आईआईटी धारवाड़ राष्ट्र को समर्पित किया
दुनिया में सबसे लंबे रेलवे प्लेटफॉर्म श्री सिद्धारूढ़ा स्वामीजी हुबली स्टेशन का लोकार्पण किया
पुनर्विकसित होसपेटे स्टेशन का लोकार्पण किया गया, जो हम्पी स्मारकों के समान डिजाइन किया गया है
धारवाड़ बहु-ग्राम जलापूर्ति योजना की आधारशिला रखी गई
हुबली-धारवाड़ स्मार्ट सिटी की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया
"डबल इंजन सरकार प्रदेश के हर जिले, गांव, कस्बे के पूर्ण विकास के लिए पूरी ईमानदारी से प्रयासरत है"
“धारवाड़ विशेष है। यह भारत की सांस्कृतिक जीवंतता का प्रतिबिंब है”
“धारवाड़ में आईआईटी का नया परिसर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सुविधा प्रदान करेगा। यह बेहतर कल के लिए युवा प्रतिभाओं को तैयार करेगा”
“शिलान्यास से लेकर लोकार्पण तक, डबल इंजन की सरकार निरंतर तेजी से काम करती है”
“अच्छी शिक्षा हर जगह और सभी तक पहुंचनी चाहिए। बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण संस्थान अधिक लोगों तक अच्छी शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करेंगे”
"प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और बेहतर शासन हुबली-धारवाड़ क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा"
"आज हम युवाओं को अगले 25 वर्षों में उनके संकल्पों को साकार करने के लिए सभी संसाधन दे रहे हैं"
"आज भारत सबसे शक्तिशाली डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं में से एक है"
“भारत के लोकतंत्र की जड़ें हमारे सदियों पुराने इतिहास से जुड़ी हैं। दुनिया की कोई ताकत भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान नहीं पहुंचा सकती”
"कर्नाटक हाई-टेक इंडिया का इंजन है"

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

जगद्गुरु बसवेश्वर अवरिगे नन्ना नमस्कारगळु।

कले, साहित्य मत्तू संस्कृतिया इ नाडिगे,

कर्नाटक दा एल्ला सहोदरा सहोदरीयारिगे नन्ना नमस्कारगळु।

साथियों,

मुझे इस साल की शुरुआत में भी हुबली आने का सौभाग्य मिला था। जिस तरह हुबली के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों ने सड़कों के किनारे खड़े होकर मुझे आशीर्वाद दिया, वो पल मैं कभी भूल नहीं सकता हूं इतना प्यार, इतने आशीर्वाद। बीते समय में मुझे कर्नाटक के अनेक क्षेत्रों में जाने का अवसर मिला है। बेंगलुरू से लेकर बेलागावी तक, कलबुर्गी से लेकर शिमोगा तक, मैसूर से लेकर तुमकुरू तक, मुझे कन्नड़िगा लोगों ने जिस तरह का स्नेह दिया है, अपनापन दिया है, एक से बढ़कर एक, आपका ये प्यार, आपके आशीर्वाद अभिभूत करने वाले हैं। ये स्नेह आपका मुझ पर बहुत बड़ा ऋण है, कर्ज है और इस कर्ज को मैं कर्नाटक की जनता की लगातार सेवा करके चुकाउंगा। कर्नाटक के प्रत्येक व्यक्ति का जीवन खुशहाल हो, यहां के नौजवानों को आगे बढ़ने के, रोजगार के लगातार नए अवसर मिलें, यहां की बहन-बेटियां और सशक्त हों, इसी दिशा में हम मिलकर काम कर रहे हैं। भाजपा की डबल इंजन की सरकार, कर्नाटक के हर जिले, हर गांव, हर कस्बे के पूर्ण विकास के लिए ईमानदारी से प्रयास कर रही है। आज धारवाड़ की इस धरा पर विकास की एक नई धारा निकल रही है। विकास की ये धारा हुबली, धारवाड़ के साथ ही, पूरे कर्नाटक के भविष्य को सींचने का काम करेगी, उसे पुष्पित और पल्लवित करने का काम करेगी।

साथियों,

सदियों से हमारा धारवाड़ मलेनाडु और बयालू सीमे इसके बीच गेटवे टाउन, यानी द्वार के रूप में जाना जाता रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों के यात्रियों के लिए ये नगर एक पड़ाव होता था। इसने हर किसी का दिल खोलकर के स्वागत किया, और हर किसी से सीखकर खुद को समृद्ध भी किया। इसीलिए धारवाड़ केवल एक गेटवे ही नहीं रहा, बल्कि ये कर्नाटक और भारत की जीवंतता का एक प्रतिबिंब बन गया। इसे कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। धारवाड़ की पहचान साहित्य से रही है, जिसने डॉ डी. आर. बेंद्रे जैसे साहित्यकार दिये हैं। धारवाड़ की पहचान समृद्ध संगीत से रही है, जिसने पंडित भीमसेन जोशी, गंगूभाई हंगल और बासवराज राजगुरु जैसे संगीतज्ञ दिये हैं। धारवाड़ की धरती ने पंडित कुमार गंधर्व, पंडित मल्लिकार्जुन मानसुर, जैसे महान रत्नों को दिया है। और धारवाड़ की पहचान यहाँ के स्वाद से भी है। ऐसा कौन होगा, जिसने एक बार ‘धारवाड़ पेड़ा’ का स्वाद लिया हो और फिर उसका मन उसे दोबारा खाने का ना किया हो। लेकिन हमारे साथी प्रहलाद जोशी मेरे स्वास्थ्य का बहुत ख्याल रखते हैं, इसलिए उन्होंने आज मुझे पेड़ा तो दिया, लेकिन बंद बॉक्स में दिया।

साथियों,

आज धारवाड़ में IIT के इस नए कैम्पस की दोहरी खुशी है। यहां हिंदी समझ में आता है इस तरफ। ये कैंपस, धारवाड़ की पहचान को और मजबूत करने का काम करेगा।

साथियों,

यहाँ आने से पहले मैं अभी मंड्या में था। मंड्या में मुझे ‘बेंगलुरु-मैसूर एक्सप्रेस वे’ कर्नाटक की और देश की जनता को समर्पित करने का सौभाग्य मिला। ये एक्सप्रेस वे कर्नाटक को दुनिया के सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी हब के रूप में और आगे ले जाने का रास्ता तैयार करेगा। अभी कुछ ही दिन पहले बेलागावी में कई विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ था। शिमोगा में कुवेम्पु एयरपोर्ट का inauguration भी हुआ था। और, अब धारवाड़ में IIT का ये नया कैम्पस कर्नाटक की विकासयात्रा में नया अध्याय लिख रहा है। एक इंस्टीट्यूट के रूप में यहां की high-tech facilities IIT-धारवाड़ को वर्ल्ड के बेस्ट institutes के बराबर पहुँचने की प्रेरणा देंगे।


साथियों,

ये संस्थान, भाजपा सरकार की संकल्प से सिद्धि का भी उदाहरण है। 4 साल पहले फरवरी 2019 में मैंने इस आधुनिक इंस्टीट्यूट का शिलान्यास किया था। बीच में कोरोना काल था, काम करने में अनेक दिक्कतें थी। लेकिन उसके बावजूद भी मुझे खुशी है कि 4 साल के भीतर-भीतर IIT-धारवाड़ आज एक futuristic institute के रूप में तैयार हो चुका है। शिलान्यास से लोकार्पण तक, डबल इंजन सरकार इसी स्पीड से काम करती है और मेरा तो संकल्प रहता है जिसका शिलान्यास हम करेंगे उसका उद्घाटन भी हम ही करेंगे। होती है, चलती है शिलान्यास करो पत्थर रखो और भूल जाओ वो वक्त चला गया है।

साथियों,

आजादी के बाद कई दशकों तक हमारे यहां यही सोच रही कि अच्छे शिक्षण संस्थाओं का विस्तार होगा तो उसके ब्रांड पर असर पड़ेगा। इस सोच ने देश के युवाओं का बहुत नुकसान किया है। लेकिन अब नया भारत, नौजवान भारत, इस पुरानी सोच को पीछे छोड़कर आगे बढ़ रहा है। अच्छी शिक्षा हर जगह पहुंचनी चाहिए, हर किसी को मिलनी चाहिए। जितने ज्यादा उत्तम इंस्टीट्यूट होंगे, उतने ज्यादा लोगों तक अच्छी शिक्षा की पहुंच होगी। यही वजह है कि बीते 9 वर्षों में भारत में अच्छे एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की संख्या लगातार बढ़ रही है। हमने AIIMS की संख्या तीन गुना कर दिया। आजादी के बाद 7 दशकों में जहां देश में सिर्फ 380 मेडिकल कॉलेज थे, वहीं पिछले 9 वर्षों में 250 मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। इन 9 वर्षों में देश में अनेकों नए IIM और IIT खुले हैं। आज का ये कार्यक्रम भी भाजपा सरकार की इसी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

साथियों,

21वीं सदी का भारत, अपने शहरों को आधुनिक बनाते हुए आगे बढ़ रहा है। भाजपा सरकार ने हुबली-धारवाड़ को स्मार्ट सिटी योजना में शामिल किया था। आज इसके तहत यहां अनेक स्मार्ट परियोजनाओं का लोकार्पण हुआ है। इसके अलावा एक स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स की आधारशिला रखी गई है। टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्मार्ट गवर्नेंस की वजह से आने वाले दिनों में हुबली धारवाड़ का ये क्षेत्र विकास की नई ऊंचाई पर जाएगा।

साथियों,

पूरे कर्नाटक में श्री जयदेव हॉस्पिटल ऑफ कार्डियोवस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट पर भी बहुत भरोसा किया जाता है। इसकी सेवाएं बेंगलुरु, मैसूर और कलबुर्गी में मिलती हैं। आज हुबली में इसके नए ब्रांच की आधारशिला रखी गई है, इसके बनने के बाद इस क्षेत्र के लोगों को बहुत बड़ी सुविधा हो जाएगी। ये क्षेत्र पहले से ही Health Care Hub है। अब नए अस्पताल से यहां के और ज्यादा लोगों को फायदा होगा।

साथियों,

धारवाड़ और उसके आसपास के क्षेत्र में पीने के साफ पानी को उपलब्ध कराने के लिए भी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रहे हैं। जल जीवन मिशन के तहत यहां एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की योजना का शिलान्यास हुआ है। इसके द्वारा रेणुका सागर जलाशय और मालाप्रभा नदी का जल, नल के जरिए सवा लाख से ज्यादा घरों तक पहुंचाया जाएगा। धारवाड़ में जब नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार होगा तो इससे पूरे जिले के लोगों को फायदा होगा। आज तुपरीहल्ला फ्लड डैमेज कंट्रोल प्रोजेक्ट की आधारशिला भी रखी गई है। इस प्रोजेक्ट के द्वारा बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

साथियों,

आज मुझे एक और बात की बहुत प्रसन्नता है। कर्नाटक ने कनेक्टिविटी के मामले में आज एक और माइलस्टोन को छू लिया है। और कर्नाटक को ये गौरव दिलाने का सौभाग्य हुबली को मिला है। अब सिद्धरूधा स्वामीजी स्टेशन पर दुनिया का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म है। लेकिन ये सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है, ये सिर्फ एक प्लेटफॉर्म का विस्तार नहीं है। ये विस्तार है उस सोच का, जिसमें हम इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता देते हैं। होसपेट–हुबली–तिनाईघाट सेक्शन का इलेक्ट्रिफिकेशन और होसपेट स्टेशन का अपग्रेडेशन हमारे इसी विजन को ताकत देता है। इस रूट से बड़े पैमाने पर उद्योगों के लिए कोयले की ढुलाई होती है। इस लाइन के इलेक्ट्रिफिकेशन के बाद डीजल पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण की सुरक्षा होगी। इन सारे प्रयासों से क्षेत्र के आर्थिक विकास को रफ्तार मिलेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

भाइयों और बहनों,

अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सिर्फ आंखों को अच्छा लगने के लिए नहीं होता, ये जीवन को आसान बनाने वाला होता है। ये सपनों को साकार करने का रास्ता बनाता है। जब हमारे यहां अच्छी सड़कें नहीं थीं, अच्छे अस्पताल नहीं थे, हर वर्ग, हर आयु के लोगों को कितनी परेशानी होती थी। लेकिन आज जब नए भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, तो सभी को इसका लाभ मिल रहा है। अच्छी सड़कों से स्कूल-कॉलेज जाने वाले युवाओं को आसानी होती है। आधुनिक हाईवे से किसानों को, मज़दूरों को, व्यापार करने बिजनेस वाले को, दफ्तर आने वाले लोगों को, मिडिल क्लास को, हर किसी को लाभ होता है। इसलिए हर कोई अच्छा-आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर चाहता है। और मुझे खुशी है कि बीते 9 वर्षों से देश लगातार अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए निरंतर काम कर रहा है। पिछले 9 वर्ष में देश के गांवों में पीएम सड़क योजना के माध्यम से सड़कों का नेटवर्क दोगुना से अधिक हो चुका है। नेशनल हाइवे नेटवर्क में 55% से अधिक वृद्धि हो चुकी है। सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि देश में आज एयरपोर्ट और रेलवे का भी अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। पिछले 9 वर्षों में देश में एयरपोर्ट्स की संख्या दोगुनी से अधिक हो चुकी है।

साथियों,

साल 2014 से पहले देश में इंटरनेट की, भारत की डिजिटल ताकत की चर्चा बहुत कम होती थी। लेकिन आज भारत दुनिया की सबसे ताकतवर डिजिटल इकॉनॉमीज़ में से एक है। ये इसलिए हुआ क्योंकि हमने सस्ता इंटरनेट उपलब्ध कराया, गांव-गांव इंटरनेट पहुंचाया। पिछले 9 वर्षों में हर दिन औसतन ढाई लाख ब्रॉडबैंड कनेक्शन दिए गए हैं, प्रतिदिन ढाई लाख कनेक्शन।

इंफ्रा के विकास में ये गति इसलिए आ रही है, क्योंकि आज देश और देशवासियों की ज़रूरत के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। पहले राजनीतिक लाभ-हानि देखकर ही रेल, रोड ऐसे प्रोजेक्ट्स की घोषणा होती थी। हम पूरे देश के लिए पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान लेकर आए हैं, ताकि जहां-जहां भी देश में ज़रूरत है, वहां तेज़ गति से इंफ्रास्ट्रक्चर बन सके।

साथियों,

आज देश में सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी अभूतपूर्व काम हो रहा है। साल 2014 तक देश की एक बड़ी आबादी के पास पक्का घर नहीं था। टॉयलेट के अभाव के कारण हमारी बहनों को कितने कष्ट उठाने पड़ते थे। लकड़ी-पानी के इंतजाम में ही बहनों का पूरा समय चला जाता था। गरीब के लिए अस्पताल की कमी थी। अस्पताल में इलाज महंगा था। हमने एक-एक करके इन समस्याओं का समाधान किया। गरीब को अपना पक्का घर मिला, बिजली-गैस कनेक्शन मिला, टॉयलेट मिला। अब हर घर नल से जल की सुविधा मिल रही है। घर-गांव के निकट अच्छे अस्पताल बन रहे हैं, अच्छे कॉलेज-यूनिवर्सिटी बन रहे हैं। यानि आज हम अपने युवाओं को हर वो साधन दे रहे हैं, जो आने वाले 25 साल के संकल्प सिद्ध करने में उनकी मदद करेंगे।


साथियों,

आज जब मैं भगवान बसवेश्वर की धरती पर आया हूं तो खुद को और धन्य महसूस कर रहा हूं। भगवान बसवेश्वर के अनेक योगदानों में सबसे प्रमुख है-अनुभव मंडपम की स्थापना। इस लोकतांत्रिक व्यवस्था का दुनिया भर में अध्ययन होता है। और ऐसी अनेक बातें है, जिसके कारण हम दावे के साथ कहते हैं भारत सिर्फ largest democracy नहीं, भारत mother of democracy भी है। ये मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे कुछ वर्ष पूर्व लंदन में भगवान बसवेश्वर की प्रतिमा के लोकार्पण का अवसर मिला। लंदन में भगवान बसवेश्वर, लोकतंत्र की मजबूत नींव का प्रतीक अनुभव मंडपम। वो भगवान बसवेश्वर लंदन की धरती पर उनकी मूर्ति लेकिन ये दुर्भाग्य है कि लंदन में ही भारत के लोकतंत्र पर सवाल उठाने का काम किया गया। भारत के लोकतंत्र की जड़ें, हमारे सदियों के इतिहास से सींची गई हैं। दुनिया की कोई ताकत भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान नहीं पहुंचा सकती। बावजूद इसके कुछ लोग भारत के लोकतंत्र को लगातार कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। ऐसे लोग भगवान बसवेश्वर का अपमान कर रहे हैं। ऐसे लोग कर्नाटक के लोगों का, भारत की महान परंपरा का, भारत के 130 करोड़ जागरूक नागरिकों का अपमान कर रहे हैं। ऐसे लोगों से कर्नाटक के लोगों को भी सतर्क रहना है।

 

साथियों,

कर्नाटक ने बीते वर्षों में जिस तरह से भारत को tech-future के रूप में पहचान दिलाई है, ये समय उसे और आगे बढ़ाने का है। कर्नाटक हाइटेक इंडिया का इंजन है। इस इंजन को डबल इंजन की सरकार की पावर मिलनी बहुत जरूरी है।

साथियों,

एक बार फिर हुबली-धारवाड़ के लोगों को विकास के प्रोजेक्ट्स के लिए बहुत-बहुत बधाई, बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मेरे साथ बोलें– भारत माता की जय। दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए – भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Text of PM Modi's address at the Parliament of Guyana
November 21, 2024

Hon’ble Speaker, मंज़ूर नादिर जी,
Hon’ble Prime Minister,मार्क एंथनी फिलिप्स जी,
Hon’ble, वाइस प्रेसिडेंट भरत जगदेव जी,
Hon’ble Leader of the Opposition,
Hon’ble Ministers,
Members of the Parliament,
Hon’ble The चांसलर ऑफ द ज्यूडिशियरी,
अन्य महानुभाव,
देवियों और सज्जनों,

गयाना की इस ऐतिहासिक पार्लियामेंट में, आप सभी ने मुझे अपने बीच आने के लिए निमंत्रित किया, मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। कल ही गयाना ने मुझे अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है। मैं इस सम्मान के लिए भी आप सभी का, गयाना के हर नागरिक का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। गयाना का हर नागरिक मेरे लिए ‘स्टार बाई’ है। यहां के सभी नागरिकों को धन्यवाद! ये सम्मान मैं भारत के प्रत्येक नागरिक को समर्पित करता हूं।

साथियों,

भारत और गयाना का नाता बहुत गहरा है। ये रिश्ता, मिट्टी का है, पसीने का है,परिश्रम का है करीब 180 साल पहले, किसी भारतीय का पहली बार गयाना की धरती पर कदम पड़ा था। उसके बाद दुख में,सुख में,कोई भी परिस्थिति हो, भारत और गयाना का रिश्ता, आत्मीयता से भरा रहा है। India Arrival Monument इसी आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक है। अब से कुछ देर बाद, मैं वहां जाने वाला हूं,

साथियों,

आज मैं भारत के प्रधानमंत्री के रूप में आपके बीच हूं, लेकिन 24 साल पहले एक जिज्ञासु के रूप में मुझे इस खूबसूरत देश में आने का अवसर मिला था। आमतौर पर लोग ऐसे देशों में जाना पसंद करते हैं, जहां तामझाम हो, चकाचौंध हो। लेकिन मुझे गयाना की विरासत को, यहां के इतिहास को जानना था,समझना था, आज भी गयाना में कई लोग मिल जाएंगे, जिन्हें मुझसे हुई मुलाकातें याद होंगीं, मेरी तब की यात्रा से बहुत सी यादें जुड़ी हुई हैं, यहां क्रिकेट का पैशन, यहां का गीत-संगीत, और जो बात मैं कभी नहीं भूल सकता, वो है चटनी, चटनी भारत की हो या फिर गयाना की, वाकई कमाल की होती है,

साथियों,

बहुत कम ऐसा होता है, जब आप किसी दूसरे देश में जाएं,और वहां का इतिहास आपको अपने देश के इतिहास जैसा लगे,पिछले दो-ढाई सौ साल में भारत और गयाना ने एक जैसी गुलामी देखी, एक जैसा संघर्ष देखा, दोनों ही देशों में गुलामी से मुक्ति की एक जैसी ही छटपटाहट भी थी, आजादी की लड़ाई में यहां भी,औऱ वहां भी, कितने ही लोगों ने अपना जीवन समर्पित कर दिया, यहां गांधी जी के करीबी सी एफ एंड्रूज हों, ईस्ट इंडियन एसोसिएशन के अध्यक्ष जंग बहादुर सिंह हों, सभी ने गुलामी से मुक्ति की ये लड़ाई मिलकर लड़ी,आजादी पाई। औऱ आज हम दोनों ही देश,दुनिया में डेमोक्रेसी को मज़बूत कर रहे हैं। इसलिए आज गयाना की संसद में, मैं आप सभी का,140 करोड़ भारतवासियों की तरफ से अभिनंदन करता हूं, मैं गयाना संसद के हर प्रतिनिधि को बधाई देता हूं। गयाना में डेमोक्रेसी को मजबूत करने के लिए आपका हर प्रयास, दुनिया के विकास को मजबूत कर रहा है।

साथियों,

डेमोक्रेसी को मजबूत बनाने के प्रयासों के बीच, हमें आज वैश्विक परिस्थितियों पर भी लगातार नजर ऱखनी है। जब भारत और गयाना आजाद हुए थे, तो दुनिया के सामने अलग तरह की चुनौतियां थीं। आज 21वीं सदी की दुनिया के सामने, अलग तरह की चुनौतियां हैं।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्थाएं और संस्थाएं,ध्वस्त हो रही हैं, कोरोना के बाद जहां एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ना था, दुनिया दूसरी ही चीजों में उलझ गई, इन परिस्थितियों में,आज विश्व के सामने, आगे बढ़ने का सबसे मजबूत मंत्र है-"Democracy First- Humanity First” "Democracy First की भावना हमें सिखाती है कि सबको साथ लेकर चलो,सबको साथ लेकर सबके विकास में सहभागी बनो। Humanity First” की भावना हमारे निर्णयों की दिशा तय करती है, जब हम Humanity First को अपने निर्णयों का आधार बनाते हैं, तो नतीजे भी मानवता का हित करने वाले होते हैं।

साथियों,

हमारी डेमोक्रेटिक वैल्यूज इतनी मजबूत हैं कि विकास के रास्ते पर चलते हुए हर उतार-चढ़ाव में हमारा संबल बनती हैं। एक इंक्लूसिव सोसायटी के निर्माण में डेमोक्रेसी से बड़ा कोई माध्यम नहीं। नागरिकों का कोई भी मत-पंथ हो, उसका कोई भी बैकग्राउंड हो, डेमोक्रेसी हर नागरिक को उसके अधिकारों की रक्षा की,उसके उज्जवल भविष्य की गारंटी देती है। और हम दोनों देशों ने मिलकर दिखाया है कि डेमोक्रेसी सिर्फ एक कानून नहीं है,सिर्फ एक व्यवस्था नहीं है, हमने दिखाया है कि डेमोक्रेसी हमारे DNA में है, हमारे विजन में है, हमारे आचार-व्यवहार में है।

साथियों,

हमारी ह्यूमन सेंट्रिक अप्रोच,हमें सिखाती है कि हर देश,हर देश के नागरिक उतने ही अहम हैं, इसलिए, जब विश्व को एकजुट करने की बात आई, तब भारत ने अपनी G-20 प्रेसीडेंसी के दौरान One Earth, One Family, One Future का मंत्र दिया। जब कोरोना का संकट आया, पूरी मानवता के सामने चुनौती आई, तब भारत ने One Earth, One Health का संदेश दिया। जब क्लाइमेट से जुड़े challenges में हर देश के प्रयासों को जोड़ना था, तब भारत ने वन वर्ल्ड, वन सन, वन ग्रिड का विजन रखा, जब दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हुए, तब भारत ने CDRI यानि कोएलिशन फॉर डिज़ास्टर रज़ीलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर का initiative लिया। जब दुनिया में pro-planet people का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करना था, तब भारत ने मिशन LiFE जैसा एक global movement शुरु किया,

साथियों,

"Democracy First- Humanity First” की इसी भावना पर चलते हुए, आज भारत विश्वबंधु के रूप में विश्व के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहा है। दुनिया के किसी भी देश में कोई भी संकट हो, हमारा ईमानदार प्रयास होता है कि हम फर्स्ट रिस्पॉन्डर बनकर वहां पहुंचे। आपने कोरोना का वो दौर देखा है, जब हर देश अपने-अपने बचाव में ही जुटा था। तब भारत ने दुनिया के डेढ़ सौ से अधिक देशों के साथ दवाएं और वैक्सीन्स शेयर कीं। मुझे संतोष है कि भारत, उस मुश्किल दौर में गयाना की जनता को भी मदद पहुंचा सका। दुनिया में जहां-जहां युद्ध की स्थिति आई,भारत राहत और बचाव के लिए आगे आया। श्रीलंका हो, मालदीव हो, जिन भी देशों में संकट आया, भारत ने आगे बढ़कर बिना स्वार्थ के मदद की, नेपाल से लेकर तुर्की और सीरिया तक, जहां-जहां भूकंप आए, भारत सबसे पहले पहुंचा है। यही तो हमारे संस्कार हैं, हम कभी भी स्वार्थ के साथ आगे नहीं बढ़े, हम कभी भी विस्तारवाद की भावना से आगे नहीं बढ़े। हम Resources पर कब्जे की, Resources को हड़पने की भावना से हमेशा दूर रहे हैं। मैं मानता हूं,स्पेस हो,Sea हो, ये यूनीवर्सल कन्फ्लिक्ट के नहीं बल्कि यूनिवर्सल को-ऑपरेशन के विषय होने चाहिए। दुनिया के लिए भी ये समय,Conflict का नहीं है, ये समय, Conflict पैदा करने वाली Conditions को पहचानने और उनको दूर करने का है। आज टेरेरिज्म, ड्रग्स, सायबर क्राइम, ऐसी कितनी ही चुनौतियां हैं, जिनसे मुकाबला करके ही हम अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवार पाएंगे। और ये तभी संभव है, जब हम Democracy First- Humanity First को सेंटर स्टेज देंगे।

साथियों,

भारत ने हमेशा principles के आधार पर, trust और transparency के आधार पर ही अपनी बात की है। एक भी देश, एक भी रीजन पीछे रह गया, तो हमारे global goals कभी हासिल नहीं हो पाएंगे। तभी भारत कहता है – Every Nation Matters ! इसलिए भारत, आयलैंड नेशन्स को Small Island Nations नहीं बल्कि Large ओशिन कंट्रीज़ मानता है। इसी भाव के तहत हमने इंडियन ओशन से जुड़े आयलैंड देशों के लिए सागर Platform बनाया। हमने पैसिफिक ओशन के देशों को जोड़ने के लिए भी विशेष फोरम बनाया है। इसी नेक नीयत से भारत ने जी-20 की प्रेसिडेंसी के दौरान अफ्रीकन यूनियन को जी-20 में शामिल कराकर अपना कर्तव्य निभाया।

साथियों,

आज भारत, हर तरह से वैश्विक विकास के पक्ष में खड़ा है,शांति के पक्ष में खड़ा है, इसी भावना के साथ आज भारत, ग्लोबल साउथ की भी आवाज बना है। भारत का मत है कि ग्लोबल साउथ ने अतीत में बहुत कुछ भुगता है। हमने अतीत में अपने स्वभाव औऱ संस्कारों के मुताबिक प्रकृति को सुरक्षित रखते हुए प्रगति की। लेकिन कई देशों ने Environment को नुकसान पहुंचाते हुए अपना विकास किया। आज क्लाइमेट चेंज की सबसे बड़ी कीमत, ग्लोबल साउथ के देशों को चुकानी पड़ रही है। इस असंतुलन से दुनिया को निकालना बहुत आवश्यक है।

साथियों,

भारत हो, गयाना हो, हमारी भी विकास की आकांक्षाएं हैं, हमारे सामने अपने लोगों के लिए बेहतर जीवन देने के सपने हैं। इसके लिए ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज़ बहुत ज़रूरी है। ये समय ग्लोबल साउथ के देशों की Awakening का समय है। ये समय हमें एक Opportunity दे रहा है कि हम एक साथ मिलकर एक नया ग्लोबल ऑर्डर बनाएं। और मैं इसमें गयाना की,आप सभी जनप्रतिनिधियों की भी बड़ी भूमिका देख रहा हूं।

साथियों,

यहां अनेक women members मौजूद हैं। दुनिया के फ्यूचर को, फ्यूचर ग्रोथ को, प्रभावित करने वाला एक बहुत बड़ा फैक्टर दुनिया की आधी आबादी है। बीती सदियों में महिलाओं को Global growth में कंट्रीब्यूट करने का पूरा मौका नहीं मिल पाया। इसके कई कारण रहे हैं। ये किसी एक देश की नहीं,सिर्फ ग्लोबल साउथ की नहीं,बल्कि ये पूरी दुनिया की कहानी है।
लेकिन 21st सेंचुरी में, global prosperity सुनिश्चित करने में महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका होने वाली है। इसलिए, अपनी G-20 प्रेसीडेंसी के दौरान, भारत ने Women Led Development को एक बड़ा एजेंडा बनाया था।

साथियों,

भारत में हमने हर सेक्टर में, हर स्तर पर, लीडरशिप की भूमिका देने का एक बड़ा अभियान चलाया है। भारत में हर सेक्टर में आज महिलाएं आगे आ रही हैं। पूरी दुनिया में जितने पायलट्स हैं, उनमें से सिर्फ 5 परसेंट महिलाएं हैं। जबकि भारत में जितने पायलट्स हैं, उनमें से 15 परसेंट महिलाएं हैं। भारत में बड़ी संख्या में फाइटर पायलट्स महिलाएं हैं। दुनिया के विकसित देशों में भी साइंस, टेक्नॉलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स यानि STEM graduates में 30-35 परसेंट ही women हैं। भारत में ये संख्या फोर्टी परसेंट से भी ऊपर पहुंच चुकी है। आज भारत के बड़े-बड़े स्पेस मिशन की कमान महिला वैज्ञानिक संभाल रही हैं। आपको ये जानकर भी खुशी होगी कि भारत ने अपनी पार्लियामेंट में महिलाओं को रिजर्वेशन देने का भी कानून पास किया है। आज भारत में डेमोक्रेटिक गवर्नेंस के अलग-अलग लेवल्स पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व है। हमारे यहां लोकल लेवल पर पंचायती राज है, लोकल बॉड़ीज़ हैं। हमारे पंचायती राज सिस्टम में 14 लाख से ज्यादा यानि One point four five मिलियन Elected Representatives, महिलाएं हैं। आप कल्पना कर सकते हैं, गयाना की कुल आबादी से भी करीब-करीब दोगुनी आबादी में हमारे यहां महिलाएं लोकल गवर्नेंट को री-प्रजेंट कर रही हैं।

साथियों,

गयाना Latin America के विशाल महाद्वीप का Gateway है। आप भारत और इस विशाल महाद्वीप के बीच अवसरों और संभावनाओं का एक ब्रिज बन सकते हैं। हम एक साथ मिलकर, भारत और Caricom की Partnership को और बेहतर बना सकते हैं। कल ही गयाना में India-Caricom Summit का आयोजन हुआ है। हमने अपनी साझेदारी के हर पहलू को और मजबूत करने का फैसला लिया है।

साथियों,

गयाना के विकास के लिए भी भारत हर संभव सहयोग दे रहा है। यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश हो, यहां की कैपेसिटी बिल्डिंग में निवेश हो भारत और गयाना मिलकर काम कर रहे हैं। भारत द्वारा दी गई ferry हो, एयरक्राफ्ट हों, ये आज गयाना के बहुत काम आ रहे हैं। रीन्युएबल एनर्जी के सेक्टर में, सोलर पावर के क्षेत्र में भी भारत बड़ी मदद कर रहा है। आपने t-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप का शानदार आयोजन किया है। भारत को खुशी है कि स्टेडियम के निर्माण में हम भी सहयोग दे पाए।

साथियों,

डवलपमेंट से जुड़ी हमारी ये पार्टनरशिप अब नए दौर में प्रवेश कर रही है। भारत की Energy डिमांड तेज़ी से बढ़ रही हैं, और भारत अपने Sources को Diversify भी कर रहा है। इसमें गयाना को हम एक महत्वपूर्ण Energy Source के रूप में देख रहे हैं। हमारे Businesses, गयाना में और अधिक Invest करें, इसके लिए भी हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

साथियों,

आप सभी ये भी जानते हैं, भारत के पास एक बहुत बड़ी Youth Capital है। भारत में Quality Education और Skill Development Ecosystem है। भारत को, गयाना के ज्यादा से ज्यादा Students को Host करने में खुशी होगी। मैं आज गयाना की संसद के माध्यम से,गयाना के युवाओं को, भारतीय इनोवेटर्स और वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करने के लिए भी आमंत्रित करता हूँ। Collaborate Globally And Act Locally, हम अपने युवाओं को इसके लिए Inspire कर सकते हैं। हम Creative Collaboration के जरिए Global Challenges के Solutions ढूंढ सकते हैं।

साथियों,

गयाना के महान सपूत श्री छेदी जगन ने कहा था, हमें अतीत से सबक लेते हुए अपना वर्तमान सुधारना होगा और भविष्य की मजबूत नींव तैयार करनी होगी। हम दोनों देशों का साझा अतीत, हमारे सबक,हमारा वर्तमान, हमें जरूर उज्जवल भविष्य की तरफ ले जाएंगे। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं, मैं आप सभी को भारत आने के लिए भी निमंत्रित करूंगा, मुझे गयाना के ज्यादा से ज्यादा जनप्रतिनिधियों का भारत में स्वागत करते हुए खुशी होगी। मैं एक बार फिर गयाना की संसद का, आप सभी जनप्रतिनिधियों का, बहुत-बहुत आभार, बहुत बहुत धन्यवाद।