Quote"शिक्षा के क्षेत्र में सर्वपल्ली राधाकृष्णन के प्रयास हम सभी को प्रेरित करते हैं"
Quote“भारत की वर्तमान राष्ट्रपति, जो एक शिक्षक भी हैं, उनसे सम्मानित होना और भी महत्वपूर्ण है”
Quote"एक शिक्षक की भूमिका किसी व्यक्ति को सही राह दिखाना है। एक शिक्षक ही सपने देखना और उन सपनों को संकल्प में बदलना सिखाता है"
Quote"राष्ट्रीय शिक्षा नीति को इस तरह से आत्मसात करने की आवश्यकता है कि यह सरकारी दस्तावेज छात्रों के जीवन का आधार बन जाए"
Quote"पूरे देश में ऐसा कोई छात्र नहीं होना चाहिए जिसके पास 2047 के लिए सपना न हो"
Quote"दांडी यात्रा और भारत छोड़ो के दौरान देश में व्याप्त हुए उत्साह को फिर से जगाने की जरूरत है"

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी धर्मेंद्र जी, अन्नपूर्णा देवी जी और देशभर से आए मेरे सभी शिक्षक साथियों और आपके माध्‍यम से एक प्रकार से मैं आज देश के सभी शिक्षकों से भी बात कर रहा हूं।

देश आज भारत के पूर्व राष्ट्रपति और शिक्षाविद् डॉक्‍टर राधाकृष्णन जी को उनके जन्म दिवस पर आदरांजलि दे रहा है और ये हमारा सौभाग्‍य है कि हमारे वर्तमान राष्‍ट्रपति भी टीचर हैं। उनका जीवन का प्रारंभिक काल उन्‍होंने शिक्षक के रूप में काम किया और वो भी दूर-सुदूर उड़ीसा के interior इलाके में और वहीं से उनकी जिंदगी अनेक प्रकार से हमारे लिए सुखद संयोग है और ऐसे टीचर राष्‍ट्रपति के हाथ से आपका सम्‍मान हुआ है तो ये और आपके लिए गर्व की बात है।

देखिए, आज जब देश आज़ादी के अमृतकाल के अपने विराट सपनों को साकार करने में जुट चुका है, तब शिक्षा के क्षेत्र में राधाकृष्णन जी के प्रयास हम सभी को प्रेरित करते हैं। इस अवसर पर मैं राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त आप सभी शिक्षकों को, राज्‍यों में भी इस प्रकार के पुरस्‍कार दिए जाते हैं, उन सबको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

अभी मुझे अनेक शिक्षकों से बातचीत करने का मौका मिला। सब अलग-अलग भाषा बोलने वाले हैं, अलग-अलग प्रयोग करने वाले लोग हैं। भाषा अलग होगी, क्षेत्र अलग होगा, समस्‍याएं अलग होंगी, लेकिन ये भी है कि इनके बीच में आप कितने ही क्‍यों न हों, आप सबके बीच में एक समानता है और वो है आपका कर्म, आपका विद्यार्थियों के प्रति समर्पण, और ये समानता आपके अंदर जो सबसे बड़ी बात होती है और आपने देखा होगा जो सफल टीचर रहा होगा वो कभी भी बच्‍चे को ये नहीं कहता कि चल ये तेरे बस का रोग नहीं है, नहीं कहता है। टीचर की सबसे बड़ी जो स्‍ट्रेंथ होती है, वो पॉजिटिविटी होती है, सकारात्‍मकता। कितना ही बच्‍चा पढ़ने में-लिखने में पूरा हो…अरे करो बेटे हो जाएगा। अरे देखो उसने किया है तुम भी करो, हो जाएगा।

यानी आप देखिए उसको पता भी नहीं है, लेकिन टीचर के गुणों में होता है। वो हर बार पॉजिटिव ही बोलेगा, वो कभी‍ किसी को नेगेटिव कमेंट करके निराश कर देना, हताश करना तो उसके नेचर में नहीं है। और एक टीचर की भूमिका ही है जो व्यक्ति को रोशनी दिखाने का काम करती है। वो सपने बोती है, टीचर जो है ना वो हर बच्‍चे के अंदर सपने बोता है़ और उसको संकल्‍प में परिवर्तित करने की ट्रेनिंग देता है कि देख ये सपना पूरा हो सकता है, तुम एक बार संकल्प लो, लग जाओ। आपने देखा होगा कि वो बच्‍चा सपनों को संकल्‍प में परिवर्तित कर देता है और टीचर ने जो रास्‍ता दिखाया है, उसे वो सिद्ध करके रहता है। यानी सपने से सिद्धि तक की ये पूरी यात्रा उसी प्रकाश पुंज के साथ होती है, जो किसी टीचर ने उसकी जिंदगी में सपना बोया था, दीया जलाया था। जो उसको कितनी ही चुनौतियों और अंधेरों के बीच में भी रास्‍ता दिखाता है।

और अब देश भी आज नए सपने, नए संकल्‍प ले करके एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है कि आज जो पीढ़ी है, जो विद्यार्थी अवस्‍था में है, 2047 में हिन्‍दुस्‍तान कैसा बनेगा, ये उन्‍हीं पर तय होने वाला है। और उनका जीवन आपके हाथ में है। इसका मतलब हुआ कि 2047 को देश गढ़ने का काम आज जो वर्तमान में टीचर हैं, जो आने वाले 10 साल, 20 साल सेवाएं देने वाले हैं, उनके हाथ में 2047 का भविष्‍य तय होने वाला है।

और इसीलिए आप एक स्‍कूल में नौकरी करते हैं, ऐसा नहीं है, आप एक क्‍लासरूम में बच्‍चों को पढ़ाते हैं, ऐसा नहीं है, आप एक सिलेबस को अटेंड करते हैं, ऐसा नहीं है। आप उसके साथ जुड़ करके, उसकी जिंदगी बनाने का काम और उसकी जिंदगी के माध्‍यम से देश बनाने का सपना ले करके चलते हैं। जो टीचर का सपना खुद का ही छोटा होता है, उसके दिमाग में 10 से 5 का ही भरा रहता है, आज चार पीरियड लेने हैं, वही रहता है। तो वो, उसके लिए वो भले तनख्‍वाह लेता है, एक तारीख का वो इंतजार करता है, लेकिन उसको आनंद नहीं आता है, उसको वो चीजें बोझ लगती हैं। लेकिन जब उसके सपनों से वो जुड़ जाता है, तब ये कोई चीज उसको बोझ नहीं लगती है। उसको लगता है कि अरे! मेरे इस काम से तो मैं देश का इतना बड़ा कंट्रीब्‍यूशन करूंगा। अगर मैं खेल के मैदान में एक खिलाड़ी तैयार करूं और मैं सपना संजोऊं कि कभी न कभी मैं उसको दुनिया में कहीं न कहीं तिरंगे झंडे के सामने खड़ा हुआ देखना चाहता हूं...आप कल्‍पना कर सकते हैं, आपको उस काम का आनंद कितना आएगा। आपको रात-रात जागने का कितना आनंद आएगा।

|

और इसलिए टीचर के मन में सिर्फ वो क्‍लासरूम, वो अपना पीरियड, चार लेने हैं, पांच लेने हैं, वो आज आया नहीं तो उसके बदले में भी मुझे जाना पड़ रहा है, ये सारे बोझ से मुक्‍त हो करके…मैं आपकी कठिनाइयां जानता हूं, इसलिए बोल रहा हूं...उस बोझ से मुक्‍त हो करके अगर हम इन बच्‍चों के साथ, उनकी जिंदगी के साथ जुड़ जाते हैं।

दूसरा, अल्टीमेटली हमें बच्‍चे को पढ़ाना तो है ही है, ज्ञान तो देना है, लेकिन हमें उसका जीवन बनाना है। देखिए, आइसोलेशन में, साइलोज में जीवन नहीं बनते। क्‍लासरूम में वो एक देख लें, स्‍कूल परिसर में कुछ और देखें, घर परिवेश में कुछ और देखें तो बच्‍चा conflict और contradiction में फंस जाता है। उसको लगता है, मां तो ये कह रही थी और टीचर तो ये कह रहे थे और क्‍लास में बाकी जो लोग थे, वो तो ऐसा बोल रहे थे। उस बच्‍चे को दुविधा की जिंदगी से बाहर निकालना ही हमारा काम है। लेकिन उसका कोई इंजेक्‍शन नहीं होता है कि चलो आज ये इंजेक्‍शन ले लो, तुम दुविधा से बाहर। टीका लगा दो, दुविधा से बाहर, ऐसा तो नहीं है। और इसके लिए टीचर के लिए बहुत जरूरी है कि कोई integrated approach हो उसका।

कितने टीचर हैं, जो स्‍टूडेंट्स के परिवार को जानते हैं, कभी परिवार को मिले हैं, कभी उनसे पूछा है कि घर आकर क्‍या करता है, कैसा करता है, आपको क्‍या लगता है। और कभी ये बताया कि देखिए भाई, मेरी क्‍लास में आपका बच्‍चा आता है, इसमें ये बहुत बढ़िया ताकत है। आप थोड़ा इसको घर में भी जरा देखिए, बहुत आगे निकल जाएगा। मैं तो हूं ही हूं, टीचर के नाते मैं कोई कमी नहीं रखूंगा, लेकिन आप थोड़ी मेरी मदद कीजिए।

तो उन घर के लोगों के अंदर भी एक सपना बो करके आप आ जाते हैं और वो आपके सहयात्री बन जाते हैं। फिर घर भी अपने-आप में पाठशाला संस्‍कार की बन जाती है। जो सपने आप क्‍लासरूम में बोते हैं, वो सपने उस घर के अंदर फुलवारी बन करके पुलकित होने की शुरूआत कर देते हैं। और इसलिए क्‍या हमारी कोशिश है क्‍या, और आपने देखा होगा एकाध स्‍टूडेंट आपको बड़ा ही परेशान करने वाला दिखता है, ये ऐसा ही है, समय खराब कर देता है, क्‍लास में आते ही पहली नजर वहीं जाती है तो आधा दिमाग वहीं खराब हो जाता है। मैं आपके भीतर से बोल रहा हूं। और वो भी वैसा होता है कि पहली बेंच पर ही बैठेगा, उसको भी लगता है कि ये टीचर मुझे पसंद नहीं करते हैं तो पहले सामने आएगा वो। और आपका आधा समय वो ही खा जाता है।

ऐसे में उन बाकी बच्‍चों पर अन्याय हो जाए…कारण क्‍या है, मेरी पसंद-नापसंद। सफल टीचर वो होता है, जिसकी बच्‍चों के संबंध में, स्‍टूडेंट्स के संबंध में न कोई पसंद होती है, न कोई नापसंद होती है। उसके लिए वो सबके सब बराबर होते हैं। मैंने ऐसे टीचर देखे हैं, जिनकी अपनी संतान भी उसी क्‍लासरूम में है। लेकिन वे टीचर क्‍लासरूम में खुद की संतान को भी वही ट्रीटमेंट देते हैं, जो सब स्‍टूडेंट्स को देते हैं।

अगर चार लोगों को पूछना है, उसकी बारी आई तो उसको पूछते हैं, स्पेशियली उसको कभी नहीं कहते कि तुम ये बताओ, तुम ये करो, कभी नहीं। क्योंकि उनको मालूम है कि उसको एक अच्‍छी मां की जरूरत है, एक अच्‍छे पिता की जरूरत है, लेकिन अच्‍छे टीचर की भी जरूरत है। तो वो भी कोशिश करते हैं कि घर में मैं मां-बाप का रोल पूरा करूंगा, लेकिन क्‍लास में तो मुझे उसको टीचर-स्‍टूडेंट का ही मेरा नाता रहना चाहिए, वो घर वाला रिश्‍ता यहां आना नहीं चाहिए।

ये टीचर का बहुत बड़ा त्‍याग होता है, तब संभव होता है जी। ये अपने-आपको संभाल करके इस प्रकार से काम करना, ये तब संभव होता है। और इसलिए हमारी जो शिक्षा व्‍यवस्‍था है, भारत की जो परंपरा रही है वो किताबों तक सीमित कभी नहीं रही है, कभी नहीं रही है। वो तो एक प्रकार से एक सहारा है हमारे लिए। हम बहुत सी चीजों...और आज टेक्‍नोलॉजी के कारण ये बहुत संभव हुआ है। और मैं देख रहा हूं कि टेक्‍नोलॉजी के कारण बहुत बड़ी मात्रा में हमारे गांव के टीचर भी जो स्‍वयं टेक्‍नोलॉजी में उनकी पढ़ाई नहीं हुई है, लेकिन करते-करते वो सीख गए। और उन्‍होंने भी सोचा कि भई, क्‍योंकि उसके दिमाग में स्‍टूडेंट भरा पड़ा है, उसके दिमाग में सिलेबस भरा पड़ा है, तो वो चीजें, प्रॉडक्‍ट तैयार करता है जो उस बच्‍चे के काम आती हैं।

यहां सरकार में बैठे हुए लोगों के दिमाग में क्‍या रहता है, आंकड़े रहते हैं कि भई कितने टीचर भर्ती करना बाकी है, कितने स्‍टूडेंट का ड्रॉप आउट हो गया, बच्चियों का एनरोलमेंट हुआ कि नहीं हुआ, उनके दिमाग में वो रहता है, लेकिन टीचर के दिमाग में उसकी जिंदगी रहती है...बहुत बड़ा फर्क होता है। और इसलिए अगर टीचर इन सारी जिम्‍मेदारियों को ढंग से उठा लेता है।

अब हमारी जो राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति आई है, इसकी इतनी तारीफ हो रही है, इतनी तारीफ हो रही है, क्‍यों हो रही है, उसमें कुछ कमियां नहीं होंगी, ऐसा तो मैं दावा नहीं कर सकता हूं, कोई नहीं दावा कर सकता है। लेकिन जो लोगों के मन में पड़ा था, उनको लगा यार, ये कुछ रास्‍ता दिख रहा है, ये कुछ सही दिशा में जा रहे हैं। चलिए, इस रास्‍ते पर हम चलते हैं।

हमें पुरानी आदतें इतनी घर कर गई हैं कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति को एक बार पढ़ने-सुनने से बात बनने वाली नहीं है जी। महात्‍मा गांधी जी को कभी एक बार किसी ने पूछा था कि भई आपको कुछ मन में संशय हो, समस्‍याएं हों तो क्‍या करते हैं। तो उन्‍होंने कहा, मुझे भागवत गीता से बहुत कुछ मिल जाता है। इसका मतलब वो बार-बार उसको पढ़ते हैं, बार-बार उसके अर्थ बदलते हैं, बार-बार नए अर्थ दिखते हैं, बार-बार नया प्रकाशवान पुंज सामने खड़ा हो जाता है।

ये राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति भी, जब तक शिक्षा जगत के लोग उससे हर समस्‍या का समाधान उसमें है क्‍या, दस बार पढ़ें, 12 बार पढ़ें, 15 बार पढ़ें, सॉल्‍यूशन इसमें है क्‍या। उसको उस रूप में हम देखेंगे। एक बार आया है, चलो सर्कुलर आता है, वैसे देख लिया तो नहीं होगा। उसको हमें हमारी रगों में उतारना पड़ेगा, हमारे जेहन में उतारना पड़ेगा। अगर ये प्रयास होता है तो मुझे पक्‍का विश्‍वास है कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति बनाने में हमारे देश के टीचर्स का बहुत बड़ा रोल रहा है। लाखों की तादाद में टीचर्स ने कंट्रीब्यूट किया है, इसको बनाने में।

|

पहली बार देश में इतना बड़ा मंथन हुआ है। जिन टीचर्स ने इसे बनाया है, उन टीचर्स का काम है कि सरकारी भाषा वगैरह बच्‍चों के लिए काम नहीं आती है, आपको माध्‍यम होना होगा कि ये जो सरकारी डॉक्‍यूमेंट हैं, वो उनके जीवन का आधार कैसे बनें। मुझे उसको ट्रांसलेट करना है, मुझे उसको फुलस्‍टॉप, कौमा के साथ पकड़ते हुए भी उसको सहज, सरल रूप में उसको समझाना है। और मैं मानता हूं कि जैसे कुछ नाट्य प्रयोग होते हैं, कुछ essay righting होता है, कुछ व्यक्तित्व स्‍पर्धाएं होती हैं, बच्‍चों को राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चाएं करनी चाहिए। क्योंकिं टीचर उनको तैयार करेगा, जब वो बोलेंगे तो एकाध चीज नई भी उभर करके आएगी। तो ये एक प्रयास करना चाहिए।

आपको मालूम है कि अभी मैंने 15 अगस्‍त को आजादी के 75 साल का ये मेरा भाषण था तो उसका एक अपना अलग मेरा मिजाज भी था। तो मैंने 2047 को ध्‍यान में रख करके बातें कीं। और उसमें मैंने आग्रह किया कि पंच प्रण की चर्चा की। क्‍या उन पंच प्रण, हमारे क्‍लासरूम में इसकी चर्चा हो सकती है क्‍या। असेम्‍बली जब होती हैं, चलिए भई आज फलाना विद्यार्थी और फलाना टीचर पहले प्रण पर बोलेंगे, मंगल को दूसरे प्रण पर, बुधवार को तीसरे प्रण पर, शुक्रवार को पांचवें प्रण पर और फिर अगले सप्‍ताह फिर पहले प्रण पर ये टीचर-ये टीचर। यानी सालभर, उसका अर्थ क्‍या है, हमें क्‍या करना है, ये पंच प्रण हमारे, हमारा भी तो प्रण तत्‍व होना चाहिए, हर नागरिक का होना चाहिए।

इस प्रकार से अगर हम कर सकते हैं तो मैं समझता हूं उसकी सराहना हो रही है, सब लोग कह रहे हैं हां भई, ये पांच प्रण ऐसे हैं कि हमारे आगे जाने का रास्‍ता बना देते हैं। तो ये पांच प्रण उन बच्‍चों तक कैसे पहुंचें, उनके जीवन में कैसे आएं, इसको जोड़ने का काम कैसे करें।

दूसरा, हिन्‍दुस्‍तान में अब कोई स्‍कूल में बच्‍चा ऐसा नहीं होना चाहिए, जिसके दिमाग में 2047 का सपना न हो। उसको कहना चाहिए, बताओ भई तुम, 2047 में तुम्‍हारी उम्र क्‍या होगी, उसको पूछना चाहिए। हिसाब लगाओ, तुम्‍हारे पास इतने साल हैं, तुम बताओ इतने सालों में तुम तुम्‍हारे लिए क्‍या करोगे और देश के लिए क्‍या करोगे। हिसाब लगाओ, 2047 के पहले तुम्‍हारे पास कितने साल हैं, कितने महीने हैं, कितने दिन हैं, कितने घंटे हैं, तुम एक-एक घंटे को जोड़ करके बताओ, तुम क्‍या करोगे। तुरंत इसका एक पूरा कैनवास तैयार हो जाएगा कि हां, आज एक घंटा चला गया, मेरा 2047 तो पास आ गया। आज दो घंटे चले गए, मेरा 2047 पास आ गया। मुझे 2047 में ऐसे जाना है, ऐसे करना है।

अगर ये भाव हम बच्‍चों के मन-मंदिर में भर देते हैं, एक नई ऊर्जा के साथ, एक नई उमंग के साथ, तो बच्‍चे लग जाएंगे इसके पीछे। और दुनिया में, प्रगति उन्‍हीं की होती है जो बड़े सपने देखते हैं, बड़े संकल्‍प लेते हैं और दूर की सोच करके जीवन को खपा देने के लिए तैयार रहते हैं।

हिन्‍दुस्‍तान में 1947 के पहले एक प्रकार से डांडी यात्रा-1930 और 1942, अंग्रेजो भारत छोड़ो, ये जो 12 साल...आप देखिए, पूरा हिन्‍दुस्‍तान उछल पड़ा था, सिवाय आजादी कोई मंत्र नहीं था। जीवन के हर काम में आजादी, स्‍वतंत्रता, ऐसा एक मिजाज बन गया था। वैसा ही मिजाज, सुराज, राष्‍ट्र का गौरव, मेरा देश मुझे यहां पर, ये समय है हमें ये पैदा करने का।

और मेरा भरोसा हमारे शिक्षक बंधुओं पर ज्‍यादा है, शिक्षा जगत पर ज्‍यादा है। अगर आप इस प्रयास में जुट जाएं, मुझे पक्‍का विश्‍वास है हम उन सपनों को पार कर सकते हैं और आवाज गांव-गांव से उठने वाली है जी। अब देश रुकना नहीं चाहता है। अब देखिए दो दिन पहले- 250 साल तक जो हम पर राज करके गए थे, 250 साल तक...उनको पीछे छोड़ करके हम दुनिया की इकोनॉमी में आगे निकल गए। 6 नंबर से 5 नंबर पर आने का जो आनंद होता है, उससे ज्‍यादा आनंद इसमें हुआ, क्‍यों। 6 से 5 होते तो होता थोड़ा आनंद, लेकिन ये 5 स्‍पेशल है। क्‍योंकि हमने उनको पीछे छोड़ा है, हमारे दिमाग में वो भाव भरा है, वो तिरंगे वाला, 15 अगस्‍त का।

15 अगस्‍त के तिरंगे का जो आंदोलन था, उसके प्रकाश में ये 5वां नंबर आया है और इसलिए उसके अंदर वो जिद भर गई है कि देखा, मेरा तिरंगा और फहरा रहा है। ये मिजाज बहुत आवश्‍यक है और इसलिए 1930 से 1942 तक देश का जो मूड था, देश के लिए जीने का, देश के लिए जूझने का, और जरूरत पड़ी तो देश के लिए मरने का, आज वो मिजाज चाहिए।

मैं मेरे देश को पीछे नहीं रहने दूंगा। हजारों साल की गुलामी से बाहर निकले हैं, अब मौका है, हम रुकेंगे नहीं, हम चल पड़ेंगे। ये मिजाज पहुंचाने का काम, सभी हमारे शिक्षक वर्ग के द्वारा हो तो ताकत अनेक गुना बढ़ जाएगी, अनेक गुना बढ़ जाएगी।

मैं फिर एक बार, आप इतना काम कर-करके अवार्ड प्राप्‍त किए हैं, लेकिन अवार्ड प्राप्‍त किए हैं, इसलिए मैं ज्‍यादा काम दे रहा हूं। जो काम करता है, उसी को काम देने का मन करता है, जो नहीं करता है, उसको कौन देता है। और शिक्षक का मेरा भरोसा रहा है कि वो जिम्‍मा लेता है तो पूरा करता है। तो इसलिए मैं आप लोगों को कहता हूं, मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद!

Explore More
140 करोड़ देशवासियों का भाग्‍य बदलने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

140 करोड़ देशवासियों का भाग्‍य बदलने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी

Media Coverage

"Huge opportunity": Japan delegation meets PM Modi, expressing their eagerness to invest in India
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s speech at TV9 Summit 2025
March 28, 2025
QuoteToday, the world's eyes are on India: PM
QuoteIndia's youth is rapidly becoming skilled and driving innovation forward: PM
Quote"India First" has become the mantra of India's foreign policy: PM
QuoteToday, India is not just participating in the world order but also contributing to shaping and securing the future: PM
QuoteIndia has given Priority to humanity over monopoly: PM
QuoteToday, India is not just a Nation of Dreams but also a Nation That Delivers: PM

श्रीमान रामेश्वर गारु जी, रामू जी, बरुन दास जी, TV9 की पूरी टीम, मैं आपके नेटवर्क के सभी दर्शकों का, यहां उपस्थित सभी महानुभावों का अभिनंदन करता हूं, इस समिट के लिए बधाई देता हूं।

TV9 नेटवर्क का विशाल रीजनल ऑडियंस है। और अब तो TV9 का एक ग्लोबल ऑडियंस भी तैयार हो रहा है। इस समिट में अनेक देशों से इंडियन डायस्पोरा के लोग विशेष तौर पर लाइव जुड़े हुए हैं। कई देशों के लोगों को मैं यहां से देख भी रहा हूं, वे लोग वहां से वेव कर रहे हैं, हो सकता है, मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं। मैं यहां नीचे स्क्रीन पर हिंदुस्तान के अनेक शहरों में बैठे हुए सब दर्शकों को भी उतने ही उत्साह, उमंग से देख रहा हूं, मेरी तरफ से उनका भी स्वागत है।

साथियों,

आज विश्व की दृष्टि भारत पर है, हमारे देश पर है। दुनिया में आप किसी भी देश में जाएं, वहां के लोग भारत को लेकर एक नई जिज्ञासा से भरे हुए हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो देश 70 साल में ग्यारहवें नंबर की इकोनॉमी बना, वो महज 7-8 साल में पांचवे नंबर की इकोनॉमी बन गया? अभी IMF के नए आंकड़े सामने आए हैं। वो आंकड़े कहते हैं कि भारत, दुनिया की एकमात्र मेजर इकोनॉमी है, जिसने 10 वर्षों में अपने GDP को डबल किया है। बीते दशक में भारत ने दो लाख करोड़ डॉलर, अपनी इकोनॉमी में जोड़े हैं। GDP का डबल होना सिर्फ आंकड़ों का बदलना मात्र नहीं है। इसका impact देखिए, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, और ये 25 करोड़ लोग एक नियो मिडिल क्लास का हिस्सा बने हैं। ये नियो मिडिल क्लास, एक प्रकार से नई ज़िंदगी शुरु कर रहा है। ये नए सपनों के साथ आगे बढ़ रहा है, हमारी इकोनॉमी में कंट्रीब्यूट कर रहा है, और उसको वाइब्रेंट बना रहा है। आज दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे भारत में है। ये युवा, तेज़ी से स्किल्ड हो रहा है, इनोवेशन को गति दे रहा है। और इन सबके बीच, भारत की फॉरेन पॉलिसी का मंत्र बन गया है- India First, एक जमाने में भारत की पॉलिसी थी, सबसे समान रूप से दूरी बनाकर चलो, Equi-Distance की पॉलिसी, आज के भारत की पॉलिसी है, सबके समान रूप से करीब होकर चलो, Equi-Closeness की पॉलिसी। दुनिया के देश भारत की ओपिनियन को, भारत के इनोवेशन को, भारत के एफर्ट्स को, जैसा महत्व आज दे रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। आज दुनिया की नजर भारत पर है, आज दुनिया जानना चाहती है, What India Thinks Today.

|

साथियों,

भारत आज, वर्ल्ड ऑर्डर में सिर्फ पार्टिसिपेट ही नहीं कर रहा, बल्कि फ्यूचर को शेप और सेक्योर करने में योगदान दे रहा है। दुनिया ने ये कोरोना काल में अच्छे से अनुभव किया है। दुनिया को लगता था कि हर भारतीय तक वैक्सीन पहुंचने में ही, कई-कई साल लग जाएंगे। लेकिन भारत ने हर आशंका को गलत साबित किया। हमने अपनी वैक्सीन बनाई, हमने अपने नागरिकों का तेज़ी से वैक्सीनेशन कराया, और दुनिया के 150 से अधिक देशों तक दवाएं और वैक्सीन्स भी पहुंचाईं। आज दुनिया, और जब दुनिया संकट में थी, तब भारत की ये भावना दुनिया के कोने-कोने तक पहुंची कि हमारे संस्कार क्या हैं, हमारा तौर-तरीका क्या है।

साथियों,

अतीत में दुनिया ने देखा है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब भी कोई वैश्विक संगठन बना, उसमें कुछ देशों की ही मोनोपोली रही। भारत ने मोनोपोली नहीं बल्कि मानवता को सर्वोपरि रखा। भारत ने, 21वीं सदी के ग्लोबल इंस्टीट्यूशन्स के गठन का रास्ता बनाया, और हमने ये ध्यान रखा कि सबकी भागीदारी हो, सबका योगदान हो। जैसे प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती है। देश कोई भी हो, इन आपदाओं से इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान होता है। आज ही म्यांमार में जो भूकंप आया है, आप टीवी पर देखें तो बहुत बड़ी-बड़ी इमारतें ध्वस्त हो रही हैं, ब्रिज टूट रहे हैं। और इसलिए भारत ने Coalition for Disaster Resilient Infrastructure - CDRI नाम से एक वैश्विक नया संगठन बनाने की पहल की। ये सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार करने का संकल्प है। भारत का प्रयास है, प्राकृतिक आपदा से, पुल, सड़कें, बिल्डिंग्स, पावर ग्रिड, ऐसा हर इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रहे, सुरक्षित निर्माण हो।

साथियों,

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हर देश का मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। ऐसी ही एक चुनौती है, हमारे एनर्जी रिसोर्सेस की। इसलिए पूरी दुनिया की चिंता करते हुए भारत ने International Solar Alliance (ISA) का समाधान दिया है। ताकि छोटे से छोटा देश भी सस्टेनबल एनर्जी का लाभ उठा सके। इससे क्लाइमेट पर तो पॉजिटिव असर होगा ही, ये ग्लोबल साउथ के देशों की एनर्जी नीड्स को भी सिक्योर करेगा। और आप सबको ये जानकर गर्व होगा कि भारत के इस प्रयास के साथ, आज दुनिया के सौ से अधिक देश जुड़ चुके हैं।

साथियों,

बीते कुछ समय से दुनिया, ग्लोबल ट्रेड में असंतुलन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी challenges का सामना कर रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भी भारत ने दुनिया के साथ मिलकर नए प्रयास शुरु किए हैं। India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC), ऐसा ही एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। ये प्रोजेक्ट, कॉमर्स और कनेक्टिविटी के माध्यम से एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को जोड़ेगा। इससे आर्थिक संभावनाएं तो बढ़ेंगी ही, दुनिया को अल्टरनेटिव ट्रेड रूट्स भी मिलेंगे। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन भी और मजबूत होगी।

|

साथियों,

ग्लोबल सिस्टम्स को, अधिक पार्टिसिपेटिव, अधिक डेमोक्रेटिक बनाने के लिए भी भारत ने अनेक कदम उठाए हैं। और यहीं, यहीं पर ही भारत मंडपम में जी-20 समिट हुई थी। उसमें अफ्रीकन यूनियन को जी-20 का परमानेंट मेंबर बनाया गया है। ये बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम था। इसकी मांग लंबे समय से हो रही थी, जो भारत की प्रेसीडेंसी में पूरी हुई। आज ग्लोबल डिसीजन मेकिंग इंस्टीट्यूशन्स में भारत, ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज़ बन रहा है। International Yoga Day, WHO का ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिए ग्लोबल फ्रेमवर्क, ऐसे कितने ही क्षेत्रों में भारत के प्रयासों ने नए वर्ल्ड ऑर्डर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, और ये तो अभी शुरूआत है, ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत का सामर्थ्य नई ऊंचाई की तरफ बढ़ रहा है।

साथियों,

21वीं सदी के 25 साल बीत चुके हैं। इन 25 सालों में 11 साल हमारी सरकार ने देश की सेवा की है। और जब हम What India Thinks Today उससे जुड़ा सवाल उठाते हैं, तो हमें ये भी देखना होगा कि Past में क्या सवाल थे, क्या जवाब थे। इससे TV9 के विशाल दर्शक समूह को भी अंदाजा होगा कि कैसे हम, निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक, Aspirations से Achievement तक, Desperation से Development तक पहुंचे हैं। आप याद करिए, एक दशक पहले, गांव में जब टॉयलेट का सवाल आता था, तो माताओं-बहनों के पास रात ढलने के बाद और भोर होने से पहले का ही जवाब होता था। आज उसी सवाल का जवाब स्वच्छ भारत मिशन से मिलता है। 2013 में जब कोई इलाज की बात करता था, तो महंगे इलाज की चर्चा होती थी। आज उसी सवाल का समाधान आयुष्मान भारत में नजर आता है। 2013 में किसी गरीब की रसोई की बात होती थी, तो धुएं की तस्वीर सामने आती थी। आज उसी समस्या का समाधान उज्ज्वला योजना में दिखता है। 2013 में महिलाओं से बैंक खाते के बारे में पूछा जाता था, तो वो चुप्पी साध लेती थीं। आज जनधन योजना के कारण, 30 करोड़ से ज्यादा बहनों का अपना बैंक अकाउंट है। 2013 में पीने के पानी के लिए कुएं और तालाबों तक जाने की मजबूरी थी। आज उसी मजबूरी का हल हर घर नल से जल योजना में मिल रहा है। यानि सिर्फ दशक नहीं बदला, बल्कि लोगों की ज़िंदगी बदली है। और दुनिया भी इस बात को नोट कर रही है, भारत के डेवलपमेंट मॉडल को स्वीकार रही है। आज भारत सिर्फ Nation of Dreams नहीं, बल्कि Nation That Delivers भी है।

साथियों,

जब कोई देश, अपने नागरिकों की सुविधा और समय को महत्व देता है, तब उस देश का समय भी बदलता है। यही आज हम भारत में अनुभव कर रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। पहले पासपोर्ट बनवाना कितना बड़ा काम था, ये आप जानते हैं। लंबी वेटिंग, बहुत सारे कॉम्प्लेक्स डॉक्यूमेंटेशन का प्रोसेस, अक्सर राज्यों की राजधानी में ही पासपोर्ट केंद्र होते थे, छोटे शहरों के लोगों को पासपोर्ट बनवाना होता था, तो वो एक-दो दिन कहीं ठहरने का इंतजाम करके चलते थे, अब वो हालात पूरी तरह बदल गया है, एक आंकड़े पर आप ध्यान दीजिए, पहले देश में सिर्फ 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, आज इनकी संख्या 550 से ज्यादा हो गई है। पहले पासपोर्ट बनवाने में, और मैं 2013 के पहले की बात कर रहा हूं, मैं पिछले शताब्दी की बात नहीं कर रहा हूं, पासपोर्ट बनवाने में जो वेटिंग टाइम 50 दिन तक होता था, वो अब 5-6 दिन तक सिमट गया है।

साथियों,

ऐसा ही ट्रांसफॉर्मेशन हमने बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी देखा है। हमारे देश में 50-60 साल पहले बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, ये कहकर कि इससे लोगों को बैंकिंग सुविधा सुलभ होगी। इस दावे की सच्चाई हम जानते हैं। हालत ये थी कि लाखों गांवों में बैंकिंग की कोई सुविधा ही नहीं थी। हमने इस स्थिति को भी बदला है। ऑनलाइन बैंकिंग तो हर घर में पहुंचाई है, आज देश के हर 5 किलोमीटर के दायरे में कोई न कोई बैंकिंग टच प्वाइंट जरूर है। और हमने सिर्फ बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का ही दायरा नहीं बढ़ाया, बल्कि बैंकिंग सिस्टम को भी मजबूत किया। आज बैंकों का NPA बहुत कम हो गया है। आज बैंकों का प्रॉफिट, एक लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए के नए रिकॉर्ड को पार कर चुका है। और इतना ही नहीं, जिन लोगों ने जनता को लूटा है, उनको भी अब लूटा हुआ धन लौटाना पड़ रहा है। जिस ED को दिन-रात गालियां दी जा रही है, ED ने 22 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक वसूले हैं। ये पैसा, कानूनी तरीके से उन पीड़ितों तक वापिस पहुंचाया जा रहा है, जिनसे ये पैसा लूटा गया था।

साथियों,

Efficiency से गवर्नमेंट Effective होती है। कम समय में ज्यादा काम हो, कम रिसोर्सेज़ में अधिक काम हो, फिजूलखर्ची ना हो, रेड टेप के बजाय रेड कार्पेट पर बल हो, जब कोई सरकार ये करती है, तो समझिए कि वो देश के संसाधनों को रिस्पेक्ट दे रही है। और पिछले 11 साल से ये हमारी सरकार की बड़ी प्राथमिकता रहा है। मैं कुछ उदाहरणों के साथ अपनी बात बताऊंगा।

|

साथियों,

अतीत में हमने देखा है कि सरकारें कैसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिनिस्ट्रीज में accommodate करने की कोशिश करती थीं। लेकिन हमारी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही कई मंत्रालयों का विलय कर दिया। आप सोचिए, Urban Development अलग मंत्रालय था और Housing and Urban Poverty Alleviation अलग मंत्रालय था, हमने दोनों को मर्ज करके Housing and Urban Affairs मंत्रालय बना दिया। इसी तरह, मिनिस्ट्री ऑफ ओवरसीज़ अफेयर्स अलग था, विदेश मंत्रालय अलग था, हमने इन दोनों को भी एक साथ जोड़ दिया, पहले जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय अलग था, और पेयजल मंत्रालय अलग था, हमने इन्हें भी जोड़कर जलशक्ति मंत्रालय बना दिया। हमने राजनीतिक मजबूरी के बजाय, देश की priorities और देश के resources को आगे रखा।

साथियों,

हमारी सरकार ने रूल्स और रेगुलेशन्स को भी कम किया, उन्हें आसान बनाया। करीब 1500 ऐसे कानून थे, जो समय के साथ अपना महत्व खो चुके थे। उनको हमारी सरकार ने खत्म किया। करीब 40 हज़ार, compliances को हटाया गया। ऐसे कदमों से दो फायदे हुए, एक तो जनता को harassment से मुक्ति मिली, और दूसरा, सरकारी मशीनरी की एनर्जी भी बची। एक और Example GST का है। 30 से ज्यादा टैक्सेज़ को मिलाकर एक टैक्स बना दिया गया है। इसको process के, documentation के हिसाब से देखें तो कितनी बड़ी बचत हुई है।

साथियों,

सरकारी खरीद में पहले कितनी फिजूलखर्ची होती थी, कितना करप्शन होता था, ये मीडिया के आप लोग आए दिन रिपोर्ट करते थे। हमने, GeM यानि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म बनाया। अब सरकारी डिपार्टमेंट, इस प्लेटफॉर्म पर अपनी जरूरतें बताते हैं, इसी पर वेंडर बोली लगाते हैं और फिर ऑर्डर दिया जाता है। इसके कारण, भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है, और सरकार को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत भी हुई है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर- DBT की जो व्यवस्था भारत ने बनाई है, उसकी तो दुनिया में चर्चा है। DBT की वजह से टैक्स पेयर्स के 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा, गलत हाथों में जाने से बचे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा फर्ज़ी लाभार्थी, जिनका जन्म भी नहीं हुआ था, जो सरकारी योजनाओं का फायदा ले रहे थे, ऐसे फर्जी नामों को भी हमने कागजों से हटाया है।

साथियों,

 

हमारी सरकार टैक्स की पाई-पाई का ईमानदारी से उपयोग करती है, और टैक्सपेयर का भी सम्मान करती है, सरकार ने टैक्स सिस्टम को टैक्सपेयर फ्रेंडली बनाया है। आज ITR फाइलिंग का प्रोसेस पहले से कहीं ज्यादा सरल और तेज़ है। पहले सीए की मदद के बिना, ITR फाइल करना मुश्किल होता था। आज आप कुछ ही समय के भीतर खुद ही ऑनलाइन ITR फाइल कर पा रहे हैं। और रिटर्न फाइल करने के कुछ ही दिनों में रिफंड आपके अकाउंट में भी आ जाता है। फेसलेस असेसमेंट स्कीम भी टैक्सपेयर्स को परेशानियों से बचा रही है। गवर्नेंस में efficiency से जुड़े ऐसे अनेक रिफॉर्म्स ने दुनिया को एक नया गवर्नेंस मॉडल दिया है।

साथियों,

पिछले 10-11 साल में भारत हर सेक्टर में बदला है, हर क्षेत्र में आगे बढ़ा है। और एक बड़ा बदलाव सोच का आया है। आज़ादी के बाद के अनेक दशकों तक, भारत में ऐसी सोच को बढ़ावा दिया गया, जिसमें सिर्फ विदेशी को ही बेहतर माना गया। दुकान में भी कुछ खरीदने जाओ, तो दुकानदार के पहले बोल यही होते थे – भाई साहब लीजिए ना, ये तो इंपोर्टेड है ! आज स्थिति बदल गई है। आज लोग सामने से पूछते हैं- भाई, मेड इन इंडिया है या नहीं है?

साथियों,

आज हम भारत की मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस का एक नया रूप देख रहे हैं। अभी 3-4 दिन पहले ही एक न्यूज आई है कि भारत ने अपनी पहली MRI मशीन बना ली है। अब सोचिए, इतने दशकों तक हमारे यहां स्वदेशी MRI मशीन ही नहीं थी। अब मेड इन इंडिया MRI मशीन होगी तो जांच की कीमत भी बहुत कम हो जाएगी।

|

साथियों,

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान ने, देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक नई ऊर्जा दी है। पहले दुनिया भारत को ग्लोबल मार्केट कहती थी, आज वही दुनिया, भारत को एक बड़े Manufacturing Hub के रूप में देख रही है। ये सक्सेस कितनी बड़ी है, इसके उदाहरण आपको हर सेक्टर में मिलेंगे। जैसे हमारी मोबाइल फोन इंडस्ट्री है। 2014-15 में हमारा एक्सपोर्ट, वन बिलियन डॉलर तक भी नहीं था। लेकिन एक दशक में, हम ट्वेंटी बिलियन डॉलर के फिगर से भी आगे निकल चुके हैं। आज भारत ग्लोबल टेलिकॉम और नेटवर्किंग इंडस्ट्री का एक पावर सेंटर बनता जा रहा है। Automotive Sector की Success से भी आप अच्छी तरह परिचित हैं। इससे जुड़े Components के एक्सपोर्ट में भी भारत एक नई पहचान बना रहा है। पहले हम बहुत बड़ी मात्रा में मोटर-साइकल पार्ट्स इंपोर्ट करते थे। लेकिन आज भारत में बने पार्ट्स UAE और जर्मनी जैसे अनेक देशों तक पहुंच रहे हैं। सोलर एनर्जी सेक्टर ने भी सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। हमारे सोलर सेल्स, सोलर मॉड्यूल का इंपोर्ट कम हो रहा है और एक्सपोर्ट्स 23 गुना तक बढ़ गए हैं। बीते एक दशक में हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट भी 21 गुना बढ़ा है। ये सारी अचीवमेंट्स, देश की मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी की ताकत को दिखाती है। ये दिखाती है कि भारत में कैसे हर सेक्टर में नई जॉब्स भी क्रिएट हो रही हैं।

साथियों,

TV9 की इस समिट में, विस्तार से चर्चा होगी, अनेक विषयों पर मंथन होगा। आज हम जो भी सोचेंगे, जिस भी विजन पर आगे बढ़ेंगे, वो हमारे आने वाले कल को, देश के भविष्य को डिजाइन करेगा। पिछली शताब्दी के इसी दशक में, भारत ने एक नई ऊर्जा के साथ आजादी के लिए नई यात्रा शुरू की थी। और हमने 1947 में आजादी हासिल करके भी दिखाई। अब इस दशक में हम विकसित भारत के लक्ष्य के लिए चल रहे हैं। और हमें 2047 तक विकसित भारत का सपना जरूर पूरा करना है। और जैसा मैंने लाल किले से कहा है, इसमें सबका प्रयास आवश्यक है। इस समिट का आयोजन कर, TV9 ने भी अपनी तरफ से एक positive initiative लिया है। एक बार फिर आप सभी को इस समिट की सफलता के लिए मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं हैं।

मैं TV9 को विशेष रूप से बधाई दूंगा, क्योंकि पहले भी मीडिया हाउस समिट करते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर एक छोटे से फाइव स्टार होटल के कमरे में, वो समिट होती थी और बोलने वाले भी वही, सुनने वाले भी वही, कमरा भी वही। TV9 ने इस परंपरा को तोड़ा और ये जो मॉडल प्लेस किया है, 2 साल के भीतर-भीतर देख लेना, सभी मीडिया हाउस को यही करना पड़ेगा। यानी TV9 Thinks Today वो बाकियों के लिए रास्ता खोल देगा। मैं इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आपकी पूरी टीम को, और सबसे बड़ी खुशी की बात है कि आपने इस इवेंट को एक मीडिया हाउस की भलाई के लिए नहीं, देश की भलाई के लिए आपने उसकी रचना की। 50,000 से ज्यादा नौजवानों के साथ एक मिशन मोड में बातचीत करना, उनको जोड़ना, उनको मिशन के साथ जोड़ना और उसमें से जो बच्चे सिलेक्ट होकर के आए, उनकी आगे की ट्रेनिंग की चिंता करना, ये अपने आप में बहुत अद्भुत काम है। मैं आपको बहुत बधाई देता हूं। जिन नौजवानों से मुझे यहां फोटो निकलवाने का मौका मिला है, मुझे भी खुशी हुई कि देश के होनहार लोगों के साथ, मैं अपनी फोटो निकलवा पाया। मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं दोस्तों कि आपके साथ मेरी फोटो आज निकली है। और मुझे पक्का विश्वास है कि सारी युवा पीढ़ी, जो मुझे दिख रही है, 2047 में जब देश विकसित भारत बनेगा, सबसे ज्यादा बेनिफिशियरी आप लोग हैं, क्योंकि आप उम्र के उस पड़ाव पर होंगे, जब भारत विकसित होगा, आपके लिए मौज ही मौज है। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।