Quoteप्रधानमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के मंडी में 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की जलविद्युत परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया
Quote"आज शुरू की गई जल-विद्युत परियोजनाएं, पर्यावरण-अनुकूल विकास के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं"
Quote"भारत ने 2016 में ये लक्ष्य रखा था कि वो साल 2030 तक, अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 40 प्रतिशत, गैर-जीवाश्म ऊर्जा स्रोतों से पूरा करेगा; आज हर भारतीय को इसका गर्व होगा कि भारत ने अपना ये लक्ष्य, इस साल नवंबर में ही प्राप्त कर लिया है"
Quote“प्लास्टिक हर जगह फैल गया है, प्लास्टिक नदियों में जा रहा है, इससे हिमाचल को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए हमें मिलकर प्रयास करने होंगे”
Quote"यदि भारत को आज दुनिया की फार्मेसी कहा जाता है, तो इसके पीछे हिमाचल की बहुत बड़ी ताकत है”
Quote“कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान हिमाचल प्रदेश ने ना सिर्फ दूसरे राज्यों, बल्कि दूसरे देशों की भी मदद की है"
Quote“विलंब की विचारधारा वालों ने हिमाचल के लोगों को दशकों तक इंतजार कराया; इस वजह से यहां के परियोजनाओं में कई सालों की देरी हुई”
Quote15-18 आयु वर्ग के नवयुवाओं के लिए टीका, अग्रिम पंक्ति के कर्मियों, स्वास्थ्य-कर्मियों और सह-रुग्णता वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए एहतियाती खुराक लेने के बारे में जानकारी दी
Quote"बेटियों की शादी की उम्र बढ़ाकर 21 साल करने से उन्हें पढ़ाई का पूरा समय मिलेगा और वे अपना करियर भी बना पाएंगी"
Quote"हमारी सरकार ने बीते सात वर्षों में देश की सुरक्षा बढ़ाने के लिए जो काम किए हैं, फौजियों, पूर्व फौजियों के लिए जो निर्णय लिए हैं, उसका भी बहुत बड़ा लाभ हिमाचल के लोगों को मिला है"

हिमाचल के राज्यपाल श्री राजेंद्र आर्लेकर जी, लोकप्रिय और ऊर्जावान मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर जी, पूर्व मुख्यमंत्री धुमल जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी अनुराग जी, संसद में मेरे साथी श्री सुरेश कश्यप जी, श्री किशन कपूर जी, बहन इंदु गोस्वामी जी, और हिमाचल के कोने-कोने से यहां पधारे मेरे प्यारे भाइयों और बहनों !

इस मिहिन्ने काशी विश्वनाथा रे दर्शन करने बाद... आज इस छोटी काशी मंझ, बाबा भूतनाथरा, पंच-वक्त्रारा, महामृत्युन्जयरा आशीर्वाद लैणे रा मौका मिल्या। देवभूमि रे, सभी देवी-देवतयां जो मेरा नमन।

साथियों,

हिमाचल से मेरा हमेशा से एक भावनात्मक रिश्ता रहा है। हिमाचल की धरती ने, हिमालय के उत्तुंग शिखरों ने मेरे जीवन को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई है। और आज मैं जब आपके बीच आया हूं, और मैं जब भी मंडी आता हूं तो मंडी री सेपू बड़ी, कचौरी और बदाणे रे मिट्ठा की याद आ ही जाती है।

साथियों,

आज डबल इंजन की सरकार के भी 4 साल पूरे हुए हैं। सेवा और सिद्धि के इन 4 सालों के लिए हिमाचल की जनता जर्नादन को बहुत बहुत बधाई देता हूं। और इतनी बड़ी तादाद में और ऐसी कड़ाके की ठंड में हम सबको आर्शीवाद देने के लिए आना। इसका मतलब ये है कि इन 4 साल में हिमाचल को तेज गति से आगे बढ़ते हुए आपने देखा है। जयराम जी और उनकी परिश्रमी टीम ने हिमाचल वासियों के सपनों को पूरा करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। इन 4 वर्षों में 2 साल हमने मजबूती से कोरोना से भी लड़ाई लड़ी है और विकास के कार्यों को भी रुकने नहीं दिया। बीते 4 सालों में हिमाचल को पहला एम्स मिला। हमीरपुर, मंडी, चंबा और सिरमौर में 4 नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए। हिमाचल की कनेक्टिविटी को सशक्त करने के लिए अनेक प्रयास भी जारी हैं।

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भाइयों और बहनों,

आज यहां मंच पर आने से पहले मैं हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक विकास से जुड़े कार्यक्रम में, इंवेस्टर्स मीट में शामिल हुआ। और यहां जो प्रदर्शनी लगी है। उसे देखकर भी मन अभिभूत हो गया। इसमें हिमाचल में हज़ारों करोड़ रुपए के निवेश का, युवाओं के लिए अनेक नए रोज़गार का मार्ग बना है। अभी यहां थोड़ी देर पहले 11 हज़ार करोड़ रुपए की लागत वाले 4 बड़े हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास या फिर लोकार्पण भी किया गया है। इनसे हिमाचल की आय बढ़ेगी और रोज़गार के हज़ारों अवसर भी बनेंगे। सावड़ा कुड्डु प्रोजेक्ट हो, लूहरी प्रोजेक्ट हो, धौलासिद्ध प्रोजेक्ट हो या रेणुका जी प्रोजेक्ट, ये सभी हिमाचल की आकांक्षा और देश की आवश्यकता की पूर्ति, दोनों के माध्यम से होने वाली है। सावड़ा कुड्डु बांध तो पियानो की आकृति वाला एशिया का पहला ऐसा बांध है। यहां पैदा हुई बिजली से हिमाचल को हर वर्ष लगभग सवा सौ करोड़ रुपए की आय होगी।

साथियों,

श्री रेणुकाजी हमारी आस्था का अहम केंद्र है। भगवान परशुराम और उनकी मां रेणुका जी के स्नेह की प्रतीक इस भूमि से आज देश के विकास के लिए भी एक धारा निकली है। गिरी नदी पर बन रही श्री रेणुकाजी बांध परियोजना जब पूरी हो जाएगी तो एक बड़े क्षेत्र को इससे सीधा लाभ होगा। इस प्रोजेक्ट से जो भी आय होगी उसका भी एक बड़ा हिस्सा यहीं के विकास पर खर्च होगा।

साथियों,

देश के नागरिकों का जीवन आसान बनाना, Ease of Living, हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। और इसमें बिजली की बहुत बड़ी भूमिका है। बिजली पढ़ने के लिए, बिजली घर के काम निपटाने के लिए, बिजली उद्योगों के लिए और इतना ही नहीं अब तो बिजली मोबाइल चार्ज करने के लिए, उसके बिना कोई रह ही नहीं सकता। आप जानते हैं हमारी सरकार का ease of living मॉडल, पर्यावरण के प्रति सचेत है और पर्यावरण की रक्षा करने में भी मदद कर रहा है। आज यहां जो हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है, वो भी climate friendly New India की तरफ देश का एक मजबूत कदम है। आज पूरा विश्व भारत की इस बात की प्रशंसा कर रहा है कि हमारा देश किस तरह पर्यावरण को बचाते हुए विकास को गति दे रहा है। सोलर पावर से लेकर हाइड्रो पावर तक, पवन ऊर्जा से लेकर ग्रीन हाइड्रोजन तक, हमारा देश renewable energy के हर संसाधन को पूरी तरह से इस्तेमाल करने के लिए निरंतर काम कर रहा है। मकसद यही है कि देश के नागरिकों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ, पर्यावरण की भी रक्षा हो। और भारत अपने लक्ष्यों को किस तरह प्राप्त कर रहा है, इसका एक उदाहरण देश की बढ़ती installed electricity capacity भी है।

 

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साथियों,

भारत ने 2016 में ये लक्ष्य रखा था कि वो साल 2030 तक, अपनी installed electricity capacity का 40 प्रतिशत, non-fossil energy sources से पूरा करेगा। आज हर भारतीय को इसका गर्व होगा कि भारत ने अपना ये लक्ष्य, इस साल नवंबर में ही प्राप्त कर लिया है। यानि जो लक्ष्य 2030 का था, भारत ने वो 2021 में ही हासिल कर लिया है। ये है आज भारत के काम करने की रफ्तार, हमारे काम करने की रफ्तार।

साथियों,

पहाड़ों को प्लास्टिक की वजह से जो नुकसान हो रहा है, हमारी सरकार उसे लेकर भी सतर्क है। सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ देशव्यापी अभियान के साथ ही हमारी सरकार, प्लास्टिक Waste मैनेजमेंट पर भी काम कर रही है। प्लास्टिक कचरे को री-सायकिल करके आज उसका इस्तेमाल सड़क बनाने में हो रहा है। आज आपसे बात करते हुए मैं हिमाचल आने वाले, देश के कोने कोने से लोग यहां आते हैं। हिमाचल आने वाले सभी पर्यटकों से भी एक आग्रह करना चाहता हूं। हिमाचल को स्वच्छ रखने में, प्लास्टिक और अन्य कचरे से मुक्त रखने में पर्यटकों का भी दायित्व बहुत बड़ा है। इधर उधर फैला प्लास्टिक, नदियों में जाता प्लास्टिक, हिमाचल को जो नुकसान पहुंचा रहा है, उसे रोकने के लिए हमें मिलकर प्रयास करना होगा।

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साथियों,

देवभूमि हिमाचल को प्रकृति से जो वरदान मिला हुआ है, हमें उसे संरक्षित करना ही होगा। यहां टूरिज्म के साथ ही औद्योगिक विकास की भी अपार संभावना हैं। हमारी सरकार इस दिशा में भी लगातार काम कर रही है। हमारा जोर विशेष तौर पर Food Industry, Farming और Pharma पर है। और यहां फंड तो है ही है। टूरिज्म का फंड हिमाचल से बढ़कर कहां मिलेगा। हिमाचल की फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज में विस्तार की बहुत क्षमता है। इसलिए हमारी सरकार मेगा फूड पार्क से लेकर कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही है। फार्मिंग में, नैचुरल फार्मिंग को, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी डबल इंजन की सरकार निरंतर काम कर रही है। आज प्राकृतिक खेती से हुई उपज की दुनिया भर में मांग बढ़ रही है। केमिकल मुक्त कृषि उत्पाद आज विशेष आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। मुझे खुशी है कि हिमाचल इसमें भी अच्छा काम कर रहा है, राज्य में अनेक बायो-विलेज बनाए गए हैं। और मैं आज विशेष रूप से हिमाचल के किसानों को हृदय से अभिनंदन करना चाहता हूं कि उन्होंने प्राकृतिक खेती का रास्ता चुना है। मुझे बताया गया करीब – करीब डेढ़ लाख से ज्यादा किसान इतने छोटे से राज्य में और बहुत ही कम समय में केमिकल मुक्त प्राकृतिक खेती के रास्ते पर चल पड़े हैं। और मैं आज अभी प्रदर्शनी में प्राकृतिक खेती के उत्पाद देख रहा था। उसकी साईज भी इतनी लुभावनी थी, उसके रंग रूप इतने लुभावने थे। मुझे बहुत खुशी हुई, मैं हिमाचल को, हिमाचल के किसानों को इस बात के लिए हृदय से अभिनंदन करता हूं और देश भर के किसानों को आग्रह करता हूं कि हिमाचल ने जो रास्ता चुना है यह रास्ता उत्तम किसानी का एक उत्तम मार्ग है। आज जब पैक्ड फूड का चलन बढ़ रहा है तो हिमाचल, इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है।

साथियों,

हिमाचल प्रदेश, देश के सबसे महत्वपूर्ण फार्मा Hub में से एक है। भारत को आज pharmacy of the world कहा जाता है तो इसके पीछे हिमाचल की बहुत बड़ी ताकत है। कोरोना वैश्विक महामारी के दौरान हिमाचल प्रदेश ने ना सिर्फ दूसरे राज्यों, बल्कि दूसरे देशों की भी मदद की है। फार्मा इंडस्ट्री के साथ ही हमारी सरकार आयुष इंडस्ट्री- नैचुरल मेडिसिन से जुड़े उद्यमियों को भी बढ़ावा दे रही है।

साथियों,

आज देश में सरकार चलाने के दो अलग-अलग मॉडल काम कर रहे हैं। एक मॉडल है- सबका साथ- सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास। वहीं दूसरा मॉडल है- खुद का स्वार्थ, परिवार का स्वार्थ और विकास भी खुद के परिवार का है। अगर हम हिमाचल में ही देखें तो आज पहला मॉडल, जिस मॉडल को हम लेकर के आपके पास आए वो मॉडल पूरी शक्ति से राज्य के विकास में जुटा हुआ है। इसी का परिणाम है कि हिमाचल ने अपनी पूरी वयस्क जनसंख्या को वैक्सीन देने में बाकी सबसे बाजी मार ली। यहां जो सरकार में हैं, वो राजनीतिक स्वार्थ में डूबे नहीं हैं बल्कि उन्होंने पूरा ध्यान, हिमाचल के एक एक नागरिक को वैक्सीन कैसे मिले, इसमे लगाया है। और मुझे एक बार वर्चुअली इस काम में जुटे लोगों से बात करने का सौभाग्य मिला था। बड़ा प्रेरक, एक – एक की बात इतनी प्रेरक थी

भाइयो – बहनों

हिमाचल के लोगों के स्वास्थ्य की चिंता थी इसलिए दूर-दराज के क्षेत्रों में भी, कष्ट उठाकर के भी, सबने वैक्सीन पहुंचाई है। ये है हमारा सेवा भाव, लोगों के प्रति दायित्व का ऐहसास है। यहां सरकार ने लोगों के विकास के लिए अनेक नई योजनाओं को लागू किया है और केंद्र सरकार की योजनाओं का भी बेहतर तरीके से विस्तार कर रही है। ये दिखाता है कि हिमाचल सरकार को लोगों की, गरीबों की कितनी चिंता है।

साथियों,

आज हमारी सरकार, बेटियों को, बेटों के समान अधिकार देने के लिए काम कर रही है। बेटा-बेटी एक समान। और इतनी बड़ी मात्रा में माताएं – बहनें आई हैं। तो उनके आर्शीवाद हमे इस काम के लिए ताकत देते हैं। बेटा – बेटी एक समान। हमने तय किया है कि बेटियों की शादी की उम्र भी वही होनी चाहिए, जिस उम्र में बेटों को शादी की इजाजत मिलती है। देखिए सबसे ज्यादा तालियां हमारी बहनें बजा रही हैं। बेटियों की शादी की उम्र 21 साल होने से, उन्हें पढ़ने के लिए पूरा समय भी मिलेगा और वो अपना करियर भी बना पाएंगी। हमारे इन सारे प्रयासों के बीच, आप एक दूसरा मॉडल भी देख रहे हैं जो सिर्फ अपना स्वार्थ देखता है, अपना वोटबैंक देखता है। जिन राज्यों में वो सरकार चला रहे हैं, उसमें प्राथमिकता गरीबों के कल्याण को नहीं बल्कि खुद के परिवार के कल्याण की ही है। मैं जरा चाहुंगा, देश के पंडितो से आग्रह करूंगा जरा उन राज्यों का वैक्सीनेशन रिकॉर्ड भी जरा देख लीजिए। उनका वैक्सीनेशन रिकॉर्ड भी इस बात का गवाह है कि उन्हें अपने राज्य के लोगों की चिंता नहीं है।

साथियों,

हमारी सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ, सतर्कता के साथ, आपकी हर आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए निरंतर काम कर रही है। अब सरकार ने तय किया है कि 15 से 18 साल के बीच जो बच्चें हैं, बेटे – बेटियां हैं। उनको भी 3 जनवरी, सोमवार से वैक्सीन लगाना शुरू हो जाएगा। 3 जनवरी, सोमवार से अभियान शुरू होने वाला है। मुझे विश्वास है, हिमाचल प्रदेश, इसमें भी शानदार काम करके दिखाएगा। देश को दिशा देने का काम हिमाचल करके रहेगा। हमारे जो हेल्थ सेक्टर के लोग हैं, फ्रंटलाइन वर्कर हैं, वो पिछले दो साल से कोरोना से लड़ाई में देश की एक बहुत बड़ी ताकत बने हुए हैं। उन्हें भी 10 जनवरी से प्री-कॉशन डोज देने का काम शुरू होगा। 60 साल से ऊपर के बुजुर्ग जिन्हें पहले से गंभीर बीमारियां हैं, उन्हें भी डॉक्टरों की सलाह पर प्री-कॉशन डोज का विकल्प दिया गया है। ये सारे प्रयास, हिमाचल के लोगों को सुरक्षा कवच तो देंगे ही, यहां के लिए जरूरी टूरिज्म सेक्टर को भी बचाने में और आगे बढ़ाने में ये बहुत मदद करेंगे।

साथियों,

हर देश में अलग-अलग विचारधाराएं होती हैं, लेकिन आज हमारे देश के लोग स्पष्ट तौर पर दो विचारधाराओं को देख रहे हैं। एक विचारधारा विलंब की है और दूसरी विकास की है। विलंब की विचारधारा वालों ने पहाड़ों पर रहने वाले लोगों की कभी परवाह नहीं की। चाहे इंफ्रास्ट्रक्चर का काम हो, लोगों को बुनियादी सुविधाएं देने का काम हो, विलंब की विचारधारा वालों ने, हिमाचल के लोगों को दशकों का इंतजार करवाया। इसी वजह से अटल टनल के काम में बरसों का विलंब हुआ। रेणुका जी परियोजना में भी तीन दशकों का विलंब हुआ। उन लोगों की विलंब की विचारधारा से अलग, हमारा कमिटमेंट सिर्फ और सिर्फ विकास के लिए है। तेज गति के विकास के लिए है। हमने अटल टनल का काम पूरा करवाया। हमने चंडीगढ़ से मनाली और शिमला को जोड़ने वाली सड़क का चौड़ीकरण किया। हम सिर्फ हाईवे और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर ही विकसित नहीं कर रहे बल्कि अनेकों जगहों पर रोपवे भी लगवा रहे हैं। हम दूर-दराज के गावों को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से भी जोड़ रहे हैं।

साथियों,

बीते 6-7 सालों में जिस तरह डबल इंजन की सरकार ने काम किया है, उससे हमारी बहनों के जीवन में विशेष तौर पर बहुत बदलाव आया है। पहले खाना बनाने के लिए लकड़ी के इंतजाम में हमारी बहनों का बहुत समय बीत जाता था। आज घर-घर गैस सिलेंडर पहुंचा है। शौचालय की सुविधा मिलने से भी बहनों को बहुत राहत मिली है। पानी के लिए यहां की बहनों-बेटियों को कितनी मेहनत करनी पड़ती थी, ये आपसे बेहतर और कौन जानता है। एक समय था जब पानी का कनेक्शन पाने के लिए ही कई-कई दिनों तक सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते थे। आज सरकार खुद पानी का कनेक्शन देने के लिए आपके दरवाज़े पर दस्तक दे रही है। आज़ादी के 7 दशक में हिमाचल में 7 लाख परिवारों को पाइप से पानी मिला था। 7 दशक में 7 लाख परिवारों को। सिर्फ 2 साल के भीतर ही और वो भी कोरोना काल होते बावजूद भी 7 लाख से अधिक नए परिवारों को पाइप से पानी मिल चुका है। 7 दशक में 7 लाख कितने? सात दशक में कितने ? जरा उधर से भी आवाज आए कितने? 7 दशक में 7 लाख। और हमने दो साल में दिए सात लाख और नए। कितने दिए? सात लाख घरों में पानी पहुंचाने का काम। अब लगभग 90 प्रतिशत आबादी के पास नल से जल की सुविधा है। डबल इंजन सरकार का यही लाभ होता है। केंद्र सरकार का एक इंजन जिस योजना को शुरू करता है, राज्य सरकार का दूसरा इंजन उस योजना को तेज गति से आगे ले जाता है। अब जैसे आयुष्मान भारत योजना का उदाहरण है। इस योजना को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने हिमकेयर योजना शुरू की और ज्यादा लोगों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज के दायरे में लाई। इन योजनाओं में हिमाचल के लगभग सवा लाख मरीज़ों को फ्री इलाज मिल चुका है। इसी प्रकार यहां की सरकार ने उज्जवला योजना के लाभार्थियों का विस्तार गृहणी सुविधा योजना से किया, जिससे लाखों बहनों को एक नई मदद मिली। केंद्र सरकार इस मुश्किल समय में जो मुफ्त राशन पहुंचा रही है, उसको तेज़ी से हर लाभार्थी तक पहुंचाने का काम भी राज्य सरकार यहां कर रही है।

साथियों,

हिमाचल वीरों की धरती है, हिमाचल अनुशासन की धरती है, देश की आन-बान और शान को बढ़ाने वाली धरती है। यहां के घर-घर में देश की रक्षा करने वाले वीर बेटे-बेटियां हैं। हमारी सरकार ने बीते सात वर्षों में देश की सुरक्षा बढ़ाने के लिए जो काम किए हैं, फौजियों, पूर्व फौजियों के लिए जो निर्णय लिए हैं, उसका भी बहुत बड़ा लाभ हिमाचल के लोगों को हुआ है। वन रैंक वन पेंशन का दशकों से अटका हुआ फैसला, विलम्ब वाली नीति, वो अटका हुआ फैसला हो या फिर सेना को आधुनिक हथियार और बुलेट प्रूफ जैकेट देने का काम, ठंड में परेशानी कम करने करने के लिए जरूरी साधन-संसाधन देना हो या फिर आने-जाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी, सरकार के प्रयासों का लाभ हिमाचल के हर घर तक पहुंच रहा है।

साथियों,

भारत में पर्यटन और तीर्थाटन आपस में जुड़ते चले जा रहे हैं। तीर्थाटन में हिमाचल का जो सामर्थ्य है, उसका कोई मुकाबला नहीं है। ये शिव और शक्ति का स्थान है। पंच कैलाश में से 3 कैलाश हिमाचल प्रदेश में हैं। इसी प्रकार हिमाचल में कई शक्तिपीठ भी हैं। बौद्ध आस्था और संस्कृति का भी अहम स्थान यहां मौजूद हैं। डबल इंजन की सरकार हिमाचल की इस ताकत को कई गुणा बढ़ाने वाली है।

मंडी में शिवधाम का निर्माण भी इसी प्रतिबद्धता का परिणाम है।

भाइयों और बहनों,

आज जब भारत आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, तब हिमाचल भी पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने की स्वर्ण जयंती वर्ष मना रहा है। यानि ये हिमाचल के लिए नई संभावनाओं पर काम करने का भी समय है। हिमाचल ने हर राष्ट्रीय संकल्प की सिद्धि में अग्रणी भूमिका निभाई है। आने वाले समय में भी ये उत्साह जारी रहेगा। एक बार फिर विकास और विश्वास के 5वें वर्ष की और नववर्ष की मंगलकामनाएं। आपको अनेक – अनेक शुभकामनाएं इतना प्यार देने के लिए, इतने आर्शीवाद देने के लिए। मैं फिर एक बाद इस देवभूमि को प्रणाम करता हूं।

मेरे साथ बोलिये,

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

बहुत – बहुत धन्यवाद।

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आज भारत सिर्फ Nation of Dreams नहीं, बल्कि Nation That Delivers भी है: TV9 समिट में पीएम मोदी
March 28, 2025
QuoteToday, the world's eyes are on India: PM
QuoteIndia's youth is rapidly becoming skilled and driving innovation forward: PM
Quote"India First" has become the mantra of India's foreign policy: PM
QuoteToday, India is not just participating in the world order but also contributing to shaping and securing the future: PM
QuoteIndia has given Priority to humanity over monopoly: PM
QuoteToday, India is not just a Nation of Dreams but also a Nation That Delivers: PM

श्रीमान रामेश्वर गारु जी, रामू जी, बरुन दास जी, TV9 की पूरी टीम, मैं आपके नेटवर्क के सभी दर्शकों का, यहां उपस्थित सभी महानुभावों का अभिनंदन करता हूं, इस समिट के लिए बधाई देता हूं।

TV9 नेटवर्क का विशाल रीजनल ऑडियंस है। और अब तो TV9 का एक ग्लोबल ऑडियंस भी तैयार हो रहा है। इस समिट में अनेक देशों से इंडियन डायस्पोरा के लोग विशेष तौर पर लाइव जुड़े हुए हैं। कई देशों के लोगों को मैं यहां से देख भी रहा हूं, वे लोग वहां से वेव कर रहे हैं, हो सकता है, मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं। मैं यहां नीचे स्क्रीन पर हिंदुस्तान के अनेक शहरों में बैठे हुए सब दर्शकों को भी उतने ही उत्साह, उमंग से देख रहा हूं, मेरी तरफ से उनका भी स्वागत है।

साथियों,

आज विश्व की दृष्टि भारत पर है, हमारे देश पर है। दुनिया में आप किसी भी देश में जाएं, वहां के लोग भारत को लेकर एक नई जिज्ञासा से भरे हुए हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो देश 70 साल में ग्यारहवें नंबर की इकोनॉमी बना, वो महज 7-8 साल में पांचवे नंबर की इकोनॉमी बन गया? अभी IMF के नए आंकड़े सामने आए हैं। वो आंकड़े कहते हैं कि भारत, दुनिया की एकमात्र मेजर इकोनॉमी है, जिसने 10 वर्षों में अपने GDP को डबल किया है। बीते दशक में भारत ने दो लाख करोड़ डॉलर, अपनी इकोनॉमी में जोड़े हैं। GDP का डबल होना सिर्फ आंकड़ों का बदलना मात्र नहीं है। इसका impact देखिए, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, और ये 25 करोड़ लोग एक नियो मिडिल क्लास का हिस्सा बने हैं। ये नियो मिडिल क्लास, एक प्रकार से नई ज़िंदगी शुरु कर रहा है। ये नए सपनों के साथ आगे बढ़ रहा है, हमारी इकोनॉमी में कंट्रीब्यूट कर रहा है, और उसको वाइब्रेंट बना रहा है। आज दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे भारत में है। ये युवा, तेज़ी से स्किल्ड हो रहा है, इनोवेशन को गति दे रहा है। और इन सबके बीच, भारत की फॉरेन पॉलिसी का मंत्र बन गया है- India First, एक जमाने में भारत की पॉलिसी थी, सबसे समान रूप से दूरी बनाकर चलो, Equi-Distance की पॉलिसी, आज के भारत की पॉलिसी है, सबके समान रूप से करीब होकर चलो, Equi-Closeness की पॉलिसी। दुनिया के देश भारत की ओपिनियन को, भारत के इनोवेशन को, भारत के एफर्ट्स को, जैसा महत्व आज दे रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। आज दुनिया की नजर भारत पर है, आज दुनिया जानना चाहती है, What India Thinks Today.

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साथियों,

भारत आज, वर्ल्ड ऑर्डर में सिर्फ पार्टिसिपेट ही नहीं कर रहा, बल्कि फ्यूचर को शेप और सेक्योर करने में योगदान दे रहा है। दुनिया ने ये कोरोना काल में अच्छे से अनुभव किया है। दुनिया को लगता था कि हर भारतीय तक वैक्सीन पहुंचने में ही, कई-कई साल लग जाएंगे। लेकिन भारत ने हर आशंका को गलत साबित किया। हमने अपनी वैक्सीन बनाई, हमने अपने नागरिकों का तेज़ी से वैक्सीनेशन कराया, और दुनिया के 150 से अधिक देशों तक दवाएं और वैक्सीन्स भी पहुंचाईं। आज दुनिया, और जब दुनिया संकट में थी, तब भारत की ये भावना दुनिया के कोने-कोने तक पहुंची कि हमारे संस्कार क्या हैं, हमारा तौर-तरीका क्या है।

साथियों,

अतीत में दुनिया ने देखा है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब भी कोई वैश्विक संगठन बना, उसमें कुछ देशों की ही मोनोपोली रही। भारत ने मोनोपोली नहीं बल्कि मानवता को सर्वोपरि रखा। भारत ने, 21वीं सदी के ग्लोबल इंस्टीट्यूशन्स के गठन का रास्ता बनाया, और हमने ये ध्यान रखा कि सबकी भागीदारी हो, सबका योगदान हो। जैसे प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती है। देश कोई भी हो, इन आपदाओं से इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान होता है। आज ही म्यांमार में जो भूकंप आया है, आप टीवी पर देखें तो बहुत बड़ी-बड़ी इमारतें ध्वस्त हो रही हैं, ब्रिज टूट रहे हैं। और इसलिए भारत ने Coalition for Disaster Resilient Infrastructure - CDRI नाम से एक वैश्विक नया संगठन बनाने की पहल की। ये सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार करने का संकल्प है। भारत का प्रयास है, प्राकृतिक आपदा से, पुल, सड़कें, बिल्डिंग्स, पावर ग्रिड, ऐसा हर इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रहे, सुरक्षित निर्माण हो।

साथियों,

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हर देश का मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। ऐसी ही एक चुनौती है, हमारे एनर्जी रिसोर्सेस की। इसलिए पूरी दुनिया की चिंता करते हुए भारत ने International Solar Alliance (ISA) का समाधान दिया है। ताकि छोटे से छोटा देश भी सस्टेनबल एनर्जी का लाभ उठा सके। इससे क्लाइमेट पर तो पॉजिटिव असर होगा ही, ये ग्लोबल साउथ के देशों की एनर्जी नीड्स को भी सिक्योर करेगा। और आप सबको ये जानकर गर्व होगा कि भारत के इस प्रयास के साथ, आज दुनिया के सौ से अधिक देश जुड़ चुके हैं।

साथियों,

बीते कुछ समय से दुनिया, ग्लोबल ट्रेड में असंतुलन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी challenges का सामना कर रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भी भारत ने दुनिया के साथ मिलकर नए प्रयास शुरु किए हैं। India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC), ऐसा ही एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। ये प्रोजेक्ट, कॉमर्स और कनेक्टिविटी के माध्यम से एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को जोड़ेगा। इससे आर्थिक संभावनाएं तो बढ़ेंगी ही, दुनिया को अल्टरनेटिव ट्रेड रूट्स भी मिलेंगे। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन भी और मजबूत होगी।

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साथियों,

ग्लोबल सिस्टम्स को, अधिक पार्टिसिपेटिव, अधिक डेमोक्रेटिक बनाने के लिए भी भारत ने अनेक कदम उठाए हैं। और यहीं, यहीं पर ही भारत मंडपम में जी-20 समिट हुई थी। उसमें अफ्रीकन यूनियन को जी-20 का परमानेंट मेंबर बनाया गया है। ये बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम था। इसकी मांग लंबे समय से हो रही थी, जो भारत की प्रेसीडेंसी में पूरी हुई। आज ग्लोबल डिसीजन मेकिंग इंस्टीट्यूशन्स में भारत, ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज़ बन रहा है। International Yoga Day, WHO का ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिए ग्लोबल फ्रेमवर्क, ऐसे कितने ही क्षेत्रों में भारत के प्रयासों ने नए वर्ल्ड ऑर्डर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, और ये तो अभी शुरूआत है, ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत का सामर्थ्य नई ऊंचाई की तरफ बढ़ रहा है।

साथियों,

21वीं सदी के 25 साल बीत चुके हैं। इन 25 सालों में 11 साल हमारी सरकार ने देश की सेवा की है। और जब हम What India Thinks Today उससे जुड़ा सवाल उठाते हैं, तो हमें ये भी देखना होगा कि Past में क्या सवाल थे, क्या जवाब थे। इससे TV9 के विशाल दर्शक समूह को भी अंदाजा होगा कि कैसे हम, निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक, Aspirations से Achievement तक, Desperation से Development तक पहुंचे हैं। आप याद करिए, एक दशक पहले, गांव में जब टॉयलेट का सवाल आता था, तो माताओं-बहनों के पास रात ढलने के बाद और भोर होने से पहले का ही जवाब होता था। आज उसी सवाल का जवाब स्वच्छ भारत मिशन से मिलता है। 2013 में जब कोई इलाज की बात करता था, तो महंगे इलाज की चर्चा होती थी। आज उसी सवाल का समाधान आयुष्मान भारत में नजर आता है। 2013 में किसी गरीब की रसोई की बात होती थी, तो धुएं की तस्वीर सामने आती थी। आज उसी समस्या का समाधान उज्ज्वला योजना में दिखता है। 2013 में महिलाओं से बैंक खाते के बारे में पूछा जाता था, तो वो चुप्पी साध लेती थीं। आज जनधन योजना के कारण, 30 करोड़ से ज्यादा बहनों का अपना बैंक अकाउंट है। 2013 में पीने के पानी के लिए कुएं और तालाबों तक जाने की मजबूरी थी। आज उसी मजबूरी का हल हर घर नल से जल योजना में मिल रहा है। यानि सिर्फ दशक नहीं बदला, बल्कि लोगों की ज़िंदगी बदली है। और दुनिया भी इस बात को नोट कर रही है, भारत के डेवलपमेंट मॉडल को स्वीकार रही है। आज भारत सिर्फ Nation of Dreams नहीं, बल्कि Nation That Delivers भी है।

साथियों,

जब कोई देश, अपने नागरिकों की सुविधा और समय को महत्व देता है, तब उस देश का समय भी बदलता है। यही आज हम भारत में अनुभव कर रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। पहले पासपोर्ट बनवाना कितना बड़ा काम था, ये आप जानते हैं। लंबी वेटिंग, बहुत सारे कॉम्प्लेक्स डॉक्यूमेंटेशन का प्रोसेस, अक्सर राज्यों की राजधानी में ही पासपोर्ट केंद्र होते थे, छोटे शहरों के लोगों को पासपोर्ट बनवाना होता था, तो वो एक-दो दिन कहीं ठहरने का इंतजाम करके चलते थे, अब वो हालात पूरी तरह बदल गया है, एक आंकड़े पर आप ध्यान दीजिए, पहले देश में सिर्फ 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, आज इनकी संख्या 550 से ज्यादा हो गई है। पहले पासपोर्ट बनवाने में, और मैं 2013 के पहले की बात कर रहा हूं, मैं पिछले शताब्दी की बात नहीं कर रहा हूं, पासपोर्ट बनवाने में जो वेटिंग टाइम 50 दिन तक होता था, वो अब 5-6 दिन तक सिमट गया है।

साथियों,

ऐसा ही ट्रांसफॉर्मेशन हमने बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी देखा है। हमारे देश में 50-60 साल पहले बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, ये कहकर कि इससे लोगों को बैंकिंग सुविधा सुलभ होगी। इस दावे की सच्चाई हम जानते हैं। हालत ये थी कि लाखों गांवों में बैंकिंग की कोई सुविधा ही नहीं थी। हमने इस स्थिति को भी बदला है। ऑनलाइन बैंकिंग तो हर घर में पहुंचाई है, आज देश के हर 5 किलोमीटर के दायरे में कोई न कोई बैंकिंग टच प्वाइंट जरूर है। और हमने सिर्फ बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का ही दायरा नहीं बढ़ाया, बल्कि बैंकिंग सिस्टम को भी मजबूत किया। आज बैंकों का NPA बहुत कम हो गया है। आज बैंकों का प्रॉफिट, एक लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए के नए रिकॉर्ड को पार कर चुका है। और इतना ही नहीं, जिन लोगों ने जनता को लूटा है, उनको भी अब लूटा हुआ धन लौटाना पड़ रहा है। जिस ED को दिन-रात गालियां दी जा रही है, ED ने 22 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक वसूले हैं। ये पैसा, कानूनी तरीके से उन पीड़ितों तक वापिस पहुंचाया जा रहा है, जिनसे ये पैसा लूटा गया था।

साथियों,

Efficiency से गवर्नमेंट Effective होती है। कम समय में ज्यादा काम हो, कम रिसोर्सेज़ में अधिक काम हो, फिजूलखर्ची ना हो, रेड टेप के बजाय रेड कार्पेट पर बल हो, जब कोई सरकार ये करती है, तो समझिए कि वो देश के संसाधनों को रिस्पेक्ट दे रही है। और पिछले 11 साल से ये हमारी सरकार की बड़ी प्राथमिकता रहा है। मैं कुछ उदाहरणों के साथ अपनी बात बताऊंगा।

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साथियों,

अतीत में हमने देखा है कि सरकारें कैसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिनिस्ट्रीज में accommodate करने की कोशिश करती थीं। लेकिन हमारी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही कई मंत्रालयों का विलय कर दिया। आप सोचिए, Urban Development अलग मंत्रालय था और Housing and Urban Poverty Alleviation अलग मंत्रालय था, हमने दोनों को मर्ज करके Housing and Urban Affairs मंत्रालय बना दिया। इसी तरह, मिनिस्ट्री ऑफ ओवरसीज़ अफेयर्स अलग था, विदेश मंत्रालय अलग था, हमने इन दोनों को भी एक साथ जोड़ दिया, पहले जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय अलग था, और पेयजल मंत्रालय अलग था, हमने इन्हें भी जोड़कर जलशक्ति मंत्रालय बना दिया। हमने राजनीतिक मजबूरी के बजाय, देश की priorities और देश के resources को आगे रखा।

साथियों,

हमारी सरकार ने रूल्स और रेगुलेशन्स को भी कम किया, उन्हें आसान बनाया। करीब 1500 ऐसे कानून थे, जो समय के साथ अपना महत्व खो चुके थे। उनको हमारी सरकार ने खत्म किया। करीब 40 हज़ार, compliances को हटाया गया। ऐसे कदमों से दो फायदे हुए, एक तो जनता को harassment से मुक्ति मिली, और दूसरा, सरकारी मशीनरी की एनर्जी भी बची। एक और Example GST का है। 30 से ज्यादा टैक्सेज़ को मिलाकर एक टैक्स बना दिया गया है। इसको process के, documentation के हिसाब से देखें तो कितनी बड़ी बचत हुई है।

साथियों,

सरकारी खरीद में पहले कितनी फिजूलखर्ची होती थी, कितना करप्शन होता था, ये मीडिया के आप लोग आए दिन रिपोर्ट करते थे। हमने, GeM यानि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म बनाया। अब सरकारी डिपार्टमेंट, इस प्लेटफॉर्म पर अपनी जरूरतें बताते हैं, इसी पर वेंडर बोली लगाते हैं और फिर ऑर्डर दिया जाता है। इसके कारण, भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है, और सरकार को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत भी हुई है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर- DBT की जो व्यवस्था भारत ने बनाई है, उसकी तो दुनिया में चर्चा है। DBT की वजह से टैक्स पेयर्स के 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा, गलत हाथों में जाने से बचे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा फर्ज़ी लाभार्थी, जिनका जन्म भी नहीं हुआ था, जो सरकारी योजनाओं का फायदा ले रहे थे, ऐसे फर्जी नामों को भी हमने कागजों से हटाया है।

साथियों,

 

हमारी सरकार टैक्स की पाई-पाई का ईमानदारी से उपयोग करती है, और टैक्सपेयर का भी सम्मान करती है, सरकार ने टैक्स सिस्टम को टैक्सपेयर फ्रेंडली बनाया है। आज ITR फाइलिंग का प्रोसेस पहले से कहीं ज्यादा सरल और तेज़ है। पहले सीए की मदद के बिना, ITR फाइल करना मुश्किल होता था। आज आप कुछ ही समय के भीतर खुद ही ऑनलाइन ITR फाइल कर पा रहे हैं। और रिटर्न फाइल करने के कुछ ही दिनों में रिफंड आपके अकाउंट में भी आ जाता है। फेसलेस असेसमेंट स्कीम भी टैक्सपेयर्स को परेशानियों से बचा रही है। गवर्नेंस में efficiency से जुड़े ऐसे अनेक रिफॉर्म्स ने दुनिया को एक नया गवर्नेंस मॉडल दिया है।

साथियों,

पिछले 10-11 साल में भारत हर सेक्टर में बदला है, हर क्षेत्र में आगे बढ़ा है। और एक बड़ा बदलाव सोच का आया है। आज़ादी के बाद के अनेक दशकों तक, भारत में ऐसी सोच को बढ़ावा दिया गया, जिसमें सिर्फ विदेशी को ही बेहतर माना गया। दुकान में भी कुछ खरीदने जाओ, तो दुकानदार के पहले बोल यही होते थे – भाई साहब लीजिए ना, ये तो इंपोर्टेड है ! आज स्थिति बदल गई है। आज लोग सामने से पूछते हैं- भाई, मेड इन इंडिया है या नहीं है?

साथियों,

आज हम भारत की मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस का एक नया रूप देख रहे हैं। अभी 3-4 दिन पहले ही एक न्यूज आई है कि भारत ने अपनी पहली MRI मशीन बना ली है। अब सोचिए, इतने दशकों तक हमारे यहां स्वदेशी MRI मशीन ही नहीं थी। अब मेड इन इंडिया MRI मशीन होगी तो जांच की कीमत भी बहुत कम हो जाएगी।

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साथियों,

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान ने, देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक नई ऊर्जा दी है। पहले दुनिया भारत को ग्लोबल मार्केट कहती थी, आज वही दुनिया, भारत को एक बड़े Manufacturing Hub के रूप में देख रही है। ये सक्सेस कितनी बड़ी है, इसके उदाहरण आपको हर सेक्टर में मिलेंगे। जैसे हमारी मोबाइल फोन इंडस्ट्री है। 2014-15 में हमारा एक्सपोर्ट, वन बिलियन डॉलर तक भी नहीं था। लेकिन एक दशक में, हम ट्वेंटी बिलियन डॉलर के फिगर से भी आगे निकल चुके हैं। आज भारत ग्लोबल टेलिकॉम और नेटवर्किंग इंडस्ट्री का एक पावर सेंटर बनता जा रहा है। Automotive Sector की Success से भी आप अच्छी तरह परिचित हैं। इससे जुड़े Components के एक्सपोर्ट में भी भारत एक नई पहचान बना रहा है। पहले हम बहुत बड़ी मात्रा में मोटर-साइकल पार्ट्स इंपोर्ट करते थे। लेकिन आज भारत में बने पार्ट्स UAE और जर्मनी जैसे अनेक देशों तक पहुंच रहे हैं। सोलर एनर्जी सेक्टर ने भी सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। हमारे सोलर सेल्स, सोलर मॉड्यूल का इंपोर्ट कम हो रहा है और एक्सपोर्ट्स 23 गुना तक बढ़ गए हैं। बीते एक दशक में हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट भी 21 गुना बढ़ा है। ये सारी अचीवमेंट्स, देश की मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी की ताकत को दिखाती है। ये दिखाती है कि भारत में कैसे हर सेक्टर में नई जॉब्स भी क्रिएट हो रही हैं।

साथियों,

TV9 की इस समिट में, विस्तार से चर्चा होगी, अनेक विषयों पर मंथन होगा। आज हम जो भी सोचेंगे, जिस भी विजन पर आगे बढ़ेंगे, वो हमारे आने वाले कल को, देश के भविष्य को डिजाइन करेगा। पिछली शताब्दी के इसी दशक में, भारत ने एक नई ऊर्जा के साथ आजादी के लिए नई यात्रा शुरू की थी। और हमने 1947 में आजादी हासिल करके भी दिखाई। अब इस दशक में हम विकसित भारत के लक्ष्य के लिए चल रहे हैं। और हमें 2047 तक विकसित भारत का सपना जरूर पूरा करना है। और जैसा मैंने लाल किले से कहा है, इसमें सबका प्रयास आवश्यक है। इस समिट का आयोजन कर, TV9 ने भी अपनी तरफ से एक positive initiative लिया है। एक बार फिर आप सभी को इस समिट की सफलता के लिए मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं हैं।

मैं TV9 को विशेष रूप से बधाई दूंगा, क्योंकि पहले भी मीडिया हाउस समिट करते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर एक छोटे से फाइव स्टार होटल के कमरे में, वो समिट होती थी और बोलने वाले भी वही, सुनने वाले भी वही, कमरा भी वही। TV9 ने इस परंपरा को तोड़ा और ये जो मॉडल प्लेस किया है, 2 साल के भीतर-भीतर देख लेना, सभी मीडिया हाउस को यही करना पड़ेगा। यानी TV9 Thinks Today वो बाकियों के लिए रास्ता खोल देगा। मैं इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आपकी पूरी टीम को, और सबसे बड़ी खुशी की बात है कि आपने इस इवेंट को एक मीडिया हाउस की भलाई के लिए नहीं, देश की भलाई के लिए आपने उसकी रचना की। 50,000 से ज्यादा नौजवानों के साथ एक मिशन मोड में बातचीत करना, उनको जोड़ना, उनको मिशन के साथ जोड़ना और उसमें से जो बच्चे सिलेक्ट होकर के आए, उनकी आगे की ट्रेनिंग की चिंता करना, ये अपने आप में बहुत अद्भुत काम है। मैं आपको बहुत बधाई देता हूं। जिन नौजवानों से मुझे यहां फोटो निकलवाने का मौका मिला है, मुझे भी खुशी हुई कि देश के होनहार लोगों के साथ, मैं अपनी फोटो निकलवा पाया। मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं दोस्तों कि आपके साथ मेरी फोटो आज निकली है। और मुझे पक्का विश्वास है कि सारी युवा पीढ़ी, जो मुझे दिख रही है, 2047 में जब देश विकसित भारत बनेगा, सबसे ज्यादा बेनिफिशियरी आप लोग हैं, क्योंकि आप उम्र के उस पड़ाव पर होंगे, जब भारत विकसित होगा, आपके लिए मौज ही मौज है। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।