गौमाता के रक्षक भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन अर्थात जन्माष्टमी

गौमाता के कत्ल को प्रोत्साहन देनेवाली केन्द्र सरकार की गुलाबी क्रांति की नीति का विरोध करने का समय आ गया है

प्रिय मित्रों,

जन्माष्टमी के अवसर पर मैं आपके परिवार और खास तौर पर बालकों को मेरी शुभकामनाएं देता हूं। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन अर्थात जन्माष्टमी..मतलब भक्ति और भाव योग की विभावना का पुन: स्मरण करने का दिन। देश के विभिन्न भागों के साथ ही दुनियाभर में जन्माष्टमी का उत्सव अलग- अलग रूप से मनाया जाता है। जन्माष्टमी का नाम पड़ते ही मस्तिष्क में सबसे पहले दही हांडी का चित्र उभर आता है, जब मक्खन से भरी मटकी तोड़ने के लिए युवा उमड़ पड़ते हैं। माखनचोर श्रीकृष्ण को हमेशा गाय के सखा और रखवाले के रूप में याद किया जाता है।

भगवान श्रीकृष्ण को दुष्टों के संहारक के तौर पर भी जाना जाता है। उन्होंने कंस के दुष्ट षडयंत्रों से बचकर फिर उसका संहार किया था। महाभारत में वृन्दावन में गाय के साथ खड़े युवा कृष्ण का चित्रण हमें सदैव दिव्य लगता है। महाभारत के युद्ध के समय उन्होंने भगवद् गीता के स्वरूप में हमें जीवन सन्देश दिया। निष्काम कर्मयोग के बोध द्वारा उन्होंने हमें निस्वार्थ सेवा की सीख देकर जीवन जीने की पद्धति सिखाई। भगवान श्रीकृष्ण ने गुजरात की इस पावन भूमि को अपनी कर्मभूमि बनाया यह हमारे लिए गर्व की बात है। द्वारका उनकी राजधानी थी और वह द्वारकाधीश अर्थात् द्वारका के नाथ के रूप में जाने जाते हैं।

हमारे जीवन के हर पहलु में हम भगवान श्रीकृष्ण की मौजूदगी महसूस कर सकते हैं। हम सिर्फ श्रीकृष्ण ही नहीं बल्कि उनके साथ जुड़ी तमाम चीजों को आदर देते हैं। गाय को माता के रूप में पूजने के अनेक कारणों में से महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि भगवान श्रीकृष्ण का नाता गायों के साथ रहा था। गुजरात देश का एकमात्र राज्य है जहां गौवंश की रक्षा के लिए गाय के कत्ल पर प्रतिबन्ध लगाने वाला कानून बनाया गया है। हमने गायों के कत्ल पर प्रतिबन्ध लगाया है सिर्फ इतना ही नहीं, उनको बेहतर उपचार मिल सके इसकी भी ठोस व्यवस्था की है। गाय की महिमा को जानकर ही हमने गायों के लिए खास मोतियाबिन्द के ऑपरेशन करवाने की व्यवस्था की है।

मित्रों, हमारे प्राचीन मूल्यों ने हमें हमारी माता को त्याग देना नहीं सिखाया। वर्तमान की कांग्रेस शासित युपीए सरकार गायों के कत्ल और गौमांस के निर्यात को प्रोत्साहन देकर गुलाबी क्रांति लाना चाहती है। इस बात से मैं बहुत व्यथित हूं। बालक मां के गर्भ में हो तब से लेकर वह इस धरतीमाता को छोड़कर जाए तब तक जीवनभर गौमाता मनुष्यों को पोषण उपलब्ध करवाती है। ऐसी गौमाता का कत्ल करना हमारी प्राचीन संस्कृति और मूल्यों के खिलाफ है। दुर्भाग्य से कांग्रेस शासित युपीए सरकार हमारे इन प्राचीन मूल्यों की निरंतर घोर उपेक्षा कर रही है। केन्द्र सरकार भारत को दुनिया का सबसे बड़ा गौमांस निर्यातक देश बनाना चाहती है। महात्मा गांधी और आचार्य विनोबा भावे ने गौमाता के संरक्षण के लिए अथक प्रयास किए थे, मगर वर्तमान की इस केन्द्र सरकार ने इन महापुरुषों की सीख को दरकिनार कर दिया हैं। कांग्रेस शासित युपीए सरकार के गौमाता की हत्या को प्रोत्साहन देनेवाले इन प्रयासों से क्या हमें गर्व होगा ?

मित्रों, आज के दिन, मेरा आप से अनुरोध है की आप विचार कीजिये कि क्या हमें, और खास तौर पर प्रोटीन की कमी से पीड़ित बालकों को दूध और दूध से बनी वस्तुएं प्रदान करने वाले गौवंश का कत्ल जारी रहने दिया जाना चाहिए ? देश के भविष्य बालकों को पीने के लिए पर्याप्त दूध मिल नहीं पाता ऐसे में केन्द्र सरकार हमें जीवन का आधार प्रदान करने वाली गायों की हत्या करना चाहती है। मुझे विश्वास है की इस विवेकहीन कृत्य को रोकने के लिए आप यथासम्भव योगदान देंगे।

फिर से एक बार मैं आप को इस शुभ दिवस की बधाई देता हूं और भगवान श्रीकृष्ण के साथ जुड़े गुजरात के द्वारका, डाकोर और शामळाजी जैसे स्थलों पर आने का आमंत्रण देता हूं।

आपका

नरेन्द्र मोदी

Gujarat: Leading Cattle Development, Ushering in the White Revolution

Watch : Khushboo Gujarat Ki Dwarka

Watch : Breathe in a bit of Gujarat -- Somnath 

Explore More
140 करोड़ देशवासियों का भाग्‍य बदलने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

140 करोड़ देशवासियों का भाग्‍य बदलने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे: स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी
India's Economic Growth Activity at 8-Month High in October, Festive Season Key Indicator

Media Coverage

India's Economic Growth Activity at 8-Month High in October, Festive Season Key Indicator
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
भारत के रतन का जाना...
November 09, 2024

आज श्री रतन टाटा जी के निधन को एक महीना हो रहा है। पिछले महीने आज के ही दिन जब मुझे उनके गुजरने की खबर मिली, तो मैं उस समय आसियान समिट के लिए निकलने की तैयारी में था। रतन टाटा जी के हमसे दूर चले जाने की वेदना अब भी मन में है। इस पीड़ा को भुला पाना आसान नहीं है। रतन टाटा जी के तौर पर भारत ने अपने एक महान सपूत को खो दिया है...एक अमूल्य रत्न को खो दिया है।

आज भी शहरों, कस्बों से लेकर गांवों तक, लोग उनकी कमी को गहराई से महसूस कर रहे हैं। हम सबका ये दुख साझा है। चाहे कोई उद्योगपति हो, उभरता हुआ उद्यमी हो या कोई प्रोफेशनल हो, हर किसी को उनके निधन से दुख हुआ है। पर्यावरण रक्षा से जुड़े लोग...समाज सेवा से जुड़े लोग भी उनके निधन से उतने ही दुखी हैं। और ये दुख हम सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में महसूस कर रहे हैं।

युवाओं के लिए, श्री रतन टाटा एक प्रेरणास्रोत थे। उनका जीवन, उनका व्यक्तित्व हमें याद दिलाता है कि कोई सपना ऐसा नहीं जिसे पूरा ना किया जा सके, कोई लक्ष्य ऐसा नहीं जिसे प्राप्त नहीं किया जा सके। रतन टाटा जी ने सबको सिखाया है कि विनम्र स्वभाव के साथ, दूसरों की मदद करते हुए भी सफलता पाई जा सकती है।

 रतन टाटा जी, भारतीय उद्यमशीलता की बेहतरीन परंपराओं के प्रतीक थे। वो विश्वसनीयता, उत्कृष्टता औऱ बेहतरीन सेवा जैसे मूल्यों के अडिग प्रतिनिधि थे। उनके नेतृत्व में, टाटा समूह दुनिया भर में सम्मान, ईमानदारी और विश्वसनीयता का प्रतीक बनकर नई ऊंचाइयों पर पहुंचा। इसके बावजूद, उन्होंने अपनी उपलब्धियों को पूरी विनम्रता और सहजता के साथ स्वीकार किया।

दूसरों के सपनों का खुलकर समर्थन करना, दूसरों के सपने पूरा करने में सहयोग करना, ये श्री रतन टाटा के सबसे शानदार गुणों में से एक था। हाल के वर्षों में, वो भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का मार्गदर्शन करने और भविष्य की संभावनाओं से भरे उद्यमों में निवेश करने के लिए जाने गए। उन्होंने युवा आंत्रप्रेन्योर की आशाओं और आकांक्षाओं को समझा, साथ ही भारत के भविष्य को आकार देने की उनकी क्षमता को पहचाना।

भारत के युवाओं के प्रयासों का समर्थन करके, उन्होंने नए सपने देखने वाली नई पीढ़ी को जोखिम लेने और सीमाओं से परे जाने का हौसला दिया। उनके इस कदम ने भारत में इनोवेशन और आंत्रप्रेन्योरशिप की संस्कृति विकसित करने में बड़ी मदद की है। आने वाले दशकों में हम भारत पर इसका सकारात्मक प्रभाव जरूर देखेंगे।

रतन टाटा जी ने हमेशा बेहतरीन क्वालिटी के प्रॉडक्ट...बेहतरीन क्वालिटी की सर्विस पर जोर दिया और भारतीय उद्यमों को ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करने का रास्ता दिखाया। आज जब भारत 2047 तक विकसित होने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो हम ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करते हुए ही दुनिया में अपना परचम लहरा सकते हैं। मुझे आशा है कि उनका ये विजन हमारे देश की भावी पीढ़ियों को प्रेरित करेगा और भारत वर्ल्ड क्लास क्वालिटी के लिए अपनी पहचान मजबूत करेगा।

रतन टाटा जी की महानता बोर्डरूम या सहयोगियों की मदद करने तक ही सीमित नहीं थी। सभी जीव-जंतुओं के प्रति उनके मन में करुणा थी। जानवरों के प्रति उनका गहरा प्रेम जगजाहिर था और वे पशुओं के कल्याण पर केन्द्रित हर प्रयास को बढ़ावा देते थे। वो अक्सर अपने डॉग्स की तस्वीरें साझा करते थे, जो उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा थे। मुझे याद है, जब रतन टाटा जी को लोग आखिरी विदाई देने के लिए उमड़ रहे थे...तो उनका डॉग ‘गोवा’ भी वहां नम आंखों के साथ पहुंचा था।

रतन टाटा जी का जीवन इस बात की याद दिलाता है कि लीडरशिप का आकलन केवल उपलब्धियों से ही नहीं किया जाता है, बल्कि सबसे कमजोर लोगों की देखभाल करने की उसकी क्षमता से भी किया जाता है।

रतन टाटा जी ने हमेशा, नेशन फर्स्ट की भावना को सर्वोपरि रखा। 26/11 के आतंकवादी हमलों के बाद उनके द्वारा मुंबई के प्रतिष्ठित ताज होटल को पूरी तत्परता के साथ फिर से खोलना, इस राष्ट्र के एकजुट होकर उठ खड़े होने का प्रतीक था। उनके इस कदम ने बड़ा संदेश दिया कि – भारत रुकेगा नहीं...भारत निडर है और आतंकवाद के सामने झुकने से इनकार करता है।

व्यक्तिगत तौर पर, मुझे पिछले कुछ दशकों में उन्हें बेहद करीब से जानने का सौभाग्य मिला। हमने गुजरात में साथ मिलकर काम किया। वहां उनकी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर निवेश किया गया। इनमें कई ऐसी परियोजनाएं भी शामिल थीं, जिसे लेकर वे बेहद भावुक थे।

जब मैं केन्द्र सरकार में आया, तो हमारी घनिष्ठ बातचीत जारी रही और वो हमारे राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों में एक प्रतिबद्ध भागीदार बने रहे। स्वच्छ भारत मिशन के प्रति श्री रतन टाटा का उत्साह विशेष रूप से मेरे दिल को छू गया था। वह इस जन आंदोलन के मुखर समर्थक थे। वह इस बात को समझते थे कि स्वच्छता और स्वस्थ आदतें भारत की प्रगति की दृष्टि से कितनी महत्वपूर्ण हैं। अक्टूबर की शुरुआत में स्वच्छ भारत मिशन की दसवीं वर्षगांठ के लिए उनका वीडियो संदेश मुझे अभी भी याद है। यह वीडियो संदेश एक तरह से उनकी अंतिम सार्वजनिक उपस्थितियों में से एक रहा है।

कैंसर के खिलाफ लड़ाई एक और ऐसा लक्ष्य था, जो उनके दिल के करीब था। मुझे दो साल पहले असम का वो कार्यक्रम याद आता है, जहां हमने संयुक्त रूप से राज्य में विभिन्न कैंसर अस्पतालों का उद्घाटन किया था। उस अवसर पर अपने संबोधन में, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि वो अपने जीवन के आखिरी वर्षों को हेल्थ सेक्टर को समर्पित करना चाहते हैं। स्वास्थ्य सेवा एवं कैंसर संबंधी देखभाल को सुलभ और किफायती बनाने के उनके प्रयास इस बात के प्रमाण हैं कि वो बीमारियों से जूझ रहे लोगों के प्रति कितनी गहरी संवेदना रखते थे।

मैं रतन टाटा जी को एक विद्वान व्यक्ति के रूप में भी याद करता हूं - वह अक्सर मुझे विभिन्न मुद्दों पर लिखा करते थे, चाहे वह शासन से जुड़े मामले हों, किसी काम की सराहना करना हो या फिर चुनाव में जीत के बाद बधाई सन्देश भेजना हो।

अभी कुछ सप्ताह पहले, मैं स्पेन सरकार के राष्ट्रपति श्री पेड्रो सान्चेज के साथ वडोदरा में था और हमने संयुक्त रूप से एक विमान फैक्ट्री का उद्घाटन किया। इस फैक्ट्री में सी-295 विमान भारत में बनाए जाएंगे। श्री रतन टाटा ने ही इस पर काम शुरू किया था। उस समय मुझे श्री रतन टाटा की बहुत कमी महसूस हुई।

आज जब हम उन्हें याद कर रहे हैं, तो हमें उस समाज को भी याद रखना है जिसकी उन्होंने कल्पना की थी। जहां व्यापार, अच्छे कार्यों के लिए एक शक्ति के रूप में काम करे, जहां प्रत्येक व्यक्ति की क्षमता को महत्व दिया जाए और जहां प्रगति का आकलन सभी के कल्याण और खुशी के आधार पर किया जाए। रतन टाटा जी आज भी उन जिंदगियों और सपनों में जीवित हैं, जिन्हें उन्होंने सहारा दिया और जिनके सपनों को साकार किया। भारत को एक बेहतर, सहृदय और उम्मीदों से भरी भूमि बनाने के लिए आने वाली पीढ़ियां उनकी सदैव आभारी रहेंगी।