1. डेनमार्क की प्रधानमंत्री सुश्री मैट फ्रेडरिक्सन और भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 28 सितंबर 2020 को भारत और डेनमार्क के बीच हुए एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की।

2. प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री फ्रेडरिक्सन के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर उत्साहपूर्ण और मैत्रीपूर्ण वातावरण में विचारों का आदान-प्रदान किया गया। वार्तालाप के दौरान, दोनों देशों के बीच स्थायी अर्थव्यवस्थाओं और समाजों में प्रगति के लिए समान हितों पर सहमति के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन, हरित परिवर्तन सहित कोविड-19 महामारी से निपटने जैसे वैश्विक मामलों पर विचार-विमर्श किया गया।

3. दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक संबंधों, समान लोकतांत्रिक परंपराओं और क्षेत्रीय साझा इच्छा के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय शांति और स्थिरता के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों की निरंतर प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

4. विश्वसनीय सहभागी बने रहने की साझा अभिलाषा प्रकट करते हुए, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने भारत-डेनमार्क संबंधों को हरित रणनीतिक साझेदारी के रूप में आगे बढ़ाने पर अपनी सहमति जताई। यह साझेदारी भारत और डेनमार्क के बीच एक संयुक्त सहयोग आयोग को स्थापित करने के मौजूदा समझौते (6 फरवरी 2009 को हस्ताक्षरित) के आधार पर इसे और दृढ़ बनाएगी। इसके अंतर्गत, राजनीतिक, आर्थिक और वाणिज्यिक, विज्ञान और तकनीक, पर्यावरण, ऊर्जा, शिक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों सहयोग का उल्लेख किया गया था। इसके अतिरिक्त, यह नवीकरणीय ऊर्जा, शहरी विकास, पर्यावरण, कृषि और पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार, नौवहन, श्रम गतिशीलता और डिजिटाइजेशन पर मौजूदा संयुक्त कार्य समूहों को सशक्त बनाते हुए इन्हें पुष्ट बनाती है।

5. हरित रणनीतिक साझेदारी पेरिस समझौते और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के एक महत्वाकांक्षी कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ राजनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने, आर्थिक संबंधों और हरित विकास का विस्तार करने, रोजगार सृजन और वैश्विक चुनौतियों एवं अवसरों के समाधान में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक पारस्परिक रूप से लाभप्रद समझौता है।

6. दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने हरित रणनीतिक साझेदारी की स्थापना के महत्व को स्वीकार किया, जिसके तहत भारत और डेनमार्क संबंधित मंत्रालयों, संस्थानों और हितधारकों के माध्यम से सहयोग करेंगे।

ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन

7. दोनों प्रधानमंत्रियों ने हरित ऊर्जा परिवर्तन और जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक चुनौतियों का समाधान तलाशने में घनिष्ठ सहयोग की पुष्टि की। अपतटीय पवन और नवीकरणीय ऊर्जा पर रणनीतिक क्षेत्रीय सहयोग के साथ-साथ पवन ऊर्जा पर क्षमता निर्माण, ज्ञान-साझेदारी और प्रौद्योगिकी स्थानांतरण पर भारत-डेनमार्क ऊर्जा सहभागिता (आईएनडीईपी); एवं ऊर्जा मॉडलिंग और नवीकरणीय ऊर्जा के समेकन जैसे क्षेत्रों में वैश्विक ऊर्जा पारगमन, हरित विकास और सतत विकास की दिशा में कुछ समान वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए साझा प्रतिबद्धता जताई। दोनों पक्षों ने आने वाले वर्षों में ऊर्जा साझेदारी को और मजबूत बनाने की भी पुष्टि की।

8. भारत और डेनमार्क जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में अग्रणी रहने के लिए सहमत हैं। दोनों देशों ने जलवायु और ऊर्जा पर अत्यंत महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किए हैं जो पेरिस समझौते के महत्वाकांक्षी कार्यान्वयन में योगदान करेंगे। दोनों देश संयुक्त रूप से विश्व के समक्ष यह उदाहरण प्रस्तुत करेंगे कि महत्वाकांक्षी जलवायु और सतत ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करना संभव है।

9. दोनों देशों ने विभिन्न स्तरों पर जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा पर नियमित रूप से विचार-विमर्श और वार्तालाप करने पर भी सहमति व्यक्त की।

पर्यावरण/जल और चक्रीय अर्थव्यवस्था

10. दोनों प्रधानमंत्रियों ने पर्यावरण/जल और चक्रीय अर्थव्यवस्था पर दोनों देशों की सरकारों के बीच सहयोग का भविष्य में और विस्तार करने और इन्हें मजबूत बनाने की दिशा में कार्य करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने जल क्षमता और गैर-राजस्व जल (जल की हानि) में सहयोग के संदर्भ में, भारतीय जल शक्ति मंत्रालय और डेनमार्क पर्यावरण संरक्षण एजेंसी एवं डेनमार्क पर्यावरण और खाद्य मंत्रालय के बीच तीन वर्ष की (2021-23) अवधि के लिए ने एक प्रारंभिक कार्य योजना तैयार करने पर सहमति व्यक्त की।

11. दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-डेनमार्क जल प्रौद्योगिकी गठबंधन के माध्यम से जलापूर्ति, जल वितरण, अपशिष्ट जल प्रबंधन, सीवरेज सिस्टम, उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग, जल प्रबंधन ऊर्जा अनुकूलन जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संयुक्त इच्छा व्यक्त की।

स्मार्ट शहरों सहित सतत शहरी विकास

12. दोनों पक्षों ने 26 जून, 2020 को सतत शहरी विकास पर भारत-डेनमार्क के दूसरे संयुक्त कार्यकारी समूह की वर्चअल बैठक का उल्लेख करते हुए गोवा में शहरी लिविंग लैब के माध्यम से स्मार्ट शहरों सहित सतत शहरी विकास में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की।

13. दोनों पक्षों ने उदयपुर और आरहूस, तुमकुरु और अलबोर्ग के बीच मौजूदा नगर-से-नगर सहयोग को पुष्ट बनाने पर सहमति जताई।

14. उन्होंने इस पक्ष पर भी ध्यान केन्द्रित किया कि डेनमार्क की कंपनियां भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तैयार करने में योगदान दे रही हैं। सतत शहरी विकास के सभी क्षेत्रों में डेनमार्क की अधिक भागीदारी के लिए उनका स्वागत भी किया गया।

व्यापार, कारोबार और नौवहन

15. दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों की सरकारों, संस्थानों और व्यवसायों के बीच हरित और जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियों पर विशेष ध्यान देने के साथ साझेदारी विकसित करने के विचार का स्वागत किया। उन्होंने हरित ऊर्जा में सार्वजनिक और निजी निवेशों का समर्थन करने के लिए नियामक ढांचे के महत्व पर बल दिया।

16. दोनों नेताओं ने समुद्री मामलों पर घनिष्ठ सहयोग की सराहना करते हुए पोत निर्माण और डिजाइन, समुद्री सेवाओं और हरित नौवहन में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ बंदरगाह विकास क्षमता का भी उल्लेख किया।

17. दोनों प्रधानमंत्रियों ने रेखांकित किया कि वे एसएमई के लिए व्यापार प्रतिनिधिमंडलों, बाजार पहुंच गतिविधियों को प्रोत्साहित करेंगे और व्यापार में आसानी के लिए सुविधाओं का विस्तार करेंगे।

18. भारत और डेनमार्क ने बौद्धिक संपदा अधिकारों में उभरते सहयोग की पुष्टि की जिसके माध्यम से नवाचार, रचनात्मकता और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने के लिए अपनी राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा प्रणालियों को आधुनिक और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और डिजिटलीकरण

19. भारत और डेनमार्क ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) में निवेश को बढ़ावा देने और सुविधा प्रदान करने के महत्व पर भी बल दिया जो एक मजबूत प्रौद्योगिकी विकास और नवीन समाधानों के कार्यान्वयन में शीघ्रता लाने का एक महत्वपूर्ण साधन है। एसटीआई में सहयोग, भारत और डेनमार्क में अधिकारियों, छोटी और बड़ी कंपनियों, अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने एवं उन्हें मजबूत बनाने के माध्यम से हरित रणनीतिक साझेदारी का समर्थन करता है। दोनों पक्षों ने ऊर्जा, जल, जैव-संसाधन और आईसीटी जैसे क्षेत्रों में परियोजनाओं के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने के साथ-साथ मौजूदा मजबूत द्विपक्षीय एसटीआई साझेदारी बनाने पर भी सहमत जताई।

20. दोनों नेताओं ने हरित परिवर्तन में डिजिटलीकरण और डिजिटल समाधान एवं व्यापार मॉडल में अपनी साझा रुचि की पहचान करते हुए हरित स्थायी विकास का समर्थन करने हेतू डिजिटल प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में विकास, नवाचार और निष्पादन को बढ़ाने के लिए सहयोग करने का फैसला किया।

खाद्य और कृषि

21. कृषि क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाओं को देखते हुए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने खाद्य प्रसंस्करण और खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में अधिकारियों, व्यवसायों और अनुसंधान संस्थानों के बीच घनिष्ठ और निकट सहयोग को प्रोत्साहन दिया।

स्वास्थ्य और जीवन विज्ञान

22. दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में संवाद और सहयोग को और मजबूत करने की समान इच्छा पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से कोविड-19 और भविष्य में महामारियों से निपटने के लिए, महामारी और टीके सहित स्वास्थ्य नीति के मुद्दों पर वार्तालाप को बढ़ाने और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। दोनों पक्षों ने अनुसंधान सहयोग सहित जीवन विज्ञान क्षेत्र के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करते हुए कारोबार के लिए व्यावसायिक अवसरों के विस्तार की दिशा में कार्य करने पर सहमति जताई।

सांस्कृतिक सहयोग, लोगों से लोगों के बीच संपर्क और श्रम गतिशीलता

23. दोनों प्रधानमंत्रियों ने स्वीकार किया कि भारत और डेनमार्क के बीच समृद्ध संबंध लंबे समय से जारी लोगों से लोगों के बीच संपर्क का परिणाम है। उन्होंने सांस्कृतिक सहयोग के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच अधिक जागरूकता और आपसी समझ को और बढ़ावा देने पर भी सहमति व्यक्त की।

24. दोनों पक्षों ने श्रम गतिशीलता की संभावनाओं का मूल्याँकन करने के साथ ही साथ लोगों से लोगों के बीच व्यापक स्तर पर संवाद और पर्यटन क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के बीच यात्रा में अधिक सुलभता लाने पर सहमति जताई।

बहुपक्षीय सहयोग

25. दोनों प्रधानमंत्रियों ने नियम-आधारित बहुपक्षीय प्रणाली के समर्थन और प्रोत्साहन के प्रयासों और पहलों में शामिल होने पर सहमति व्यक्त की। इसमें ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला करने के वैश्विक प्रयासों को आगे बढ़ाने की तात्कालिकता और अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के लिए समान प्रतिबद्धता के प्रति मजबूत बहुपक्षीय सहयोग शामिल है।

26. दोनों पक्षों ने वैश्विक विकास और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए विश्व व्यापार संगठन के अंतर्गत एक खुली, समावेशी और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को प्रोत्साहन देने में सहयोग की आवश्यकता का समर्थन किया।

27. दोनों पक्षों ने विश्व व्यापार संगठन में सुधार के लिए जारी चर्चाओं के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हुए विश्व व्यापार संगठन के व्यापक सुधारों में सहयोग को मजबूत करने और योगदान देने में अपने दृढ़ संकल्प की पुष्टि की। दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि सुधारों को समावेशी बनाने और पारदर्शी तरीके से किए जाने की आवश्यकता है और विश्व व्यापार संगठन की दो-स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली के अंग के रूप में एक पूर्ण अधिकार प्राप्त अपीलीय निकाय की बहाली को उच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

28. दोनों पक्षों ने यूरोपीय संघ-भारत संबंधों को और मजबूत बनाने और घनिष्ठ करने के लिए यूरोपीय संघ और भारत के बीच एक महत्वाकांक्षी, निष्पक्ष, और पारस्परिक रूप से लाभप्रद व्यापार और निवेश समझौते की दिशा में कार्य करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

29. दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि आर्कटिक परिषद के ढांचे के भीतर आर्कटिक सहयोग एक वैश्विक आयाम ऱखता है और यह पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में अहम है। इस दिशा में, दोनों पक्षों ने जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में आर्कटिक परिषद के ढांचे के भीतर सहयोग की अपनी इच्छा व्यक्त की।

30. दोनों नेताओं ने मानव अधिकारों, लोकतंत्र और कानून के शासन के साझा मूल्यों को स्वीकार करते हुए लोकतंत्र और मानवाधिकारों को प्रोत्साहन देने के लिए बहुपक्षीय मंचों में सहयोग करने पर अपनी सहमति जताई।

निष्कर्ष

31. दोनों नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि डेनमार्क और भारत के बीच हरित रणनीतिक साझेदारी को स्थापित करने के एक निर्णय ने दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

32. इन क्षेत्रों के भीतर महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और कार्यों की पहचान की जाएगी और एक कार्य योजना को तैयार करते हुए शीघ्रता से इसके कार्यान्वयन को पूर्ण समर्थन दिया जाएगा।

 

 

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Text of PM’s address at the Odisha Parba
November 24, 2024
Delighted to take part in the Odisha Parba in Delhi, the state plays a pivotal role in India's growth and is blessed with cultural heritage admired across the country and the world: PM
The culture of Odisha has greatly strengthened the spirit of 'Ek Bharat Shreshtha Bharat', in which the sons and daughters of the state have made huge contributions: PM
We can see many examples of the contribution of Oriya literature to the cultural prosperity of India: PM
Odisha's cultural richness, architecture and science have always been special, We have to constantly take innovative steps to take every identity of this place to the world: PM
We are working fast in every sector for the development of Odisha,it has immense possibilities of port based industrial development: PM
Odisha is India's mining and metal powerhouse making it’s position very strong in the steel, aluminium and energy sectors: PM
Our government is committed to promote ease of doing business in Odisha: PM
Today Odisha has its own vision and roadmap, now investment will be encouraged and new employment opportunities will be created: PM

जय जगन्नाथ!

जय जगन्नाथ!

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्रीमान धर्मेन्द्र प्रधान जी, अश्विनी वैष्णव जी, उड़िया समाज संस्था के अध्यक्ष श्री सिद्धार्थ प्रधान जी, उड़िया समाज के अन्य अधिकारी, ओडिशा के सभी कलाकार, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों।

ओडिशा र सबू भाईओ भउणी मानंकु मोर नमस्कार, एबंग जुहार। ओड़िया संस्कृति के महाकुंभ ‘ओड़िशा पर्व 2024’ कू आसी मँ गर्बित। आपण मानंकु भेटी मूं बहुत आनंदित।

मैं आप सबको और ओडिशा के सभी लोगों को ओडिशा पर्व की बहुत-बहुत बधाई देता हूँ। इस साल स्वभाव कवि गंगाधर मेहेर की पुण्यतिथि का शताब्दी वर्ष भी है। मैं इस अवसर पर उनका पुण्य स्मरण करता हूं, उन्हें श्रद्धांजलि देता हूँ। मैं भक्त दासिआ बाउरी जी, भक्त सालबेग जी, उड़िया भागवत की रचना करने वाले श्री जगन्नाथ दास जी को भी आदरपूर्वक नमन करता हूं।

ओडिशा निजर सांस्कृतिक विविधता द्वारा भारतकु जीबन्त रखिबारे बहुत बड़ भूमिका प्रतिपादन करिछि।

साथियों,

ओडिशा हमेशा से संतों और विद्वानों की धरती रही है। सरल महाभारत, उड़िया भागवत...हमारे धर्मग्रन्थों को जिस तरह यहाँ के विद्वानों ने लोकभाषा में घर-घर पहुंचाया, जिस तरह ऋषियों के विचारों से जन-जन को जोड़ा....उसने भारत की सांस्कृतिक समृद्धि में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। उड़िया भाषा में महाप्रभु जगन्नाथ जी से जुड़ा कितना बड़ा साहित्य है। मुझे भी उनकी एक गाथा हमेशा याद रहती है। महाप्रभु अपने श्री मंदिर से बाहर आए थे और उन्होंने स्वयं युद्ध का नेतृत्व किया था। तब युद्धभूमि की ओर जाते समय महाप्रभु श्री जगन्नाथ ने अपनी भक्त ‘माणिका गौउडुणी’ के हाथों से दही खाई थी। ये गाथा हमें बहुत कुछ सिखाती है। ये हमें सिखाती है कि हम नेक नीयत से काम करें, तो उस काम का नेतृत्व खुद ईश्वर करते हैं। हमेशा, हर समय, हर हालात में ये सोचने की जरूरत नहीं है कि हम अकेले हैं, हम हमेशा ‘प्लस वन’ होते हैं, प्रभु हमारे साथ होते हैं, ईश्वर हमेशा हमारे साथ होते हैं।

साथियों,

ओडिशा के संत कवि भीम भोई ने कहा था- मो जीवन पछे नर्के पडिथाउ जगत उद्धार हेउ। भाव ये कि मुझे चाहे जितने ही दुख क्यों ना उठाने पड़ें...लेकिन जगत का उद्धार हो। यही ओडिशा की संस्कृति भी है। ओडिशा सबु जुगरे समग्र राष्ट्र एबं पूरा मानब समाज र सेबा करिछी। यहाँ पुरी धाम ने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत बनाया। ओडिशा की वीर संतानों ने आज़ादी की लड़ाई में भी बढ़-चढ़कर देश को दिशा दिखाई थी। पाइका क्रांति के शहीदों का ऋण, हम कभी नहीं चुका सकते। ये मेरी सरकार का सौभाग्य है कि उसे पाइका क्रांति पर स्मारक डाक टिकट और सिक्का जारी करने का अवसर मिला था।

साथियों,

उत्कल केशरी हरे कृष्ण मेहताब जी के योगदान को भी इस समय पूरा देश याद कर रहा है। हम व्यापक स्तर पर उनकी 125वीं जयंती मना रहे हैं। अतीत से लेकर आज तक, ओडिशा ने देश को कितना सक्षम नेतृत्व दिया है, ये भी हमारे सामने है। आज ओडिशा की बेटी...आदिवासी समुदाय की द्रौपदी मुर्मू जी भारत की राष्ट्रपति हैं। ये हम सभी के लिए बहुत ही गर्व की बात है। उनकी प्रेरणा से आज भारत में आदिवासी कल्याण की हजारों करोड़ रुपए की योजनाएं शुरू हुई हैं, और ये योजनाएं सिर्फ ओडिशा के ही नहीं बल्कि पूरे भारत के आदिवासी समाज का हित कर रही हैं।

साथियों,

ओडिशा, माता सुभद्रा के रूप में नारीशक्ति और उसके सामर्थ्य की धरती है। ओडिशा तभी आगे बढ़ेगा, जब ओडिशा की महिलाएं आगे बढ़ेंगी। इसीलिए, कुछ ही दिन पहले मैंने ओडिशा की अपनी माताओं-बहनों के लिए सुभद्रा योजना का शुभारंभ किया था। इसका बहुत बड़ा लाभ ओडिशा की महिलाओं को मिलेगा। उत्कलर एही महान सुपुत्र मानंकर बिसयरे देश जाणू, एबं सेमानंक जीबन रु प्रेरणा नेउ, एथी निमन्ते एपरी आयौजनर बहुत अधिक गुरुत्व रहिछि ।

साथियों,

इसी उत्कल ने भारत के समुद्री सामर्थ्य को नया विस्तार दिया था। कल ही ओडिशा में बाली जात्रा का समापन हुआ है। इस बार भी 15 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा के दिन से कटक में महानदी के तट पर इसका भव्य आयोजन हो रहा था। बाली जात्रा प्रतीक है कि भारत का, ओडिशा का सामुद्रिक सामर्थ्य क्या था। सैकड़ों वर्ष पहले जब आज जैसी टेक्नोलॉजी नहीं थी, तब भी यहां के नाविकों ने समुद्र को पार करने का साहस दिखाया। हमारे यहां के व्यापारी जहाजों से इंडोनेशिया के बाली, सुमात्रा, जावा जैसे स्थानो की यात्राएं करते थे। इन यात्राओं के माध्यम से व्यापार भी हुआ और संस्कृति भी एक जगह से दूसरी जगह पहुंची। आजी विकसित भारतर संकल्पर सिद्धि निमन्ते ओडिशार सामुद्रिक शक्तिर महत्वपूर्ण भूमिका अछि।

साथियों,

ओडिशा को नई ऊंचाई तक ले जाने के लिए 10 साल से चल रहे अनवरत प्रयास....आज ओडिशा के लिए नए भविष्य की उम्मीद बन रहे हैं। 2024 में ओडिशावासियों के अभूतपूर्व आशीर्वाद ने इस उम्मीद को नया हौसला दिया है। हमने बड़े सपने देखे हैं, बड़े लक्ष्य तय किए हैं। 2036 में ओडिशा, राज्य-स्थापना का शताब्दी वर्ष मनाएगा। हमारा प्रयास है कि ओडिशा की गिनती देश के सशक्त, समृद्ध और तेजी से आगे बढ़ने वाले राज्यों में हो।

साथियों,

एक समय था, जब भारत के पूर्वी हिस्से को...ओडिशा जैसे राज्यों को पिछड़ा कहा जाता था। लेकिन मैं भारत के पूर्वी हिस्से को देश के विकास का ग्रोथ इंजन मानता हूं। इसलिए हमने पूर्वी भारत के विकास को अपनी प्राथमिकता बनाया है। आज पूरे पूर्वी भारत में कनेक्टिविटी के काम हों, स्वास्थ्य के काम हों, शिक्षा के काम हों, सभी में तेजी लाई गई है। 10 साल पहले ओडिशा को केंद्र सरकार जितना बजट देती थी, आज ओडिशा को तीन गुना ज्यादा बजट मिल रहा है। इस साल ओडिशा के विकास के लिए पिछले साल की तुलना में 30 प्रतिशत ज्यादा बजट दिया गया है। हम ओडिशा के विकास के लिए हर सेक्टर में तेजी से काम कर रहे हैं।

साथियों,

ओडिशा में पोर्ट आधारित औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। इसलिए धामरा, गोपालपुर, अस्तारंगा, पलुर, और सुवर्णरेखा पोर्ट्स का विकास करके यहां व्यापार को बढ़ावा दिया जाएगा। ओडिशा भारत का mining और metal powerhouse भी है। इससे स्टील, एल्युमिनियम और एनर्जी सेक्टर में ओडिशा की स्थिति काफी मजबूत हो जाती है। इन सेक्टरों पर फोकस करके ओडिशा में समृद्धि के नए दरवाजे खोले जा सकते हैं।

साथियों,

ओडिशा की धरती पर काजू, जूट, कपास, हल्दी और तिलहन की पैदावार बहुतायत में होती है। हमारा प्रयास है कि इन उत्पादों की पहुंच बड़े बाजारों तक हो और उसका फायदा हमारे किसान भाई-बहनों को मिले। ओडिशा की सी-फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में भी विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। हमारा प्रयास है कि ओडिशा सी-फूड एक ऐसा ब्रांड बने, जिसकी मांग ग्लोबल मार्केट में हो।

साथियों,

हमारा प्रयास है कि ओडिशा निवेश करने वालों की पसंदीदा जगहों में से एक हो। हमारी सरकार ओडिशा में इज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्कर्ष उत्कल के माध्यम से निवेश को बढ़ाया जा रहा है। ओडिशा में नई सरकार बनते ही, पहले 100 दिनों के भीतर-भीतर, 45 हजार करोड़ रुपए के निवेश को मंजूरी मिली है। आज ओडिशा के पास अपना विज़न भी है, और रोडमैप भी है। अब यहाँ निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा, और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। मैं इन प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री श्रीमान मोहन चरण मांझी जी और उनकी टीम को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

ओडिशा के सामर्थ्य का सही दिशा में उपयोग करके उसे विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा सकता है। मैं मानता हूं, ओडिशा को उसकी strategic location का बहुत बड़ा फायदा मिल सकता है। यहां से घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचना आसान है। पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए ओडिशा व्यापार का एक महत्वपूर्ण हब है। Global value chains में ओडिशा की अहमियत आने वाले समय में और बढ़ेगी। हमारी सरकार राज्य से export बढ़ाने के लक्ष्य पर भी काम कर रही है।

साथियों,

ओडिशा में urbanization को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएं हैं। हमारी सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है। हम ज्यादा संख्या में dynamic और well-connected cities के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम ओडिशा के टियर टू शहरों में भी नई संभावनाएं बनाने का भरपूर हम प्रयास कर रहे हैं। खासतौर पर पश्चिम ओडिशा के इलाकों में जो जिले हैं, वहाँ नए इंफ्रास्ट्रक्चर से नए अवसर पैदा होंगे।

साथियों,

हायर एजुकेशन के क्षेत्र में ओडिशा देशभर के छात्रों के लिए एक नई उम्मीद की तरह है। यहां कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय इंस्टीट्यूट हैं, जो राज्य को एजुकेशन सेक्टर में लीड लेने के लिए प्रेरित करते हैं। इन कोशिशों से राज्य में स्टार्टअप्स इकोसिस्टम को भी बढ़ावा मिल रहा है।

साथियों,

ओडिशा अपनी सांस्कृतिक समृद्धि के कारण हमेशा से ख़ास रहा है। ओडिशा की विधाएँ हर किसी को सम्मोहित करती है, हर किसी को प्रेरित करती हैं। यहाँ का ओड़िशी नृत्य हो...ओडिशा की पेंटिंग्स हों...यहाँ जितनी जीवंतता पट्टचित्रों में देखने को मिलती है...उतनी ही बेमिसाल हमारे आदिवासी कला की प्रतीक सौरा चित्रकारी भी होती है। संबलपुरी, बोमकाई और कोटपाद बुनकरों की कारीगरी भी हमें ओडिशा में देखने को मिलती है। हम इस कला और कारीगरी का जितना प्रसार करेंगे, उतना ही इस कला को संरक्षित करने वाले उड़िया लोगों को सम्मान मिलेगा।

साथियों,

हमारे ओडिशा के पास वास्तु और विज्ञान की भी इतनी बड़ी धरोहर है। कोणार्क का सूर्य मंदिर… इसकी विशालता, इसका विज्ञान...लिंगराज और मुक्तेश्वर जैसे पुरातन मंदिरों का वास्तु.....ये हर किसी को आश्चर्यचकित करता है। आज लोग जब इन्हें देखते हैं...तो सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि सैकड़ों साल पहले भी ओडिशा के लोग विज्ञान में इतने आगे थे।

साथियों,

ओडिशा, पर्यटन की दृष्टि से अपार संभावनाओं की धरती है। हमें इन संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए कई आयामों में काम करना है। आप देख रहे हैं, आज ओडिशा के साथ-साथ देश में भी ऐसी सरकार है जो ओडिशा की धरोहरों का, उसकी पहचान का सम्मान करती है। आपने देखा होगा, पिछले साल हमारे यहाँ G-20 का सम्मेलन हुआ था। हमने G-20 के दौरान इतने सारे देशों के राष्ट्राध्यक्षों और राजनयिकों के सामने...सूर्यमंदिर की ही भव्य तस्वीर को प्रस्तुत किया था। मुझे खुशी है कि महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर परिसर के सभी चार द्वार खुल चुके हैं। मंदिर का रत्न भंडार भी खोल दिया गया है।

साथियों,

हमें ओडिशा की हर पहचान को दुनिया को बताने के लिए भी और भी इनोवेटिव कदम उठाने हैं। जैसे....हम बाली जात्रा को और पॉपुलर बनाने के लिए बाली जात्रा दिवस घोषित कर सकते हैं, उसका अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रचार कर सकते हैं। हम ओडिशी नृत्य जैसी कलाओं के लिए ओडिशी दिवस मनाने की शुरुआत कर सकते हैं। विभिन्न आदिवासी धरोहरों को सेलिब्रेट करने के लिए भी नई परम्पराएँ शुरू की जा सकती हैं। इसके लिए स्कूल और कॉलेजों में विशेष आयोजन किए जा सकते हैं। इससे लोगों में जागरूकता आएगी, यहाँ पर्यटन और लघु उद्योगों से जुड़े अवसर बढ़ेंगे। कुछ ही दिनों बाद प्रवासी भारतीय सम्मेलन भी, विश्व भर के लोग इस बार ओडिशा में, भुवनेश्वर में आने वाले हैं। प्रवासी भारतीय दिवस पहली बार ओडिशा में हो रहा है। ये सम्मेलन भी ओडिशा के लिए बहुत बड़ा अवसर बनने वाला है।

साथियों,

कई जगह देखा गया है बदलते समय के साथ, लोग अपनी मातृभाषा और संस्कृति को भी भूल जाते हैं। लेकिन मैंने देखा है...उड़िया समाज, चाहे जहां भी रहे, अपनी संस्कृति, अपनी भाषा...अपने पर्व-त्योहारों को लेकर हमेशा से बहुत उत्साहित रहा है। मातृभाषा और संस्कृति की शक्ति कैसे हमें अपनी जमीन से जोड़े रखती है...ये मैंने कुछ दिन पहले ही दक्षिण अमेरिका के देश गयाना में भी देखा। करीब दो सौ साल पहले भारत से सैकड़ों मजदूर गए...लेकिन वो अपने साथ रामचरित मानस ले गए...राम का नाम ले गए...इससे आज भी उनका नाता भारत भूमि से जुड़ा हुआ है। अपनी विरासत को इसी तरह सहेज कर रखते हुए जब विकास होता है...तो उसका लाभ हर किसी तक पहुंचता है। इसी तरह हम ओडिशा को भी नई ऊचाई पर पहुंचा सकते हैं।

साथियों,

आज के आधुनिक युग में हमें आधुनिक बदलावों को आत्मसात भी करना है, और अपनी जड़ों को भी मजबूत बनाना है। ओडिशा पर्व जैसे आयोजन इसका एक माध्यम बन सकते हैं। मैं चाहूँगा, आने वाले वर्षों में इस आयोजन का और ज्यादा विस्तार हो, ये पर्व केवल दिल्ली तक सीमित न रहे। ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ें, स्कूल कॉलेजों का participation भी बढ़े, हमें इसके लिए प्रयास करने चाहिए। दिल्ली में बाकी राज्यों के लोग भी यहाँ आयें, ओडिशा को और करीबी से जानें, ये भी जरूरी है। मुझे भरोसा है, आने वाले समय में इस पर्व के रंग ओडिशा और देश के कोने-कोने तक पहुंचेंगे, ये जनभागीदारी का एक बहुत बड़ा प्रभावी मंच बनेगा। इसी भावना के साथ, मैं एक बार फिर आप सभी को बधाई देता हूं।

आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय जगन्नाथ!