Quoteनागपुर-विजयवाड़ा आर्थिक गलियारे से जुड़ी महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखी
Quoteभारतमाला परियोजना के तहत विकसित हैदराबाद-विशाखापत्तनम कॉरिडोर से जुड़ी सड़क परियोजना का लोकार्पण किया
Quoteप्रमुख तेल और गैस पाइपलाइन परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया
Quoteहैदराबाद (काचीगुडा) - रायचूर - हैदराबाद (काचीगुडा) ट्रेन सेवा को झंडी दिखाकर रवाना किया
Quoteतेलंगाना के हल्दी किसानों के लाभ के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के गठन की घोषणा की
Quoteआर्थिक गलियारा हनमकोंडा, महबूबाबाद, वारंगल और खम्मम जिलों के युवाओं के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगा
Quoteनए सम्मक्का-सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय पर 900 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज महबूबनगर, तेलंगाना में 13,500 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। विकास परियोजनाएँ सड़क, रेल, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक ट्रेन सेवा को भी झंडी दिखाकर रवाना किया।

उपस्थित जन-समुदाय को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने त्योहारों के मौसम के आगमन को रेखांकित किया और कहा कि संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित होने से नवरात्रि की शुरुआत से पहले शक्ति पूजा की भावना स्थापित हुई है।

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प्रधानमंत्री ने आज कई सड़क संपर्क परियोजनाओं की आधारशिला रखने पर प्रसन्नता व्यक्त की, जो इस क्षेत्र में जीवन को बदल देंगी। नागपुर-विजयवाड़ा आर्थिक गलियारा; तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में परिवहन और व्यापार को आसान बनाएगा। इन परियोजनाओं से इन राज्यों में व्यापार, पर्यटन और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि कॉरिडोर में प्रमुख आर्थिक केंद्रों की पहचान की गई है, जिनमें 8 विशेष आर्थिक क्षेत्र, 5 मेगा फूड पार्क, 4 फिशिंग सीफूड क्लस्टर, 3 फार्मा और मेडिकल क्लस्टर और 1 टेक्सटाइल क्लस्टर शामिल हैं। इससे हनमकोंडा, महबूबाबाद, वारंगल और खम्मम जिलों के युवाओं के लिए अवसरों के कई द्वार खुलेंगे।

प्रधानमंत्री ने स्थानीय निर्मित उत्पादों को बंदरगाहों तक ले जाने के लिए तेलंगाना जैसे भूमि से घिरे राज्य के संदर्भ में रेल और सड़क परिवहन की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश के कई प्रमुख आर्थिक गलियारे तेलंगाना से होकर गुजर रहे हैं। ये सभी, राज्य को पूर्वी और पश्चिमी तट से जोड़ने का माध्यम बनेंगे। हैदराबाद विशाखापत्तनम कॉरिडोर का सूर्यापेट-खम्मम खंड भी इसमें मदद करेगा। इससे पूर्वी तट तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही उद्योगों और व्यवसायों की लॉजिस्टिक लागत भी कम होगी। उन्होंने कहा कि जक्लैर और कृष्णा खंड के बीच बन रही रेलवे लाइन भी यहां के लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी।

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प्रधानमंत्री ने तेलंगाना के हल्दी किसानों के लाभ के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के गठन की घोषणा की। उन्होंने रेखांकित किया कि राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड, आपूर्ति श्रृंखला में मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित करेगा और किसानों के लिए अवसंरचना सुधार में मदद करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड के गठन पर तेलंगाना और पूरे देश के हल्दी उगाने वाले किसानों को बधाई दी।

ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा क्षेत्र में दुनिया भर में हाल के विकास के बारे में चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार ने न केवल उद्योगों के लिए, बल्कि परिवारों के लिए भी ऊर्जा सुरक्षित की है। उन्होंने एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 2014 के 14 करोड़ से बढ़कर 2023 में 32 करोड़ होने का उदाहरण दिया और गैस की कीमतों में हाल में हुई कमी का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा, "सरकार देश में एलपीजी वितरण नेटवर्क के विस्तार को बढ़ावा दे रही है।" उन्होंने कहा कि हसन-चेरलापल्ली एलपीजी पाइपलाइन परियोजना क्षेत्र में लोगों को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कृष्णापट्टनम से हैदराबाद के बीच बहु-उत्पाद पेट्रोलियम पाइपलाइन की आधारशिला रखने का भी जिक्र किया, जिससे तेलंगाना में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के हजारों अवसरों के सृजन में मदद मिलेगी।

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इससे पहले प्रधानमंत्री ने हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में कई इमारतों का उद्घाटन किया। केंद्र सरकार ने हैदराबाद विश्वविद्यालय को 'उत्कृष्ट संस्थान' का दर्जा दिया है और विशेष धनराशि प्रदान की है। प्रधानमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा, “भारत सरकार मुलुगु जिले में एक केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय स्थापित करने जा रही है। इस विश्वविद्यालय का नाम श्रद्धेय जनजातीय देवी सम्मक्का-सरक्का के नाम पर रखा जाएगा। सम्मक्का-सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय पर लगभग 900 करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे।” श्री मोदी ने इस केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के लिए तेलंगाना के लोगों को बधाई दी।

इस अवसर पर तेलंगाना की राज्यपाल सुश्री तमिलिसाई सुंदरराजन, केंद्रीय मंत्री श्री जी किशन रेड्डी, संसद सदस्य श्री बंदी संजय कुमार तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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पृष्ठभूमि

देश भर में आधुनिक सड़क अवसंरचना के विकास से संबंधित प्रधानमंत्री के विज़न को साकार करने के एक कदम के रूप में, कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सड़क परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया। प्रधानमंत्री ने प्रमुख सड़क परियोजनाओं की आधारशिला रखी, जो नागपुर-विजयवाड़ा आर्थिक गलियारे का हिस्सा हैं। परियोजनाओं में शामिल हैं - एनएच-163जी के 'वारंगल से खम्मम खंड तक 108 किमी लंबा चार-लेन पहुंच नियंत्रित ग्रीनफील्ड राजमार्ग और एनएच-163जी के खम्मम से विजयवाड़ा खंड तक 90 किमी लंबा 'चार-लेन पहुंच नियंत्रित ग्रीनफील्ड राजमार्ग। ये सड़क परियोजनाएं लगभग 6400 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाएंगी। परियोजनाओं से वारंगल और खम्मम के बीच दूरी लगभग 14 किमी कम हो जाएगी और खम्मम और विजयवाड़ा के बीच भी दूरी में लगभग 27 किमी की कमी आयेगी।

प्रधानमंत्री ने एक सड़क परियोजना का लोकार्पण किया - 'एनएच-365बीबी पर 59 किमी लंबा व चार लेन वाला सूर्यापेट- खम्मम खंड। लगभग 2,460 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित, यह परियोजना हैदराबाद-विशाखापत्तनम कॉरिडोर का एक हिस्सा है और इसे भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया गया है। यह सड़क परियोजना खम्मम जिले और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों को बेहतर सड़क परिवहन सुविधा भी प्रदान करेगी।

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कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने '37 किलोमीटर लम्बी जक्लैर - कृष्णा नई रेलवे लाइन' का लोकार्पण किया। 500 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित, नयी रेल लाइन पहली बार नारायणपेट जिले के पिछड़े क्षेत्रों को रेल सुविधा से जोड़ती है। प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृष्णा स्टेशन से हैदराबाद (काचीगुडा) - रायचूर - हैदराबाद (काचीगुडा) ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई। ट्रेन सेवा तेलंगाना के हैदराबाद, रंगारेड्डी, महबूबनगर और नारायणपेट जिलों को कर्नाटक के रायचूर जिले से जोड़ेगी। यह सेवा महबूबनगर और नारायणपेट जिलों के पिछड़े क्षेत्रों को पहली बार रेल सुविधा प्रदान करेगी, जिससे क्षेत्र के छात्रों, दैनिक यात्रियों, श्रमिकों और स्थानीय हथकरघा उद्योग को लाभ होगा।

देश भर में लॉजिस्टिक्स दक्षता में सुधार से जुड़े प्रधानमंत्री के विज़न के अनुरूप, कार्यक्रम के दौरान महत्वपूर्ण तेल और गैस पाइपलाइन परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया। प्रधानमंत्री ने 'हसन-चेरलापल्ली एलपीजी पाइपलाइन परियोजना' राष्ट्र को समर्पित की। लगभग 2170 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित, कर्नाटक के हसन से चेरलापल्ली (हैदराबाद का उपनगर) तक एलपीजी पाइपलाइन, क्षेत्र में एलपीजी परिवहन और वितरण का एक सुरक्षित, लागत प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल माध्यम प्रदान करती है। उन्होंने कृष्णापट्टनम से हैदराबाद (मलकापुर) तक 'भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) की बहु-उत्पाद पेट्रोलियम पाइपलाइन' की आधारशिला भी रखी। 425 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन 1940 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित की जाएगी। यह पाइपलाइन क्षेत्र में पेट्रोलियम उत्पादों का एक सुरक्षित, तेज, कुशल और पर्यावरण-अनुकूल उपाय की सुविधा प्रदान करेगी।

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प्रधानमंत्री ने 'हैदराबाद विश्वविद्यालय की पांच नई इमारतों' यानि स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स; स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स एंड स्टेटिस्टिक्स; स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज; व्याख्यान कक्ष परिसर - III और सरोजिनी नायडू स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड कम्युनिकेशन (एनेक्सी) का भी उद्घाटन किया। हैदराबाद विश्वविद्यालय में अवसंरचना-उन्नयन, छात्रों तथा शिक्षकों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक और कदम है।

 

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प्रधानमंत्री ने थाईलैंड की प्रधानमंत्री से मुलाकात की
April 03, 2025

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने थाईलैंड की अपनी आधिकारिक यात्रा पर आज बैंकॉक में थाईलैंड की प्रधानमंत्री पैतोंगतार्न शिनावात्रा से मुलाकात की। गवर्नमेंट हाउस पहुंचने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अगवानी प्रधानमंत्री शिनावात्रा ने की और उनका औपचारिक स्वागत किया। यह उन दोनों की दूसरी मुलाकात थी। इससे पहले, दोनों नेताओं ने अक्टूबर 2024 में वियनतियाने में आसियान से संबंधित शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की थी।

दोनों नेताओं ने भारत और थाईलैंड के बीच द्विपक्षीय सहयोग के पूरे दायरे की समीक्षा की। उन्होंने राजनीतिक आदान-प्रदान, रक्षा और सुरक्षा भागीदारी, रणनीतिक जुड़ाव, व्यापार और निवेश और दोनों देशों के लोगों को बीच संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। ऐसा करते हुए दोनों नेताओं ने कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्टार्ट-अप, नवाचार, डिजिटल, शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन सहयोग बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया। उन्होंने मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी और साइबर घोटालों सहित अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधों का मुकाबला करने के लिए सहयोग को गहरा करने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किए। दोनों प्रधानमंत्रियों ने वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और बिम्सटेक, आसियान और मेकांग गंगा सहयोग सहित उप-क्षेत्रीय, क्षेत्रीय और बहु-पक्षीय मंचों में निकट सहयोग स्थापित करने के तरीकों पर चर्चा की।

दोनों नेताओं ने भारत-थाईलैंड रणनीतिक साझेदारी की स्थापना पर संयुक्त घोषणा के आदान-प्रदान को देखा। उन्होंने हथकरघा और हस्तशिल्प; डिजिटल प्रौद्योगिकियों; सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई); और समुद्री विरासत के क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी देखा। दोनों नेताओं ने भारत-थाईलैंड कांसुलर वार्ता की स्थापना का भी स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संपर्क को और सुगम बनाएगा। परिणामों की सूची यहां देखी जा सकती है।

सद्भावना के एक प्रतीक के रूप में थाई सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा को चिह्नित करने के लिए 18वीं शताब्दी के रामायण भित्ति चित्रों को दर्शाते हुए एक विशेष डाक टिकट जारी किया। दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को रेखांकित करते हुए, प्रधानमंत्री को थाईलैंड की प्रधानमंत्री शिनावात्रा द्वारा पाली में बौद्ध धर्म के पवित्र ग्रंथ ‘तिपिटक’ का एक विशेष संस्करण भेंट किया गया। भारत और थाईलैंड के बीच घनिष्ठ सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करने के लिए, प्रधानमंत्री ने गुजरात से खुदाई करके लाए गए भगवान बुद्ध के अवशेषों को थाईलैंड भेजने की पेशकश की, ताकि लोग उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट कर सकें। पिछले साल, भगवान बुद्ध और उनके दो शिष्यों के पवित्र अवशेष भारत से थाईलैंड आए थे और 40 लाख से अधिक लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।

भारत और थाईलैंड के बीच घनिष्ठ सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री ने गुजरात से खुदाई करके लाए गए भगवान बुद्ध के अवशेषों को थाईलैंड भेजने की पेशकश की, ताकि लोग उनके प्रति अपना सम्मान प्रकट कर सकें। पिछले साल, भगवान बुद्ध और उनके दो शिष्यों के पवित्र अवशेष भारत से थाईलैंड आए थे और 40 लाख से अधिक लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी थी।

भारत और थाईलैंड समुद्री पड़ोसी हैं, जिनके बीच सांस्कृतिक, भाषाई और धार्मिक संबंधों से जुडे साझा सभ्यागत बंधन हैं, जिनमें रामायण और बौद्ध धर्म के संबंध भी शामिल हैं। थाईलैंड के साथ भारत के संबंध हमारी 'एक्ट ईस्ट' नीति, आसियान के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी, विजन महानगर और हिन्द-प्रशांत के हमारे दृष्टिकोण का एक अभिन्न स्तंभ हैं। दोनों देशों के बीच निरंतर बातचीत ने सदियों पुराने संबंधों और साझा हितों पर आधारित एक मजबूत और बहु-आयामी संबंध को जन्म दिया है।