अतीत के कालखंड में देश में सैनिटेशन का संकट व्याप्त था। उस दौर में, महिलाओं और लड़कियों की खुले में शौच से जुड़ी दर्दनाक कहानियां सुर्खियां बनती थीं। यह उस समय की एक कठोर वास्तविकता थी। हालांकि, पीएम मोदी के नेतृत्व में एक परिवर्तनकारी बदलाव आया, जिसमें शौचालयों तक पहुंच प्रदान करने और महिलाओं तथा लड़कियों की गरिमा की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया।

पीएम मोदी को उन मुद्दों को उठाने के लिए जाना जाता है, जिन पर पहले किसी भी अन्य प्रधानमंत्री ने पहल नहीं की है। 2014 में स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से, उन्होंने उन महिलाओं की दुर्दशा के बारे में बात की, जिनके लिए अपने घर या पड़ोस में शौचालय का अस्तित्व नदारद था, जिनकी सुरक्षा दांव पर थी, जिन्हें खुले में शौच के लिए मजबूर होने के कारण, बलात्कार और अन्य उत्पीड़नों से गुजरना पड़ा। इसने एक महत्वपूर्ण बदलाव की शुरुआत की।

सभी के लिए शौचालय तक पहुंच

शौचालय या 'इज्जत घर' का निर्माण महिलाओं को शौचालयों तक पहुंच का मूल अधिकार प्रदान करने और उनकी सुविधा बढ़ाने के बारे में है। इसलिए, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण की सफलता को कई तरीकों से मापा जा सकता है। इस योजना के तहत 11 करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण के साथ, 80% से अधिक भारतीय गांवों को खुले में शौच मुक्त (ODF) घोषित किया गया है और पूरे भारत में 4.89 लाख से अधिक गांवों ने 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ODF प्लस स्टेटस हासिल किया है। इसके अलावा, 4 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने ODF प्लस मॉडल का स्टेटस हासिल किया है और स्वच्छता मानकों में उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया है। यह योजना के उचित कार्यान्वयन में लोगों की जबरदस्त भागीदारी का एक प्रमाण है।

स्कूलों में अधिक शौचालयों ने वहां लड़कियों की उपस्थिति को बढ़ाया है। स्वच्छता से संबंधित मुद्दों के कारण अब स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या में कमी आई है और वे अपनी शिक्षा पूरी कर रही है। कार्यस्थल पर शौचालयों की समुचित उपलब्धता से महिलाओं को स्वच्छता कारणों के चलते कार्यस्थल छोड़ने के लिए बाध्य नहीं होना पड़ता। शौचालयों ने महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी खोले हैं क्योंकि वे राजमिस्त्री, उद्यमियों और स्वच्छता कार्यकर्ताओं के रूप में काम करती हैं क्योंकि महिलाएं स्वच्छता कार्यक्रमों की योजना, कार्यान्वयन और निगरानी में अधिक शामिल होती हैं। इसने राष्ट्र में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को समग्र रूप से प्रभावित किया है।

शहरी सफलता

जब पीएम मोदी ने स्पष्ट आह्वान किया और भारतीयों से स्वच्छ भारत अभियान में भाग लेने और मन की बात के माध्यम से स्वच्छ भारत मिशन को लागू करने में मदद करने के लिए कहा, तो देश के सभी हिस्सों से लोगों ने बड़ी संख्या में इसमें भागीदारी प्रदर्शित की। योजना की सफलता का श्रेय बड़े पैमाने पर जन लामबंदी और लोगों के अथक प्रयासों को दिया जा सकता है, जिन्होंने जनभागीदारी की बदलावकारी ताकत को सिद्ध किया।

शहरी भारत ने खुले में शौच से मुक्त का दर्जा हासिल कर लिया, सभी 4,715 शहरी स्थानीय निकायों को पूरी तरह से ODF घोषित कर दिया गया। यह स्वच्छ भारत मिशन की राष्ट्रव्यापी सफलता को रेखांकित करता है, जिसका शहरी केंद्रों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

शैक्षिक प्रभाव

उस वक्त से जब लड़कियों को माहवारी आने पर स्वच्छ शौचालयों के अभाव के कारण स्कूल छोड़ना पड़ता था, आज के समय तक जब उन्हें अपनी शिक्षा पूरी करने और उच्च अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, भारत की नारी शक्ति ने दृढ़ता से साबित कर दिया है कि सही अवसरों और सुविधाओं के साथ, वे निश्चित रूप से सफलता हासिल करेंगी।

संख्याओं पर एक व्यापक नज़र डालते हुए, हम देखते हैं कि महिला नामांकन 2019-20 में 1.88 करोड़ से बढ़कर 2.01 करोड़ हो गया है। 2014-15 से लगभग 44 लाख की वृद्धि हुई है। अधिक से अधिक लड़कियां स्कूली शिक्षा जारी रखने का विकल्प चुन रही हैं और कुल नामांकन में महिला नामांकन का प्रतिशत 2014-15 में 45% से बढ़कर 2020-21 में 49% हो गया है।

"स्वच्छ विद्यालय" नामक आदर्श विद्यालय बनाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, ताकि छात्रों और कर्मचारियों के लिए स्कूल परिसर के अंदर पीने के पानी, हाथ धोने के स्टेशन, शौचालय और साबुन जैसी आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाई जा सके। इससे न केवल स्कूलों के अंदर अनुकूल वातावरण बनता है, बल्कि स्वच्छता की स्वस्थ आदतों को बढ़ावा मिलता है और बीमारियों की रोकथाम की दिशा में भी काम होता है।

स्वास्थ्य और सुरक्षा

UNICEF के एक अध्ययन के अनुसार, यह बात सामने आई है कि सर्वेक्षण में शामिल लगभग 80% घरों की शौचालय बनवाने की प्राथमिक प्रेरणा महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा बढ़ाना था। यह महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के प्रति परिवारों की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। इसके अलावा, लगभग 40% परिवारों ने सांप और जहरीले जीवों के काटने जैसे जानवरों के हमलों से बचाव के लिए और खुले में शौच के कारण फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए शौचालय बनवाने का फैसला किया।

UNICEF द्वारा किए गए सर्वेक्षण में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह सामने आया कि आधे से अधिक परिवारों ने खुले में शौच करने से फैलने वाली बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए शौचालयों की इच्छा व्यक्त की।

स्वच्छ भारत अभियान माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के बारे में जागरूकता बढ़ाने में भी सफल रहा है। स्वच्छता सुविधाओं में वृद्धि ने महिलाओं और लड़कियों के बीच बेहतर माहवारी स्वच्छता प्रथाओं में योगदान दिया है, जबकि माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के बारे में जागरूकता में वृद्धि भी सुनिश्चित की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार सर्वेक्षण -5 के अनुसार, भारत में लगभग 78% महिलाएं और लड़कियां स्वच्छ माहवारी विधियों का उपयोग करती हैं।

निष्कर्ष के तौर पर, प्रधानमंत्री मोदी की 'इज्जत घर' बनाने की प्रतिबद्धता ने न केवल शौचालय प्रदान किए हैं; इसने नारी शक्ति के लिए गरिमा, सुरक्षा और संरक्षा बहाल की है। स्वच्छ भारत आंदोलन महिलाओं और लड़कियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और अधिक सशक्त भविष्य सुनिश्चित करने के लिए भारत के सामूहिक प्रयास का प्रमाण है।

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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दिल्ली का विकास
April 12, 2024

दिल्ली को राष्ट्रों के सम्मानित ध्वजों को फहराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है: G20 समिट की मेजबानी के लिए दिल्ली की तैयारियों पर पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के पिछले दस वर्षों ने एक नए भारत के निर्माण की दिशा में काम शुरू किया है; गांव से शहर तक, पानी से बिजली तक, घर से स्वास्थ्य तक, शिक्षा से रोजगार तक, जाति से वर्ग तक - एक व्यापक योजना, जो हर दरवाजे तक विकास और समृद्धि ला रही है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, इस बदलावकारी दशक में, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संचालित इस डेवलपमेंटल मोमेंटम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरा है।

यह शहर, उस इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव के केंद्र में रहा है जिसने पूरे देश को एक नया रूप दिया है। आज अटल सेतु, चिनाब ब्रिज, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और जोजिला टनल जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के चमत्कार भारत के निरंतर विकसित होते परिदृश्य को दर्शाते हैं।

ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को नया रूप देने, शहरी सुविधाओं को उन्नत करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मोदी सरकार ने कई बदलावकारी पहल शुरू की हैं। रेलवे, हाईवेज से लेकर एयरपोर्ट्स तक, ये इनिशिएटिव, देश भर में इंक्लूजिव और सस्टेनेबल डेवलपमेंट को गति देने में महत्वपूर्ण रहे हैं।

मेट्रो रेल नेटवर्क के प्रभावशाली विस्तार ने भारत में शहरी आवागमन में क्रांति ला दी है। 2014 में मात्र 5 शहरों से, मेट्रो रेल नेटवर्क अब देश भर के 21 शहरों में सेवा प्रदान करता है - 2014 के 248 किलोमीटर से बढ़कर 2024 तक यह 945 किलोमीटर हो जाएगा, साथ ही 26 अतिरिक्त शहरों में 919 किलोमीटर लाइनें निर्माणाधीन हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में दिल्ली मेट्रो फेज-4 के दो नए कॉरिडोर; लाजपत नगर से साकेत जी-ब्लॉक और इंद्रलोक से इंद्रप्रस्थ को मंजूरी दी है। दोनों लाइनों की संयुक्त लंबाई 20 किलोमीटर से अधिक है और परियोजना की लागत 8,000 करोड़ रुपये से अधिक है (केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से फंडेड)। इंद्रलोक-इंद्रप्रस्थ लाइन हरियाणा के बहादुरगढ़ क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसके अतिरिक्त, दिल्ली-मेरठ क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर पर चलने वाली भारत की पहली नमो भारत ट्रेन; रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ाने और इसके ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को उन्नत करने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को और रेखांकित करती है।

इसके अलावा, भारतमाला परियोजना में लगभग 35,000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों के विकास के माध्यम से बेहतर लॉजिस्टिक्स दक्षता और कनेक्टिविटी की परिकल्पना की गई है। इस योजना के तहत 25 ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर की योजना बनाई गई है, जिनमें से चार दिल्ली की बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता से जुड़ेंगे: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे, दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून एक्सप्रेसवे और शहरी विस्तार सड़क-II। दिल्ली के लिए स्वीकृत कुल परियोजना लंबाई 203 किलोमीटर है, जिसके लिए 18,000 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया है।

पिछले एक दशक में मोदी सरकार ने एयरपोर्ट्स की क्षमता बढ़ाने और भीड़भाड़ कम करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। IGI एयरपोर्ट दिल्ली देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट बन गया है, जिसमें चार रनवे और एक एलिवेटेड टैक्सीवे है। हाल ही में विस्तारित अत्याधुनिक टर्मिनल 1 का भी उद्घाटन किया गया है। इसके अलावा, आगामी नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) दिल्ली एयरपोर्ट की भीड़भाड़ कम करने में और योगदान देगा, जो सालाना लाखों यात्रियों को सेवा प्रदान करेगा।

इसके अलावा, नए संसद भवन के उद्घाटन ने शहर के स्वरूप में सभ्यतागत और आधुनिक दोनों तरह के अर्थ जोड़ दिए हैं। यशोभूमि (India International Convention & Expo Centre) के उद्घाटन ने दिल्ली को भारत का सबसे बड़ा सम्मेलन और प्रदर्शनी केंद्र दिया है, जो मिश्रित उद्देश्य वाला पर्यटन अनुभव प्रदान करता है। यशोभूमि के साथ, विश्व स्तरीय सम्मेलन और प्रदर्शनी केंद्र ‘भरत मंडपम’, दुनिया को भारत का दर्शन कराता है।

वेलफेयर की बात करें तो, मोदी सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनका लाभ अब तक विकास और प्रगति के हाशिये पर पड़े लोगों को मिला है। दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय रही है। इसी को हल करने के लिए, मोदी सरकार ने बलात्कार के लिए सजा की मात्रा बढ़ाकर आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 को मजबूत किया, जिसमें 12 वर्ष से कम उम्र की बच्ची के साथ बलात्कार के लिए मृत्युदंड भी शामिल है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2018 में एक अलग महिला सुरक्षा प्रभाग की स्थापना की। वन-स्टॉप सेंटर, सखी निवास, सेफ सिटी प्रोजेक्ट, निर्भया फंड, शी-बॉक्स, यौन अपराधों के लिए जांच ट्रैकिंग सिस्टम और Cri-MAC (Crime Multi-Agency Center) आदि महिला सुरक्षा के प्रति सरकार के अभियान में महत्वपूर्ण हैं।

इसके अलावा, स्वच्छ भारत मिशन, पीएम-उज्ज्वला योजना, पीएम-मातृ वंदना योजना और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ने भारत में नारी शक्ति को और सशक्त बनाया है।

जैसे-जैसे भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन रहा है, दिल्ली भी इस विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। आज दिल्ली में 13,000 से अधिक DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप काम कर रहे हैं, साथ ही सरकार PM MUDRA योजना के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2023-24 (26.01.2024 तक) के लिए 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के 2.3 लाख से अधिक लोन स्वीकृत किए गए हैं।

पीएम-स्वनिधि, जो स्ट्रीट वेंडर्स को बिना किसी गारंटी के लोन मुहैया कराता है, दिल्ली में 1.67 लाख से ज़्यादा लाभार्थियों को मदद कर रहा है। इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान नए रोजगार के सृजन और रोजगार के नुकसान की भरपाई के लिए एंप्लॉयर्स को प्रोत्साहित करने के लिए 2020 में शुरू की गई आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के तहत, दिल्ली में 2.2 लाख से ज़्यादा एंप्लॉयी लाभान्वित हुए।

इसके अलावा, पीएम आवास योजना (शहरी) के तहत दिल्ली में लगभग 30,000 घरों को मंजूरी दी गई है और उनका निर्माण पूरा हो चुका है।

दिल्ली के लोगों के लिए वायु प्रदूषण एक सतत समस्या रही है। इस वास्तविकता को समझते हुए, केंद्र सरकार ने देश भर में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की रणनीति के रूप में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम शुरू किया है।

पिछले एक दशक में मोदी सरकार के कार्यकाल ने दिल्ली में विभिन्न मोर्चों पर उल्लेखनीय बदलाव लाए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट से लेकर गवर्नेंस रिफॉर्म्स तक, शिक्षा से लेकर रोजगार तक, सरकार की पहलों ने राजधानी शहर पर एक अमिट छाप छोड़ी है। जैसे-जैसे दिल्ली प्रोग्रेस और डेवलपमेंट के अपने सफर पर आगे बढ़ रही है, मोदी सरकार का योगदान आने वाले वर्षों में इसके भविष्य की दिशा को आकार देने के लिए तैयार है।