
नर्मदा योजना के मुद्दे पर गुजरात सरकार के प्रवक्ता मंत्रियों का कांग्रेस पर पलटवार
बांध में दरवाजा लगाने की मंजूरी नहीं देने के पीछे केन्द्र का राजनीतिक सूत्र-संचार
सरदार सरोवर बांध में दरवाजा लगाने की मंजूरी नहीं देने की अक्षम्य निष्फलता के लिए केन्द्र की कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ही पूरी तरह से जिम्मेदार है
गुजरात सहित मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र में विस्थापितों के पुनर्वास का कोई काम बाकी नहीं
गुजरात सरकार के प्रवक्ता वित्त मंत्री नितिनभाई पटेल और ऊर्जा मंत्री सौरभभाई पटेल ने साफ तौर पर कहा है कि नर्मदा योजना के सरदार सरोवर बांध पर दरवाजा लगाने की मंजूरी नहीं देने के लिए केन्द्र की कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ही जिम्मेदार है।गुजरात कांग्रेस के नेता शक्तिसिंह गोहिल द्वारा राज्य की जनता को गुमराह करने के लिए मध्य प्रदेश और गुजरात सरकार को दोषी करार देने के सफेद झूठ के खिलाफ केन्द्र सरकार की ही अधिकृत रिपोर्टों की सिलसिलेवार जानकारियों के साथ प्रवक्ताओं ने कांग्रेस नेताओं को सीधी चुनौती देते हुए कहा है कि बांध में दरवाजा लगाने की मंजूरी नहीं देने के पीछे केन्द्र का राजनीतिक सूत्र-संचार है।
उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार ने वर्ष २००६ में ही विस्थापितों के पुनर्वास की समग्र कार्यवाही पूरी कर इससे संबंधित जो रिपोर्ट दी है, उसे आर एंड आर ग्रुप एवं नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण (एनसीए) ने मंजूर कर लिया है। सरदार सरोवर बांध पर दरवाजा लगाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने भी जनवरी-२०१० में आर एंड आर सब ग्रुप के साथ परामर्श करते हुए असरग्रस्तों के पुनर्वास की कार्यवाही पूरी कर ली थी। इतना ही नहीं, महाराष्ट्र सरकार ने भी पुनर्वास की सारी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं, जिसकी रिपोर्ट नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण के पास है।
वहीं, १२ सिंतबर, २०१२ को दिल्ली में आयोजित नर्मदा योजना की आर एंड आर सब ग्रुप एवं नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की बैठक में संबंधित भागीदार राज्यों ने असरग्रस्तों के पुनर्वास की समूची कार्यवाही पूरी होने की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
प्रवक्ता मंत्रियों ने कहा कि इसके बावजूद दिल्ली में यूपीए सरकार के किसी राजनीतिक सूत्र-संचार के तहत केन्द्र के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव की अध्यक्षता में आयोजित आर एंड आर सब ग्रुप की बैठक में कांग्रेस शासित महाराष्ट्र सरकार से दस्तावेज मांगने जैसी अत्यंत मामूली वजहों के चलते बांध में दरवाजा लगाने की मंजूरी देने के निर्णय को आगे बढ़ाया गया।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र राज्य में कुल ४१२ विस्थापितों के पुनर्वास की कार्यवाही जमीन के अभाव के चलते अटक न जाए इस हेतु गुजरात सरकार ने महाराष्ट्र सरकार की विनती को त्वरित स्वीकार करते हुए महाराष्ट्र के करीब ९० असरग्रस्तों को महाराष्ट्र सीमा के निकट गुजरात की निझर तहसील में खेती की जमीन संपादित कर सुंदर तरीके से बसाया गया था। शेष ३२२ असरग्रस्तों के पुनर्वास की संपूर्ण कार्यवाही महाराष्ट्र सरकार ने भी पूरी कर ली थी।
इस तरह, १२ सितंबर, २०१२ के रोज नर्मदा योजना के आर एंड आर सब ग्रुप ने मामूली वजहों से बांध पर दरवाजा लगाने की मंजूरी देने का काम स्थगित रखा। वहीं, मध्यप्रदेश सरकार के पुनर्वास का तो कोई प्रश्न ही नहीं था। क्योंकि आर एंड आर ग्रुप ने जनवरी-२०१० की बैठक में ही इस कार्य को मंजूर कर दिया था।
महाराष्ट्र सरकार ने भी उसके ८ जनवरी, २०१३ के पत्र के माध्यम से मामूली आपत्तियों का निपटारा कर दिया था। इसके बाद २३ जनवरी, २०१३ को दिल्ली में आर एंड आर सब ग्रुप एवं नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में संबंधित तीनों राज्यों में विस्थापितों के पुनर्वास की कार्यवाही पूरी होने की वजह से, सरदार सरोवर बांध में दरवाजा लगाने की मंजूरी देने के लिए किसी अवरोध का सवाल ही नहीं था। इसके बावजूद एक बार फिर केन्द्र सरकार के सूत्र-संचार के तहत २३ जनवरी, २०१३ की बैठक आर एंड आर ग्रुप के अध्यक्ष की बीमारी के चलते आखिरी क्षणों में रद्द कर दी गई और इस तरह बांध पर दरवाजा लगाने की मंजूरी देने का फैसला एक बार फिर अधर में लटक गया।
प्रवक्ताओं ने कहा कि यह बात गले नहीं उतरती कि शक्तिसिंह गोहिल एवं गुजरात कांग्रेस के नेता यह नहीं जानते कि नर्मदा बांध में दरवाजा लगाने की मंजूरी देने का काम किसकी वजह से अटका है। परन्तु नर्मदा योजना जल्दी पूरी करने का यश मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को मिलने के काल्पनिक भय से पीड़ित कांग्रेस के नेता बांध पर दरवाजा लगाने की केन्द्र सरकार की मंजूरी को किसी न किसी बहाने से अटकाने के लिए कैसी-कैसी साजिश एवं झूठ फैला रहे हैं, यह जानने का जनता को पूरा अधिकार है।
उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा दिए गए फैसले के तहत नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने सरदार सरोवर बांध की निर्धारित संपूर्ण ऊंचाई १३८.६८ मीटर का निर्माण कार्य पूरा करने का जो एक्शन प्लान सर्वोच्च अदालत में रखा था, उसके तहत बांध में दरवाजा लगाने सहित १३८.६८ मीटर की पूरी ऊंचाई को श्रृंखलाबद्ध तरीके से जून-२००५ में निर्धारित स्तर तक पूरा करना था। इस एक्शन प्लान को भी आठ वर्ष जितना विलंब हो चुका है। गुजरात सरकार ने समय-समय पर आयोजित नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की बैठक में यह विश्वास दिलाया है कि बांध की ऊंचाई ३१ दिसंबर, २००६ को १२१.९२ मीटर तक पहुंच गई है और बांध पर दरवाजा लगाने के लिए जरूरी सभी पूर्व तैयारियां कर ली गई हैं। बांध का दरवाजा (स्पीलवे पियर्स) का संपूर्ण कार्य करने में ३० महीने का समय लगना है।
विपक्ष के नेताओं को चुनौती देते हुए श्री नितिनभाई एवं सौरभभाई ने कहा है कि फिलहाल गुजरात में नर्मदा योजना के सरदार सरोवर जलाशय से पानी का जो जत्था मिल रहा है, वह योजना के कुल जत्थे का मात्र चौथाई हिस्सा ही है। यदि नर्मदा बांध पर दरवाजा लगाकर बांध को १३८.६८ मीटर की ऊंचाई तक ले जाया जाए तो शेष तीन गुना पानी का जत्था यानी बांध की वर्तमान क्षमता से ३४ लाख एकड़ फीट ज्यादा पानी मिल सकता है। जिससे ६.८ लाख हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन को सिंचाई और चालीस फीसदी अधिक बिजली उत्पादन किया जा सकता है। महाराष्ट्र फिलवक्त जिस बिजली संकट का सामना कर रहा है, उसे भी पर्याप्त बिजली मिल सकती है।
इतना ही नहीं, नर्मदा के बाढ़ के पानी का संपूर्ण नियंत्रण कर उसका खेती और पेयजल के लिए उपयोग किया जा सकता है। लेकिन केन्द्र में बैठी कांग्रेसनीत सरकार पानी जैसे राष्ट्रहित एवं जनता की जीवनोपयोगी आवश्यकता के मुद्दे पर भी राजनीति कर रही है।
प्रवक्ताओं ने सवाल दागते हुए कहा कि २३ जनवरी, २०१३ को दिल्ली में आर एंड आर सब ग्रुप तथा एनसीए की जो बैठक आयोजित होने वाली थी, जिसमें संबंधित राज्यों मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र के विस्थापितों के पुनर्वास का कोई मामला मंजूरी देने के आडे़ नहीं आने वाला था, उस बैठक को किन वजहों से अध्यक्ष की बीमारी के बहाने आखिरी क्षणों में स्थगित करना पड़ा।
गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इससे पूर्व जब भी प्रधानमंत्री से रूबरू मिले हैं, तब उन्होंने सरदार सरोवर बांध पर दरवाजा लगाने की मंजूरी देने की विनती की ही है। इतना ही नहीं, गुजरात की जनता का जनादेश मिलने और नई सरकार का नेतृत्व संभालने के बाद ६ फरवरी, २०१३ को दिल्ली में प्रधानमंत्री से सौजन्य मुलाकात के वक्त भी श्री मोदी ने नर्मदा बांध में दरवाजा लगाने की मंजूरी देने में हो रहे अक्षम्य विलंब पर अपनी बात पेश की थी। उस वक्त प्रधानमंत्री ने स्वयं इस मामले में केन्द्र की मंजूरी नहीं मिलने पर आश्चर्य जताया था। इसके अलावा गुजरात के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने भी प्रधानमंत्री से रूबरू मुलाकात कर नर्मदा बांध पर दरवाजा लगाने की त्वरित मंजूरी के लिए आवेदन पत्र सुपुर्द किया था।
प्रवक्ता मंत्रियों ने विरोधी दल के रूप में कांग्रेस की नकारात्मक मानसिकता और जवाबदारी को चुनौती देते हुए कहा कि ५०-५० बरसों से राजनीतिक दांवपेच में कांग्रेस ने नर्मदा योजना को पूरा नहीं होने दिया, इसके चलते सरदार पटेल का सपना अब तक पूरा नहीं हो सका। गुजरात ही नहीं महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान के लिए सरदार सरोवर योजना विकास का एजेंडा है, और जब सारे राज्य इसके लिए सहमत हैं तो सिर्फ केन्द्र सरकार ही बांध में दरवाजा लगाने की मंजूरी देने में किसी राजनीतिक इरादे से विलंब कर रही है। इसे सही ठहराने और केन्द्र की अक्षम्य निष्फलता को छिपाने के लिए श्री शक्तिसिंह गोहिल ने झूठ का सहारा लिया है, लेकिन गुजरात की जनता इससे बिल्कुल भ्रमित नहीं होगी।