Quote2022 तक देश के किसानों की आय दोगुनी करना हमारा लक्ष्य: पीएम मोदी
Quote'संपदा योजना' के माध्यम से कृषि उत्पादों के मूल्य में बढ़ोतरी होगी: प्रधानमंत्री मोदी 
Quoteलोगों ने हमारे फैसलों का किया समर्थन, इससे हमें आगे भी काम करने की प्रेरणा मिलती है: प्रधानमंत्री 
Quoteलोगों ने स्वच्छता को जन आंदोलन बनाया, स्वच्छता के संदेश को आगे बढ़ाने में मीडिया की अहम भूमिका: पीएम मोदी
Quoteआइए हम सभी अगले 5 वर्षों में देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लें और न्यू इंडिया का निर्माण करें: प्रधानमंत्री मोदी

मंच पर विराजमान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान रंजीत दास जी, असम के लोकप्रिय एवं यशस्वी मुख्यमंत्री श्रीमान सर्बानंद सोनेवाल जी, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्रीमान प्रेमा खान्डू जी, मणिपुर के मुख्यमंत्री श्रीमान एन बिरेन सिंह जी, राज्य सरकार में मंत्री श्रीमान हेमंता विश्वशर्मा जी, केन्द्र सरकार में मंत्री परिषद के के मेरे साथी डाक्टर जितेन्द्र सिंह, फग्गन सिंह, अनुप्रिया जी, राज्य सरकार के मंत्री श्रीमान केशव बहंता, बीटीसी प्रमुख श्रीमान हगरामा मोयली जी, श्रीमान अजय जामवाल जी, प्रमिला रानी ब्रहमा जी, सासंद के मेरे साथी रमन डेका जी, राज्य सरकार के मंत्री श्रीमान रेहान डायमरी जी, चन्द्रमोहन पटवारी जी, विश्वस्वरुप भट्टाचार्य जी और विशाल संख्या में पधारे हुए असम के मेरे भाइयों-बहनों।

तीन साल पहले इसी समय 26 मई को दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के परिसर में राष्ट्रपति जी ने मुझे प्रधानमंत्री के कार्यभार के लिए शपथ दिलवाई थी। आज इसी समय ठीक उस बात को 3 वर्ष हो रहे हैं। और ये 3 वर्ष, असम का आग्रह था आज मैं यहां आ सकूं तो अच्छा होगा। पहले तो परंपरा ऐसे रही थी कि ऐसे अवसरों पर दिल्ली का महत्व ज्यादा रहता है। लेकिन हमारे सरकार का कार्य संस्कृति ऐसी है कि हमारे लिए हिन्दुस्तान का हर कोना दिल्ली है। और आज इस 3 वर्ष के निमित और असम सरकार के 1 वर्ष निमित, इतनी बड़ी तदाद में लोग आकर के लोग आप आकर आशीर्वाद दिए। मैं आपका ह्रदय से बहुत-बहुत आभारी हूं। और स्वयं मेघ राजा ने भी आ करके आशीर्वाद दिए। और कार्यक्रम शुरू होते ही मेघ राजा ने भी हमारे लिए अनुकूलता कर दी। इसलिए मेघ राजा का भी आभार व्यक्त करता हूं।

भाइयों-बहनों।

आज सुबह हिन्दुस्तान सबसे लम्बे ब्रिज का लोकार्पण करने का मुझे सौभाग्य मिला। और आज दो महत्वपूर्ण संस्थानों का शिलान्यास हुआ। हम ये समझें कि कृषि क्षेत्र में रिसर्च के लिए इतनी बड़ी इंस्टीट्यूशन का असम में आना और गुवाहाटी में एम्स का शिलान्यास होना, आज एक ही दिन में करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट का या तो शिलान्यास या लोकार्पण करने का अवसर मिला है। एक ही दिन में करीब साढ़े तीन हजार करोड़ रुपया, एक राज्य के अंदर आना, अपने आप में ये बताता है कि सरकार की सोच क्या है? हिन्दुस्तान के हर राज्यों के विकास का हमारा जो सपना है, उसको इसमें आप देख सकते हैं।  

भाइयों-बहनों।

आज सुबह मैंने घोषणा की थी कि हिन्दुस्तान का ये जो लम्बा ब्रिज बना है ब्रह्मपुत्रा के ऊपर ये ब्रिज बना है। भूपेन्द्र हजारिका जीवनभर ब्रह्मपुत्रा की उपासना करते रहे, ब्रह्मपुत्रा के गीत गाते रहे, वो ब्रह्मपुत्रामय हो रहे थे। और इसलिए आज ये ब्रिज भी उन्हीं के नाम समर्पित कर दिया। और ये ब्रिज भूपेन्द्र हजारिका के नाम से जाना जाएगा। आज मुझे एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूशन के शिलान्यास का अवसर मिला था। वहां मैंने एक और घोषणा की - किसान सम्पदा योजना की। 2022 में हिन्दुस्तान के किसान की इनकम डबल करने का इरादा, एक संकल्प, उसको ले करके आगे बढ़ रहे हैं तब, एक किसान सम्पदा योजना के तहत एग्रो-प्रोडक्ट में फूड प्रोसेसिंग हो, वेल्यू एडिशन हो, मूल्यवृद्धि हो। उस काम के लिए 6000 करोड़ रुपया की सीड मनी के साथ दुनियाभर के FDI को इन्वाइट करके एक लाख करोड़ का कारोबार कृषि उत्पादन की मूल्य वृद्धि में करने की दिशा में एक योजना की मैंने आज घोषणा की है। ये किसान सम्पदा योजना सच्चे अर्थ में किसानों की सम्पदा बनेगा। देश की अर्थव्यवस्था को एक नया आयाम देगा।

और आज मैं जब गुवाहाटी में आपके बीच आया हूं तब, आप जानते हैं। पिछली बार लोकसभा चल रही थी। हमने एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण फैसला किया। बहुत वर्षों से हमारे देश के पिछले वर्ग के लोग एक ओबीसी कमीशन का मांग कर रहे थे। लेकिन पहले की सरकारें सुनती रही, आश्वासन देती रही। लेकिन ओबीसी कमीशन का कभी निर्णय नहीं किया। हमने ये निर्णय कर लिया। कानून पारित कर दिया और पहली बार हिन्दुस्तान के कोटी-कोटी, ओबीसी जन जो हैं, पिछड़े वर्ग के लोग हैं, उनके लिए एक संवैधानिक व्यवस्था देने का काम हमने किया।

भाइयों-बहनों।

आने वाले दिनों में, स्कूलों में, कॉलेजेज में एडमिशन का दौर चलेगा। इन सब को ध्यान से रखते हुए ओबीसी क्रिमीलेयर जो अब तक 6 लाख रुपया माना गया है। उसमें 25% वृद्धि करके क्रिमीलेयर की सीमा 8 लाख करने का सरकार ने फैसला किया है। और इसके कारण पिछड़े वर्ग के बालक इस बार जब एडमिशन के लिए जाएंगे तो 2 लाख की जो बढ़ोतरी हुई है, उनके बच्चे जो छूट जाने की संभावना है, उनको इसका लाभ मिलेगा। और समाज के बहुत बड़े तबके को इस सुविधा से अपने जीवन में, शिक्षा में प्रगति करने के लिए एक बहुत बड़ा लाभ होगा।

भाइयों-बहनों।

आज मैं देश के नागरिकों का ह्रदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूं। आपने हम पर एक विश्वास रख करके पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने का अवसर दिया। एक प्रधान सेवक के रूप में मुझे कार्य करने का मौका दिया लेकिन इससे भी ज्यादा मैंने इन 3 साल में देखा है कि आपने सिर्फ वोट दे करके, हमें सत्ता में पहुंचा करके, आप सो नहीं गए। अब मोदी जी आए हैं सब करेंगे, ऐसा आपने नहीं किया। मैं 3 साल में बड़े संतोष के साथ, बड़े गर्व का साथ, सवा सौ करोड़ देशवासियों के सामने सर झुका करके इस बात का गौरव से स्वीकार करता हूं कि ये देश, सवा सौ करोड़ देशवासी, हर कदम पर हमारे साथ चले। हर परिस्थिति में हमारे साथ चलें। कड़े से कड़े फैसले हमने लिए। सवा सौ करोड़ देशवासी उन्होंने विश्वास को और मजबूत बनाया। भरोसे को नई ताकत दी। शायद सार्वजनिक जीवन में सरकार बनाने में जनता का सहयोग, ये तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। लेकिन सरकार चलाने में जनता, सरकार से भी दो कदम आगे चले, ये आजादी के बाद पहली बार हिन्दुस्तान ने इस 3 साल में देखा है। हर हिन्दुस्तानी को इस बात में गर्व होगा। जब लाल किले पर से मुझे पहली बार देश के सामने अपनी बातें रखने का सौभाग्य मिला था। और मैंने स्वच्छता का विषय छेड़ा था। सब लोगों के लिए अचरज था। ये कैसा प्रधानमंत्री है। लाल किले पर से शौचालय की बात कर रहा है। स्वच्छता की बातें कर रहा है। अब तक तो हमने बहुत बड़ी-बड़ी बातें सुनी है। बड़े-बड़े आकड़ें, बड़ी-बड़ी योजनाओं के नाम यही लाल किले से सुना है। ये कैसा प्रधान सेवक आ गया है कि वो शौचालय की बात कर रहा है। स्वच्छता की बात रहा है। बड़ा अजूबा लगा था लोगों के लिए ...।

लेकिन भाइयों-बहनों।

एक बार के लिए अजूबा हो सकता है। उनके लिए आश्चर्य हो सकता है। लेकिन मैं जिस पार्श्वभूमि से आया हूं। जिस जिंदगी को जीकर निकला हूं। और इसलिए इन चीजों के जिंदगी में क्या अहमियत होती है। इन बातों को मै भली भांति अनुभव कर सकता हूं। देश के छोटे-छोटे लोगों को कैसी-कैसी चीजों से गुजरना पड़ता है। ये अपने अनुभव से मैंने जाना है, समझा है। और इसलिए एक बार मैंने कहा था। मेरी पार्श्वभूमि ऐसी है। मेरा लालन-पालन ऐसी है कि जिसमें एक छोटे व्यक्ति को अत्यंत पीछे आखरी कतार से आए हुए व्यक्ति को जो अनुभूति होती है। और इसलिए मैंने कहा था। मैं छोटा हूं और छोटे-छोटे लोगों के लिए बड़े-बड़े काम करके रहूंगा। ये मेरा इरादा है। मैं देशवासियों का अभारी हूं कि स्वच्छता अभियान को जनता ने अपना कार्यक्रम बना लिया। मीडिया ने भी शत प्रतिशत मदद की। प्रारंभ में राजनीतिक विरोध के लोगों ने उसका उपहास किया। लेकिन बाद में भी उन्होंने भी उसकी आलोचना करना बंद कर दिया। एक प्रकार से हर किसी का सहयोग मिला। आजादी के बाद जन समर्थन से शासन कैसे चल सकता है। जनभागीदारी से शासन कैसे चल सकता है। जनता जनार्दन की अगुआई से सरकार कैसे चल सकती है। इसके अनेक उदाहरण आपने देखे हैं।

भाइयों-बहनों।

हमारे देश में गैस सिलेंडर 9 देना या 12 देना, उस पर हिन्दुस्तान के बड़े-बड़े नेता उलझे हुए थे। सासंद में घंटों तक 9 सिलेंडर से 12 सिलेंडर तय हुआ करती थी। वो भी एक वक्त था। ये भी एक वक्त है। एक ऐसी सरकार आपने बैठायी, जिस सरकार ने लोगों से कहा कि आप गैस की सब्सिडी छोड़ते क्यों नहीं हो। अरे गरीब के लिए कुछ छोड़ो और आज मैं सर झुका करके 1 करोड़ से ज्यादा उन परिवारों को सर झुका करके नमन करता हूं कि उन्होंने अपनी गैस की सब्सिडी छोड़ दी। और गरीब के घर में गैस के चूल्हा जलाने के लिए, उन्होंने भागीदारी की।

भाइयों-बहनों।

हिन्दुस्तान के जन-मन की ताकत को समझ करके, जन सामर्थ्य के समझ करके योजनाओं में जनभागीदारी को बढ़ाते-बढ़ाते आगे बढ़ने की हमने फैसले किए हैं। भाइयों-बहनों। नोटबंदी बड़ा कठोर निर्णय था। अभी भी कुछ लोग यही कहते हैं। हमने इतने बड़े कठोर निर्णय की कल्पना तक नहीं कर सकते हैं। और उन दिनों टीवी पर राजनेताओं के भाषणों में पूरे देश में आक्रोश पैदा करने के लिए, क्या कुछ नहीं हुआ था। अगर सरकार का इरादा नेक ना होता, सदइच्छा से लिया हुआ फैसला न होता। इतने बड़े कड़े फैसले को जिस प्रकार से आग लगाने की कोशिश चली थी। कितनी बड़ी ताकतवर सरकार हो, भस्म हो जाती, लेकिन ये सवा सौ करोड़ देशवासी थे। उनके आशीर्वाद थे कि इतने बड़े कृत्रिम बवंडर के बावजूद भी, भ्रमित करने के कोटी-कोटी प्रयासों के बावजूद, देश की जनता तसू भर भी डगमगाई नहीं, हिली नहीं और कंधे से कधा मिलाकर के मुझ जैसे प्रधान सेवक के साथ खड़ी रही। आप मुझे बताइये। ऐसी जनता के लिए जिंदगी खपा देने से कितना आनंद मिलता होगा। ये आनंद की अनुभूति मैं करता हूं। लोग मुझे कभी-कभी पूछते हैं। मोदी जी थकते नहीं हो क्या। इतना दौड़ते रहते हो। मैंने कहा सवा सौ करोड़ देशवासी हर पल मुझसे एक कदम आगे चलते हैं। हर बात पर मेरा साथ देते हैं। उनके लिए ये जिदंगी खपाने का जो आनंद है। वो मुझे थकते नहीं देता है, मुझे काम करने का प्रेरणा देता है। तन समर्पित, मन समर्पित और ये जीवन समर्पित, चाहता हूं मां तुझे और क्या दूं। इसी भाव को लेकर के काम करने का प्रेरणा मिलती है।  

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भाइयों-बहनों।

हमारे देश में निर्णय और बदलाव, जनता में एक वक्त था क्या माहौल था सामान्य जीवन में, निराशा व्याप्त था। और निराशा इस हद कर तक घर कर गयी थी। कि भाई अब कुछ होने वाला नहीं है। अब गुजारा कर लो, जिंदगी गुजार लो। अब कुछ होने वाला नहीं है। भाइयों-बहनों। देखते ही वक्त बदल चुका है। आज अब कुछ होगा नहीं, ऐसा ही चलने वाला है। ऐसे ही जीना पड़ेगा। जिंदगी का गुजारा कर लो, ये भाव खत्म हो चुका है। हर किसी के दिल में एक आशा जगी है। नहीं नहीं जरूर होगा। कुछ ना कुछ अच्छा होगा। हम जरूर आगे बढ़ेंगे। देश दुनिया में ताकतवर बनेगा। ये विश्वास हिन्दुस्तान के कोटी-कोटी जनों में आज पैदा हुआ है।

भाइयों-बहनों।

एक वक्त था। ठहराव ही ठहराव नजर आता था। पता ही नहीं चल रहा था कि सरकार है या नहीं है। है तो कुछ हो रहा है या नहीं हो रहा है। हो रहा है तो क्या हो रहा है। कैसे हो रहा है। किसके लिए हो रहा है। सब कुछ एक ठहराव सा महसूस होता था। आज प्रतिपल ठहराव से निकल करके एक निरंतर अविरत प्रवाह, हर दिन नये कार्यक्रम, हर दिन नयी योजना, हर दिन नया प्रयास, हर दिन नयी कोशिश, देश अनुभव कर रहा है, जब कार्य संस्कृति बदलती है। कार्यशैली बदलती है। नेतृत्व की सोच बदलती है। ईमानदारी के साथ चलने का फैसला होता है। तो फिर सरकार वही, मुलाजिम वही, फाइलें वही, दफ्तर वही, समय वही, उसके बावजूद हर कोई काम में लग जाता है। बदलाव शुरू हो जाता है। आज देश अनुभव कर रहा है। बदलाव देख रहा है। जब सरकारी दफ्तर में लोग समय पर आने लगे। तो मीडिया में सुर्खियां बन गयी। इसका मतलब दफ्तर का क्या हाल पहले रहता होगा। इसका हम भलीभांति अंदाज कर सकते हैं।

भाइयों-बहनों।

सरकार कैसे चलती है। सांसद में कानून बनने के बाद इतनी बड़ी महत्वपूर्ण पार्लियामेंट, कोटी-कोटी जनों के वोट से चुनकर के आए हुए पार्लियामेंट के मेंबर, कोई कानून पास करने के लिए, घंटों बहस करें, तर्क-वितर्क करें, जानकारियां एकत्रित करें, रात-रात अध्ययन करें, सांसद में चर्चा करें, संसद में कानून पारित हो लेकिन सरकारें ऐसे चलती थी कि संसद में पारित कानून भी दफ्तर में अंदर जा करके फाइल के डिब्बे में बंद हो जाता था। ना कभी नोटिफिकेशन होता था और ना कभी रूल बनते थे। इससे बड़ी संसद की अवमानना क्या हो सकती है। आपने देखा होगा बेनामी संपत्ति... । इस देश के हर नागरिक को भ्रष्टाचार, बेइमानी के खिलाफ गुस्सा है, आक्रोश है। 1988 में बेनामी संपत्ति के संबंध में एक कानून बना। 28 साल तक वो नोटिफाई नहीं हुआ, रूल्स नहीं बने। कैसी सरकार?

भाइयों बहनों

आज देश में एक और माहौल नजर आ रहा है। एक समय था जब अच्छे से अच्छे ईमानदार व्यक्ति को भी, ईमानदारी से जीना चाहिए कि नहीं जीना चाहिए। इस पर सवालिया निशान खड़ा हो चुका था। उसका मन विचलित होने लगा था। पीढ़ी दर पीढ़ी ईमानदारी से जिंदगी जीने के बाद वो सोचने लगा था कि ईमानदार रह करके क्या पाया? देखो वो बेइमान कहां पहुंच गया, देखो वो बेइमान क्या होता है उसकोदेखिये उसकी बेईमानी, ये सरकारी नौकरी करता है, वैकेशन में विदेश घूमने का पैसा कहां से लाता है। ये कल तक तो साइकिल चलाता था, आज इतना बड़ा बंग्लो कहां से आया? ईमानदार व्यक्ति भी जब ये देखने लगा। उसकी ईमानदारी भी लड़खड़ाने लगी, मन विचलित होने लगा। वो दिन थे आज।

भाइयों बहनों।

सवा सौ करोड़ देशवासी इस बात को अनुभव करते हैं कि हिंदुस्तान में पहली बार ईमानदारी का अवसर आया है। ईमानदारी के लिए जीने का अवसर आया है। जो ईमानदारी से जीता था उसका विश्वास बढ़ा हैउसको लगता है अब बेईमानों के लिए चैन से जीना मुश्किल हुआ है, अब मेरी ईमानदारी रंग लाएगी, भले ही मेरी जिंदगी में सुख वैभव नहीं आया लेकिन शांति से जीने का अवसर आया है, आज ये वातावरण बना है। कुछ दिन पहले मुझे बड़े अच्छे घराने के बच्चे मिले थे। ऐसे ही मैंने पूछा नौजवानों को कि भाई यूथ में क्या चल रहा है। उन्होंने कहा, साब हमारे घर में एक चर्चा है, हम हमारे माता-पिता से चर्चा करते हैं कि आपके जमाने में जो था वो था, आपने बेईमानी की होगी, की होगी, सरकारी नियमों को तोड़ा होगा, तोड़ा होगा, आपने लोगों को खरीदा होगा, खरीदा होगा लेकिन अब वक्त बदला है। हमारी पीढ़ी ईमानदारी से कुछ करना चाहती है और हमें विश्वास है कि हम ईमानदारी से अच्छी जिंदगी जी सकते हैं।  

भाइयों बहनों।

ईमानदारी को अवसर मिले, मैं जानता हूं इसके लिए मुझे कितना कष्ट झेलना पड़ता है। कितनी बातों पर मुझे कठोरता बरतनी पड़ती है लेकिन मैं देश की जनता को वादा करके आया हूं और उस वादे को मैं पूरी तरह निभाऊंगा।

भाइयों बहनों।

एक वक्त था जब देश में काले धन का ही कोहराम मचा हुआ था। काला धन, काला धन, काला धन यही कान पर आता था। ये कैसी सरकार है जहां काला धन नहीं जन धन, जन धन, जन धन यही शब्द सुनाई देते हैं। ये फर्क है दोस्तों, ये फर्क है। ...और आजआज जन धन की चर्चा होती है। आने वाले दिवसों में डिजिधन की चर्चा भी सहज रूप से होगी। कहां काला धन, वहां से निकलकर के जन धन और अब आगे डिजिधन। एक के बाद एक हमारी यात्रा का रास्ता खुलता जा रहा है।

भाइयों बहनों। 

हमने सरकार बनाई। 26 को शपथ लिया, 2 दिन के बाद हमारी पहली केबिनेट मीटिंग हुई। पहली मीटिंग में पहला निर्णय था, काले धन के खिलाफ कदम उठाने का। और भाइयों बहनों। चोरी के पैसों से जो बड़े-बड़े बंग्ले बनाकर बैठे हैं, बेनामी संपत्ति जिन्होंने बनाई है। 18-20 साल के उनके बेटे दुनिया की महंगी से महंगी मोटरबाइक लेकर के दुनिया में घूम रहे हैं। अगर वो पैसा बेईमानी का है तो हम निकालकर के रहेंगे, गरीबों को लौटा कर रहेंगे भाइयों बहनों। मैं जानता हूं इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी, हर कीमत चुकाने के लिए तैयार हूं लेकिन जनता को जो वादा किया है, उस वादे से मैं कभी मुकरने वाला नहीं हूंमैं ये लड़ाई, लड़ाई लड़ने वाला हूं क्योंकि मैं देख रहा हूं सवा सौ करोड़ देशवासी ईमानदारी का उत्सव मनाने के लिए फैसला कर चुके हैं और मैं देश की जनता के साथ चलने के लिए तैयार हूं भाइयों बहनों।

भाइयों बहनों।

जब सवा सौ करोड़ देशवासी संकल्प कर लेते हैं, आगे बढ़ने का निर्णय कर लेते हैं और शासन प्रो-पीपल होता है, प्रो-पूअर होता है, प्रो-एक्टिव होता है तो जनता जनार्दन का भरोसा भी अनेक गुना बढ़ जाता है। फिर काम सरल हो जाते हैं। आज मैं अनुभव कर रहा हूं। अब नोटबंदी के बाद किसी ने सोचा होगा कि करीब-करीब 90 लाख से भी ज्यादा लोग ईमानदारी के उत्सव में जुड़ गएटैक्स देने के लिए सामने से आगे आए और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ अपने आपको जोड़ दिया। अभी तो सरकार ने किसी को कुछ कहा नहीं है, अभी तो सिर्फ मैं चीजें तैयार कर रहा हूं। उसके बावजूद भी 90 लाख लोगों का अपने आप देश को कर्ज चुकाने के लिए आगे आना, ये अपने आपमें ईमानदारी के अवसर को एक ताकत देने वाली घटना के रूप में मैं देखता हूं।

भाइयों बहनों।

हमारा ये विश्वास रहा है कि हम जनता-जनार्दन पर भरोसा करें। अंग्रेजों ने कभी भी हिंदुस्तान की जनता पर भरोसा नहीं किया। वे इस देश को गुलाम बनाए रखने के लिए हर हिंदुस्तानी पर शक करते हुए अपनी शासन व्यवस्था को विकसित किया था। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी सरकारों की आदत वही रही और जनता पर शक करना।

भाइयों बहनों।

पिछले साल में आपने देखा होगा। हमने हर काम में जनता पर भरोसा करने को प्राथमिकता दी है। शुरुआत यहीं से करते हैं, जनता-जनार्दन नागरिक सही बोलता है। हमें पहले मानकर चलना चाहिए कि सही बोलता है। अगर गलत हमारे पास जानकारी आए तब उसकी गलती की बात करनी चाहिए, आते ही उसको गलत मानकर नहीं चलना चाहिए।  अब आपको मालूम है, पहले कभी स्कूल में एडमिशन लेना है, कॉलेज में एडमिशन लेना है, नौकरी की अर्जी करनी है तो जिरॉक्स कॉपी सर्टिफिकेट की, उसको भी किसी पॉलिटीशियन के घर जाकर के ठप्पा मरवाना पड़ता था। क्यों भाई... ? जब जिरॉक्स मशीन है जब फाइनल इंटरव्यू होगा, नौकरी का उस समय जो ऑरिजनल कॉपी है वो देख लीजिए, अभी उसको क्यों दौड़ाते हो...? हमारी सरकार ने निर्णय कर लिया देश की जनता पर भरोसा करो। वो खुद अपने आप अपना साइन कर दे, खुद ही कह दे कि हां ये मेरे ट्रू कॉपी है, मान लो उसको। घटना छोटी होगी लेकिन सोचने का तरीका क्या है। उसकी शुरुआत यहीं से होती हैहमने इनकम टैक्स में लोगों को कहा कि 50 लाख का अगर आपका कारोबार है। प्रोफेशनल का आप अपने हिसाब से सरकार को बता दीजिए और इतनी मात्रा में टैक्स दे दीजिए आपको कोई हिसाब रखने की जरूरत नहीं, दिखाने की जरूरत नहीं। जनता पर भरोसा करना चाहिए। जनता पर विश्वास करना चाहिए। दिल्ली में एक ऐसी सरकार है जिसका अपने पर ईमानदारी का इतना विश्वास है कि वो जनता को ईमानदार मानती है और ईमानदार जनता पर भरोसा करके आगे बढ़ने का फैसला लेकर के चलती है। एक अलग कार्य संस्कृति क्या होती है? एक अलग कार्य करने का तरीका क्या होता है? ये आज देश अनुभव कर रहा है।

भाइयों बहनों।

आज देश में दुनिया के अंदर जो आईटी रिवोल्यूशन आया हैहिंदुस्तान पीछे नहीं रह सकता है। अफवाह फैलाने वाले फैलाते रहेंगे लेकिन हमने इस टेक्नोलॉजी का भरपूर फायदा उठाना है। एक के बाद एक हमारे कदम गरीब से गरीब व्यक्ति को इम्पॉवर करने वाले हैं। बैंकों की ब्रांच कम थी, हमने पोस्ट ऑफिस को पेमेंट बैंक में बदलने का निर्णय कर लिया। एक दम रातों-रात लाखों नईं बैंकें बन गईं। हमने डिजिटल पेमेंट की व्यस्था कीहर इंसान का मोबाइल फोन अपने आप बैंकिंग व्यवस्था का हिस्सा बन गया। मॉस स्कैल पर बदलाव कैसे लाया जा सकता है। ये आप अनुभव कर सकते हैं।

भाइयों बहनों।

कुछ काम ऐसे हैं जो हमारा इंतजार नहीं कर सकते। हम हमारी पुरानी आदत से चलेंगे तो ये तो लगेगा कि काम हो रहा हैसरकार कुछ कर रही है लेकिन जनता-जनार्दन या देश को कोई लाभ नहीं होगा। हिंदुस्तान को आज से 10 साल पहले ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ने की जरूरत थीपुरानी सरकारों में निर्णय भी हुआ लेकिन भाइयों बहनों। 100 गांव तक भी ऑप्टिकल फाइबर का काम पहुंचा नहीं। 3 साल ऐसे ही गए, हमने आने के बाद बीड़ा उठाया। 

भाइयों बहनों।

आज करीब-करीब 1 लाख गांवों तक हमने इस काम को पहुंचा दिया है। तेज गति से पहुंचा दिया है। काम को गति चाहिए, सरकार है, चलती है, कुछ हो रहा है, नहीं... । समय सीमा में तय किया 4 करोड़ टॉयलेट बनाना, देश की जनता ने हमारा साथ दिया टॉयलेट बन गए दोस्तों। पहली बार देश में लाखों गांव अपने आपको ओपन डेफिकेशन फ्री घोषित करने में पूरी तैयारी करके आगे आए हैं। जन सामान्य बदलाव के लिए किस प्रकार से जुड़ता है, ये हम सामने से देख रहे हैं।

भाइयों बहनों। 

महंगी दवाइयां, मंहगे स्टैंट हार्ट के लिए हमने कंपनियों से कहा, भरोसा किया, जेनरिक दवाइयों के विषय में आगे आए जो स्टैंट लाख-सवा लाख के थे वो 20, 25, 27 हजार पर पहुंच गए। जो 40, 45 हजार के थे वो 5 हजार, 7 हजार पर आकरके रूक गए। जो दवाइयां 1200, 1500, 2000, 3000 में बिकती थीं वो 80 रुपया, 100 रुपये, 125 रुपये में दवाई बिकने लग गई। गरीब को दवाई मिले, लोगों के सहयोग से निर्णय किया जा सकता है, बदलाव लाया जा सकता है।

भाइयों बहनों।

सैटेलाइट पहले भी जाते थे लेकिन जब 104 सैटेलाइट एक साथ जाते हैं तो दुनिया चौंक जाती है, गति ये होती है, काम का स्कैल ये होता है इसके ये नमूने हैं। भाइयों बहनों। एक बहुत बड़े फर्क पर काम को आगे बढ़ाने की दिशा में हमारा प्रयास है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, कौन कहता है पहले की सरकारों में तालाब नहीं बनते थे...? बनते थेकौन कहता है कि पहले की सरकारों में डैम नहीं बनते थे...? बनते थेकौन कहता है कि पहले की सरकारों में पानी की व्यवस्था की चिंता नहीं थी? थी। हमने कभी मना नहीं किया लेकिन देश के किसान की जो आवश्यकता है वो और सरकार के काम की गति ये दोनों इतनी मिसमैच थी कि कभी देश के किसान को देश की इकॉनामी को एग्रीकल्चर का कोई लाभ नहीं मिल सका। हमने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एक फोकस एक्टिविटी शुरू की। 90 प्रोजेक्ट हाथ में लिएहजारों, करोड़ों रुपये लगाने का फैसला किया और उन 90 योजनाओं को पूरा करके लाखों हेक्टेयर धरती को पानी से सिंचित करने की दिशा में हमने बीड़ा उठाया और आज मैं विश्वास से कहता हूं कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के द्वारा हर खेत को पानी ये सपना पूरा करने की संभावना पैदा हुई है और अगर हमारे देश का किसान मदद करे Per Drop More Crop, बूंद-बूंद पानी से फसल का उत्तम उत्पादन करने का फैसला करे, माइक्रो एरिगेशन, ट्रिप एरिगेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग इसको हम महत्व दें।

भाइयों बहनों।

मुझे विश्वास है कि मेरे देश के किसान की जिंदगी में पानी कभी संकट पैदा न करें, ये स्थिति पैदा की जा सकती है। इनपुट कॉस्ट कम हो। हमने सोलर पंप का अभियान चलाया हैबिजली के खर्चे से किसान को मुक्ति मिल जाएसफलतापूर्वक काम आगे बढ़ रहा है। एक जमाना था यूरिया के लिए 24, 24 घंटे किसान को कतार में खड़ा रहना पड़ता था, लाठी चार्ज हुआ करता था। हर मुख्यमंत्री भारत सरकार के दरवाजे पर दस्तक देता था कि हमें यूरिया चाहिए। हमने यूरिया का नीम-कोटिंग किया, नीम-कोटिंग करने से जो यूरिया किसान के नाम पर निकलता था लेकिन केमिकल की फैक्ट्री में चला जाता था। अब नीम-कोटिंग यूरिया का खेती के अलावा कहीं उपयोग ही नहीं हो सकता हैऔर ये अनुभव आया कि दो साल हो गए इस देश में यूरिया के लिए कहीं पर कमी महसूस नहीं हुईकोई चर्चा ही नहीं है कि यूरिया है कि नहीं है और नीम-कोटिंग करने के कारण पहले से किसान उसका उपयोग भी कम करने लगा है। फसल ज्यादा पैदा करने लगा है। हर प्रकार की फसल में नीम-कोटिंग यूरिया के कारण वृद्धि हुई है। किसान को सीधा-सीधा लाभ हुआ है।

हमने LED बल्ब का अभियान चलाया। आज मध्यम वर्ग के परिवार जिसके घर के अंदर 4 या 5 लट्टू होंगे। LED बल्ब लगाया तो आज उसके घर में 200, 500, 1000 रुपए की बचत हुईबिजली की बचत हुईलाखों-करोड़ों रुपए की बचत हुई। हमने Direct Benefit Scheme चालू कीलाभार्थी के खाते में सीधा पैसा जमा करने की योजना चालू की। और उसका परिणाम ये आया कि हजारों-करोड़ रुपये, मोटा-मोटा अंदाज है। 60 हजार करोड़ रुपया जो कभी गलत हाथों में चला जाता था, योजनाओं के नाम पर चला जाता था, गरीब लाभार्थी के नाम पर चला जाता था, सच्ची व्यवस्था से बैंक अकाउंट में पैसे जाने लगे। सारी चोरी पकड़ी गई, 60 हजार करोड़ रुपया, सालाना 60 हजार करोड़ रुपया इस देश का चोरी होता बच गया भाइयों बहनों। आधार की मदद से हुआ। मेरे कहने का तात्पर्य ये है कि विकास कैसे, स्कैल कितना बड़ा हो, एक्टिविटी का फोकस कितना साफ हो, ये इस सरकार ने करके दिखाया।

भाइयों बहनों।

लेकिन हम जन समर्थन बढ़ रहा है, लोगों का विश्वास बढ़ रहा है इसलिए चैन से बैठने वाले लोगों में से नहीं हैं। जितना विश्वास बढ़ता जा रहा है, उतना काम का उत्साह बढ़ता जा रहा है। न्यू इंडिया का सपना लेकर चले हैं। 2022, आजादी के 75 साल होंगे, देश के वीर नायकों ने मातृभूमि की आजादी के लिए जीवन खपा दिया है। हम 5 साल देश के लिए कुछ करने का संकल्प करें, न्यू इंडिया बनाने का संकल्प करें, जहां हर काम में हमारे अपने सपने नजर आते हों, ऐसे कामों को आगे बढ़ाना है, जन भागीदारी से आगे बढ़ाना है। एक ऐसा हिंदुस्तान, जो आधुनिक हिंदुस्तान हो, एक ऐसा हिंदुस्तान जिसको देश का नौजवान ड्राइव करता हो, एक ऐसा हिंदुस्तान जहां पर श्रम की पूजा होती है, श्रम का गौरव होता हो, श्रमिक के प्रति आदर का भाव होता हो। एक ऐसा हिंदुस्तान जहां हमारी माताएं-बहनें कंधे से कंधा मिलाकर हमारे साथ चलती हों, कोई भेद न हो, न कोई ऊंचा हो, न कोई नीचा हो। ऐसा हिंदुस्तान, ऐसा न्यू इंडिया जो आर्थिक ऊंचाइयों को पाने के सपनों को लेकर के चलने वाला हिंदुस्तान हो।

भाइयो-बहनों

तीन साल, एक दिन ऐसा नहीं है जब कोई नया इनिशिएटिव न लिया हो। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां नई पहल न की हो। कथा इतनी लंबी है कि मैं महीनों तक इस सरकार के नए-नए कदमों की बातें आपको बता सकता हूं लेकिन मैंने आज इन सारी प्रक्रियाओं के पीछे हमारी सोच क्या है, हम किस दिशा में सोचते हैं और कहां जाना चाहते हैं। इसकी एक छोटी से झलक आपके सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया है लेकिन आज असम के लोगों ने पूरे दिन मुझे आपके बीच रहने का मौका दिया।, आपने जो प्यार दिया, मैं इसके लिए आभारी हूं और गुवाहटी की धरती से मां कामाख्या की धरती से मैं देशवासियों को भी विश्वास दिलाता हूं आपने, आपने जो विश्वास रखा है, इस विश्वास की हर कसौटी पर हमें कसके देखिए हम खरा उतरने का भरपूर प्रयास करेंगे। आपका भरोसा, आपका समर्थन, आपका विश्वास हमें काम करने की ताकत देता है और नए काम करने की ताकत देता है और नई योजनाएं बनाने की ताकत दे रहा है। ये आपका ही सहयोग है, ये जो भी सफलता है, वो सवा सौ करोड़ देशवासियों की हैये जो कुछ भी प्रगति है, वो सवा सौ करोड़ देशवासियों की है। सवा सौ करोड़ देशवासी, यही मेरी टीम इंडिया है, टीम इंडिया की सफलता है और यही सफलता दुनिया में भारत को गौरव से सर ऊंचा करने के लिए तैयार करेगी। इस विश्वास के साथ, आप सब का बहुत-बहुत धन्यवाद।

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140 करोड़ देशवासियों का भाग्‍य बदलने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी

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140 करोड़ देशवासियों का भाग्‍य बदलने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी

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"Huge opportunity": Japan delegation meets PM Modi, expressing their eagerness to invest in India
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आज भारत सिर्फ Nation of Dreams नहीं, बल्कि Nation That Delivers भी है: TV9 समिट में पीएम मोदी
March 28, 2025
QuoteToday, the world's eyes are on India: PM
QuoteIndia's youth is rapidly becoming skilled and driving innovation forward: PM
Quote"India First" has become the mantra of India's foreign policy: PM
QuoteToday, India is not just participating in the world order but also contributing to shaping and securing the future: PM
QuoteIndia has given Priority to humanity over monopoly: PM
QuoteToday, India is not just a Nation of Dreams but also a Nation That Delivers: PM

श्रीमान रामेश्वर गारु जी, रामू जी, बरुन दास जी, TV9 की पूरी टीम, मैं आपके नेटवर्क के सभी दर्शकों का, यहां उपस्थित सभी महानुभावों का अभिनंदन करता हूं, इस समिट के लिए बधाई देता हूं।

TV9 नेटवर्क का विशाल रीजनल ऑडियंस है। और अब तो TV9 का एक ग्लोबल ऑडियंस भी तैयार हो रहा है। इस समिट में अनेक देशों से इंडियन डायस्पोरा के लोग विशेष तौर पर लाइव जुड़े हुए हैं। कई देशों के लोगों को मैं यहां से देख भी रहा हूं, वे लोग वहां से वेव कर रहे हैं, हो सकता है, मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं। मैं यहां नीचे स्क्रीन पर हिंदुस्तान के अनेक शहरों में बैठे हुए सब दर्शकों को भी उतने ही उत्साह, उमंग से देख रहा हूं, मेरी तरफ से उनका भी स्वागत है।

साथियों,

आज विश्व की दृष्टि भारत पर है, हमारे देश पर है। दुनिया में आप किसी भी देश में जाएं, वहां के लोग भारत को लेकर एक नई जिज्ञासा से भरे हुए हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो देश 70 साल में ग्यारहवें नंबर की इकोनॉमी बना, वो महज 7-8 साल में पांचवे नंबर की इकोनॉमी बन गया? अभी IMF के नए आंकड़े सामने आए हैं। वो आंकड़े कहते हैं कि भारत, दुनिया की एकमात्र मेजर इकोनॉमी है, जिसने 10 वर्षों में अपने GDP को डबल किया है। बीते दशक में भारत ने दो लाख करोड़ डॉलर, अपनी इकोनॉमी में जोड़े हैं। GDP का डबल होना सिर्फ आंकड़ों का बदलना मात्र नहीं है। इसका impact देखिए, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, और ये 25 करोड़ लोग एक नियो मिडिल क्लास का हिस्सा बने हैं। ये नियो मिडिल क्लास, एक प्रकार से नई ज़िंदगी शुरु कर रहा है। ये नए सपनों के साथ आगे बढ़ रहा है, हमारी इकोनॉमी में कंट्रीब्यूट कर रहा है, और उसको वाइब्रेंट बना रहा है। आज दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे भारत में है। ये युवा, तेज़ी से स्किल्ड हो रहा है, इनोवेशन को गति दे रहा है। और इन सबके बीच, भारत की फॉरेन पॉलिसी का मंत्र बन गया है- India First, एक जमाने में भारत की पॉलिसी थी, सबसे समान रूप से दूरी बनाकर चलो, Equi-Distance की पॉलिसी, आज के भारत की पॉलिसी है, सबके समान रूप से करीब होकर चलो, Equi-Closeness की पॉलिसी। दुनिया के देश भारत की ओपिनियन को, भारत के इनोवेशन को, भारत के एफर्ट्स को, जैसा महत्व आज दे रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। आज दुनिया की नजर भारत पर है, आज दुनिया जानना चाहती है, What India Thinks Today.

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साथियों,

भारत आज, वर्ल्ड ऑर्डर में सिर्फ पार्टिसिपेट ही नहीं कर रहा, बल्कि फ्यूचर को शेप और सेक्योर करने में योगदान दे रहा है। दुनिया ने ये कोरोना काल में अच्छे से अनुभव किया है। दुनिया को लगता था कि हर भारतीय तक वैक्सीन पहुंचने में ही, कई-कई साल लग जाएंगे। लेकिन भारत ने हर आशंका को गलत साबित किया। हमने अपनी वैक्सीन बनाई, हमने अपने नागरिकों का तेज़ी से वैक्सीनेशन कराया, और दुनिया के 150 से अधिक देशों तक दवाएं और वैक्सीन्स भी पहुंचाईं। आज दुनिया, और जब दुनिया संकट में थी, तब भारत की ये भावना दुनिया के कोने-कोने तक पहुंची कि हमारे संस्कार क्या हैं, हमारा तौर-तरीका क्या है।

साथियों,

अतीत में दुनिया ने देखा है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब भी कोई वैश्विक संगठन बना, उसमें कुछ देशों की ही मोनोपोली रही। भारत ने मोनोपोली नहीं बल्कि मानवता को सर्वोपरि रखा। भारत ने, 21वीं सदी के ग्लोबल इंस्टीट्यूशन्स के गठन का रास्ता बनाया, और हमने ये ध्यान रखा कि सबकी भागीदारी हो, सबका योगदान हो। जैसे प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती है। देश कोई भी हो, इन आपदाओं से इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान होता है। आज ही म्यांमार में जो भूकंप आया है, आप टीवी पर देखें तो बहुत बड़ी-बड़ी इमारतें ध्वस्त हो रही हैं, ब्रिज टूट रहे हैं। और इसलिए भारत ने Coalition for Disaster Resilient Infrastructure - CDRI नाम से एक वैश्विक नया संगठन बनाने की पहल की। ये सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार करने का संकल्प है। भारत का प्रयास है, प्राकृतिक आपदा से, पुल, सड़कें, बिल्डिंग्स, पावर ग्रिड, ऐसा हर इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रहे, सुरक्षित निर्माण हो।

साथियों,

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हर देश का मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। ऐसी ही एक चुनौती है, हमारे एनर्जी रिसोर्सेस की। इसलिए पूरी दुनिया की चिंता करते हुए भारत ने International Solar Alliance (ISA) का समाधान दिया है। ताकि छोटे से छोटा देश भी सस्टेनबल एनर्जी का लाभ उठा सके। इससे क्लाइमेट पर तो पॉजिटिव असर होगा ही, ये ग्लोबल साउथ के देशों की एनर्जी नीड्स को भी सिक्योर करेगा। और आप सबको ये जानकर गर्व होगा कि भारत के इस प्रयास के साथ, आज दुनिया के सौ से अधिक देश जुड़ चुके हैं।

साथियों,

बीते कुछ समय से दुनिया, ग्लोबल ट्रेड में असंतुलन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी challenges का सामना कर रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भी भारत ने दुनिया के साथ मिलकर नए प्रयास शुरु किए हैं। India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC), ऐसा ही एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। ये प्रोजेक्ट, कॉमर्स और कनेक्टिविटी के माध्यम से एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को जोड़ेगा। इससे आर्थिक संभावनाएं तो बढ़ेंगी ही, दुनिया को अल्टरनेटिव ट्रेड रूट्स भी मिलेंगे। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन भी और मजबूत होगी।

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साथियों,

ग्लोबल सिस्टम्स को, अधिक पार्टिसिपेटिव, अधिक डेमोक्रेटिक बनाने के लिए भी भारत ने अनेक कदम उठाए हैं। और यहीं, यहीं पर ही भारत मंडपम में जी-20 समिट हुई थी। उसमें अफ्रीकन यूनियन को जी-20 का परमानेंट मेंबर बनाया गया है। ये बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम था। इसकी मांग लंबे समय से हो रही थी, जो भारत की प्रेसीडेंसी में पूरी हुई। आज ग्लोबल डिसीजन मेकिंग इंस्टीट्यूशन्स में भारत, ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज़ बन रहा है। International Yoga Day, WHO का ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिए ग्लोबल फ्रेमवर्क, ऐसे कितने ही क्षेत्रों में भारत के प्रयासों ने नए वर्ल्ड ऑर्डर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, और ये तो अभी शुरूआत है, ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत का सामर्थ्य नई ऊंचाई की तरफ बढ़ रहा है।

साथियों,

21वीं सदी के 25 साल बीत चुके हैं। इन 25 सालों में 11 साल हमारी सरकार ने देश की सेवा की है। और जब हम What India Thinks Today उससे जुड़ा सवाल उठाते हैं, तो हमें ये भी देखना होगा कि Past में क्या सवाल थे, क्या जवाब थे। इससे TV9 के विशाल दर्शक समूह को भी अंदाजा होगा कि कैसे हम, निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक, Aspirations से Achievement तक, Desperation से Development तक पहुंचे हैं। आप याद करिए, एक दशक पहले, गांव में जब टॉयलेट का सवाल आता था, तो माताओं-बहनों के पास रात ढलने के बाद और भोर होने से पहले का ही जवाब होता था। आज उसी सवाल का जवाब स्वच्छ भारत मिशन से मिलता है। 2013 में जब कोई इलाज की बात करता था, तो महंगे इलाज की चर्चा होती थी। आज उसी सवाल का समाधान आयुष्मान भारत में नजर आता है। 2013 में किसी गरीब की रसोई की बात होती थी, तो धुएं की तस्वीर सामने आती थी। आज उसी समस्या का समाधान उज्ज्वला योजना में दिखता है। 2013 में महिलाओं से बैंक खाते के बारे में पूछा जाता था, तो वो चुप्पी साध लेती थीं। आज जनधन योजना के कारण, 30 करोड़ से ज्यादा बहनों का अपना बैंक अकाउंट है। 2013 में पीने के पानी के लिए कुएं और तालाबों तक जाने की मजबूरी थी। आज उसी मजबूरी का हल हर घर नल से जल योजना में मिल रहा है। यानि सिर्फ दशक नहीं बदला, बल्कि लोगों की ज़िंदगी बदली है। और दुनिया भी इस बात को नोट कर रही है, भारत के डेवलपमेंट मॉडल को स्वीकार रही है। आज भारत सिर्फ Nation of Dreams नहीं, बल्कि Nation That Delivers भी है।

साथियों,

जब कोई देश, अपने नागरिकों की सुविधा और समय को महत्व देता है, तब उस देश का समय भी बदलता है। यही आज हम भारत में अनुभव कर रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। पहले पासपोर्ट बनवाना कितना बड़ा काम था, ये आप जानते हैं। लंबी वेटिंग, बहुत सारे कॉम्प्लेक्स डॉक्यूमेंटेशन का प्रोसेस, अक्सर राज्यों की राजधानी में ही पासपोर्ट केंद्र होते थे, छोटे शहरों के लोगों को पासपोर्ट बनवाना होता था, तो वो एक-दो दिन कहीं ठहरने का इंतजाम करके चलते थे, अब वो हालात पूरी तरह बदल गया है, एक आंकड़े पर आप ध्यान दीजिए, पहले देश में सिर्फ 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, आज इनकी संख्या 550 से ज्यादा हो गई है। पहले पासपोर्ट बनवाने में, और मैं 2013 के पहले की बात कर रहा हूं, मैं पिछले शताब्दी की बात नहीं कर रहा हूं, पासपोर्ट बनवाने में जो वेटिंग टाइम 50 दिन तक होता था, वो अब 5-6 दिन तक सिमट गया है।

साथियों,

ऐसा ही ट्रांसफॉर्मेशन हमने बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी देखा है। हमारे देश में 50-60 साल पहले बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, ये कहकर कि इससे लोगों को बैंकिंग सुविधा सुलभ होगी। इस दावे की सच्चाई हम जानते हैं। हालत ये थी कि लाखों गांवों में बैंकिंग की कोई सुविधा ही नहीं थी। हमने इस स्थिति को भी बदला है। ऑनलाइन बैंकिंग तो हर घर में पहुंचाई है, आज देश के हर 5 किलोमीटर के दायरे में कोई न कोई बैंकिंग टच प्वाइंट जरूर है। और हमने सिर्फ बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का ही दायरा नहीं बढ़ाया, बल्कि बैंकिंग सिस्टम को भी मजबूत किया। आज बैंकों का NPA बहुत कम हो गया है। आज बैंकों का प्रॉफिट, एक लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए के नए रिकॉर्ड को पार कर चुका है। और इतना ही नहीं, जिन लोगों ने जनता को लूटा है, उनको भी अब लूटा हुआ धन लौटाना पड़ रहा है। जिस ED को दिन-रात गालियां दी जा रही है, ED ने 22 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक वसूले हैं। ये पैसा, कानूनी तरीके से उन पीड़ितों तक वापिस पहुंचाया जा रहा है, जिनसे ये पैसा लूटा गया था।

साथियों,

Efficiency से गवर्नमेंट Effective होती है। कम समय में ज्यादा काम हो, कम रिसोर्सेज़ में अधिक काम हो, फिजूलखर्ची ना हो, रेड टेप के बजाय रेड कार्पेट पर बल हो, जब कोई सरकार ये करती है, तो समझिए कि वो देश के संसाधनों को रिस्पेक्ट दे रही है। और पिछले 11 साल से ये हमारी सरकार की बड़ी प्राथमिकता रहा है। मैं कुछ उदाहरणों के साथ अपनी बात बताऊंगा।

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साथियों,

अतीत में हमने देखा है कि सरकारें कैसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिनिस्ट्रीज में accommodate करने की कोशिश करती थीं। लेकिन हमारी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही कई मंत्रालयों का विलय कर दिया। आप सोचिए, Urban Development अलग मंत्रालय था और Housing and Urban Poverty Alleviation अलग मंत्रालय था, हमने दोनों को मर्ज करके Housing and Urban Affairs मंत्रालय बना दिया। इसी तरह, मिनिस्ट्री ऑफ ओवरसीज़ अफेयर्स अलग था, विदेश मंत्रालय अलग था, हमने इन दोनों को भी एक साथ जोड़ दिया, पहले जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय अलग था, और पेयजल मंत्रालय अलग था, हमने इन्हें भी जोड़कर जलशक्ति मंत्रालय बना दिया। हमने राजनीतिक मजबूरी के बजाय, देश की priorities और देश के resources को आगे रखा।

साथियों,

हमारी सरकार ने रूल्स और रेगुलेशन्स को भी कम किया, उन्हें आसान बनाया। करीब 1500 ऐसे कानून थे, जो समय के साथ अपना महत्व खो चुके थे। उनको हमारी सरकार ने खत्म किया। करीब 40 हज़ार, compliances को हटाया गया। ऐसे कदमों से दो फायदे हुए, एक तो जनता को harassment से मुक्ति मिली, और दूसरा, सरकारी मशीनरी की एनर्जी भी बची। एक और Example GST का है। 30 से ज्यादा टैक्सेज़ को मिलाकर एक टैक्स बना दिया गया है। इसको process के, documentation के हिसाब से देखें तो कितनी बड़ी बचत हुई है।

साथियों,

सरकारी खरीद में पहले कितनी फिजूलखर्ची होती थी, कितना करप्शन होता था, ये मीडिया के आप लोग आए दिन रिपोर्ट करते थे। हमने, GeM यानि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म बनाया। अब सरकारी डिपार्टमेंट, इस प्लेटफॉर्म पर अपनी जरूरतें बताते हैं, इसी पर वेंडर बोली लगाते हैं और फिर ऑर्डर दिया जाता है। इसके कारण, भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है, और सरकार को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत भी हुई है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर- DBT की जो व्यवस्था भारत ने बनाई है, उसकी तो दुनिया में चर्चा है। DBT की वजह से टैक्स पेयर्स के 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा, गलत हाथों में जाने से बचे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा फर्ज़ी लाभार्थी, जिनका जन्म भी नहीं हुआ था, जो सरकारी योजनाओं का फायदा ले रहे थे, ऐसे फर्जी नामों को भी हमने कागजों से हटाया है।

साथियों,

 

हमारी सरकार टैक्स की पाई-पाई का ईमानदारी से उपयोग करती है, और टैक्सपेयर का भी सम्मान करती है, सरकार ने टैक्स सिस्टम को टैक्सपेयर फ्रेंडली बनाया है। आज ITR फाइलिंग का प्रोसेस पहले से कहीं ज्यादा सरल और तेज़ है। पहले सीए की मदद के बिना, ITR फाइल करना मुश्किल होता था। आज आप कुछ ही समय के भीतर खुद ही ऑनलाइन ITR फाइल कर पा रहे हैं। और रिटर्न फाइल करने के कुछ ही दिनों में रिफंड आपके अकाउंट में भी आ जाता है। फेसलेस असेसमेंट स्कीम भी टैक्सपेयर्स को परेशानियों से बचा रही है। गवर्नेंस में efficiency से जुड़े ऐसे अनेक रिफॉर्म्स ने दुनिया को एक नया गवर्नेंस मॉडल दिया है।

साथियों,

पिछले 10-11 साल में भारत हर सेक्टर में बदला है, हर क्षेत्र में आगे बढ़ा है। और एक बड़ा बदलाव सोच का आया है। आज़ादी के बाद के अनेक दशकों तक, भारत में ऐसी सोच को बढ़ावा दिया गया, जिसमें सिर्फ विदेशी को ही बेहतर माना गया। दुकान में भी कुछ खरीदने जाओ, तो दुकानदार के पहले बोल यही होते थे – भाई साहब लीजिए ना, ये तो इंपोर्टेड है ! आज स्थिति बदल गई है। आज लोग सामने से पूछते हैं- भाई, मेड इन इंडिया है या नहीं है?

साथियों,

आज हम भारत की मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस का एक नया रूप देख रहे हैं। अभी 3-4 दिन पहले ही एक न्यूज आई है कि भारत ने अपनी पहली MRI मशीन बना ली है। अब सोचिए, इतने दशकों तक हमारे यहां स्वदेशी MRI मशीन ही नहीं थी। अब मेड इन इंडिया MRI मशीन होगी तो जांच की कीमत भी बहुत कम हो जाएगी।

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साथियों,

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान ने, देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक नई ऊर्जा दी है। पहले दुनिया भारत को ग्लोबल मार्केट कहती थी, आज वही दुनिया, भारत को एक बड़े Manufacturing Hub के रूप में देख रही है। ये सक्सेस कितनी बड़ी है, इसके उदाहरण आपको हर सेक्टर में मिलेंगे। जैसे हमारी मोबाइल फोन इंडस्ट्री है। 2014-15 में हमारा एक्सपोर्ट, वन बिलियन डॉलर तक भी नहीं था। लेकिन एक दशक में, हम ट्वेंटी बिलियन डॉलर के फिगर से भी आगे निकल चुके हैं। आज भारत ग्लोबल टेलिकॉम और नेटवर्किंग इंडस्ट्री का एक पावर सेंटर बनता जा रहा है। Automotive Sector की Success से भी आप अच्छी तरह परिचित हैं। इससे जुड़े Components के एक्सपोर्ट में भी भारत एक नई पहचान बना रहा है। पहले हम बहुत बड़ी मात्रा में मोटर-साइकल पार्ट्स इंपोर्ट करते थे। लेकिन आज भारत में बने पार्ट्स UAE और जर्मनी जैसे अनेक देशों तक पहुंच रहे हैं। सोलर एनर्जी सेक्टर ने भी सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। हमारे सोलर सेल्स, सोलर मॉड्यूल का इंपोर्ट कम हो रहा है और एक्सपोर्ट्स 23 गुना तक बढ़ गए हैं। बीते एक दशक में हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट भी 21 गुना बढ़ा है। ये सारी अचीवमेंट्स, देश की मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी की ताकत को दिखाती है। ये दिखाती है कि भारत में कैसे हर सेक्टर में नई जॉब्स भी क्रिएट हो रही हैं।

साथियों,

TV9 की इस समिट में, विस्तार से चर्चा होगी, अनेक विषयों पर मंथन होगा। आज हम जो भी सोचेंगे, जिस भी विजन पर आगे बढ़ेंगे, वो हमारे आने वाले कल को, देश के भविष्य को डिजाइन करेगा। पिछली शताब्दी के इसी दशक में, भारत ने एक नई ऊर्जा के साथ आजादी के लिए नई यात्रा शुरू की थी। और हमने 1947 में आजादी हासिल करके भी दिखाई। अब इस दशक में हम विकसित भारत के लक्ष्य के लिए चल रहे हैं। और हमें 2047 तक विकसित भारत का सपना जरूर पूरा करना है। और जैसा मैंने लाल किले से कहा है, इसमें सबका प्रयास आवश्यक है। इस समिट का आयोजन कर, TV9 ने भी अपनी तरफ से एक positive initiative लिया है। एक बार फिर आप सभी को इस समिट की सफलता के लिए मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं हैं।

मैं TV9 को विशेष रूप से बधाई दूंगा, क्योंकि पहले भी मीडिया हाउस समिट करते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर एक छोटे से फाइव स्टार होटल के कमरे में, वो समिट होती थी और बोलने वाले भी वही, सुनने वाले भी वही, कमरा भी वही। TV9 ने इस परंपरा को तोड़ा और ये जो मॉडल प्लेस किया है, 2 साल के भीतर-भीतर देख लेना, सभी मीडिया हाउस को यही करना पड़ेगा। यानी TV9 Thinks Today वो बाकियों के लिए रास्ता खोल देगा। मैं इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आपकी पूरी टीम को, और सबसे बड़ी खुशी की बात है कि आपने इस इवेंट को एक मीडिया हाउस की भलाई के लिए नहीं, देश की भलाई के लिए आपने उसकी रचना की। 50,000 से ज्यादा नौजवानों के साथ एक मिशन मोड में बातचीत करना, उनको जोड़ना, उनको मिशन के साथ जोड़ना और उसमें से जो बच्चे सिलेक्ट होकर के आए, उनकी आगे की ट्रेनिंग की चिंता करना, ये अपने आप में बहुत अद्भुत काम है। मैं आपको बहुत बधाई देता हूं। जिन नौजवानों से मुझे यहां फोटो निकलवाने का मौका मिला है, मुझे भी खुशी हुई कि देश के होनहार लोगों के साथ, मैं अपनी फोटो निकलवा पाया। मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं दोस्तों कि आपके साथ मेरी फोटो आज निकली है। और मुझे पक्का विश्वास है कि सारी युवा पीढ़ी, जो मुझे दिख रही है, 2047 में जब देश विकसित भारत बनेगा, सबसे ज्यादा बेनिफिशियरी आप लोग हैं, क्योंकि आप उम्र के उस पड़ाव पर होंगे, जब भारत विकसित होगा, आपके लिए मौज ही मौज है। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।