजना Coastal Transport के जरिये माल ढुलाई को बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभा रही है।

साथियों, सरकार के प्रयासों का ये नतीजा है कि पिछले तीन वर्षों में Port Sector में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। और अभी तक का सबसे ज्‍यादा capacity addition पिछले दो या तीन वर्ष में हुआ है। जो port और सरकारी कंपनिया घाटे में चल रही थी, उनमें भी परिस्थिति बदल रही है। सरकार का ध्‍यान coastal service से जुड़ी skill development पर भी है। एक अनुमान के मुताबिक अकेले सागरमाला project से आने वाले समय में एक करोड़ जितनी नई नौकरियों के हिन्‍दुस्‍तान में अवसर पैदा हो सकते हैं। हम इस approach के साथ काम कर रहे हैं कि transportation का पूरा framework आधुनिक और integrated हो।

हमारे देश में transport नीतियों में जो असंतुलन था, उसे भी दूर किया जा रहा है। ये असंतुलन इतना ज्‍यादा था वो आप इसी से समझ सकते हैं कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी हमारे यहां सिर्फ पांच National Waterways थे। water transport में इतना सस्‍ता होना और देश की नदियों का जल होने का बावजूद इसे नजरअंदाज कर दिया गया। अब इस सरकार ने 106 National Waterways का गठन किया गया है। और इस पर तेजी से काम चल रहा है। इस National Waterways की कुल लंबाई 17000 किलोमीटर से भी ज्‍यादा है। ये Waterways देश के transport sector देश के असंतुलन को देर करने में बहुत मददगार साबित हुई है।

हमारी सामुद्रिक संपदा हमारे ग्रामीण और समुद्री तट को एक नया आयाम दे सकती है। मछुआरे भाई इस संपदा का पूरा इस्‍तेमाल कर पाएं इसके लिए सरकार ने Blue Revolution Scheme को शुरू किया है। उन्‍हें आधुनिक तकनीक का इस्‍तेमाल करते हुए मछली पकड़ने और मछली पालन में value-addition के बारे में सिखाया जा रहा है।

Blue Revolution Scheme के अंतर्गत आज मछुआरों को Longliner trollers के लिए आर्थिक मदद देने की भी योजना बनाई है। एक vessel पर केंद्र सरकार की तरफ से चालीस लाख रूपये की सब्सिडी दी जाएगी। Longliner trollers का ने सिर्फ मछुआरों की जिंदगी आसान बनाएगें बल्कि वो उनके कारोबार को भी नई आर्थिक मजबूती देंगे। अभी जिस तरह ये trollers का इस्‍तेमाल किया जाता है, वो कम पानी में मछली पकड़ने के काम आते हैं। तकनीक के मामले में भी ये बहुत पुराने हैं risky हैं। इसलिए जब इन पुराने trollers को लेकर के वे समुद्र जाते हैं तो अक्‍सर रास्‍ता भटक जाते हैं। उन्‍हीं पता तक नहीं चलता कि भारत की समुद्री सीमा छोड़कर, दूसरे देश की समुद्र सीमा में पहुंच गये। इसके बाद मछुआरों को कई तरह की दिक्‍कत उठानी पड़ती है। तकनीक का ज्‍यादा से ज्‍यादा इस्‍तेमाल करके हम इन दिक्‍कतों को कम कर सकते हैं और इसलिए हमने ये Longliner trollers की मदद से मछुआरे भाई समुद्र में सही दिशा में दूर तक गहरे पानी में मछली पकड़ने के लिए जा सके इसके सरकार मदद करने की योजना बनाई है। आधु‍निक Longliner trollers ईंधन के मामले में भी काफी किफायती होते हैं। यानि मछुआरों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ उनका व्‍यापार और मुनाफा दोनों बढ़ाएगें।

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साथियों देश में infrastructure का विकास हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। पिछले तीन वर्षों में Highways, Railways, Waterways और Airways पर जितना निवेश किया गया है। उतना पहले इतने कम समय में कभी नहीं हुआ। इसके अलावा नई Aviation Policy बनाकर Regional Air Service को सुधारा जा रहा है। छोटे-छोटे हवाई अड्डों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। कुछ हफते पहले ही अहमदाबाद से मुंबई के बीच चलने वाली देश की पहली बुलेट ट्रेन का भी काम शुरू किया जा चुका है। ये सारे प्रयास देश को इक्‍सवीं सदी के transport system देने का आधार बनेगें। एक ऐसा transport system जो New India की आवश्‍यकता हो New India की उम्‍मीदों के मुताबिक। साथियों आज यहां Ghogha से मैं ferry के माध्‍यम से ही दहेज़ तक जाऊंगा। मेरे साथ मेरे कुछ नन्‍हें साथी, दिव्‍यांग बच्‍चे भी होंगे। उनके चेहरे की खुशी ही मेरा पारिश्रमिक होगा।

भाईयो-बहनों, से बचपन से जिस कार्य का सपना देखा था, वो पूरा होने के बाद मैंने ऐसा अनुभव किया इसकी कल्‍पना शायद कोई नहीं कर सकता है। बचपन में जिस बात को सुना था और हो नहीं रहा था, आज जब अपनी आंखों के सामने देख पर रहा हूं और खुद को उस काम को करने का मौका मिला, मैं समझता हूं कि मेरे जीवन का बहुत धन्य पल है। मैं इसे अपना सौभाग्‍य मानता हूं। दहेज मैं जाऊंगा अपने अनुभव वहां बाटूंगा। लेकिन मैं आज आपसे आग्रह करूंगा कि इस महत्‍वपूर्ण काम में आप हमारे साथ जुडि़ए और ये मानिए ये ferry service तो शुरूआत है, ये पहला चरण है। बाद में प्राइवेट कंपनिया आएंगी ढेर सारी फेरिया चलेंगी। रूट चलेंगे, tourism development होगा। और सूरत के हमारे धनी लोग इसको हम hire करके जन्‍म दिन मनाने के लिए भी समुद्र में जाएंगे। बहुत बड़ी विकास की संभावनाए हैं। और इसलिए मैंने कहा कि घोघा का भाग्‍य फिर एक बार बदलने वाला है। घोघा का भाग्‍य फिर एक बार बदल रहा है। और एक बार फिर आप सभी को Ghogha-Dahej Ro-Ro ferry service और सर्वोत्‍त्‍म डेयरी के cattle freed plant के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आप सबको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं।

भारत माता की जय,

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जय वीर मोखरा जी दादा

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Today, India is not just a Nation of Dreams but also a Nation That Delivers: PM Modi in TV9 Summit
March 28, 2025
QuoteToday, the world's eyes are on India: PM
QuoteIndia's youth is rapidly becoming skilled and driving innovation forward: PM
Quote"India First" has become the mantra of India's foreign policy: PM
QuoteToday, India is not just participating in the world order but also contributing to shaping and securing the future: PM
QuoteIndia has given Priority to humanity over monopoly: PM
QuoteToday, India is not just a Nation of Dreams but also a Nation That Delivers: PM

श्रीमान रामेश्वर गारु जी, रामू जी, बरुन दास जी, TV9 की पूरी टीम, मैं आपके नेटवर्क के सभी दर्शकों का, यहां उपस्थित सभी महानुभावों का अभिनंदन करता हूं, इस समिट के लिए बधाई देता हूं।

TV9 नेटवर्क का विशाल रीजनल ऑडियंस है। और अब तो TV9 का एक ग्लोबल ऑडियंस भी तैयार हो रहा है। इस समिट में अनेक देशों से इंडियन डायस्पोरा के लोग विशेष तौर पर लाइव जुड़े हुए हैं। कई देशों के लोगों को मैं यहां से देख भी रहा हूं, वे लोग वहां से वेव कर रहे हैं, हो सकता है, मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं। मैं यहां नीचे स्क्रीन पर हिंदुस्तान के अनेक शहरों में बैठे हुए सब दर्शकों को भी उतने ही उत्साह, उमंग से देख रहा हूं, मेरी तरफ से उनका भी स्वागत है।

साथियों,

आज विश्व की दृष्टि भारत पर है, हमारे देश पर है। दुनिया में आप किसी भी देश में जाएं, वहां के लोग भारत को लेकर एक नई जिज्ञासा से भरे हुए हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो देश 70 साल में ग्यारहवें नंबर की इकोनॉमी बना, वो महज 7-8 साल में पांचवे नंबर की इकोनॉमी बन गया? अभी IMF के नए आंकड़े सामने आए हैं। वो आंकड़े कहते हैं कि भारत, दुनिया की एकमात्र मेजर इकोनॉमी है, जिसने 10 वर्षों में अपने GDP को डबल किया है। बीते दशक में भारत ने दो लाख करोड़ डॉलर, अपनी इकोनॉमी में जोड़े हैं। GDP का डबल होना सिर्फ आंकड़ों का बदलना मात्र नहीं है। इसका impact देखिए, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, और ये 25 करोड़ लोग एक नियो मिडिल क्लास का हिस्सा बने हैं। ये नियो मिडिल क्लास, एक प्रकार से नई ज़िंदगी शुरु कर रहा है। ये नए सपनों के साथ आगे बढ़ रहा है, हमारी इकोनॉमी में कंट्रीब्यूट कर रहा है, और उसको वाइब्रेंट बना रहा है। आज दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे भारत में है। ये युवा, तेज़ी से स्किल्ड हो रहा है, इनोवेशन को गति दे रहा है। और इन सबके बीच, भारत की फॉरेन पॉलिसी का मंत्र बन गया है- India First, एक जमाने में भारत की पॉलिसी थी, सबसे समान रूप से दूरी बनाकर चलो, Equi-Distance की पॉलिसी, आज के भारत की पॉलिसी है, सबके समान रूप से करीब होकर चलो, Equi-Closeness की पॉलिसी। दुनिया के देश भारत की ओपिनियन को, भारत के इनोवेशन को, भारत के एफर्ट्स को, जैसा महत्व आज दे रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। आज दुनिया की नजर भारत पर है, आज दुनिया जानना चाहती है, What India Thinks Today.

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साथियों,

भारत आज, वर्ल्ड ऑर्डर में सिर्फ पार्टिसिपेट ही नहीं कर रहा, बल्कि फ्यूचर को शेप और सेक्योर करने में योगदान दे रहा है। दुनिया ने ये कोरोना काल में अच्छे से अनुभव किया है। दुनिया को लगता था कि हर भारतीय तक वैक्सीन पहुंचने में ही, कई-कई साल लग जाएंगे। लेकिन भारत ने हर आशंका को गलत साबित किया। हमने अपनी वैक्सीन बनाई, हमने अपने नागरिकों का तेज़ी से वैक्सीनेशन कराया, और दुनिया के 150 से अधिक देशों तक दवाएं और वैक्सीन्स भी पहुंचाईं। आज दुनिया, और जब दुनिया संकट में थी, तब भारत की ये भावना दुनिया के कोने-कोने तक पहुंची कि हमारे संस्कार क्या हैं, हमारा तौर-तरीका क्या है।

साथियों,

अतीत में दुनिया ने देखा है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब भी कोई वैश्विक संगठन बना, उसमें कुछ देशों की ही मोनोपोली रही। भारत ने मोनोपोली नहीं बल्कि मानवता को सर्वोपरि रखा। भारत ने, 21वीं सदी के ग्लोबल इंस्टीट्यूशन्स के गठन का रास्ता बनाया, और हमने ये ध्यान रखा कि सबकी भागीदारी हो, सबका योगदान हो। जैसे प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती है। देश कोई भी हो, इन आपदाओं से इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान होता है। आज ही म्यांमार में जो भूकंप आया है, आप टीवी पर देखें तो बहुत बड़ी-बड़ी इमारतें ध्वस्त हो रही हैं, ब्रिज टूट रहे हैं। और इसलिए भारत ने Coalition for Disaster Resilient Infrastructure - CDRI नाम से एक वैश्विक नया संगठन बनाने की पहल की। ये सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार करने का संकल्प है। भारत का प्रयास है, प्राकृतिक आपदा से, पुल, सड़कें, बिल्डिंग्स, पावर ग्रिड, ऐसा हर इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रहे, सुरक्षित निर्माण हो।

साथियों,

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हर देश का मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। ऐसी ही एक चुनौती है, हमारे एनर्जी रिसोर्सेस की। इसलिए पूरी दुनिया की चिंता करते हुए भारत ने International Solar Alliance (ISA) का समाधान दिया है। ताकि छोटे से छोटा देश भी सस्टेनबल एनर्जी का लाभ उठा सके। इससे क्लाइमेट पर तो पॉजिटिव असर होगा ही, ये ग्लोबल साउथ के देशों की एनर्जी नीड्स को भी सिक्योर करेगा। और आप सबको ये जानकर गर्व होगा कि भारत के इस प्रयास के साथ, आज दुनिया के सौ से अधिक देश जुड़ चुके हैं।

साथियों,

बीते कुछ समय से दुनिया, ग्लोबल ट्रेड में असंतुलन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी challenges का सामना कर रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भी भारत ने दुनिया के साथ मिलकर नए प्रयास शुरु किए हैं। India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC), ऐसा ही एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। ये प्रोजेक्ट, कॉमर्स और कनेक्टिविटी के माध्यम से एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को जोड़ेगा। इससे आर्थिक संभावनाएं तो बढ़ेंगी ही, दुनिया को अल्टरनेटिव ट्रेड रूट्स भी मिलेंगे। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन भी और मजबूत होगी।

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साथियों,

ग्लोबल सिस्टम्स को, अधिक पार्टिसिपेटिव, अधिक डेमोक्रेटिक बनाने के लिए भी भारत ने अनेक कदम उठाए हैं। और यहीं, यहीं पर ही भारत मंडपम में जी-20 समिट हुई थी। उसमें अफ्रीकन यूनियन को जी-20 का परमानेंट मेंबर बनाया गया है। ये बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम था। इसकी मांग लंबे समय से हो रही थी, जो भारत की प्रेसीडेंसी में पूरी हुई। आज ग्लोबल डिसीजन मेकिंग इंस्टीट्यूशन्स में भारत, ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज़ बन रहा है। International Yoga Day, WHO का ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिए ग्लोबल फ्रेमवर्क, ऐसे कितने ही क्षेत्रों में भारत के प्रयासों ने नए वर्ल्ड ऑर्डर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, और ये तो अभी शुरूआत है, ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत का सामर्थ्य नई ऊंचाई की तरफ बढ़ रहा है।

साथियों,

21वीं सदी के 25 साल बीत चुके हैं। इन 25 सालों में 11 साल हमारी सरकार ने देश की सेवा की है। और जब हम What India Thinks Today उससे जुड़ा सवाल उठाते हैं, तो हमें ये भी देखना होगा कि Past में क्या सवाल थे, क्या जवाब थे। इससे TV9 के विशाल दर्शक समूह को भी अंदाजा होगा कि कैसे हम, निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक, Aspirations से Achievement तक, Desperation से Development तक पहुंचे हैं। आप याद करिए, एक दशक पहले, गांव में जब टॉयलेट का सवाल आता था, तो माताओं-बहनों के पास रात ढलने के बाद और भोर होने से पहले का ही जवाब होता था। आज उसी सवाल का जवाब स्वच्छ भारत मिशन से मिलता है। 2013 में जब कोई इलाज की बात करता था, तो महंगे इलाज की चर्चा होती थी। आज उसी सवाल का समाधान आयुष्मान भारत में नजर आता है। 2013 में किसी गरीब की रसोई की बात होती थी, तो धुएं की तस्वीर सामने आती थी। आज उसी समस्या का समाधान उज्ज्वला योजना में दिखता है। 2013 में महिलाओं से बैंक खाते के बारे में पूछा जाता था, तो वो चुप्पी साध लेती थीं। आज जनधन योजना के कारण, 30 करोड़ से ज्यादा बहनों का अपना बैंक अकाउंट है। 2013 में पीने के पानी के लिए कुएं और तालाबों तक जाने की मजबूरी थी। आज उसी मजबूरी का हल हर घर नल से जल योजना में मिल रहा है। यानि सिर्फ दशक नहीं बदला, बल्कि लोगों की ज़िंदगी बदली है। और दुनिया भी इस बात को नोट कर रही है, भारत के डेवलपमेंट मॉडल को स्वीकार रही है। आज भारत सिर्फ Nation of Dreams नहीं, बल्कि Nation That Delivers भी है।

साथियों,

जब कोई देश, अपने नागरिकों की सुविधा और समय को महत्व देता है, तब उस देश का समय भी बदलता है। यही आज हम भारत में अनुभव कर रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। पहले पासपोर्ट बनवाना कितना बड़ा काम था, ये आप जानते हैं। लंबी वेटिंग, बहुत सारे कॉम्प्लेक्स डॉक्यूमेंटेशन का प्रोसेस, अक्सर राज्यों की राजधानी में ही पासपोर्ट केंद्र होते थे, छोटे शहरों के लोगों को पासपोर्ट बनवाना होता था, तो वो एक-दो दिन कहीं ठहरने का इंतजाम करके चलते थे, अब वो हालात पूरी तरह बदल गया है, एक आंकड़े पर आप ध्यान दीजिए, पहले देश में सिर्फ 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, आज इनकी संख्या 550 से ज्यादा हो गई है। पहले पासपोर्ट बनवाने में, और मैं 2013 के पहले की बात कर रहा हूं, मैं पिछले शताब्दी की बात नहीं कर रहा हूं, पासपोर्ट बनवाने में जो वेटिंग टाइम 50 दिन तक होता था, वो अब 5-6 दिन तक सिमट गया है।

साथियों,

ऐसा ही ट्रांसफॉर्मेशन हमने बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी देखा है। हमारे देश में 50-60 साल पहले बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, ये कहकर कि इससे लोगों को बैंकिंग सुविधा सुलभ होगी। इस दावे की सच्चाई हम जानते हैं। हालत ये थी कि लाखों गांवों में बैंकिंग की कोई सुविधा ही नहीं थी। हमने इस स्थिति को भी बदला है। ऑनलाइन बैंकिंग तो हर घर में पहुंचाई है, आज देश के हर 5 किलोमीटर के दायरे में कोई न कोई बैंकिंग टच प्वाइंट जरूर है। और हमने सिर्फ बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का ही दायरा नहीं बढ़ाया, बल्कि बैंकिंग सिस्टम को भी मजबूत किया। आज बैंकों का NPA बहुत कम हो गया है। आज बैंकों का प्रॉफिट, एक लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए के नए रिकॉर्ड को पार कर चुका है। और इतना ही नहीं, जिन लोगों ने जनता को लूटा है, उनको भी अब लूटा हुआ धन लौटाना पड़ रहा है। जिस ED को दिन-रात गालियां दी जा रही है, ED ने 22 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक वसूले हैं। ये पैसा, कानूनी तरीके से उन पीड़ितों तक वापिस पहुंचाया जा रहा है, जिनसे ये पैसा लूटा गया था।

साथियों,

Efficiency से गवर्नमेंट Effective होती है। कम समय में ज्यादा काम हो, कम रिसोर्सेज़ में अधिक काम हो, फिजूलखर्ची ना हो, रेड टेप के बजाय रेड कार्पेट पर बल हो, जब कोई सरकार ये करती है, तो समझिए कि वो देश के संसाधनों को रिस्पेक्ट दे रही है। और पिछले 11 साल से ये हमारी सरकार की बड़ी प्राथमिकता रहा है। मैं कुछ उदाहरणों के साथ अपनी बात बताऊंगा।

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साथियों,

अतीत में हमने देखा है कि सरकारें कैसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिनिस्ट्रीज में accommodate करने की कोशिश करती थीं। लेकिन हमारी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही कई मंत्रालयों का विलय कर दिया। आप सोचिए, Urban Development अलग मंत्रालय था और Housing and Urban Poverty Alleviation अलग मंत्रालय था, हमने दोनों को मर्ज करके Housing and Urban Affairs मंत्रालय बना दिया। इसी तरह, मिनिस्ट्री ऑफ ओवरसीज़ अफेयर्स अलग था, विदेश मंत्रालय अलग था, हमने इन दोनों को भी एक साथ जोड़ दिया, पहले जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय अलग था, और पेयजल मंत्रालय अलग था, हमने इन्हें भी जोड़कर जलशक्ति मंत्रालय बना दिया। हमने राजनीतिक मजबूरी के बजाय, देश की priorities और देश के resources को आगे रखा।

साथियों,

हमारी सरकार ने रूल्स और रेगुलेशन्स को भी कम किया, उन्हें आसान बनाया। करीब 1500 ऐसे कानून थे, जो समय के साथ अपना महत्व खो चुके थे। उनको हमारी सरकार ने खत्म किया। करीब 40 हज़ार, compliances को हटाया गया। ऐसे कदमों से दो फायदे हुए, एक तो जनता को harassment से मुक्ति मिली, और दूसरा, सरकारी मशीनरी की एनर्जी भी बची। एक और Example GST का है। 30 से ज्यादा टैक्सेज़ को मिलाकर एक टैक्स बना दिया गया है। इसको process के, documentation के हिसाब से देखें तो कितनी बड़ी बचत हुई है।

साथियों,

सरकारी खरीद में पहले कितनी फिजूलखर्ची होती थी, कितना करप्शन होता था, ये मीडिया के आप लोग आए दिन रिपोर्ट करते थे। हमने, GeM यानि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म बनाया। अब सरकारी डिपार्टमेंट, इस प्लेटफॉर्म पर अपनी जरूरतें बताते हैं, इसी पर वेंडर बोली लगाते हैं और फिर ऑर्डर दिया जाता है। इसके कारण, भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है, और सरकार को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत भी हुई है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर- DBT की जो व्यवस्था भारत ने बनाई है, उसकी तो दुनिया में चर्चा है। DBT की वजह से टैक्स पेयर्स के 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा, गलत हाथों में जाने से बचे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा फर्ज़ी लाभार्थी, जिनका जन्म भी नहीं हुआ था, जो सरकारी योजनाओं का फायदा ले रहे थे, ऐसे फर्जी नामों को भी हमने कागजों से हटाया है।

साथियों,

 

हमारी सरकार टैक्स की पाई-पाई का ईमानदारी से उपयोग करती है, और टैक्सपेयर का भी सम्मान करती है, सरकार ने टैक्स सिस्टम को टैक्सपेयर फ्रेंडली बनाया है। आज ITR फाइलिंग का प्रोसेस पहले से कहीं ज्यादा सरल और तेज़ है। पहले सीए की मदद के बिना, ITR फाइल करना मुश्किल होता था। आज आप कुछ ही समय के भीतर खुद ही ऑनलाइन ITR फाइल कर पा रहे हैं। और रिटर्न फाइल करने के कुछ ही दिनों में रिफंड आपके अकाउंट में भी आ जाता है। फेसलेस असेसमेंट स्कीम भी टैक्सपेयर्स को परेशानियों से बचा रही है। गवर्नेंस में efficiency से जुड़े ऐसे अनेक रिफॉर्म्स ने दुनिया को एक नया गवर्नेंस मॉडल दिया है।

साथियों,

पिछले 10-11 साल में भारत हर सेक्टर में बदला है, हर क्षेत्र में आगे बढ़ा है। और एक बड़ा बदलाव सोच का आया है। आज़ादी के बाद के अनेक दशकों तक, भारत में ऐसी सोच को बढ़ावा दिया गया, जिसमें सिर्फ विदेशी को ही बेहतर माना गया। दुकान में भी कुछ खरीदने जाओ, तो दुकानदार के पहले बोल यही होते थे – भाई साहब लीजिए ना, ये तो इंपोर्टेड है ! आज स्थिति बदल गई है। आज लोग सामने से पूछते हैं- भाई, मेड इन इंडिया है या नहीं है?

साथियों,

आज हम भारत की मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस का एक नया रूप देख रहे हैं। अभी 3-4 दिन पहले ही एक न्यूज आई है कि भारत ने अपनी पहली MRI मशीन बना ली है। अब सोचिए, इतने दशकों तक हमारे यहां स्वदेशी MRI मशीन ही नहीं थी। अब मेड इन इंडिया MRI मशीन होगी तो जांच की कीमत भी बहुत कम हो जाएगी।

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साथियों,

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान ने, देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक नई ऊर्जा दी है। पहले दुनिया भारत को ग्लोबल मार्केट कहती थी, आज वही दुनिया, भारत को एक बड़े Manufacturing Hub के रूप में देख रही है। ये सक्सेस कितनी बड़ी है, इसके उदाहरण आपको हर सेक्टर में मिलेंगे। जैसे हमारी मोबाइल फोन इंडस्ट्री है। 2014-15 में हमारा एक्सपोर्ट, वन बिलियन डॉलर तक भी नहीं था। लेकिन एक दशक में, हम ट्वेंटी बिलियन डॉलर के फिगर से भी आगे निकल चुके हैं। आज भारत ग्लोबल टेलिकॉम और नेटवर्किंग इंडस्ट्री का एक पावर सेंटर बनता जा रहा है। Automotive Sector की Success से भी आप अच्छी तरह परिचित हैं। इससे जुड़े Components के एक्सपोर्ट में भी भारत एक नई पहचान बना रहा है। पहले हम बहुत बड़ी मात्रा में मोटर-साइकल पार्ट्स इंपोर्ट करते थे। लेकिन आज भारत में बने पार्ट्स UAE और जर्मनी जैसे अनेक देशों तक पहुंच रहे हैं। सोलर एनर्जी सेक्टर ने भी सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। हमारे सोलर सेल्स, सोलर मॉड्यूल का इंपोर्ट कम हो रहा है और एक्सपोर्ट्स 23 गुना तक बढ़ गए हैं। बीते एक दशक में हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट भी 21 गुना बढ़ा है। ये सारी अचीवमेंट्स, देश की मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी की ताकत को दिखाती है। ये दिखाती है कि भारत में कैसे हर सेक्टर में नई जॉब्स भी क्रिएट हो रही हैं।

साथियों,

TV9 की इस समिट में, विस्तार से चर्चा होगी, अनेक विषयों पर मंथन होगा। आज हम जो भी सोचेंगे, जिस भी विजन पर आगे बढ़ेंगे, वो हमारे आने वाले कल को, देश के भविष्य को डिजाइन करेगा। पिछली शताब्दी के इसी दशक में, भारत ने एक नई ऊर्जा के साथ आजादी के लिए नई यात्रा शुरू की थी। और हमने 1947 में आजादी हासिल करके भी दिखाई। अब इस दशक में हम विकसित भारत के लक्ष्य के लिए चल रहे हैं। और हमें 2047 तक विकसित भारत का सपना जरूर पूरा करना है। और जैसा मैंने लाल किले से कहा है, इसमें सबका प्रयास आवश्यक है। इस समिट का आयोजन कर, TV9 ने भी अपनी तरफ से एक positive initiative लिया है। एक बार फिर आप सभी को इस समिट की सफलता के लिए मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं हैं।

मैं TV9 को विशेष रूप से बधाई दूंगा, क्योंकि पहले भी मीडिया हाउस समिट करते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर एक छोटे से फाइव स्टार होटल के कमरे में, वो समिट होती थी और बोलने वाले भी वही, सुनने वाले भी वही, कमरा भी वही। TV9 ने इस परंपरा को तोड़ा और ये जो मॉडल प्लेस किया है, 2 साल के भीतर-भीतर देख लेना, सभी मीडिया हाउस को यही करना पड़ेगा। यानी TV9 Thinks Today वो बाकियों के लिए रास्ता खोल देगा। मैं इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आपकी पूरी टीम को, और सबसे बड़ी खुशी की बात है कि आपने इस इवेंट को एक मीडिया हाउस की भलाई के लिए नहीं, देश की भलाई के लिए आपने उसकी रचना की। 50,000 से ज्यादा नौजवानों के साथ एक मिशन मोड में बातचीत करना, उनको जोड़ना, उनको मिशन के साथ जोड़ना और उसमें से जो बच्चे सिलेक्ट होकर के आए, उनकी आगे की ट्रेनिंग की चिंता करना, ये अपने आप में बहुत अद्भुत काम है। मैं आपको बहुत बधाई देता हूं। जिन नौजवानों से मुझे यहां फोटो निकलवाने का मौका मिला है, मुझे भी खुशी हुई कि देश के होनहार लोगों के साथ, मैं अपनी फोटो निकलवा पाया। मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं दोस्तों कि आपके साथ मेरी फोटो आज निकली है। और मुझे पक्का विश्वास है कि सारी युवा पीढ़ी, जो मुझे दिख रही है, 2047 में जब देश विकसित भारत बनेगा, सबसे ज्यादा बेनिफिशियरी आप लोग हैं, क्योंकि आप उम्र के उस पड़ाव पर होंगे, जब भारत विकसित होगा, आपके लिए मौज ही मौज है। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।