Jungle raj only cares about hiding their benami property: PM Modi
Jungle Raj made sure all the industries and sugar mills which were the hallmark of Bihar were shut down: PM
I urge the people to exercise your right to vote and make the NDA victorious in Bihar again: PM Modi

भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

देश के आजादी आउर विकास में बहुत बड़ जोगदान के धरती चंपारन-मोतिहारी में राउर सभै भाई-बहिनन के परनाम..अभिनंदन!
हमार अहोभाग बा कि सीता मैया, अरेराज सोमेश्वर महादेव, भगवान बुद्ध, भक्त ध्रुव, महर्षि वाल्मीकि, रामायण के रचना स्थल, गज-ग्राह स्थल के उद्धार स्थल, अउर महात्मा गांधी के आंदोलन से जुड़ल रहल पवित्र माटी पर आप सभै के बीच फेर आइल के मौका मिलल बाटे !

हम पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी जी, भाजपा के वरिष्ठ नेता श्रीमान राधामोहन सिंह जी, संसद में मेरे साथी भाई राजीव रंजन सिंह जी, संसद के अंदर मजबूत महिला नेता के रूप में जिन्होंने अपने सामर्थ्य का परिचय करवाया है, ऐसी संसद में मेरी साथी बहन रमादेवी जी, एनडीए के सभी प्रतिनिधिगण और मेरे प्रिय

भाइयो और बहनो, यहां रक्सौल सहित अन्य क्षेत्रों से भी साथी आए हैं और हजारों की संख्या में डिजिटल माध्यम से भी आज इस कार्यक्रम से जुड़े हैं।
मैं सभी साथियों को मेरा प्रणाम करता हूं !
भाइयो और बहनो, चंपारण में, मोतिहारी में आना तो बहुत बार हुआ है, लेकिन अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण शुरु होने के बाद आज पहली बार आपके बीच यहां आया हूं।
सदियों के लंबे इंतजार के बाद, तप और तपस्या के लंबे दौर के बाद, जो ये अवसर आया है, उसके लिए रामायण की रचनास्थली से जुड़े आप सभी साथियों को मैं बधाई देता हूं।
प्रभु राम ने एक राजा के रूप में जिन आदर्शों को हमारे सामने रखा है, आज उसी दिशा में काम करने का पूरी निष्ठा से काम चल रहा है।
भाइयो और बहनो, NDA सरकार को जब से आपने अवसर दिया है, गांव, गरीब, महिलाओं-नौजवानों का सशक्तिकरण और सम्मान, हमने हमेशा सर्वोपरि रखा है। नीतीश जी की अगुवाई में बीते सालों में NDA ने बिहार में इसके लिए सार्थक कदम उठाए हैं।
स्थिति चाहे कोरोना काल से पहले की हो या फिर आत्मनिर्भर भारत बनाने का अभियान सभी पर तेजी से काम किया जा रहा है।

भाइयो और बहनो, जब कोरोना का संकट देश में आया तो सबसे पहले गांव, गरीब और किसान के बारे में ही हमने प्राथमिकता देकर कदम उठाए।
ये कोरोना का संक्रमण गांव तक ना फैले, इसके लिए सही समय पर लॉकडाउन किया गया। गरीब परिवारों को भूखा ना सोना पड़े इसके लिए दीवाली और छठ पूजा तक मुफ्त राशन की व्यवस्था की गई। गांव में फसल की कटाई और बुआई चलती रहे, इसके लिए भी हर जरूरी कदम उठाए गए।

भाइयो और बहनो, कटाई और खरीद के साथ-साथ लॉकडाउन के दौरान बुआई के लिए भी किसानों को हर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। बिहार में भी आपने अनुभव किया होगा कि मुश्किलों के बावजूद बीज और खाद की उपलब्धता कभी भी कमी नहीं होने दी गई, सारी व्यवस्थाएं पर्याप्त रखी गई।

लॉकडाउन के दौरान बिहार के किसानों के खाते में पीएम किसान सम्मान निधि के जो सैकड़ों करोड़ रुपए पहुंचे, उससे भी उनको बहुत लाभ हुआ है।

साथियो, बिहार के जो श्रमिक परिवार दूसरे राज्यों से लौटे हैं, उनके राशन से लेकर रोजगार के लिए इस दौरान गरीब कल्याण रोजगार अभियान चलाया गया है।
इसके तहत एक गांवों में ही श्रमिक साथियों को रोजगार तो उपलब्ध कराया ही जा रहा है, जिनके पास राशनकार्ड नहीं है, उनके लिए भी मुफ्त राशन की व्यवस्था की गई।
अब पूरे देश के लिए एक ही राशनकार्ड बनाया जा रहा है ताकि देश भर में कहीं भी हमारे श्रमिक साथी अपने हिस्से का राशन ले पाएं।

साथियो, श्रमिक साथी जब गांव से शहरों की ओर जाते हैं, तो गांव में अपने घर को लेकर उनके मन में आशंका रहती है, चिंता रहती है पता नहीं वापस जाएंगे तब घर हमारे पास होगा कि नहीं होगा।
अब देश के अन्य राज्यों में एक बहुत बड़ी योजना शुरू की गई है इस योजना का नाम है- स्वामित्व योजना।
इस योजना के तहत गांव के घरों के, गांव की जमीन के कानूनी दस्तावेज दिए जा रहे हैं, मालिकाना हक दिया जा रहा है। जैसे ही बिहार में नीतीश जी फिर मुख्यमंत्री बनेंगे, एनडीए की सरकार बनेगी तो यहां भी चुनाव पूरा होने के बाद ये योजना तेज गति से आगे बढ़ाई जाएगी। इससे कब्जे की आशंका तो खत्म होगी ही, गांवों के घरों पर अगर घर का मालिक बैंकों से लोन लेना चाहता है, कर्ज लेना चाहता है तो उसको कर्ज भी उपलब्ध कराया जाएगा।

साथियो, बिहार के युवाओं को बिहार में ही अच्छा और सम्मानजनक रोजगार मिले, ये बहुत जरूरी है। सवाल ये है कि ये कौन दिला सकता है?
वो लोग जिन्होंने बिहार को अंधेरे और अपराध की पहचान दी? वो लोग जिनके लिए रोजगार देना करोड़ों की कमाई का माध्यम है?
या फिर नीतीश जी के नेतृत्व में NDA, जिसने बिहार को बीमारू राज्य की श्रेणी से बाहर निकालने का अद्भुत काम किया है?
आप याद करिए, जंगलराज की हालत तो ये थी कि जो उद्योग, जो चीनी मिलें, दशकों से चंपारण और बिहार का अहम हिस्सा रही हैं, वो भी सारी की सारी बंद हो गईं।
अब तो इस चुनाव में जंगलराज वालों के साथ नक्सलवाद के समर्थक, देश के टुकड़े-टुकड़े करने की चाहत रखने वालों के समर्थक, ये भी बढ़ चढ़ कर बारात में जुड़ गए हैं।
अब अगर इनको जरा भी मौका मिल गया, तो बिहार वापस उस हिंसा-अराजकता-अपहरण के उस खतरनाक दौर में फिर से पहुंच जाएगा।
और इसलिए बिहार को सतर्क रहना है, बिहार को सावधान रहना है। जंगलराज के युवराज से अलर्ट रहना है।

साथियो, जंगलराज वालों ने अगर कभी आपकी चिंता की होती तो बिहार विकास की दौड़ में इतना पिछड़ता नहीं। सच्चाई ये है कि इन्हें न पहले आपकी चिंता थी और न ही आज ही है। इनकी चिंता कुछ और है।
जंगलराज वालों को चिंता है कि अपनी बेनामी संपत्ति कैसे छिपाएं। एनडीए का प्रयास है कि हम बिहार के अपने गरीब भाई-बहनों को ज्यादा से ज्यादा पक्के घर कैसे बना के दें।
जंगलराज वालों को चिंता है कि अपनी तिजोरी कैसे भरें। जबकि हमारी प्राथमिकता है कि बिहार के किसानों को, श्रमिकों को, बुजुर्गों को पैसे सीधे उनके बैंक खाते में कैसे पहुंचाएं।
जंगलराज वालों को चिंता है कि लालटेन कैसे जले। हमारा प्रयास है कि हर घर में दूधिया चमकदार एलईडी बल्ब कैसे पहुंचे।

साथियो, इन लोगों ने कभी बिहार की महिलाओं, बिहार की बहन-बेटियों को होने वाली परेशानी की कभी चिंता नहीं की। वो खुले में शौच में जाने के लिए मजबूर थीं, उनकी सुरक्षा पर खतरा रहता था, लेकिन जंगलराज वाले, जंगल जैसे हालात बनाए रखना चाहते थे।
ये एनडीए की सरकार है जिसने बिहार की माताओं-बहनों के लिए लाखों शौचालय बनाकर उनकी परेशानी कम करने का प्रयास किया है।

साथियो, मुझे याद है कि जब उनकी इस तकलीफ के बारे में मैंने लाल किले से बात की थी तो इन लोगों ने किस तरह मेरा मजाक उड़ाया गया था। पर मुझे खुशी है कि आज आप सभी ने मिलकर बिहार के 38 हजार से ज्यादा गांवों को खुले में शौच से मुक्त कर दिया है।
मैं पिछले साल चंपारण में सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह कार्यक्रम के समापन पर आया था। चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे होने पर स्वच्छता का ये प्रयास करके इस क्षेत्र के लोगों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि दी है और इसलिए मैं यहां के लोगों का जितना नमन करूं, जितना आदर करूं उतना कम है।

भाइयो और बहनो, आज बिहार प्रगति के जिस पथ पर है, वो बिहार का भविष्य और मजबूत करेगा, उसे और गौरवशाली भी बनाएगा, वैभवशाली भी बनाएगा।
एनडीए के हम सभी साथी मिलकर इसी सोच को साकार करने में लगे हैं। जंगलराज का अंधेरा बिहार पीछे छोड़ चुका है, अब नई रोशनी में डबल इंजन की ताकत के साथ विकास का लाभ हमें बिहार के हर व्यक्ति तक पहुंचाना है। यही वजह है कि मां गंगा पर कहीं सबसे बड़े पुल बन रहे हैं तो कहीं पर नए एयरपोर्ट, नए हाई-वे बन रहे हैं।
जिस बिहार ने चाणक्य के अर्थशास्त्र को प्रेरणा दी आज वही बिहार गैस आधारित अर्थनीति की दिशा, देश को दिखा रहा है। एनडीए के सभी साथी, आत्मनिर्भर बिहार के संकल्प के साथ, हर कदम पर बिहार के लोगों के साथ खड़े हैं।

साथियो, आत्मनिर्भर बिहार, यहां के हर युवा की आकांक्षाओं को पूरा करने का एक पक्का रोडमैप है। आत्मनिर्भर बिहार, यहां के गांव-गांव के सामर्थ्य को पहचान दिलाने का मार्ग है। आत्मनिर्भर बिहार, गांवों में उद्यम के, रोजगार के अवसर तैयार करने का अभियान है। आत्मनिर्भर बिहार, बिहार के गौरव, बिहार के वैभव को फिर से लौटाने का मिशन है।

भाइयो और बहनो, आत्मनिर्भर बिहार अभियान से यहां को मोती बटन से जुड़े उद्योग को और प्रोत्साहन मिलना तय है। देश के हर जिले में जो इस प्रकार के उत्पाद हैं, उनके लिए उद्योगों के क्लस्टर की योजना पर काम चल रहा है।

खेती हो, पशुपालन हो, मछलीपालन हो, इससे जुड़े उद्योग और उद्यम आत्मनिर्भर चंपारण, आत्मनिर्भर बिहार का अहम हिस्सा हैं। पूर्वी चंपारण में ही कृषि अनुसंधान केंद्र बन चुका है। यहां डेयरी प्लांट भी लग चुका है, जिससे पशुपालकों को लाभ होता है।
ड्रिप और स्प्रिंकल इरिगेशन के लिए, टपक सिंचाई, फव्वारे की सिंचाई के लिए भी बहुत बड़ी मदद दी जाती है।

साथियो, मोतिहारी सहित बिहार का एक बड़ा हिस्सा मीठे पानी की मछलियों का एक बड़ा केंद्र बन सकता है। हाल में देश में मछलीपालन को बढ़ावा देने के लिए एक बहुत बड़ी योजना बिहार की धरती से ही लॉन्च की गई है।
मत्स्य संपदा योजना के तहत हजारों करोड़ रुपए का निवेश मछली व्यवसाय से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है। इसके तहत सैकड़ों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट बिहार में शुरु किए गए हैं।

भाइयो और बहनो, बिहार के इस क्षेत्र में गन्ना भी देश की आत्मनिर्भरता का और बिहार के युवाओं के रोजगार का एक बड़ा माध्यम बन सकता है।
आज पेट्रोल और हवाई ईंधन में गन्ने से बने इथेनॉल की ब्लेंडिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। पहली बार इसके लिए व्यापक नीति भी बनाई गई है और बड़े पैमाने पर सरकारी कंपनियां इथेनॉल की खरीद कर रही हैं।
यहां भी सुगौली चीनी मिल में इथेनॉल बनाने का काम चल रहा है। आने वाले समय में इस प्रकार की दूसरी मिलों के लिए भी अब नए अवसर बन रहे हैं।

साथियो, आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका हमारी बेटियों की है, हमारी माताओं की है, हमारी बहनों की है। इसलिए जीविका दीदियों की भूमिका का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। आने वाले समय में बिहार की लाखों बहनों को इससे जोड़ने का लक्ष्य है।
2013-14 की तुलना में आज बहनों-बेटियों के ऐसे स्वयं सहायता समूहों को मिलने वाले ऋण में 30 गुना से ज्यादा वृद्धि की गई है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत भी सबसे ज्यादा ऋण महिला उद्यमियों को ही मिल रहा है। महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों को, उद्यमियों को ज्यादा से ज्यादा बल मिल रहा है। बेटियों की पढ़ाई से लेकर कमाई के लिए बिहार में हो रहे प्रयासों के कारण ही NDA के साथ आज बिहार की हर मां, हर बहन, हर बेटी संकल्प के साथ जुड़ी हुई है। इन मातृशक्ति का आशीर्वाद आज एनडीए को विशेष रूप से ताकतवर बना रहा है।

साथियो, बिहार को बीमार होने से बचाने के लिए, बिहार को आत्मनिर्भर बनाने के लिए, हर एक परिवार का, हर एक मतदाता का एक-एक वोट, हर वोट NDA, यानी भाजपा, जेडीयू, हम पार्टी और VIP पार्टी के उम्मीदवारों को ही पड़ना चाहिए।

भाइयो-बहनो, आज मेरी ये तीसरी सभा है और मैं आज तीसरी बार इस चुनाव के दरमियां आपके बीच में आया हूं। आप जिस प्रकार से हमें आशीर्वाद दे रहे हैं, जिस प्रकार से जहां मेरी नजर पहुंचे, मुझे लोग ही लोग नजर आ रहे हैं। ये दिल्ली में जो पॉलीटिकल पंडित बैठे हैं थोड़ा सा नजारा देख लें पता चल जाएगा, दस नवंबर को क्या होने वाला है।

भाइयो-बहनो, मैं आज प्रथम चरण के मतदान के बाद आज आया हूं। प्रथम चरण के मतदान में सारे पॉलीटिकल पंडित उछल-उछल कर कह रहे थे। मतदान कम होगा, लोग वोट डालने आएंगे नहीं, अरे कोरोना के समय कौन निकलेगा लेकिन इन पंडितों को मालूम नहीं है ये बिहार की धरती है बिहार की। पूरी मानवजाति, पूरी दुनिया को सबसे पहले लोकतंत्र का पाठ इसी मिट्टी ने पढ़ाया था। लोकतंत्र का महत्व क्या होता है वो जितना बिहारी जानता है, शायद और कोई नहीं जानता और उसी का नतीजा है कि जी भर करके, सारे रिकॉर्ड तोड़कर के बिहार के लोगों ने सारी आशंकाओं को खत्म करते हुए पहले चरण में भारी मतदान किया। मैं सबको आदरपूर्वक नमन करता हूं, आपने लोकतंत्र को ताकत दी है, आपने लोकतंत्र का हौसला बुलंद किया है और बिहार ने देश को दिशा दिखाई है और दूसरी बात पहले चरण के मतदान के बाद कई लोगों के मुझे मैसेज मिले, सूचनाएं मिलीं, किसी ने फोन भी किया। कुछ पत्रकार मित्रों से भी चर्चा करने का मौका मिल गया। कुछ सर्वेक्षण वालों से बात करने का अवसर मिल गया, कुछ एग्जिट पोल की जिरह करते हैं ऐसे लोगों से भी पूछ लिया कि भाई बताओ तो जरा बताओ तो ये सारे पंडित गलत हो रहे हैं आगे क्या लग रहा है। मतदान तो अच्छा हो गया तो सबने मुझे कहा साहब, बिहार की जनता ने पहले चरण के मतदान से एनडीए को दोबारा सरकार बनाने के आशीर्वाद दे दिए हैं।

भाइय-बहनो, पहले चरण का ये उत्साह अगले चरण में उत्साह को बढ़ाने वाला बनना चाहिए। अब तो चलो मोदी जी का काम हो गया है चलो सो जाओ, नहीं। अब जरा और ज्यादा जोर लगाना है, एक-एक पोलिंग बूथ में जोर लगाना है। माताओं-बहनों की शक्ति को जोड़ना है और अभूतपूर्व विजय के साथ बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प करके चलना है।

भाइयो-बहनो, हम लोगों का जीवन का एक बहुत बड़ा अच्छा अनुभव है हम में से हर किसी को अनुभव है, हम में से हर किसी को अनुभव है। हममें से हर किसी ने कभी ना कभी उसमें से कुछ सीखा है। जरा मेरी बात को शांति से गौर से सुने फिर घर-घर जाकर जरूर सोचें, जीवन में कभी-कभार ऐसा हो जाता है कि सामने जब कोई खाने की चीज आ जाए, पहले कभी खाई ना हो, दिखने में बहुत बढ़िया लगती हो, जरा पैकेजिंग भी बहुत बढ़िया किया हो, जरा नाम भी बहुत बढ़िया रख दिया हो, दिखने में भी बहुत बढ़िया लगती हो और फिर मुंह में पानी छूट जाए और उसको खाएं लेकिन अगर कुछ कारण से कुछ ही घंटों में पेट में गड़बड़ शुरू हो जाए, दस्त लग जाए, बीपी ऊपर-नीचे शुरू हो जाए, वॉमेटिंग शुरू हो जाए, घर के लोगों का पसीना छूट जाए। डॉक्टर इधर-उधर से दौड़े-भागे, अस्पताल सब करें और बड़ी मुश्किल से कोई अच्छा डॉक्टर मिल जाए और बच जाएं लेकिन जीवन में कभी भी फिर से वो चीज सामने आ जाए, कितने ही नए रंग-रूप के साथ आ जाए। जिसको खाने से कभी एक बार इतनी मुसीबत झेलनी पड़ी, वो दोबारा उसको खाएगा क्या, कभी भी खाएगा क्या, दस साल के बाद आए तो खाएगा क्या, 15 साल के बाद भी आएगा तो खाएगा क्या, 40 साल के बाद भी आए तो खाएगा क्या, एक पीढ़ी-दूसरी पीढ़ी की आइटम आए तब भी खाएगा क्या, पहले बड़ा फल हो फिर छोटा फल हो खाएगा क्या? कोई नहीं खाएगा, क्योंकि उसको याद आएगा कि पहले जब खाया था तो मैं तो बड़ी मुश्किल से बचा था। दोबारा अगर चखने की भी कोशिश करूंगा तो मेरा बीमार होना तय है, कोई नहीं खाता है।
भाइयो-बहनो, क्या बिहार को फिर से बीमार होने देना है, बिहार को फिर से बीमार होने देना है, 15 साल पहले जिस कारणों से पहले बिहार, बीमार हुआ, बर्बाद हुआ। क्या दोबार हम वो गलती कर सकते हैं क्या? नहीं करेंगे ना, पक्का नहीं करेंगे ना। वादा करते हैं? शाबाश मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय। बहुत-बहुत धन्यवाद।

 

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Text of PM Modi's address at the Parliament of Guyana
November 21, 2024

Hon’ble Speaker, मंज़ूर नादिर जी,
Hon’ble Prime Minister,मार्क एंथनी फिलिप्स जी,
Hon’ble, वाइस प्रेसिडेंट भरत जगदेव जी,
Hon’ble Leader of the Opposition,
Hon’ble Ministers,
Members of the Parliament,
Hon’ble The चांसलर ऑफ द ज्यूडिशियरी,
अन्य महानुभाव,
देवियों और सज्जनों,

गयाना की इस ऐतिहासिक पार्लियामेंट में, आप सभी ने मुझे अपने बीच आने के लिए निमंत्रित किया, मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। कल ही गयाना ने मुझे अपना सर्वोच्च सम्मान दिया है। मैं इस सम्मान के लिए भी आप सभी का, गयाना के हर नागरिक का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। गयाना का हर नागरिक मेरे लिए ‘स्टार बाई’ है। यहां के सभी नागरिकों को धन्यवाद! ये सम्मान मैं भारत के प्रत्येक नागरिक को समर्पित करता हूं।

साथियों,

भारत और गयाना का नाता बहुत गहरा है। ये रिश्ता, मिट्टी का है, पसीने का है,परिश्रम का है करीब 180 साल पहले, किसी भारतीय का पहली बार गयाना की धरती पर कदम पड़ा था। उसके बाद दुख में,सुख में,कोई भी परिस्थिति हो, भारत और गयाना का रिश्ता, आत्मीयता से भरा रहा है। India Arrival Monument इसी आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक है। अब से कुछ देर बाद, मैं वहां जाने वाला हूं,

साथियों,

आज मैं भारत के प्रधानमंत्री के रूप में आपके बीच हूं, लेकिन 24 साल पहले एक जिज्ञासु के रूप में मुझे इस खूबसूरत देश में आने का अवसर मिला था। आमतौर पर लोग ऐसे देशों में जाना पसंद करते हैं, जहां तामझाम हो, चकाचौंध हो। लेकिन मुझे गयाना की विरासत को, यहां के इतिहास को जानना था,समझना था, आज भी गयाना में कई लोग मिल जाएंगे, जिन्हें मुझसे हुई मुलाकातें याद होंगीं, मेरी तब की यात्रा से बहुत सी यादें जुड़ी हुई हैं, यहां क्रिकेट का पैशन, यहां का गीत-संगीत, और जो बात मैं कभी नहीं भूल सकता, वो है चटनी, चटनी भारत की हो या फिर गयाना की, वाकई कमाल की होती है,

साथियों,

बहुत कम ऐसा होता है, जब आप किसी दूसरे देश में जाएं,और वहां का इतिहास आपको अपने देश के इतिहास जैसा लगे,पिछले दो-ढाई सौ साल में भारत और गयाना ने एक जैसी गुलामी देखी, एक जैसा संघर्ष देखा, दोनों ही देशों में गुलामी से मुक्ति की एक जैसी ही छटपटाहट भी थी, आजादी की लड़ाई में यहां भी,औऱ वहां भी, कितने ही लोगों ने अपना जीवन समर्पित कर दिया, यहां गांधी जी के करीबी सी एफ एंड्रूज हों, ईस्ट इंडियन एसोसिएशन के अध्यक्ष जंग बहादुर सिंह हों, सभी ने गुलामी से मुक्ति की ये लड़ाई मिलकर लड़ी,आजादी पाई। औऱ आज हम दोनों ही देश,दुनिया में डेमोक्रेसी को मज़बूत कर रहे हैं। इसलिए आज गयाना की संसद में, मैं आप सभी का,140 करोड़ भारतवासियों की तरफ से अभिनंदन करता हूं, मैं गयाना संसद के हर प्रतिनिधि को बधाई देता हूं। गयाना में डेमोक्रेसी को मजबूत करने के लिए आपका हर प्रयास, दुनिया के विकास को मजबूत कर रहा है।

साथियों,

डेमोक्रेसी को मजबूत बनाने के प्रयासों के बीच, हमें आज वैश्विक परिस्थितियों पर भी लगातार नजर ऱखनी है। जब भारत और गयाना आजाद हुए थे, तो दुनिया के सामने अलग तरह की चुनौतियां थीं। आज 21वीं सदी की दुनिया के सामने, अलग तरह की चुनौतियां हैं।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनी व्यवस्थाएं और संस्थाएं,ध्वस्त हो रही हैं, कोरोना के बाद जहां एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की तरफ बढ़ना था, दुनिया दूसरी ही चीजों में उलझ गई, इन परिस्थितियों में,आज विश्व के सामने, आगे बढ़ने का सबसे मजबूत मंत्र है-"Democracy First- Humanity First” "Democracy First की भावना हमें सिखाती है कि सबको साथ लेकर चलो,सबको साथ लेकर सबके विकास में सहभागी बनो। Humanity First” की भावना हमारे निर्णयों की दिशा तय करती है, जब हम Humanity First को अपने निर्णयों का आधार बनाते हैं, तो नतीजे भी मानवता का हित करने वाले होते हैं।

साथियों,

हमारी डेमोक्रेटिक वैल्यूज इतनी मजबूत हैं कि विकास के रास्ते पर चलते हुए हर उतार-चढ़ाव में हमारा संबल बनती हैं। एक इंक्लूसिव सोसायटी के निर्माण में डेमोक्रेसी से बड़ा कोई माध्यम नहीं। नागरिकों का कोई भी मत-पंथ हो, उसका कोई भी बैकग्राउंड हो, डेमोक्रेसी हर नागरिक को उसके अधिकारों की रक्षा की,उसके उज्जवल भविष्य की गारंटी देती है। और हम दोनों देशों ने मिलकर दिखाया है कि डेमोक्रेसी सिर्फ एक कानून नहीं है,सिर्फ एक व्यवस्था नहीं है, हमने दिखाया है कि डेमोक्रेसी हमारे DNA में है, हमारे विजन में है, हमारे आचार-व्यवहार में है।

साथियों,

हमारी ह्यूमन सेंट्रिक अप्रोच,हमें सिखाती है कि हर देश,हर देश के नागरिक उतने ही अहम हैं, इसलिए, जब विश्व को एकजुट करने की बात आई, तब भारत ने अपनी G-20 प्रेसीडेंसी के दौरान One Earth, One Family, One Future का मंत्र दिया। जब कोरोना का संकट आया, पूरी मानवता के सामने चुनौती आई, तब भारत ने One Earth, One Health का संदेश दिया। जब क्लाइमेट से जुड़े challenges में हर देश के प्रयासों को जोड़ना था, तब भारत ने वन वर्ल्ड, वन सन, वन ग्रिड का विजन रखा, जब दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हुए, तब भारत ने CDRI यानि कोएलिशन फॉर डिज़ास्टर रज़ीलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर का initiative लिया। जब दुनिया में pro-planet people का एक बड़ा नेटवर्क तैयार करना था, तब भारत ने मिशन LiFE जैसा एक global movement शुरु किया,

साथियों,

"Democracy First- Humanity First” की इसी भावना पर चलते हुए, आज भारत विश्वबंधु के रूप में विश्व के प्रति अपना कर्तव्य निभा रहा है। दुनिया के किसी भी देश में कोई भी संकट हो, हमारा ईमानदार प्रयास होता है कि हम फर्स्ट रिस्पॉन्डर बनकर वहां पहुंचे। आपने कोरोना का वो दौर देखा है, जब हर देश अपने-अपने बचाव में ही जुटा था। तब भारत ने दुनिया के डेढ़ सौ से अधिक देशों के साथ दवाएं और वैक्सीन्स शेयर कीं। मुझे संतोष है कि भारत, उस मुश्किल दौर में गयाना की जनता को भी मदद पहुंचा सका। दुनिया में जहां-जहां युद्ध की स्थिति आई,भारत राहत और बचाव के लिए आगे आया। श्रीलंका हो, मालदीव हो, जिन भी देशों में संकट आया, भारत ने आगे बढ़कर बिना स्वार्थ के मदद की, नेपाल से लेकर तुर्की और सीरिया तक, जहां-जहां भूकंप आए, भारत सबसे पहले पहुंचा है। यही तो हमारे संस्कार हैं, हम कभी भी स्वार्थ के साथ आगे नहीं बढ़े, हम कभी भी विस्तारवाद की भावना से आगे नहीं बढ़े। हम Resources पर कब्जे की, Resources को हड़पने की भावना से हमेशा दूर रहे हैं। मैं मानता हूं,स्पेस हो,Sea हो, ये यूनीवर्सल कन्फ्लिक्ट के नहीं बल्कि यूनिवर्सल को-ऑपरेशन के विषय होने चाहिए। दुनिया के लिए भी ये समय,Conflict का नहीं है, ये समय, Conflict पैदा करने वाली Conditions को पहचानने और उनको दूर करने का है। आज टेरेरिज्म, ड्रग्स, सायबर क्राइम, ऐसी कितनी ही चुनौतियां हैं, जिनसे मुकाबला करके ही हम अपनी आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवार पाएंगे। और ये तभी संभव है, जब हम Democracy First- Humanity First को सेंटर स्टेज देंगे।

साथियों,

भारत ने हमेशा principles के आधार पर, trust और transparency के आधार पर ही अपनी बात की है। एक भी देश, एक भी रीजन पीछे रह गया, तो हमारे global goals कभी हासिल नहीं हो पाएंगे। तभी भारत कहता है – Every Nation Matters ! इसलिए भारत, आयलैंड नेशन्स को Small Island Nations नहीं बल्कि Large ओशिन कंट्रीज़ मानता है। इसी भाव के तहत हमने इंडियन ओशन से जुड़े आयलैंड देशों के लिए सागर Platform बनाया। हमने पैसिफिक ओशन के देशों को जोड़ने के लिए भी विशेष फोरम बनाया है। इसी नेक नीयत से भारत ने जी-20 की प्रेसिडेंसी के दौरान अफ्रीकन यूनियन को जी-20 में शामिल कराकर अपना कर्तव्य निभाया।

साथियों,

आज भारत, हर तरह से वैश्विक विकास के पक्ष में खड़ा है,शांति के पक्ष में खड़ा है, इसी भावना के साथ आज भारत, ग्लोबल साउथ की भी आवाज बना है। भारत का मत है कि ग्लोबल साउथ ने अतीत में बहुत कुछ भुगता है। हमने अतीत में अपने स्वभाव औऱ संस्कारों के मुताबिक प्रकृति को सुरक्षित रखते हुए प्रगति की। लेकिन कई देशों ने Environment को नुकसान पहुंचाते हुए अपना विकास किया। आज क्लाइमेट चेंज की सबसे बड़ी कीमत, ग्लोबल साउथ के देशों को चुकानी पड़ रही है। इस असंतुलन से दुनिया को निकालना बहुत आवश्यक है।

साथियों,

भारत हो, गयाना हो, हमारी भी विकास की आकांक्षाएं हैं, हमारे सामने अपने लोगों के लिए बेहतर जीवन देने के सपने हैं। इसके लिए ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज़ बहुत ज़रूरी है। ये समय ग्लोबल साउथ के देशों की Awakening का समय है। ये समय हमें एक Opportunity दे रहा है कि हम एक साथ मिलकर एक नया ग्लोबल ऑर्डर बनाएं। और मैं इसमें गयाना की,आप सभी जनप्रतिनिधियों की भी बड़ी भूमिका देख रहा हूं।

साथियों,

यहां अनेक women members मौजूद हैं। दुनिया के फ्यूचर को, फ्यूचर ग्रोथ को, प्रभावित करने वाला एक बहुत बड़ा फैक्टर दुनिया की आधी आबादी है। बीती सदियों में महिलाओं को Global growth में कंट्रीब्यूट करने का पूरा मौका नहीं मिल पाया। इसके कई कारण रहे हैं। ये किसी एक देश की नहीं,सिर्फ ग्लोबल साउथ की नहीं,बल्कि ये पूरी दुनिया की कहानी है।
लेकिन 21st सेंचुरी में, global prosperity सुनिश्चित करने में महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका होने वाली है। इसलिए, अपनी G-20 प्रेसीडेंसी के दौरान, भारत ने Women Led Development को एक बड़ा एजेंडा बनाया था।

साथियों,

भारत में हमने हर सेक्टर में, हर स्तर पर, लीडरशिप की भूमिका देने का एक बड़ा अभियान चलाया है। भारत में हर सेक्टर में आज महिलाएं आगे आ रही हैं। पूरी दुनिया में जितने पायलट्स हैं, उनमें से सिर्फ 5 परसेंट महिलाएं हैं। जबकि भारत में जितने पायलट्स हैं, उनमें से 15 परसेंट महिलाएं हैं। भारत में बड़ी संख्या में फाइटर पायलट्स महिलाएं हैं। दुनिया के विकसित देशों में भी साइंस, टेक्नॉलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथ्स यानि STEM graduates में 30-35 परसेंट ही women हैं। भारत में ये संख्या फोर्टी परसेंट से भी ऊपर पहुंच चुकी है। आज भारत के बड़े-बड़े स्पेस मिशन की कमान महिला वैज्ञानिक संभाल रही हैं। आपको ये जानकर भी खुशी होगी कि भारत ने अपनी पार्लियामेंट में महिलाओं को रिजर्वेशन देने का भी कानून पास किया है। आज भारत में डेमोक्रेटिक गवर्नेंस के अलग-अलग लेवल्स पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व है। हमारे यहां लोकल लेवल पर पंचायती राज है, लोकल बॉड़ीज़ हैं। हमारे पंचायती राज सिस्टम में 14 लाख से ज्यादा यानि One point four five मिलियन Elected Representatives, महिलाएं हैं। आप कल्पना कर सकते हैं, गयाना की कुल आबादी से भी करीब-करीब दोगुनी आबादी में हमारे यहां महिलाएं लोकल गवर्नेंट को री-प्रजेंट कर रही हैं।

साथियों,

गयाना Latin America के विशाल महाद्वीप का Gateway है। आप भारत और इस विशाल महाद्वीप के बीच अवसरों और संभावनाओं का एक ब्रिज बन सकते हैं। हम एक साथ मिलकर, भारत और Caricom की Partnership को और बेहतर बना सकते हैं। कल ही गयाना में India-Caricom Summit का आयोजन हुआ है। हमने अपनी साझेदारी के हर पहलू को और मजबूत करने का फैसला लिया है।

साथियों,

गयाना के विकास के लिए भी भारत हर संभव सहयोग दे रहा है। यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश हो, यहां की कैपेसिटी बिल्डिंग में निवेश हो भारत और गयाना मिलकर काम कर रहे हैं। भारत द्वारा दी गई ferry हो, एयरक्राफ्ट हों, ये आज गयाना के बहुत काम आ रहे हैं। रीन्युएबल एनर्जी के सेक्टर में, सोलर पावर के क्षेत्र में भी भारत बड़ी मदद कर रहा है। आपने t-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप का शानदार आयोजन किया है। भारत को खुशी है कि स्टेडियम के निर्माण में हम भी सहयोग दे पाए।

साथियों,

डवलपमेंट से जुड़ी हमारी ये पार्टनरशिप अब नए दौर में प्रवेश कर रही है। भारत की Energy डिमांड तेज़ी से बढ़ रही हैं, और भारत अपने Sources को Diversify भी कर रहा है। इसमें गयाना को हम एक महत्वपूर्ण Energy Source के रूप में देख रहे हैं। हमारे Businesses, गयाना में और अधिक Invest करें, इसके लिए भी हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

साथियों,

आप सभी ये भी जानते हैं, भारत के पास एक बहुत बड़ी Youth Capital है। भारत में Quality Education और Skill Development Ecosystem है। भारत को, गयाना के ज्यादा से ज्यादा Students को Host करने में खुशी होगी। मैं आज गयाना की संसद के माध्यम से,गयाना के युवाओं को, भारतीय इनोवेटर्स और वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करने के लिए भी आमंत्रित करता हूँ। Collaborate Globally And Act Locally, हम अपने युवाओं को इसके लिए Inspire कर सकते हैं। हम Creative Collaboration के जरिए Global Challenges के Solutions ढूंढ सकते हैं।

साथियों,

गयाना के महान सपूत श्री छेदी जगन ने कहा था, हमें अतीत से सबक लेते हुए अपना वर्तमान सुधारना होगा और भविष्य की मजबूत नींव तैयार करनी होगी। हम दोनों देशों का साझा अतीत, हमारे सबक,हमारा वर्तमान, हमें जरूर उज्जवल भविष्य की तरफ ले जाएंगे। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं, मैं आप सभी को भारत आने के लिए भी निमंत्रित करूंगा, मुझे गयाना के ज्यादा से ज्यादा जनप्रतिनिधियों का भारत में स्वागत करते हुए खुशी होगी। मैं एक बार फिर गयाना की संसद का, आप सभी जनप्रतिनिधियों का, बहुत-बहुत आभार, बहुत बहुत धन्यवाद।