भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की दूसरी बैठक 28 फरवरी 2025 को नई दिल्ली में संपन्‍न हुई। भारत की ओर से इसकी सह-अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने की। यूरोपीय संघ की ओर से इसकी सह-अध्यक्षता प्रौद्योगिकी संप्रभुता, सुरक्षा और लोकतंत्र के लिए कार्यकारी उपाध्यक्ष सुश्री हेना विर्कुनेन, व्यापार और आर्थिक सुरक्षा, अंतर-संस्थागत संबंध और पारदर्शिता आयुक्त श्री मारोस शेफोविच और स्टार्टअप, अनुसंधान और नवाचार आयुक्त सुश्री एकातेरिना ज़हरिवा ने की।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने अप्रैल 2022 में भारत-यूरोपीय संघ टीटीसी की स्थापना की थी, जो व्यापार, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के क्षेत्र में चुनौतियों से निपटने का एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मंच है। भारत और यूरोपीय संघ, मुक्‍त बाजार की अर्थव्यवस्थाओं, साझा मूल्यों और बहुलवादी समाजों वाले दो विशाल और जीवंत लोकतंत्रों के रूप में बहुध्रुवीय दुनिया में स्वाभाविक साझेदार हैं।

यूरोपीय संघ और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों में प्रगाढ़ता तथा बढ़ता रणनीतिक विलयन वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य की बदलती गतिशीलता तथा वैश्विक स्थिरता, आर्थिक सुरक्षा तथा सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने में साझा रुचि को दर्शाता है। इस संबंध में, दोनों पक्षों ने फिर से नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के महत्व और संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, पारदर्शिता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों के लिए पूर्ण सम्मान पर जोर दिया। टीटीसी यूरोपीय संघ और भारत के बीच व्यापार और प्रौद्योगिकी के बीच उत्‍तरोत्‍तर महत्वपूर्ण हो रहे संबंधों, दोनों भागीदारों की अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ाने के लिए इन मुद्दों पर सहयोग की क्षमता और संबंधित सुरक्षा चुनौतियों पर एक साथ काम करने की आवश्यकता के बारे में साझा स्वीकृति को दर्शाती है। दोनों पक्ष सुदृढ़ता बढ़ाने, कनेक्टिविटी को मजबूत करने तथा हरित और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के विकास को आगे बढ़ाने के लिए अपनी साझेदारी की क्षमता पर गौर करते हैं।

भारत-यूरोपीय संघ टीटीसी की पहली बैठक 16 मई 2023 को ब्रुसेल्स में हुई थी। टीटीसी मंत्रिस्तरीय बैठक ने आगे की राह के लिए राजनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया। इसके बाद 24 नवंबर 2023 को वर्चुअल मोड में एक समीक्षा बैठक में तीन टीटीसी कार्य समूहों द्वारा की गई प्रगति की समीक्षा की गई।

रणनीतिक प्रौद्योगिकियों, डिजिटल गवर्नेंस और डिजिटल कनेक्टिविटी पर कार्य समूह 1

भारत और यूरोपीय संघ ने रणनीतिक प्रौद्योगिकियों, डिजिटल गवर्नेंस और डिजिटल कनेक्टिविटी से संबंधित कार्य समूह 1 के माध्यम से अपने साझा मूल्यों के अनुरूप अपने डिजिटल सहयोग को मजबूत बनाने के महत्व को दोहराया। दोनों पक्षों ने मानव-केंद्रित डिजिटल परिवर्तन तथा एआई, सेमीकंडक्टर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और 6जी जैसी उन्नत एवं भरोसेमंद डिजिटल प्रौद्योगिकियों के विकास में तेजी लाने के लिए अपनी-अपनी शक्तियों का लाभ उठाने की प्रतिबद्धता जताई, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को लाभ होगा। दोनों पक्षों ने इस उद्देश्य के लिए यूरोपीय संघ-भारत अनुसंधान और नवाचार को मजबूत करने के लिए संयुक्त रूप से काम करने की प्रतिबद्धता जताई, ताकि प्रतिस्पर्धा को और बढ़ाया जा सके, साथ ही अपनी आर्थिक सुरक्षा को बढ़ाया जा सके। दोनों पक्षों ने साइबर-सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्‍टम में वैश्विक संपर्क को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई।

मुक्‍त और समावेशी डिजिटल अर्थव्यवस्थाओं और डिजिटल समाजों के विकास के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के महत्व को स्‍वीकार करते हुए, भारत और यूरोपीय संघ ने अपने-अपने डीपीआई की अंतर-संचालनीयता की दिशा में काम करने हेतु सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की, जो मानवाधिकारों का सम्मान करते हैं और व्यक्तिगत डेटा, गोपनीयता और बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करते हैं। दोनों पक्षों ने तीसरे देशों (यानी जो यूरोपीय संघ के सदस्‍य नहीं हैं) में डीपीआई समाधानों को संयुक्त रूप से बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई और सीमा पार डिजिटल लेनदेन को बढ़ाने और आपसी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ई-हस्ताक्षरों की पारस्परिक मान्यता की आवश्यकता पर जोर दिया।

दोनों पक्षों ने सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं की सुदृढ़ता को और मजबूती प्रदान करने तथा सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। इसके लिए, उन्‍होंने चिप डिजाइन, विषम एकीकरण, टिकाऊ सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों, प्रक्रिया डिजाइन किट (पीडीके) के लिए उन्नत प्रक्रियाओं के लिए प्रौद्योगिकी विकास आदि के क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान एवं विकास की संभावनाओं का पता लगाने पर सहमति प्रकट की। दोनों पक्ष तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाने तथा टिकाऊ, सुरक्षित और विविधतापूर्ण सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता विकसित करके आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता सुनिश्चित करने के लिए यूरोपीय संघ और भारतीय सेमीकंडक्टर इकोसिस्‍टम को मजबूत बनाए जाने को बढ़ावा देंगे। इसके अलावा, उन्होंने एक समर्पित कार्यक्रम विकसित करने के लिए प्रतिबद्धता जताई जो प्रतिभाओं के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करेगा तथा छात्रों और युवा पेशेवरों के बीच सेमीकंडक्टर कौशल को बढ़ावा देगा।

दोनों पक्षों ने सुरक्षित, भरोसेमंद, मानव-केंद्रित, टिकाऊ और जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई । इसके अलावा, एआई पर निरंतर और प्रभावशाली सहयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, यूरोपीय एआई कार्यालय और भारत एआई मिशन ने सहयोग को व्‍यापक बनाने, नवाचार के इकोसिस्‍टम को प्रोत्साहित करने और भरोसेमंद एआई विकसित करने के लिए सामान्‍य खुले शोध प्रश्नों पर सूचना के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की। उन्‍होंने विशाल भाषा मॉडलों पर सहयोग बढ़ाने तथा मानव विकास और सामान्‍य कल्‍याण के लिए एआई की क्षमता का उपयोग करने पर भी सहमति प्रकट की, जिसमें नैतिक और जिम्मेदार एआई के लिए उपकरण और रूपरेखा विकसित करने जैसी संयुक्त परियोजनाएं शामिल हैं। ये प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन और जैव सूचना विज्ञान के क्षेत्रों में उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग अनुप्रयोगों पर अनुसंधान और विकास सहयोग के तहत की गई प्रगति पर आधारित होंगे।

भारत और यूरोपीय संघ ने अनुसंधान और विकास प्राथमिकताओं को संरेखित करने तथा सुरक्षित और विश्वसनीय दूरसंचार और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए भारत 6 जी एलायंस और ईयू6 जी स्मार्ट नेटवर्क एंड सर्विस इंडस्‍ट्री एसोसिएशन के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत किया। दोनों पक्ष अंतर-संचालन योग्य वैश्विक मानकों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देने के साथ आईटी और दूरसंचार मानकीकरण पर सहयोग बढ़ाएंगे।

इसके अलावा, दोनों पक्ष डिजिटल कौशल अंतर को पाटने, प्रमाणन की पारस्परिक मान्यता का पता लगाने और कुशल पेशेवरों के कानूनी मार्गों और प्रतिभाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने पर सहमत हुए।

दोनों पक्षों ने सितंबर 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में सर्वसम्मति से स्वीकृत ग्‍लोबल डिजिटल कॉम्पैक्ट के कार्यान्वयन की दिशा में सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की, जो उनके साझा उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर ध्यान दिया कि आगामी वर्ल्ड समिट ऑन द इंफॉर्मेशन सोसाइटी +20 इंटरनेट गवर्नेंस के बहु-हितधारक मॉडल के लिए वैश्विक समर्थन बनाए रखे और उसे संवर्धित करे।

स्वच्छ एवं हरित प्रौद्योगिकियों पर कार्य समूह 2

भारत और यूरोपीय संघ ने स्वच्छ और हरित प्रौद्योगिकियों पर कार्य समूह 2 के तहत भारत और यूरोपीय संघ के लिए क्रमशः 2070 और 2050 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्‍य को प्राप्त करने के लिए चिन्हित किए गए प्राथमिकता वाले कार्यों के महत्व पर बल दिया। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नई स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और मानकों में महत्वपूर्ण निवेश की आवश्यकता होगी। अनुसंधान और नवाचार (आरएंडआई) पर जोर देने से यूरोपीय संघ और भारत के बीच तकनीकी सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। समानांतर रूप से, बाजार में तेजी के लिए तकनीकी नवाचारों का समर्थन करने से भारतीय और यूरोपीय संघ के उद्यमों की संबंधित बाजारों तक पहुंच बढ़ेगी और नवीन प्रौद्योगिकियों को व्यापक रूप से अपनाने में सुविधा होगी। इससे भारतीय और यूरोपीय संघ के इनक्यूबेटरों, एसएमई और स्टार्ट-अप्स के बीच सहयोग और ऐसी प्रौद्योगिकियों में मानव संसाधन क्षमता और क्षमता के निर्माण के लिए संभावनाएं खुलती हैं।

इस संबंध में, दोनों पक्षों ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के लिए बैटरियों के पुनर्चक्रण, समुद्री प्लास्टिक कचरे और अपशिष्ट से हाइड्रोजन पर असाधारण समन्वित आह्वान के माध्यम से संयुक्त अनुसंधान सहयोग पर सहमति व्यक्त की। इसके लिए अनुमानित कुल संयुक्त बजट होराइज़न यूरोप प्रोग्राम और उसके अनुरूप भारतीय योगदान से लगभग 60 मिलियन यूरो होगा। ईवी के लिए बैटरियों के पुनर्चक्रण के संबंध में, विभिन्न प्रकार की लचीली/कम लागत वाली/पुनर्चक्रण में आसान बैटरियों के माध्यम से बैटरी की चक्रीयता पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। समुद्री प्लास्टिक कचरे के संबंध में, जलीय कचरे का पता लगाने, मापने और विश्लेषण करने और समुद्री पर्यावरण पर प्रदूषण के संचयी प्रभाव को कम करने के लिए प्रौद्योगिकियों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अपशिष्ट से हाइड्रोजन के संबंध में, बायोजेनिक कचरे से हाइड्रोजन का उत्पादन करने के लिए अधिक दक्षता वाली प्रौद्योगिकियों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

दोनों पक्षों ने भविष्य की कार्रवाई के आधार के रूप में सहयोग के चिन्हित क्षेत्रों में विशेषज्ञों के बीच महत्वपूर्ण आदान-प्रदान के महत्व को याद किया। भारतीय विशेषज्ञों ने जनवरी 2024 में इटली के इसप्रा में जॉइंट रिसर्च सेंटर (जेआरसी) ई-मोबिलिटी लैब में ईवी इंटरऑपरेबिलिटी और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी (ईएमसी) पर प्रशिक्षण और परस्‍पर सीखने के अभ्यास में भाग लिया। इसके अलावा, भारत के साथ चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मानकीकरण प्रक्रियाओं में ईयू-भारतीय संवाद और उद्योग की भागीदारी को गहन बनाने के लिए ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई), पुणे, भारत और ऑनलाइन में ईवी चार्जिंग टेक्नोलॉजीज (मानकीकरण और परीक्षण) पर एक संयुक्त हाइब्रिड कार्यशाला आयोजित की गई। दोनों पक्षों ने ईवी की बैटरी के पुनर्चक्रण के लिए प्रौद्योगिकी में भारतीय और यूरोपीय संघ के स्टार्टअप के बीच आदान-प्रदान की पहचान, समर्थन और आयोजन के लिए एक मैचमेकिंग इवेंट का भी आयोजन किया। विशेषज्ञों ने समुद्री प्लास्टिक कचरे के लिए मूल्यांकन और निगरानी उपकरणों के बारे में भी संयुक्त रूप से चर्चा की। अंत में, समुद्री प्लास्टिक प्रदूषण से प्रभावी रूप से निपटने के लिए सभी हितधारकों को शामिल करते हुए व्यावहारिक समाधान के लिए यूरोपीय संघ-भारत सहयोग को बढ़ावा देने वाला एक "आइडियाथॉन" तैयार किया जा रहा है।

दोनों पक्षों ने ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मानकों को सुसंगत बनाने के लिए सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर सहमति जताई, जिसमें ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में सुसंगत परीक्षण समाधानों और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए सहयोगपूर्ण, पूर्व-मानक अनुसंधान शामिल हैं। उन्‍होंने हाइड्रोजन से संबंधित सुरक्षा मानकों, मानकों के विज्ञान के साथ-साथ अतीत में संयुक्त रूप से आयोजित शोध परियोजनाओं के परिणामों के रूप में अपशिष्ट जल उपचार प्रौद्योगिकियों के बाजार में उपयोग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के तरीकों का पता लगाने पर भी सहमति प्रकट की।

व्यापार, निवेश और सुदृढ़ मूल्य शृंखलाओं पर कार्य समूह 3

भारत और यूरोपीय संघ ने, भारत और यूरोपीय संघ के बीच घनिष्ठ आर्थिक साझेदारी कायम करने के उद्देश्य से व्यापार, निवेश और सुदृढ़ मूल्य शृंखलाओं पर कार्य समूह 3 के तहत उपयोगी चर्चाओं पर ध्यान दिया। उत्‍तरोत्‍तर चुनौतीपूर्ण हो रहे भू-राजनीतिक संदर्भ में, दोनों पक्षों ने धन और साझा समृद्धि बनाने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। कार्य समूह 3 के तहत कार्य, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए), निवेश संरक्षण समझौते (आईपीए) और भौगोलिक संकेत समझौते पर चल रही वार्ताओं का पूरक है जो अलग-अलग ट्रैक पर आगे बढ़ रहे हैं।

दोनों पक्षों ने पारदर्शिता, पूर्वानुमेयता, विविधीकरण, सुरक्षा और स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए सुदृढ़ और भविष्य के लिए तैयार मूल्य श्रृंखलाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने कृषि-खाद्य, सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (एपीआई) और स्वच्छ प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सक्षम मूल्य श्रृंखलाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन तीनों क्षेत्रों में कार्य योजनाओं पर सहमति व्यक्त की।

कृषि क्षेत्र में, भारत और यूरोपीय संघ खाद्य सुरक्षा के लिए आकस्मिक योजना पर सहयोग करने का इरादा रखते हैं और जलवायु-अनुकूल व्यवहारों, फसल विविधीकरण और बुनियादी ढांचे में सुधार के संबंध में साझा अनुसंधान और नवाचारों की जरूरतों पर साझा प्रयासों का स्वागत करते हैं, जैसा कि जी-20 फ्रेमवर्क के माध्यम से सहयोग के लिए बढ़ावा दिया गया है। फार्मास्युटिकल क्षेत्र में, दोनों पक्षों का उद्देश्य कमजोरियों का मानचित्रण करके, टिकाऊ विनिर्माण को बढ़ावा देकर और व्यवधानों को रोकने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित करके सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (एपीआई) आपूर्ति श्रृंखलाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ाना है। स्वच्छ प्रौद्योगिकी सहयोग क्षेत्रीय क्षमताओं और निवेश प्रोत्साहनों और अनुसंधान, विकास और नवाचार प्राथमिकताओं के साथ-साथ कमजोरियों का आकलन करने के तरीकों पर जानकारी का आदान-प्रदान करके, व्यापार बाधाओं को कम करने के तरीकों पर चर्चा करके और आपूर्ति श्रृंखलाओं के संभावित तालमेल की तलाश करके सौर ऊर्जा, अपतटीय पवन और स्वच्छ हाइड्रोजन के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर केंद्रित है। इन क्षेत्रों में, भारत और यूरोपीय संघ निवेश को बढ़ावा देने, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने और नियमित संवादों, अनुसंधान सहयोगों और व्यवसाय-से-व्यवसाय सहभागिता के माध्यम से जोखिमों को कम करने, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और सतत आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं।

दोनों पक्षों ने स्वीकार किया कि टीटीसी ढांचे के भीतर सहयोग के माध्यम से बाजार तक पहुंच के उपयुक्‍त प्राथमिकता वाले मुद्दों का समाधान किया जा रहा है। यूरोपीय संघ पक्ष ने यूरोपीय संघ के अनेक संयंत्रों के उत्पादों के विपणन को मंजूरी देने के लिए भारतीय पहल की सराहना की, जबकि भारतीय पक्ष ने कई भारतीय जलीय कृषि प्रतिष्ठानों की सूची बनाने और कृषि जैविक उत्पादों के लिए समानता के मुद्दे को उठाने की सराहना की। दोनों पक्ष टीटीसी समीक्षा तंत्र के तहत इन विषयों पर अपने प्रयासों को आगे बढ़ाने और एक-दूसरे द्वारा उठाए गए शेष मुद्दों पर अपनी भागीदारी जारी रखने पर सहमत हुए।

दोनों पक्षों ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की जांच में सर्वोत्तम प्रथाओं के संबंध में हुए आदान-प्रदान पर गौर किया, जो आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए उत्‍तरोत्‍तर बढ़ते महत्व का क्षेत्र है।

भारत और यूरोपीय संघ ने मौजूदा चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक संदर्भ में बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया। साथ ही, उन्होंने विश्व व्यापार संगठन में आवश्यक सुधार लाने की आवश्यकता को स्‍वीकार किया ताकि यह सदस्यों के हित के मुद्दों को कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से हल करने में सक्षम हो सके। दोनों पक्षों ने एक कार्यशील विवाद निपटान प्रणाली के महत्व को भी स्‍वीकार किया। इस उद्देश्य के लिए, वे एमसी14 सहित डब्ल्यूटीओ को ठोस परिणाम देने में मदद करने के लिए अपनी बातचीत और सहभागिता को व्‍यापक बनाने पर सहमत हुए।

दोनों पक्षों ने कई द्विपक्षीय चैनलों के माध्यम से व्यापार और डीकार्बोनाइजेशन पर गहन चर्चा की है और हितधारकों के साथ मिलकर खासकर यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर मेकेनिज्म (सीबीएएम) के कार्यान्वयन परकाम किया है । दोनों पक्षों ने सीबीएएम कार्यान्वयन से विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा की और उन्‍हें हल करना जारी रखने पर सहमत हुए।

सह-अध्यक्षों ने टीटीसी के तहत अपनी भागीदारी बढ़ाने और उसे और गहन बनाने तथा टीटीसी की इस सफल दूसरी बैठक में निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्धता दोहरायी। वे एक वर्ष के भीतर टीटीसी की तीसरी बैठक के लिए फिर से मिलने पर सहमत हुए।

  • Yogendra Nath Pandey Lucknow Uttar vidhansabha March 26, 2025

    modi ji
  • Sekukho Tetseo March 25, 2025

    We need PM Modi leadership in this generation.
  • கார்த்திக் March 22, 2025

    Jai Shree Ram🌺Jai Shree Ram🌺Jai Shree Ram🌺Jai Shree Ram🌺Jai Shree Ram🌺Jai Shree Ram🌺Jai Shree Ram🌺Jai Shree Ram🌺Jai Shree Ram🌺Jai Shree Ram🌺Jai Shree Ram🌺Jai Shree Ram🌺
  • Jitendra Kumar March 19, 2025

    🙏🇮🇳
  • Prasanth reddi March 17, 2025

    జై బీజేపీ 🪷🪷🤝
  • ABHAY March 14, 2025

    जय हो
  • ram Sagar pandey March 14, 2025

    🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🙏🏻🌹जय श्रीराम🙏💐🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹जय माँ विन्ध्यवासिनी👏🌹💐ॐनमः शिवाय 🙏🌹🙏जय कामतानाथ की 🙏🌹🙏जय श्रीकृष्णा राधे राधे 🌹🙏🏻🌹जय श्रीकृष्णा राधे राधे 🌹🙏🏻🌹🌹🌹🙏🙏🌹🌹🌹🙏🏻🌹जय श्रीराम🙏💐🌹जय माता दी 🚩🙏🙏
  • SUNIL CHAUDHARY KHOKHAR BJP March 10, 2025

    10/03/2025
  • SUNIL CHAUDHARY KHOKHAR BJP March 10, 2025

    10/03/2025
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आज भारत सिर्फ Nation of Dreams नहीं, बल्कि Nation That Delivers भी है: TV9 समिट में पीएम मोदी
March 28, 2025
QuoteToday, the world's eyes are on India: PM
QuoteIndia's youth is rapidly becoming skilled and driving innovation forward: PM
Quote"India First" has become the mantra of India's foreign policy: PM
QuoteToday, India is not just participating in the world order but also contributing to shaping and securing the future: PM
QuoteIndia has given Priority to humanity over monopoly: PM
QuoteToday, India is not just a Nation of Dreams but also a Nation That Delivers: PM

श्रीमान रामेश्वर गारु जी, रामू जी, बरुन दास जी, TV9 की पूरी टीम, मैं आपके नेटवर्क के सभी दर्शकों का, यहां उपस्थित सभी महानुभावों का अभिनंदन करता हूं, इस समिट के लिए बधाई देता हूं।

TV9 नेटवर्क का विशाल रीजनल ऑडियंस है। और अब तो TV9 का एक ग्लोबल ऑडियंस भी तैयार हो रहा है। इस समिट में अनेक देशों से इंडियन डायस्पोरा के लोग विशेष तौर पर लाइव जुड़े हुए हैं। कई देशों के लोगों को मैं यहां से देख भी रहा हूं, वे लोग वहां से वेव कर रहे हैं, हो सकता है, मैं सभी को शुभकामनाएं देता हूं। मैं यहां नीचे स्क्रीन पर हिंदुस्तान के अनेक शहरों में बैठे हुए सब दर्शकों को भी उतने ही उत्साह, उमंग से देख रहा हूं, मेरी तरफ से उनका भी स्वागत है।

साथियों,

आज विश्व की दृष्टि भारत पर है, हमारे देश पर है। दुनिया में आप किसी भी देश में जाएं, वहां के लोग भारत को लेकर एक नई जिज्ञासा से भरे हुए हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि जो देश 70 साल में ग्यारहवें नंबर की इकोनॉमी बना, वो महज 7-8 साल में पांचवे नंबर की इकोनॉमी बन गया? अभी IMF के नए आंकड़े सामने आए हैं। वो आंकड़े कहते हैं कि भारत, दुनिया की एकमात्र मेजर इकोनॉमी है, जिसने 10 वर्षों में अपने GDP को डबल किया है। बीते दशक में भारत ने दो लाख करोड़ डॉलर, अपनी इकोनॉमी में जोड़े हैं। GDP का डबल होना सिर्फ आंकड़ों का बदलना मात्र नहीं है। इसका impact देखिए, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, और ये 25 करोड़ लोग एक नियो मिडिल क्लास का हिस्सा बने हैं। ये नियो मिडिल क्लास, एक प्रकार से नई ज़िंदगी शुरु कर रहा है। ये नए सपनों के साथ आगे बढ़ रहा है, हमारी इकोनॉमी में कंट्रीब्यूट कर रहा है, और उसको वाइब्रेंट बना रहा है। आज दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी हमारे भारत में है। ये युवा, तेज़ी से स्किल्ड हो रहा है, इनोवेशन को गति दे रहा है। और इन सबके बीच, भारत की फॉरेन पॉलिसी का मंत्र बन गया है- India First, एक जमाने में भारत की पॉलिसी थी, सबसे समान रूप से दूरी बनाकर चलो, Equi-Distance की पॉलिसी, आज के भारत की पॉलिसी है, सबके समान रूप से करीब होकर चलो, Equi-Closeness की पॉलिसी। दुनिया के देश भारत की ओपिनियन को, भारत के इनोवेशन को, भारत के एफर्ट्स को, जैसा महत्व आज दे रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं हुआ। आज दुनिया की नजर भारत पर है, आज दुनिया जानना चाहती है, What India Thinks Today.

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साथियों,

भारत आज, वर्ल्ड ऑर्डर में सिर्फ पार्टिसिपेट ही नहीं कर रहा, बल्कि फ्यूचर को शेप और सेक्योर करने में योगदान दे रहा है। दुनिया ने ये कोरोना काल में अच्छे से अनुभव किया है। दुनिया को लगता था कि हर भारतीय तक वैक्सीन पहुंचने में ही, कई-कई साल लग जाएंगे। लेकिन भारत ने हर आशंका को गलत साबित किया। हमने अपनी वैक्सीन बनाई, हमने अपने नागरिकों का तेज़ी से वैक्सीनेशन कराया, और दुनिया के 150 से अधिक देशों तक दवाएं और वैक्सीन्स भी पहुंचाईं। आज दुनिया, और जब दुनिया संकट में थी, तब भारत की ये भावना दुनिया के कोने-कोने तक पहुंची कि हमारे संस्कार क्या हैं, हमारा तौर-तरीका क्या है।

साथियों,

अतीत में दुनिया ने देखा है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जब भी कोई वैश्विक संगठन बना, उसमें कुछ देशों की ही मोनोपोली रही। भारत ने मोनोपोली नहीं बल्कि मानवता को सर्वोपरि रखा। भारत ने, 21वीं सदी के ग्लोबल इंस्टीट्यूशन्स के गठन का रास्ता बनाया, और हमने ये ध्यान रखा कि सबकी भागीदारी हो, सबका योगदान हो। जैसे प्राकृतिक आपदाओं की चुनौती है। देश कोई भी हो, इन आपदाओं से इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान होता है। आज ही म्यांमार में जो भूकंप आया है, आप टीवी पर देखें तो बहुत बड़ी-बड़ी इमारतें ध्वस्त हो रही हैं, ब्रिज टूट रहे हैं। और इसलिए भारत ने Coalition for Disaster Resilient Infrastructure - CDRI नाम से एक वैश्विक नया संगठन बनाने की पहल की। ये सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार करने का संकल्प है। भारत का प्रयास है, प्राकृतिक आपदा से, पुल, सड़कें, बिल्डिंग्स, पावर ग्रिड, ऐसा हर इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षित रहे, सुरक्षित निर्माण हो।

साथियों,

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हर देश का मिलकर काम करना बहुत जरूरी है। ऐसी ही एक चुनौती है, हमारे एनर्जी रिसोर्सेस की। इसलिए पूरी दुनिया की चिंता करते हुए भारत ने International Solar Alliance (ISA) का समाधान दिया है। ताकि छोटे से छोटा देश भी सस्टेनबल एनर्जी का लाभ उठा सके। इससे क्लाइमेट पर तो पॉजिटिव असर होगा ही, ये ग्लोबल साउथ के देशों की एनर्जी नीड्स को भी सिक्योर करेगा। और आप सबको ये जानकर गर्व होगा कि भारत के इस प्रयास के साथ, आज दुनिया के सौ से अधिक देश जुड़ चुके हैं।

साथियों,

बीते कुछ समय से दुनिया, ग्लोबल ट्रेड में असंतुलन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी challenges का सामना कर रही है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भी भारत ने दुनिया के साथ मिलकर नए प्रयास शुरु किए हैं। India–Middle East–Europe Economic Corridor (IMEC), ऐसा ही एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। ये प्रोजेक्ट, कॉमर्स और कनेक्टिविटी के माध्यम से एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट को जोड़ेगा। इससे आर्थिक संभावनाएं तो बढ़ेंगी ही, दुनिया को अल्टरनेटिव ट्रेड रूट्स भी मिलेंगे। इससे ग्लोबल सप्लाई चेन भी और मजबूत होगी।

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साथियों,

ग्लोबल सिस्टम्स को, अधिक पार्टिसिपेटिव, अधिक डेमोक्रेटिक बनाने के लिए भी भारत ने अनेक कदम उठाए हैं। और यहीं, यहीं पर ही भारत मंडपम में जी-20 समिट हुई थी। उसमें अफ्रीकन यूनियन को जी-20 का परमानेंट मेंबर बनाया गया है। ये बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम था। इसकी मांग लंबे समय से हो रही थी, जो भारत की प्रेसीडेंसी में पूरी हुई। आज ग्लोबल डिसीजन मेकिंग इंस्टीट्यूशन्स में भारत, ग्लोबल साउथ के देशों की आवाज़ बन रहा है। International Yoga Day, WHO का ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के लिए ग्लोबल फ्रेमवर्क, ऐसे कितने ही क्षेत्रों में भारत के प्रयासों ने नए वर्ल्ड ऑर्डर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, और ये तो अभी शुरूआत है, ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत का सामर्थ्य नई ऊंचाई की तरफ बढ़ रहा है।

साथियों,

21वीं सदी के 25 साल बीत चुके हैं। इन 25 सालों में 11 साल हमारी सरकार ने देश की सेवा की है। और जब हम What India Thinks Today उससे जुड़ा सवाल उठाते हैं, तो हमें ये भी देखना होगा कि Past में क्या सवाल थे, क्या जवाब थे। इससे TV9 के विशाल दर्शक समूह को भी अंदाजा होगा कि कैसे हम, निर्भरता से आत्मनिर्भरता तक, Aspirations से Achievement तक, Desperation से Development तक पहुंचे हैं। आप याद करिए, एक दशक पहले, गांव में जब टॉयलेट का सवाल आता था, तो माताओं-बहनों के पास रात ढलने के बाद और भोर होने से पहले का ही जवाब होता था। आज उसी सवाल का जवाब स्वच्छ भारत मिशन से मिलता है। 2013 में जब कोई इलाज की बात करता था, तो महंगे इलाज की चर्चा होती थी। आज उसी सवाल का समाधान आयुष्मान भारत में नजर आता है। 2013 में किसी गरीब की रसोई की बात होती थी, तो धुएं की तस्वीर सामने आती थी। आज उसी समस्या का समाधान उज्ज्वला योजना में दिखता है। 2013 में महिलाओं से बैंक खाते के बारे में पूछा जाता था, तो वो चुप्पी साध लेती थीं। आज जनधन योजना के कारण, 30 करोड़ से ज्यादा बहनों का अपना बैंक अकाउंट है। 2013 में पीने के पानी के लिए कुएं और तालाबों तक जाने की मजबूरी थी। आज उसी मजबूरी का हल हर घर नल से जल योजना में मिल रहा है। यानि सिर्फ दशक नहीं बदला, बल्कि लोगों की ज़िंदगी बदली है। और दुनिया भी इस बात को नोट कर रही है, भारत के डेवलपमेंट मॉडल को स्वीकार रही है। आज भारत सिर्फ Nation of Dreams नहीं, बल्कि Nation That Delivers भी है।

साथियों,

जब कोई देश, अपने नागरिकों की सुविधा और समय को महत्व देता है, तब उस देश का समय भी बदलता है। यही आज हम भारत में अनुभव कर रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण देता हूं। पहले पासपोर्ट बनवाना कितना बड़ा काम था, ये आप जानते हैं। लंबी वेटिंग, बहुत सारे कॉम्प्लेक्स डॉक्यूमेंटेशन का प्रोसेस, अक्सर राज्यों की राजधानी में ही पासपोर्ट केंद्र होते थे, छोटे शहरों के लोगों को पासपोर्ट बनवाना होता था, तो वो एक-दो दिन कहीं ठहरने का इंतजाम करके चलते थे, अब वो हालात पूरी तरह बदल गया है, एक आंकड़े पर आप ध्यान दीजिए, पहले देश में सिर्फ 77 पासपोर्ट सेवा केंद्र थे, आज इनकी संख्या 550 से ज्यादा हो गई है। पहले पासपोर्ट बनवाने में, और मैं 2013 के पहले की बात कर रहा हूं, मैं पिछले शताब्दी की बात नहीं कर रहा हूं, पासपोर्ट बनवाने में जो वेटिंग टाइम 50 दिन तक होता था, वो अब 5-6 दिन तक सिमट गया है।

साथियों,

ऐसा ही ट्रांसफॉर्मेशन हमने बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी देखा है। हमारे देश में 50-60 साल पहले बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, ये कहकर कि इससे लोगों को बैंकिंग सुविधा सुलभ होगी। इस दावे की सच्चाई हम जानते हैं। हालत ये थी कि लाखों गांवों में बैंकिंग की कोई सुविधा ही नहीं थी। हमने इस स्थिति को भी बदला है। ऑनलाइन बैंकिंग तो हर घर में पहुंचाई है, आज देश के हर 5 किलोमीटर के दायरे में कोई न कोई बैंकिंग टच प्वाइंट जरूर है। और हमने सिर्फ बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का ही दायरा नहीं बढ़ाया, बल्कि बैंकिंग सिस्टम को भी मजबूत किया। आज बैंकों का NPA बहुत कम हो गया है। आज बैंकों का प्रॉफिट, एक लाख 40 हज़ार करोड़ रुपए के नए रिकॉर्ड को पार कर चुका है। और इतना ही नहीं, जिन लोगों ने जनता को लूटा है, उनको भी अब लूटा हुआ धन लौटाना पड़ रहा है। जिस ED को दिन-रात गालियां दी जा रही है, ED ने 22 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक वसूले हैं। ये पैसा, कानूनी तरीके से उन पीड़ितों तक वापिस पहुंचाया जा रहा है, जिनसे ये पैसा लूटा गया था।

साथियों,

Efficiency से गवर्नमेंट Effective होती है। कम समय में ज्यादा काम हो, कम रिसोर्सेज़ में अधिक काम हो, फिजूलखर्ची ना हो, रेड टेप के बजाय रेड कार्पेट पर बल हो, जब कोई सरकार ये करती है, तो समझिए कि वो देश के संसाधनों को रिस्पेक्ट दे रही है। और पिछले 11 साल से ये हमारी सरकार की बड़ी प्राथमिकता रहा है। मैं कुछ उदाहरणों के साथ अपनी बात बताऊंगा।

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साथियों,

अतीत में हमने देखा है कि सरकारें कैसे ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिनिस्ट्रीज में accommodate करने की कोशिश करती थीं। लेकिन हमारी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही कई मंत्रालयों का विलय कर दिया। आप सोचिए, Urban Development अलग मंत्रालय था और Housing and Urban Poverty Alleviation अलग मंत्रालय था, हमने दोनों को मर्ज करके Housing and Urban Affairs मंत्रालय बना दिया। इसी तरह, मिनिस्ट्री ऑफ ओवरसीज़ अफेयर्स अलग था, विदेश मंत्रालय अलग था, हमने इन दोनों को भी एक साथ जोड़ दिया, पहले जल संसाधन, नदी विकास मंत्रालय अलग था, और पेयजल मंत्रालय अलग था, हमने इन्हें भी जोड़कर जलशक्ति मंत्रालय बना दिया। हमने राजनीतिक मजबूरी के बजाय, देश की priorities और देश के resources को आगे रखा।

साथियों,

हमारी सरकार ने रूल्स और रेगुलेशन्स को भी कम किया, उन्हें आसान बनाया। करीब 1500 ऐसे कानून थे, जो समय के साथ अपना महत्व खो चुके थे। उनको हमारी सरकार ने खत्म किया। करीब 40 हज़ार, compliances को हटाया गया। ऐसे कदमों से दो फायदे हुए, एक तो जनता को harassment से मुक्ति मिली, और दूसरा, सरकारी मशीनरी की एनर्जी भी बची। एक और Example GST का है। 30 से ज्यादा टैक्सेज़ को मिलाकर एक टैक्स बना दिया गया है। इसको process के, documentation के हिसाब से देखें तो कितनी बड़ी बचत हुई है।

साथियों,

सरकारी खरीद में पहले कितनी फिजूलखर्ची होती थी, कितना करप्शन होता था, ये मीडिया के आप लोग आए दिन रिपोर्ट करते थे। हमने, GeM यानि गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म बनाया। अब सरकारी डिपार्टमेंट, इस प्लेटफॉर्म पर अपनी जरूरतें बताते हैं, इसी पर वेंडर बोली लगाते हैं और फिर ऑर्डर दिया जाता है। इसके कारण, भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हुई है, और सरकार को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की बचत भी हुई है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर- DBT की जो व्यवस्था भारत ने बनाई है, उसकी तो दुनिया में चर्चा है। DBT की वजह से टैक्स पेयर्स के 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा, गलत हाथों में जाने से बचे हैं। 10 करोड़ से ज्यादा फर्ज़ी लाभार्थी, जिनका जन्म भी नहीं हुआ था, जो सरकारी योजनाओं का फायदा ले रहे थे, ऐसे फर्जी नामों को भी हमने कागजों से हटाया है।

साथियों,

 

हमारी सरकार टैक्स की पाई-पाई का ईमानदारी से उपयोग करती है, और टैक्सपेयर का भी सम्मान करती है, सरकार ने टैक्स सिस्टम को टैक्सपेयर फ्रेंडली बनाया है। आज ITR फाइलिंग का प्रोसेस पहले से कहीं ज्यादा सरल और तेज़ है। पहले सीए की मदद के बिना, ITR फाइल करना मुश्किल होता था। आज आप कुछ ही समय के भीतर खुद ही ऑनलाइन ITR फाइल कर पा रहे हैं। और रिटर्न फाइल करने के कुछ ही दिनों में रिफंड आपके अकाउंट में भी आ जाता है। फेसलेस असेसमेंट स्कीम भी टैक्सपेयर्स को परेशानियों से बचा रही है। गवर्नेंस में efficiency से जुड़े ऐसे अनेक रिफॉर्म्स ने दुनिया को एक नया गवर्नेंस मॉडल दिया है।

साथियों,

पिछले 10-11 साल में भारत हर सेक्टर में बदला है, हर क्षेत्र में आगे बढ़ा है। और एक बड़ा बदलाव सोच का आया है। आज़ादी के बाद के अनेक दशकों तक, भारत में ऐसी सोच को बढ़ावा दिया गया, जिसमें सिर्फ विदेशी को ही बेहतर माना गया। दुकान में भी कुछ खरीदने जाओ, तो दुकानदार के पहले बोल यही होते थे – भाई साहब लीजिए ना, ये तो इंपोर्टेड है ! आज स्थिति बदल गई है। आज लोग सामने से पूछते हैं- भाई, मेड इन इंडिया है या नहीं है?

साथियों,

आज हम भारत की मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस का एक नया रूप देख रहे हैं। अभी 3-4 दिन पहले ही एक न्यूज आई है कि भारत ने अपनी पहली MRI मशीन बना ली है। अब सोचिए, इतने दशकों तक हमारे यहां स्वदेशी MRI मशीन ही नहीं थी। अब मेड इन इंडिया MRI मशीन होगी तो जांच की कीमत भी बहुत कम हो जाएगी।

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साथियों,

आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान ने, देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक नई ऊर्जा दी है। पहले दुनिया भारत को ग्लोबल मार्केट कहती थी, आज वही दुनिया, भारत को एक बड़े Manufacturing Hub के रूप में देख रही है। ये सक्सेस कितनी बड़ी है, इसके उदाहरण आपको हर सेक्टर में मिलेंगे। जैसे हमारी मोबाइल फोन इंडस्ट्री है। 2014-15 में हमारा एक्सपोर्ट, वन बिलियन डॉलर तक भी नहीं था। लेकिन एक दशक में, हम ट्वेंटी बिलियन डॉलर के फिगर से भी आगे निकल चुके हैं। आज भारत ग्लोबल टेलिकॉम और नेटवर्किंग इंडस्ट्री का एक पावर सेंटर बनता जा रहा है। Automotive Sector की Success से भी आप अच्छी तरह परिचित हैं। इससे जुड़े Components के एक्सपोर्ट में भी भारत एक नई पहचान बना रहा है। पहले हम बहुत बड़ी मात्रा में मोटर-साइकल पार्ट्स इंपोर्ट करते थे। लेकिन आज भारत में बने पार्ट्स UAE और जर्मनी जैसे अनेक देशों तक पहुंच रहे हैं। सोलर एनर्जी सेक्टर ने भी सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। हमारे सोलर सेल्स, सोलर मॉड्यूल का इंपोर्ट कम हो रहा है और एक्सपोर्ट्स 23 गुना तक बढ़ गए हैं। बीते एक दशक में हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट भी 21 गुना बढ़ा है। ये सारी अचीवमेंट्स, देश की मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी की ताकत को दिखाती है। ये दिखाती है कि भारत में कैसे हर सेक्टर में नई जॉब्स भी क्रिएट हो रही हैं।

साथियों,

TV9 की इस समिट में, विस्तार से चर्चा होगी, अनेक विषयों पर मंथन होगा। आज हम जो भी सोचेंगे, जिस भी विजन पर आगे बढ़ेंगे, वो हमारे आने वाले कल को, देश के भविष्य को डिजाइन करेगा। पिछली शताब्दी के इसी दशक में, भारत ने एक नई ऊर्जा के साथ आजादी के लिए नई यात्रा शुरू की थी। और हमने 1947 में आजादी हासिल करके भी दिखाई। अब इस दशक में हम विकसित भारत के लक्ष्य के लिए चल रहे हैं। और हमें 2047 तक विकसित भारत का सपना जरूर पूरा करना है। और जैसा मैंने लाल किले से कहा है, इसमें सबका प्रयास आवश्यक है। इस समिट का आयोजन कर, TV9 ने भी अपनी तरफ से एक positive initiative लिया है। एक बार फिर आप सभी को इस समिट की सफलता के लिए मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं हैं।

मैं TV9 को विशेष रूप से बधाई दूंगा, क्योंकि पहले भी मीडिया हाउस समिट करते रहे हैं, लेकिन ज्यादातर एक छोटे से फाइव स्टार होटल के कमरे में, वो समिट होती थी और बोलने वाले भी वही, सुनने वाले भी वही, कमरा भी वही। TV9 ने इस परंपरा को तोड़ा और ये जो मॉडल प्लेस किया है, 2 साल के भीतर-भीतर देख लेना, सभी मीडिया हाउस को यही करना पड़ेगा। यानी TV9 Thinks Today वो बाकियों के लिए रास्ता खोल देगा। मैं इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं, आपकी पूरी टीम को, और सबसे बड़ी खुशी की बात है कि आपने इस इवेंट को एक मीडिया हाउस की भलाई के लिए नहीं, देश की भलाई के लिए आपने उसकी रचना की। 50,000 से ज्यादा नौजवानों के साथ एक मिशन मोड में बातचीत करना, उनको जोड़ना, उनको मिशन के साथ जोड़ना और उसमें से जो बच्चे सिलेक्ट होकर के आए, उनकी आगे की ट्रेनिंग की चिंता करना, ये अपने आप में बहुत अद्भुत काम है। मैं आपको बहुत बधाई देता हूं। जिन नौजवानों से मुझे यहां फोटो निकलवाने का मौका मिला है, मुझे भी खुशी हुई कि देश के होनहार लोगों के साथ, मैं अपनी फोटो निकलवा पाया। मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं दोस्तों कि आपके साथ मेरी फोटो आज निकली है। और मुझे पक्का विश्वास है कि सारी युवा पीढ़ी, जो मुझे दिख रही है, 2047 में जब देश विकसित भारत बनेगा, सबसे ज्यादा बेनिफिशियरी आप लोग हैं, क्योंकि आप उम्र के उस पड़ाव पर होंगे, जब भारत विकसित होगा, आपके लिए मौज ही मौज है। आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद।